09/07/2020
*मधुमेह दवाओं से क्यों ठीक नहीं होता?*
प्रायः यह देखने में आता है कि मधुमेह (डायबिटीज) के रोगी, चाहे वे प्रथम बार पीड़ित हुए हों या पैतृक रोग हो, लगातार दवायें खाते रहते हैं और जिन्दगीभर दवायें खाने के बाद भी उनका मधुमेह ठीक नहीं होता, बल्कि अधिकांश मामलों में दवाओं की मात्रा बढ़ती ही जाती है। वे इसे स्वाभाविक समझते हैं और यह मानकर सन्तोष कर लेते हैं कि इसका कोई उपचार नहीं है और वे जीवित हैं इतना ही पर्याप्त है।
लेकिन वे बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं क्योंकि प्रत्येक रोग की तरह इसका भी उपचार है। यदि मधुमेह के कारणों को ठीक से समझ लिया जाये और उसके अनुसार उपचार दिया जाये, तो उनका ठीक होना पूरी तरह सम्भव है। मधुमेह का कारण यह है कि हम जो भोजन करते हैं उसका एक बड़ा भाग शर्करा यानी ग्लूकोस में बदल जाता है और हमारा शरीर उसको आत्मसात कर लेता है, क्योंकि हमारे शरीर को शक्ति उसी ग्लूकोस से मिलती है।
यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, परन्तु कई बार शरीर की पाचन शक्ति कमजोर हो जाने के कारण वह समस्त ग्लूकोस को आत्मसात नहीं कर पाता। यह अतिरिक्त ग्लूकोस कई रूपों में शरीर से बाहर निकलता रहता है, मुख्य रूप से मूत्र के रास्ते। इसी को हम मधुमेह या शुगर कहते हैं। कई बार यह अतिरिक्त ग्लूकोस हमारे रक्त में भी मिल जाता है, जिसे ब्लड शुगर कहा जाता है। अधिक थकान होना, पसीना आना, अधिक प्यास लगना, शरीर पर हल्की चीटियाँ रेंगना, दृष्टि धुँधली होना भी मधुमेह के लक्षण माने जाते हैं, हालांकि ये लक्षण अन्य कारणों से भी हो सकते हैं।
स्पष्ट है कि मधुमेह वास्तव में पाचन शक्ति का रोग है। यदि हम अपने शरीर की पाचन शक्ति को बढ़ा लें तो वह अतिरिक्त ग्लूकोस बनना बन्द हो जाएगा और मधुमेह की कोई समस्या ही नहीं रहेगी। परन्तु ऐलोपैथिक डाॅक्टरों के पास पाचनशक्ति सुधारने की कोई दवा नहीं होती। इसके बजाय वे मधुमेह के रोगियों को ऐसी दवा देते हैं जैसे इंसूलिन जो अतिरिक्त ग्लूकोस के साथ रासायनिक क्रिया करके उसे लगभग उदासीन (न्यूट्रल) कर देती है। अब क्योंकि हमारे शरीर में ग्लूकोस नियमित बनता रहता है, अतः मधुमेह के रोगियों को भी उसकी दवा नियमित लेनी पड़ती है। इस प्रकार वह जिन्दगीभर के लिए दवाओं के लती बन जाते हैं और अपनी आय का एक बड़ा भाग इन दवाओं पर खर्च करते रहते हैं।
अब या तो ऐलोपैथी में पाचन शक्ति सुधारने का कोई उपाय ज्ञात नहीं है, या शायद दवा कम्पनियाँ ऐसी दवा बनाना ही नहीं चाहते, जिनसे पाचन शक्ति सुधर जाये, ताकि मधुमेह की दवाओं की बिक्री होती रहे। दवा कम्पनियों के इसी स्वार्थ और धूर्तता के कारण मधुमेह रोगी जीवनभर दवायें खाने को अभिशिप्त हो जाते हैं और उनके पाश्र्व प्रभावों के कारण अन्य रोगों से भी पीड़ित हो जाते हैं। इतना ही नहीं, ऐलोपैथी के डाॅक्टरों ने कुछ वर्ष पूर्व सामान्य शुगर स्तर को 140 से घटाकर 126 कर दिया, जिसके कारण बहुत से लोग जिनका शुगर स्तर वास्तव में सामान्य है, स्वयं को मधुमेह रोगी मानने लग जाते हैं और दवायें खाने लगते हैं। ऐलोपैथी पर अंधविश्वास और डाॅक्टरों द्वारा फैलाया गया भ्रम ही इसका कारण है।
इसके विपरीत प्राकृतिक चिकित्सा में मधुमेह का पक्का इलाज है पाचन शक्ति को सुधारना। इसके उपाय हैं- पेड़ू पर मिट्टी की पट्टी, एनिमा, और ठंडा कटिस्नान या ठंडा- गर्म सेंक लेकर टहलना, थोड़ा व्यायाम, योगासन और प्राणायाम। इन उपायों के पाचन शक्ति बहुत सुधर जाती है और शीघ्र ही मधुमेह रोगी की सारी दवायें बन्द हो जाती हैं। मैंने ये ही उपाय अपनाकर अनेक जीर्ण मधुमेह रोगियों को पूरी तरह स्वस्थ किया है।