01/03/2026
إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
आज दिल ग़म से बोझिल है, लेकिन सर फ़ख़्र से बुलंद है।
हम उस राह के मुसाफ़िर हैं जहाँ कुर्बानी, सब्र और इस्तिक़ामत ही असली पहचान है।
#लब्बैक_या_ख़मेनाई
#लब्बैक_या_रहबर
#लब्बैक_या_हुसैन
#लब्बैक_या_मेहदी
ये नारे सिर्फ़ अल्फ़ाज़ नहीं, बल्कि एक अहद हैं
ज़ुल्म के सामने सीना तान कर खड़े रहने का,
हक़ की हिफ़ाज़त में हर कुर्बानी देने का,
और करबला की विरासत को ज़िंदा रखने का।
आज अगर आँखें नम हैं, तो दिल में अटूट हौसला भी है।
शहादत हमें डराती नहीं, बल्कि हमारे क़दमों को मज़बूती देती है।
हम उसी रौशन रास्ते पर क़ायम रहेंगे
जहाँ सब्र भी इबादत है और मुकाबला भी इबादत।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए,
अहले ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता करे,
और हमें हक़ की राह पर डटे रहने की तौफ़ीक़ दे।
लब्बैक या हुसैन — लब्बैक या रहबर।