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18/01/2026

राशि के अनुसार आपकी सबसे बड़ी समस्या क्या है?

🙏साप्ताहिक राशिफल👉19 से 25 जनवरी 2026🙏इस सप्ताह ग्रहों का गोचर –सूर्य – मकर राशि मेंचंद्रमा – मकर राशि मेंमंगलवार आधी रा...
18/01/2026

🙏साप्ताहिक राशिफल👉19 से 25 जनवरी 2026🙏
इस सप्ताह ग्रहों का गोचर –
सूर्य – मकर राशि में
चंद्रमा – मकर राशि में
मंगलवार आधी रात 01.35 बजे – कुंभ में
शुक्रवार सुबह 8.33 बजे – मीन में
रविवार दोपहर 1.25 बजे – मेष में
मंगल – मकर में
बुध – मकर में
गुरु – मिथुन में (वक्री)
शुक्र – मकर में
शनि – मीन में
राहु – कुंभ में
केतु – सिंह में
1- मेष राशि
मेष राशि के जातकों के लिए समय मनोनुकूल चल रहा है। गुरुवार तक यह अवधि लाभकारी रहेगी। कार्यस्थल पर प्रशंसा मिलेगी और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिए पदोन्नति के संकेत हैं।
शुक्रवार से रविवार दोपहर तक स्वयं और परिवार के स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक होगा। धन व्यय अधिक हो सकता है। यात्रा में सावधानी रखें और अनावश्यक चिंता से बचें।
रविवार दोपहर बाद से समय फिर से श्रेष्ठ हो जाएगा। पारिवारिक वातावरण आनंदपूर्ण रहेगा और घरेलू दायित्व पूरे होंगे।
पुरुष – कार्यक्षेत्र में नेतृत्व और सम्मान बढ़ेगा।
महिला – परिवार के साथ समय बितेगा, भावनात्मक संतुलन बनाए रखें।
युवा – कैरियर में नए अवसर मिलेंगे, धैर्य रखें।
शुभ अंक – 9
शुभ रत्न – मूंगा
सावधानियां – क्रोध और अनियंत्रित खर्च से बचें।
उपाय – हनुमानजी की आराधना और मंगल कवच का पाठ करें।
2- वृष राशि
इस सप्ताह महत्वपूर्ण कार्य सोच-समझ कर करने होंगे, विशेषकर मंगलवार तक। धैर्य रखें और क्रोध पर नियंत्रण रखें। यात्रा में खर्च अधिक हो सकता है। योग और आध्यात्म से मानसिक शांति मिलेगी।
बुधवार से रविवार दोपहर तक समय बेहतर रहेगा। मन के अनुकूल परिणाम मिलेंगे और कार्यों में गति आएगी। आलस्य से बचें।
रविवार दोपहर बाद खर्च और चिंता बढ़ सकती है।
पुरुष – आर्थिक निर्णय सावधानी से लें।
महिला – घरेलू मामलों में संयम रखें।
युवा – पढ़ाई और कैरियर में फोकस बनाए रखें।
शुभ अंक – 6
शुभ रत्न – हीरा / ओपल
सावधानियां – जल्दबाजी और गुस्से से नुकसान।
उपाय – माता लक्ष्मी की आराधना करें।
3- मिथुन राशि
सोमवार से गुरुवार तक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण रह सकती हैं। मानसिक तनाव रहेगा और कामों में मन कम लगेगा। निवेश सोच-समझ कर करें।
शुक्रवार से रविवार तक शुभ समाचार मिलेंगे। व्यवसाय और नौकरी में रुचि बढ़ेगी। यात्रा और नए संपर्क लाभ देंगे। कार्यस्थल का वातावरण अनुकूल रहेगा।
पुरुष – निर्णय लेते समय विवेक रखें।
महिला – आत्मविश्वास बनाए रखें।
युवा – कैरियर से जुड़े नए विकल्प सामने आएंगे।
शुभ अंक – 5
शुभ रत्न – पन्ना
सावधानियां – भ्रम और अनावश्यक चिंता से बचें।
उपाय – गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
4- कर्क राशि
मंगलवार तक समय अनुकूल रहेगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। अच्छे समाचार मिलेंगे, पर शानो-शौकत में खर्च बढ़ सकता है।
बुधवार से रविवार दोपहर तक संघर्ष बढ़ेगा। आवश्यक कार्यों में रुकावट आ सकती है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
रविवार दोपहर बाद परिस्थितियां फिर अनुकूल होंगी। बाहरी संपर्कों से लाभ मिलेगा।
पुरुष – कार्यदबाव के बावजूद संयम रखें।
महिला – भावनात्मक संतुलन आवश्यक।
युवा – धैर्य रखें, अवसर फिर मिलेंगे।
शुभ अंक – 2
शुभ रत्न – मोती
सावधानियां – तनाव और स्वास्थ्य की अनदेखी न करें।
उपाय – भगवान शिव की आराधना और ध्यान करें।
5- सिंह राशि
सोमवार से गुरुवार तक समय अनुकूल रहेगा। कार्य-व्यापार में वृद्धि होगी और विरोधी परास्त होंगे। नई योजनाएं बनेंगी।
शुक्रवार से रविवार के बीच स्वास्थ्य का ध्यान रखें। विपरीत परिस्थितियों से मन विचलित हो सकता है। लंबी यात्रा और अनावश्यक खर्च से बचें।
पुरुष – पद और जिम्मेदारियां बढ़ेंगी।
महिला – स्वास्थ्य और परिवार में संतुलन रखें।
युवा – आत्मविश्वास अच्छा रहेगा, अहंकार से बचें।
शुभ अंक – 1
शुभ रत्न – माणिक्य
सावधानियां – मौसमजन्य रोग और भ्रम।
उपाय – भगवान विष्णु की आराधना या आदित्य स्तोत्र का पाठ करें।
6- कन्या राशि
मंगलवार तक समय थोड़ा प्रतिकूल रहेगा। कार्यों में विलंब से मन उदास रह सकता है। स्वास्थ्य और क्रोध पर नियंत्रण रखें।
बुधवार से रविवार दोपहर तक समय अनुकूल रहेगा। मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी और सोचे हुए कार्य पूरे होंगे।
रविवार दोपहर बाद व्यय और मानसिक अशांति बढ़ सकती है।
पुरुष – कार्यक्षेत्र में सराहना मिलेगी।
महिला – पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा।
युवा – पढ़ाई और कैरियर में सकारात्मक परिणाम।
शुभ अंक – 5
शुभ रत्न – पन्ना
सावधानियां – अत्यधिक चिंता और थकान से बचें।
उपाय – गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

7- तुला राशि
तुला राशि के जातकों के लिए सप्ताह का अधिकांश भाग प्रतिकूल परिस्थितियों वाला रहेगा। पहले दिन से गुरुवार तक आवश्यक कार्यों में सावधानी और धैर्य की आवश्यकता होगी। जल्दबाजी में नुकसान हो सकता है। मन दुविधा में रहेगा। मौसम के अनुसार सुपाच्य भोजन करें।
शुक्रवार से रविवार तक का समय बहुत अच्छा रहेगा। बाहरी संपर्कों से लाभ होगा और व्यापार में वृद्धि के अवसर मिलेंगे। परिवार के साथ मनोरंजन और प्रसन्नता का समय रहेगा। नए कार्य की योजना बनेगी। रोग और कष्टों में कमी आएगी।
पुरुष – व्यवसाय में नए अवसर मिलेंगे, धैर्य से कार्य करें।
महिला – पारिवारिक सहयोग मिलेगा, मन प्रसन्न रहेगा।
युवा – मित्रों का सहयोग और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
शुभ अंक – 6
शुभ रत्न – हीरा / ओपल
सावधानियां – निर्णय में असमंजस और जल्दबाजी से बचें।
उपाय – मां दुर्गा की आराधना करें।
8- वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के लिए सप्ताह मिला-जुला रहेगा। मंगलवार तक समय अत्यंत अनुकूल और लाभदायक रहेगा। परिवार और मित्रों के साथ यात्रा और आनंद का अवसर मिलेगा। मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
बुधवार से रविवार दोपहर तक खान-पान और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। कामों में जल्दबाजी न करें। पुराने और विवादित मामलों को धैर्य से निपटाएं। तनाव की स्थिति में योग और ध्यान लाभकारी रहेगा।
रविवार दोपहर बाद से समय फिर अत्यंत अनुकूल हो जाएगा। लंबे समय से रुके कार्य पूरे होंगे।
पुरुष – कार्यक्षेत्र में सम्मान और सफलता मिलेगी।
महिला – रिश्तों में मधुरता बनाए रखें।
युवा – धैर्य और अनुशासन से लाभ होगा।
शुभ अंक – 9
शुभ रत्न – मूंगा
सावधानियां – संदेह और मानसिक तनाव से बचें।
उपाय – हनुमानजी की आराधना करें।
9- धनु राशि
धनु राशि के जातकों के लिए सप्ताह मिला-जुला रहेगा। पहले दिन से मंगलवार तक व्यवहार में संयम रखें। खान-पान और स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
बुधवार और गुरुवार मन के अनुकूल रहेंगे। शुभ समाचार मिलेंगे। पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। नए संपर्क बनेंगे जो आगे चलकर लाभ देंगे। कार्यों की प्रशंसा होगी।
शुक्रवार से रविवार तक व्यस्तता बढ़ेगी। समय पर कार्य पूरे न हो पाने से तनाव हो सकता है। खर्च भी बढ़ेगा। स्वास्थ्य और परिवार के लिए समय निकालें।
पुरुष – कार्यभार बढ़ेगा, योजना बनाकर काम करें।
महिला – पारिवारिक संतुलन बनाए रखें।
युवा – लक्ष्य पर फोकस रखें, विचलन से बचें।
शुभ अंक – 3
शुभ रत्न – पुखराज
सावधानियां – अति-व्यस्तता और थकान।
उपाय – भगवान शिव का ध्यान और योग करें।
10- मकर राशि
मकर राशि वालों के लिए मंगलवार तक समय अनुकूल रहेगा। आवश्यक कार्य पूरे होंगे और पुरानी परेशानियां दूर होंगी। प्रसन्नता बढ़ेगी।
बुधवार और गुरुवार क्रोध और तामसिक भोजन से बचें। योग और आध्यात्म से मानसिक संतुलन बनाए रखें।
शुक्रवार से रविवार दोपहर तक समय और बेहतर होगा। व्यापार में वृद्धि होगी। नई जिम्मेदारियां मिलेंगी। कार्यस्थल पर प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
रविवार दोपहर बाद मन थोड़ा विचलित रह सकता है। स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।
पुरुष – कैरियर में स्थिरता और उन्नति।
महिला – घरेलू और व्यावसायिक संतुलन।
युवा – लक्ष्य के प्रति गंभीरता बढ़ेगी।
शुभ अंक – 8
शुभ रत्न – नीलम
सावधानियां – मानसिक तनाव और भ्रम।
उपाय – भगवान शिव की साधना करें।
11- कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातकों के लिए सप्ताह अधिकांशतः मिला-जुला रहेगा। मंगलवार तक अनावश्यक यात्रा और खर्च रहेगा। मन अशांत हो सकता है।
बुधवार और गुरुवार परिवार और व्यवसाय के लिए अनुकूल रहेंगे। शुभ समाचार मिलेंगे। पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। नए संपर्क भविष्य में लाभ देंगे।
शुक्रवार से रविवार दोपहर तक समय कुछ प्रतिकूल रहेगा। काम अधिक रहने से दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो सकती है। खर्च सोच-समझ कर करें।
रविवार दोपहर बाद समय फिर उत्तम रहेगा। परिवार और मित्रों के साथ अच्छा समय बीतेगा।
पुरुष – योजनाओं में स्थिरता आएगी।
महिला – भावनात्मक संतुलन बनाए रखें।
युवा – भविष्य की योजना स्पष्ट होगी।
शुभ अंक – 4
शुभ रत्न – अमेथिस्ट / नीलम
सावधानियां – जल्दबाजी और अव्यवस्था।
उपाय – भगवान शिव का ध्यान करें।
12- मीन राशि
मीन राशि वालों के लिए मंगलवार तक समय अत्यंत अनुकूल रहेगा। कार्य-व्यवसाय में वृद्धि होगी। नए संपर्क बनेंगे। व्यवहार और सौम्यता से प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
बुधवार और गुरुवार अनावश्यक यात्रा और खर्च बढ़ सकता है। मन भ्रमित रह सकता है। संतुलन बनाए रखें।
शुक्रवार से रविवार दोपहर तक समय फिर अनुकूल रहेगा। शुभ समाचार मिलेंगे। पारिवारिक वातावरण सुखद रहेगा।
रविवार दोपहर बाद स्वास्थ्य और खान-पान पर ध्यान देना आवश्यक होगा।
पुरुष – कार्यों में सफलता और सम्मान।
महिला – पारिवारिक सुख में वृद्धि।
युवा – रचनात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
शुभ अंक – 7
शुभ रत्न – पुखराज
सावधानियां – भ्रम और असंतुलित दिनचर्या।
उपाय – विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
अगला साप्ताहिक राशिफल
26 जनवरी 2026 को ।




18/01/2026

जल में यह चीज मिलाकर नहाने से बदल जायेगा भाग्य

🙏🌹 गुप्त नवरात्र 2026 🌹🙏हिंदू धर्म में माघ महीने का विशेष महत्व है, माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के नाम से जाना...
18/01/2026

🙏🌹 गुप्त नवरात्र 2026 🌹🙏
हिंदू धर्म में माघ महीने का विशेष महत्व है, माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के नाम से जाना जाता है।
माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है, पंचाग के अनुसार इस साल माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी से हो रही है, वहीं इसका समापन 27 जनवरी को होगा।

गुप्त नवरात्रि की पूजा के नौ दिनों में दस महाविद्यायाओं की पूजा का विशेष महत्व है, यह दस महाविद्याये मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगुलामुखी, मातंगी और कमला देवी हैं।

देवी भागवत महापुराण में उल्लेख के अनुसार पूरे वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं, जिसमें दो गुप्त नवरात्रि और दो प्रकट नवरात्रि होती हैं।
माघ और आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्रि होती हैं और प्रकट नवरात्रि में चैत्र नवरात्रि तथा आश्विन माह की शारदीय नवरात्रि होती है।






🙏🌹  #योगिनीदशाएं 🙏🌹पोस्ट बहुत लंबी और ज्ञान वर्धक है तो सब्र और ध्यान से पढ़ें 🙏 ।योगिनी दशाओं पर कुछ महीने पहले मैने कई...
18/01/2026

🙏🌹 #योगिनीदशाएं 🙏🌹
पोस्ट बहुत लंबी और ज्ञान वर्धक है तो सब्र और ध्यान से पढ़ें 🙏 ।
योगिनी दशाओं पर कुछ महीने पहले मैने कई पोस्ट कई भागों में डाली थी, कुछ मित्रों की कुछ शंकाए थी, कुछने दोबारा पोस्ट डालने का अनुरोध किया, तो मैं उन सब पोस्ट को एक साथ एडिट करके विस्तार से पूरी पोस्ट डाल रहा हूं जो जिज्ञासु मित्रों के लिए लाभप्रद होगी।
ज्योतिषीय पद्धति में योगिनी दशाओं का 36वर्ष का एक चक्र होता है, मंगला, पिंगला, धान्या , भ्रामरी, भद्रिका, उल्का, सिद्धा और संकटा क्रमशः चंद्र, सूर्य, गुरु, मंगल, बुध, शनि, शुक्र और राहु की दशा होती हैं, 1,3,5,7 क्रम की दशा यानी शुभ ग्रहो चंद्र, गुरु, बुध और शुक्र की दशा सामान्यतः शुभ और 2,4,6, 8क्रम की दशा यानी पाप ग्रहों सूर्य, मंगल, शनि और राहु की दशा सामान्यतः अशुभ मानी जाती हैं।
लेकिन ये दशाओं की शुभ या अशुभ होने की कसौटी नहीं है, इन दशाओं की शुभता या अशुभता ग्रहों के शुभ या अशुभ होने से या लग्न चार्ट में संबंधित ग्रह के शुभ या अशुभ स्थिति में होने से तय नहीं होती, बल्कि यह इस पर निर्भर होता है कि किस ग्रह की दशा किस नक्षत्र से जेनरेट होती है और वह नक्षत्र लग्न चार्ट में किस राशि और भाव में किस स्थिति में है, उससे लग्न प्रोग्रेस करके सटीक फलित कहा जा सकता है
तो क्या ये समझा जाए कि 36वर्ष बाद दुबारा वहीं दशा आने पर वहीं घटनाएं या फल रिपीट होंगे हो पहले चक्र में हुए? तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। क्योंकि पाराशर जी ने कहा है कि योगिनी दशाएं संबंधित ग्रह से उत्पन्न नहीं होती बल्कि ये दशाएं नक्षत्रों से जेनरेट होती हैं।
तो पहले 36वर्ष के चक्र में जो दशा किसी नक्षत्र से जेनरेट होती है, दूसरे चक्र में अन्य नक्षत्र से और तीसरे नक्षत्र में अन्य नक्षत्र से जेनरेट होती है।
जैसे उल्का (शनि) की दशा जिस नक्षत्र से जेनरेट होती है दूसरे चक्र में वही उल्का अन्य नक्षत्र से जेनरेट होती है और फलित बिल्कुल बदल जाता है।
अब प्रश्न है कि पहली योगिनी दशा किस नक्षत्र से जेनरेट हो रही है?
उसके लिए जन्म कुंडली में चन्द्रमा का नक्षत्र देखें, और उस नक्षत्र दशा में तीन जोड़ दे। तो जो योग आए उसमें से आठ आठ जितनी बार घटा सके, घटा दो। जो शेष आए उस नंबर का नक्षत्र देखें (1अश्विनी से 27रेवती तक क्रमानुसार नक्षत्र होते हैं) । शेष बचे नंबर के नक्षत्र से जातक की पहली योगिनी दशा जेनरेट होती है, किस नक्षत्र से कौन सी दशा जेनरेट होती है यह आपको अगली पोस्ट में बताऊंगा।
योगिनी दशाओं में आठ ही दशाएं होती हैं, चंद्र, सूर्य, बृहस्पति, मंगल, बुध, शनि, शुक्र, और राहु की।
योगिनी दशाओं में केतु की दशा शामिल नहीं होती।
योगिनी दशा, vinshotri दशाओं के सुक्ष्म परीक्षण का ही तरीका है जो ज्यादा सटीक समय और फलित कहने में सहायक है।
योगिनी दशा फल की सीमाएं लग्न चार्ट से ही तय होती हैं। जैसे यदि कोई ग्रह योगिनी दशा में बहुत मजबूत राजयोग बना रहा है तो हमें देखना होगा कि लग्न चार्ट उस ग्रह का फल कैसा है, यदि लग्न चार्ट में उसके योगों का फल सामान्य है तो योगिनी दशा में राजयोग होकर भी उसका फल पूर्णतया नहीं मिलता।
दूसरा योगिनी दशा से फलित देखने का यह लाभ है कि यदि जन्म समय में कोई मामूली संदेह हो, लेकिन लग्न ना बदले तो भी सारे वर्ग चार्ट तो बदल जाते हैं, लेकिन योगिनी दशा चन्द्रमा के नक्षत्र और नक्षत्र के पद से भी फलित तय करती हैं तो त्रुटि होने की संभावना नगण्य हो जाती है।
पोस्ट ज्यादा लंबी हो गई और ज्यादा पढ़ना अधिकतर लोग पसंद नहीं करते तो अगली पोस्ट में बात जारी रखेंगे कि योगिनी दशाओं का विश्लेषण करने की पद्धति क्या है।
तो अब मैं आपको बताता हूं कि योगिनी दशा कैसे देखें?
मान लो कुंडली में पहली दशा *धान्या* है तो यह पता करना होगा कि किस*नक्षत्र* की है?
इसके लिए कुंडली में चन्द्रमा देखें कि किस नक्षत्र में है, मान लो*पुष्य नक्षत्र* में है, पुष्य नक्षत्र कर्क राशि का है तो चार्ट से पुष्य नक्षत्र की धान्या प्रारंभ होगी।
अब आगे क्रमानुसार दशा चलेगी, जैसे पुष्य के बाद*आश्लेषा नक्षत्र* में भ्रामरी दशा आएगी लेकिन अश्लेषा की राशि भी *कर्क* है।
तो हम भ्रामरी दशा का फलित कहने के लिए अश्लेषा नक्षत्र की राशि*कर्क* राशि को लग्न बना लेंगे और कर्क राशि को लग्न मान कर कुंडली के लग्न चार्ट से नया लग्न चार्ट बना लेंगे।
अब इस प्रोग्रेस लग्न से फलित कहना है भ्रामरी दशा का।
तो विमर्शोत्री दशा अनुसार अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध हैं तो इस नए लग्न में बुध की स्थिति देखकर फलित कहेंगे।
तो कर्क लग्न (नया प्रोग्रेस लग्न) के लिए बुध बारहवें और तीसरे भाव के स्वामी हुए, और इन दोनों भावों के स्वामी होकर बुध अब किस स्थान पर है उससे भ्रामरी का फलित कहेंगे।
तो आप देखो कि धान्या पुष्य नक्षत्र की और भ्रामरी अश्लेषा नक्षत्र की दोनों के लिए कर्क लग्न प्रोग्रेसिव लग्न होगा लेकिन धान्या के लिए पुष्य नक्षत्र स्वामी शनि से और भ्रामरी के लिए अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध से फलित कहेंगे।
धान्या को आमतौर पर ज्योतिषी शुभ फल दाई मानते हैं लेकिन आप देखो कि कर्क लग्न के लिए शनि पाप ग्रह सातवें और आठवें भावों का स्वामी होकर अशुभ फल दाई होगा, इसी प्रकार अश्लेषा नक्षत्र की भ्रामरी दशा में कर्क लग्न प्रोग्रेसिव लग्न होगा और बुध अशुभ फल दाई होगा।
तो सिर्फ यह देखकर कि किसी शुभ या अशुभ ग्रह की योगिनी दशा शुभ या अशुभ होगी यह कहना बिल्कुल ही उचित नहीं, बल्कि पूरा विश्लेषण इसे आधार मानकर करना होगा कि योगिनी दशा किस नक्षत्र की है?
अब अश्लेषा नक्षत्र की भ्रामरी दशा से आगे बढ़े तो अगली दशा मघा नक्षत्र की होगी भद्रिका दशा।
मघा दसवां नक्षत्र है जो सिंह राशि में आता है, इसके चारों पद सिंह राशि में ही होते हैं तो सिंह लग्न को प्रोग्रेसिव लग्न बना लेंगे और नक्षत्र स्वामी केतु से स्थिति अनुसार फल कहेंगे।
अगली दशा उल्का होगी ग्यारहवें नक्षत्र की यानी पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र की, इसके भी चारों पद सिंह राशि में पड़ते हैं तो सिंह को प्रोग्रेसिव लग्न बना कर फलित कहा जाएगा, स्वामी शुक्र को देखेंगे।
अब इक महत्वपूर्ण स्थिति देखिए, अगली दशा सिद्धा होगी शुक्र की 7वर्ष की, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र की, ये 12वाँ नक्षत्र है, ये भी सिंह राशि में आता है लेकिन इसका सिर्फ एक पद ही सिंह राशि में है बाकी तीन पद कन्या राशि में है तो प्रोग्रेसिव लग्न कैसे बनाए?
यहां हम सात वर्ष की दशा को चार भागों में विभाजित कर लेंगेतो एक भाग यानी 1/4भाग समय के लिए सिंह लग्न बनायेंगे और नक्षत्र स्वामी सूर्य को देखेंगे की ओरिजिनल लग्न में कहां था और अब कहां का फल दे रहा है।
शेष 3/4 भाग समय के लिए कन्या लग्न को प्रोग्रेसिव लग्न बना कर सूर्य को देखेंगे और फलित कहेंगे।
तो पहले एक साल नौ महीने के लिए सिंह लग्न में लग्नेश होकर सूर्य अच्छा है लेकिन शेष बचे समय के लिए कन्या लग्न के लिए सूर्य बारहवें भाव का स्वामी होकर अशुभ हो जाता है तो एक ही दशा में, अलग अलग समय के लिए अलग अलग फल हो जाएंगे।
आशा है कि बात काफी स्पष्ट हो गई है।
अगली पोस्ट में एक दो उदाहरण लेकर बाकी बात करेंगे तो बात स्पष्ट हो जाएगी
जैसा कि मैने पहले कहा कि ये नक्षत्र आधारित दशाएं है और इन दशाओं से जो ग्रह जेनरेट होते हैं उन ग्रहों के अनुसार फल कहे जाते हैं लेकिन ये सत्य नहीं है कि शुभ ग्रह से शुभ फल और अशुभ ग्रह से अशुभ फल ही प्राप्त हो।
इस फलित को हम चार प्रकार से तय करते हैं।
तो सबसे पहले योगिनी से जेनरेट होने वाले ग्रह और ग्रहों के नैसर्गिक भावों का यहां उल्लेख करता हूं।
सबसे पहली योगिनी मंगला है जिससे चंद्र जेनरेट होते हैं, पाराशर के अनुसार इससे चतुर्थ भाव एक्टिव होता है जो सुख भाव कहलाता है यह वाहन, मकान, अचल संपत्ति का भी भाव है तो मंगला दशा में चंद्र और चतुर्थ भाव के एक्टिव होने से इनके कारकत्व से संबंधित फल प्राप्त होते हैं। यह दशा एक वर्ष की होती है।
दूसरी दशा पिंगला से सूर्य से संबंधित भाव एक्टिव होता है जो लग्न है, और सूर्य पाप ग्रह होकर संबंधित कारकत्व अनुसार फल देते हैं। यह दशा दो वर्ष की होती है।
तीसरी दशा धान्या से गुरु बृहस्पति की है जो बहुत ही महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इससे दूसरा, पांचवां, नौवां और ग्यारहवां भाव एक साथ एक्टिव होते हैं और धन, वाणी, शिक्षा, संतान, धर्म, अध्यात्म और लाभ आदि कारकत्व एक्टिव होकर फलदाई होते हैं, यह दशा तीन वर्ष की होती है।
चौथी दशा भ्रामरी होती है जिससे मंगल और मंगल से तीसरा और छठा भाव एक्टिव होता है और सामान्यतः अपने कराकत्व अनुसार तीसरे और छठे भाव के अशुभ फल मिलते हैं। यह दशा चार वर्ष की होती है।
पांचवीं दशा है भद्रिका जिससे बुध और दशम भाव यानी कर्म भाव एक्टिव होता है, और रोजगार, व्यापार, प्रमोशन, मित्रता, आदि की प्राप्ति के संयोग बनते हैं यह दशा पांच वर्ष की होती है।
छठी दशा है उल्का जिससे शनि और संबंधित आठवां और बारहवां भाव एक्टिव होता है और सामान्यतः अशुभ ग्रह और अशुभ भावों के कराकत्व एक्टिव होने के कारण अशुभ फल जैसे बीमारी, खर्च, धन हानि, मुकदमे में सजा आदि आते हैं, यह दशा छः वर्ष की होती है।
सातवीं दशा है सिद्धा जिससे शुक्र और सप्तम भाव एक्टिव होता है और शुक्र से संबंधित धन, विलास, सुख, विवाह, और सप्तम भाव से संबंधित कारकत्व एक्टिव होते हैं और सामान्यतः मन वांछित फल प्राप्त होते हैं। यह दशा सात वर्ष की होती है।
अंतिम दशा संकटा होती है जिससे राहु और अष्टम और द्वादश भाव एक्टिव होते हैं इससे भी उल्का जैसे शनि के अशुभ फल प्राप्त होते हैं फर्क सिर्फ यह है कि शनि के फलों की गति धीमी होती है जबकि राहु तत्काल तीव्र गति से अचानक फल देते हैं। यह दशा आठ वर्ष की होती है।
तो योगिनी दशाओं का फल उनसे जेनरेट ग्रह और उस ग्रह से एक्टिव होने वाले भावों के अनुसार निर्धारित करते हैं लेकिन जैसे मैं पहले की पोस्ट में कह चुका की इन दशाओं में फल मूल चार्ट में ग्रहों की स्थिति अनुसार और जिस नक्षत्र से योगिनी मिलती है उस नक्षत्र की जन्म की स्थिति और वर्तमान स्थिति अनुसार फल कहेंगे । शेष अगली पोस्ट में चर्चा करेंगे।
👉 किसी प्रश्न,जिज्ञासा, या शंका समाधान के लिए व्हाट्सएप कीजिए, कमेंट में व्यक्तिगत कुंडली के बारे में प्रश्न ना करें🙏







🙏🕉️।।श्री गणेशाय नमः।।🕉️🙏🍁💥आज का हिन्दू पंचांग और राशिफल 💥🍁💥दिनांक - १८ जनवरी २०२६💥दिन - रविवार 👉सूर्योदय: - ०७:२१👉सूर्य...
18/01/2026

🙏🕉️।।श्री गणेशाय नमः।।🕉️🙏
🍁💥आज का हिन्दू पंचांग और राशिफल 💥🍁

💥दिनांक - १८ जनवरी २०२६
💥दिन - रविवार
👉सूर्योदय: - ०७:२१
👉सूर्यास्त: - १७:५३
👉चन्द्रोदय: - ❌❌
👉चन्द्रास्त: -१७:२०
👉अयन - उत्तरायण
👉ऋतु: - शिशिर
👉शक सम्वत: - १९४७ (विश्वावसु)
👉विक्रम सम्वत: - २०८२ (सिद्धार्थी)
👉मास - माघ
👉पक्ष - कृष्ण
👉तिथि - अमावस्या (२५:२१ से प्रतिपदा)
👉नक्षत्र - पूर्वाषाढ (१०:१४ से उत्तराषाढ)
👉योग - हर्षण (२१:११ से वज्र)
👉प्रथम करण - चतुष्पाद (१२:४५ तक)
👉द्वितीय करण - नाग (२५:२१ तक)
👉दिशाशूल - पश्चिम

💥गोचर ग्रहा:
सूर्य - मकर
चंद्र - मकर (१६:४१ से)
मंगल - मकर (अस्त, पश्चिम , मार्गी)
बुध - मकर (अस्त , पूर्व, मार्गी )
गुरु - मिथुन (उदित, पूर्व, वक्री)
शुक्र - मकर (अस्त, पश्चिम, मार्गी)
शनि - मीन (उदय, पूर्व, मार्गी)
राहु - कुम्भ
केतु - सिंह

💥शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त - १२:१० से १२:५३
अमृत काल - २९:०२ से ३०:४४
सर्वार्थसिद्धि योग - १०:१४ से ३१:१४
विजय मुहूर्त - १४:१७ से १५:००
गोधूलि मुहूर्त - १७:४६ से १८:१३

💥अशुभ काल
राहुकाल - १६:२९ से १७:४९
राहुवास - उत्तर
यमगण्ड - १२:३२ से १३:५१

💥💥राशिफल

मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन आपके लिये शुभफलदायी रहेगा स्वभाव में थोड़ी चंचलता अवश्य रहेगी लेकिन इससे आस पास का वातावरण खुशनुमा ही बनाएंगे। कार्य क्षेत्र पर आज किसी के भटकाने से गलत निर्णय हो सकते है देखभाल कर ही कार्य करें व्यवसाय में चाहकर भी निवेश करना पड़ेगा इसका भविष्य में सामान्य लाभ मिल जाएगा। उधारी के व्यवहार कुछ समय के लिये बेचैनी बढ़ाएंगे पुरानी शीघ्र चुकाने के प्रयास करें नई करने से बचे अपमानित हो सकते है। दोपहर के बाद काम करने का मन नही करेगा मित्र परिजनों के साथ धार्मिक अथवा एकांत स्थान की यात्रा करेंगे दिखावे से बचे नाहाई तो बाद में आर्थिक विषमताएं बनेगी। सेहत में आज सुधार रहेगा।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज भी दिन आपके लिये प्रतिकूल रहने वाला है सेहत में आज भी कुछ ना कुछ विकार रहने से कार्य करने का मन नही करेगा आज आपको ज्यादा भाग दौड़ अथवा मेहनत के कार्य से बचना चाहिये अन्यथा स्थिति गंभीर भी हो सकती है। मध्यान के समय कार्यो को जबरदस्ती करेंगे जिससे थकान बढ़ेंगी और काम मे भी कुछ ना कुछ नुक्स रह जायेगा। दोपहर बाद का समय थोड़ा राहत वाला रहेगा किसी स्वजन की सहायता से धन अथवा अन्य प्रकार से लाभ होगा सेहत में सुधार तो आएगा परन्तु विपरीत लिंगीय आकर्षण भी बढ़ने से अपमान जैसी स्थिति बनेगी। घर के सदस्यों का सहयोग आज कम ही मिलेगा पति पत्नी एकदूसरे को शंका की दृष्टि से देखेंगे। यात्रा ना करें।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन आपको किसी न किसी रूप में लाभ देकर जाएगा। दिन के आरंभी भाग में आलस्य दिखाएंगे मेहनत से बचने की मानसिकता रहने से आवश्यक कार्यो में विलंब होगा जिससे घर के सदस्यों से फटकार भी सुनने को मिलेगी। दोपहर का समय कार्य व्यवसाय के लिये शुभ रहेगा प्रतिस्पर्धा कम रहने से इसका जमकर लाभ उठाएंगे धन की आमद आशासे अधिक होगी लेकिन सहकर्मी का व्यवहार आज परेशान करने वाला रहेगा फिर भी संध्या से पूर्व ही दिन भर की पूर्ति कर लेंगे। संध्या का समय काम की जगह मनोरंजन में बिताना अधिक पसंद करेंगे। मौज शौक पर खर्च अधिक होगा व्यसनों से बचे अन्यथा अपमानित हो सकते है। जरूरी कार्य भी आज ही निपटा ले कल कुछ न कुछ व्यवधान आने से लटक सकते है।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज के दिन आपके हानि लाभ बराबर रहेंगे धन लाभ समय से थोड़ा विलंब से होगा जिससे थोड़ी असुविधा होगी इसके कारण कार्यक्रम में बदलाव भी करना पड़ेगा। मध्यान बाद दिनचर्या स्थिर बनेगी पर व्यस्तता भी बढ़ेगी कार्य क्षेत्र के साथ सामाजिक व्यवहारों के लिये भी समय निकालने से परेशानी आएगी घर के बड़ो का सहयोग मिलने से इसका भी समाधान हो जाएगा। व्यवसायी वर्ग दैनिक कार्यो के साथ नए कार्यो में भी भाग्य आजमाएंगे इसमे लाभ होगा लेकिन आशाजनक नही। घरेलू वातावरण गलतमहमी के कारण थोड़ी देर के लिये अशांत बनेगा कुछ देर में सामान्य भी हो जाएगा लेकिन किसी की जिद पूरी करने के बाद ही। सेहत संध्या बाद विपरीत होने की संभावना है ठंडे प्रदार्थो से परहेज करें। धार्मिक यात्रा के योग है इससे मन को शान्ति मिलेगी।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज आप दिन के आरंभ से ही आलस्य में भरे रहेगें मध्यान तक कि दिनचर्या धीमी रहेगी इसके बाद भी काम तो करेंगे लेकिन ध्यान कही और ही रहेगा। कार्य व्यवसाय में धन लाभ के अवसर अवश्य मिलेंगे लेकिन आज सुख सुविधाओं को बढ़ाने पर आवश्यकता से अधिक खर्च करेंगे जिससे धन संचय नही हो पायेगा। कार्य क्षेत्र पर अधिक कार्य भार सौपने पर आपसे अधीनस्थ लोग नाराज रहेंगे। नौकरी पेशाओ के लिये दिन आरामदायक रहेगा छोटे मोटे घरेलू कार्य को छोड़ अन्य किसी कार्य को नही करेंगे। सामाजिक क्षेत्र के लिये समय नही देने से प्रेमीजन नाराज होंगे लेकिन मित्र वर्ग से अच्छी पटेगी। घर मे भी समय पर आवश्यकता पूर्ति करने पर शांति बनी रहेगी। उत्तम भोजन वाहन पर्यटन के अवसर मिलेंगे सेहत बनी रहेगी।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन भी छोटी मोटी घटनाओं से अशांत बनेगा फिर भी बीते कल की तुलना में थोड़ी शांति भी रहेगी। प्रातः काल घर के सदस्यों से बीती बातो के कारण मतभेद रहेंगे केवल मतलब से ही व्यवहार करेंगे लेकिन मध्यान बाद स्थिति बदलेगी घर के सभी सदस्य स्वार्थ से एक मत होंगे बाहर घूमने पर्यटन के अवसर मिलने से भी कड़वाहट में कमी आएगी लेकिन घर के बुजुर्गों को आज संतुष्ट नही कर पाएंगे। पैतृक संपत्ति के मामलों को छेड़ने की जगह अभी विराम दे अन्यथा दिन खराब हो सकता है। कार्य व्यवसाय से आज ज्यादा आशा नही रहेगी फिर भी अकस्मात लाभ होने से खुशी मिलेगी। महिलाए आज अधिक खर्चीली रहेंगी लेकिन खर्च घरेलू सामान पर अधिक करेंगी। संध्या बाद का समय दिन की तुलना में शांति से बीतेगा लेकिन सेहत में बदलाव भी आने से असहज रहेंगे।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन भी आपको आर्थिक समृद्धि प्रदान करेगा लेकिन आज खर्च करते समय सोच विचार अवश्य करें ठगे जाने अथवा अन्य कारणों से हानि हो सकती है घर के बड़े परिजन भी आपकी फिजूल खर्ची से नाराज होंगे इसके बाद ही मितव्ययी बनेंगे। कार्य क्षेत्र से दिन के पूर्वार्द्ध में ही अनुकूल वातावरण मिलेगा धन की आमद असमय होने से आश्चर्य में पढ़ेंगे। दूर रहने वाले स्वयंजन से कोई अप्रिय सूचना मिलने से कुछ समय के लिये उदासी छाएगी फिर भी अन्य क्षेत्रों से उत्साहित करने वाले प्रसंग बनते रहेंगे। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी रखें अकस्मात दुर्घटना में चोटादि का भय है शरीर मे दुखन एवं मूत्राशय संबंधित संमस्या होगी।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज के दिन आपका स्वभाव बीते कुछ दिनों से संतोषि रहेगा। आज धन संबंधित उलझने रहने के बाद भी पारिवारिक कार्यो एवं आपसी संबंधों को अधिक महत्त्व देंगे। मध्यान तक घर मे कोई न कोई आपसे असंतुष्ट रहेगा लेकिन संध्या बाद खर्च करने के बाद नाराजगी प्रसन्नता में बदल जाएगी मनोरंजन सुख वृद्धि के लिये खर्च में कमी नही करेंगे। भाई बंधुओ से ईर्ष्या युक्त संबंध कुछ समय के लिये मानसिक रूप से अशांत बनाएँगे पैतृक कारणों से बहस होने की संभावना है फिर भी आपका व्यवहार आज थोड़ा शालीन रहने से स्थिति को संभाल लेंगे। कार्य व्यवसाय से लाभ मेहनत के बाद ही साधारण रहेगा। संध्या के समय भाग दौड़ से बचने का प्रयास करेंगे दुर्व्यसनों पर भी खर्च होगा। सेहत में थोड़ी समस्या रहेगी।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज के दिन आपका व्यक्तित्त्व निखरा हुआ रहेगा लेकिन स्वभाव में जिद और अहम भी रहने से लोग आपकी बातो का गलत अर्थ ही निकालेंगे। मध्यान से पहले तक एकाग्रता अधिक रहेगी मानसिक रूप से शांत रहने के कारण दैनिक पूजा पाठ में आज अधिक मन लगेगा लेकिन दोपहर बाद कार्य भार बढ़ने से एकाग्रता भंग होगी जिस कार्य को करना है उसे छोड़ व्यर्थ के कार्यो में रुचि लेंगे। कार्य व्यवसाय में मेहनत से पीछे नही हटेंगे परन्तु तुरंत फल पाने की चाह मानसिक अशांति बढ़ाएगी धैर्य से काम ले आज आवश्यकता अनुसार आर्थिक लाभ अवश्य होगा भले थोड़ा विलंब से ही हो। पारिवारिक वातावरण अपने काम से काम रखने तक ही शांत रहेगा किसी को ताने मारना अथवा कार्य मे दखल देना परेशानी में डालेगा। सेहत छोटी मोटी व्याधि को छोड़ सामान्य रहेगी।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन हानिकर रहने वाला है किसी भी कार्य मे जल्दबाजी से बचे सोच समझकर अनुभवी व्यक्ति की सलाह के बाद ही कोई कदम उठाए। कार्य व्यवसाय आज भगवान भरोसे रहेगा लाभ होते होते किसी अन्य के पक्ष में जाने से निराशा होगी। आज जहां से सहायता की उम्मीद लगाएंगे वही आपको टरकायेगा ज्यादा जोर देने पर आगे के लिये संबंध खराब होने का भर रहेगा। धन की आमद अत्यंत सीमित होगी वह भी पुराने व्यवहारों से ही कार्य क्षेत्र पर स्वयं अथवा नौकरों के हाथ नुकसान हो सकता है क्रोध से बचे। घर मे भी परिजनों के द्वारा हानि होने की संभावना है। सेहत ठीक रहेगी लेकिन आकस्मिक चोटादि का भय है उपकरणों से काम करते समय सावधानी बरतें।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन लाभदायक है आज आप जिस भी कार्य को करने का मन बनाएंगे परिस्थितियां पहले से ही इसके अनुकूल बनने लगे जाएंगी। कार्य क्षेत्र पर प्रतिस्पर्धा रहने पर भी आपके व्यवसाय को प्रभावित नही कर पायेगी। नौकरी पेशाओ को अपने कार्य मे विजय मिलने से अधिकारी वर्ग से निकटता बढ़ेगी लेकिन बच कर भी रहे आज जिससे भी प्रेम संबंधों में घनिष्ठता बढ़ेगी वही कुछ ना कुछ भार आपके ऊपर डालेगा जिससे अपने कार्यो अथवा हितों की हानि हो सकती है। धन लाभ के लिये ज्यादा भागदौड़ नही करनी पड़ेगा सहज रूप से होने पर निश्चिन्त रहेंगे। गृहस्थी में सुख शांति बनी रहेगी पैतृक साधनों में वृद्धि करने से घर के बड़े बुजुर्ग प्रसन्न रहेंगे लेकिन महिलाए किसी बात को लेकर मुह फुलायेंगी सेहत मामूली बातो को छोड़ ठीक ही रहेगी।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन भी कार्य सफलता दायक रहेगा लेकिन आज आपको गलत मार्गदर्शन करने वाले भी मिलेंगे जो आपके हितैषी बनकर बेवजह ही उटपटांग सलाह देकर मार्गभ्रमित करेंगे। किसी भी कार्य को करने से पहले घर मे बुजुर्गों की सलाह अवश्य लें सफलता निश्चत होगी। व्यावसायिक क्षेत्र पर आज अन्य दिनों की तुलना में अधिक माथापच्ची करनी पड़ेगी धन लाभ के कई अवसर मिलेंगे लेकिन बेवजह के खर्च भी आज अधिक रहेंगे जिससे थोड़ा बहुत लाभ ही हाथ लगेगा। आज जोखिम वाले कार्यो में निवेश से बचे अन्यथा धन फंस सकता है। आध्यात्म के क्षेत्र से जुड़े जातको को साधना में नई अनुभूति होगी। गूढ़ विषयो को जानने की लालसा बढ़ेगी। सेहत में कुछ विकार भी आ सकता है। पेट से ऊपर के भाग संबंधित परेशानी की संभावना है।

।। शुभम् भवतु।।

#राशिफल
#ज्योतिष

■ 7 दिवस = 1 सप्ताह■ 4 सप्ताह = 1 माह ,■ 2 माह = 1 ऋतू■ 6 ऋतू = 1 वर्ष ,■ 100 वर्ष = 1 शताब्दी■ 10 शताब्दी = 1 सहस्राब्द...
17/01/2026

■ 7 दिवस = 1 सप्ताह
■ 4 सप्ताह = 1 माह ,
■ 2 माह = 1 ऋतू
■ 6 ऋतू = 1 वर्ष ,
■ 100 वर्ष = 1 शताब्दी
■ 10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी ,
■ 432 सहस्राब्दी = 1 युग
■ 2 युग = 1 द्वापर युग ,
■ 3 युग = 1 त्रैता युग ,
■ 4 युग = सतयुग
■ सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग = 1 महायुग
■ 72 महायुग = मनवन्तर ,
■ 1000 महायुग = 1 कल्प
■ 1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ )
■ 1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प ।(देवों का अन्त और जन्म )
■ महालय = 730 कल्प ।(ब्राह्मा का अन्त और जन्म )

सम्पूर्ण विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र यही है। जो हमारे देश भारत में बना। ये हमारा भारत जिस पर हमको गर्व है l
दो लिंग : नर और नारी ।
दो पक्ष : शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।
दो पूजा : वैदिकी और तांत्रिकी (पुराणोक्त)।
दो अयन : उत्तरायन और दक्षिणायन।

तीन देव : ब्रह्मा, विष्णु, शंकर।
तीन देवियाँ : महा सरस्वती, महा लक्ष्मी, महा गौरी।
तीन लोक : पृथ्वी, आकाश, पाताल।
तीन गुण : सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण।
तीन स्थिति : ठोस, द्रव, वायु।
तीन स्तर : प्रारंभ, मध्य, अंत।
तीन पड़ाव : बचपन, जवानी, बुढ़ापा।
तीन रचनाएँ : देव, दानव, मानव।
तीन अवस्था : जागृत, मृत, बेहोशी।
तीन काल : भूत, भविष्य, वर्तमान।
तीन नाड़ी : इडा, पिंगला, सुषुम्ना।
तीन संध्या : प्रात:, मध्याह्न, सायं।
तीन शक्ति : इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति।

चार धाम : बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम्, द्वारका।
चार मुनि : सनत, सनातन, सनंद, सनत कुमार।
चार वर्ण : ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र।
चार निति : साम, दाम, दंड, भेद।
चार वेद : सामवेद, ॠग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद।
चार स्त्री : माता, पत्नी, बहन, पुत्री।
चार युग : सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलयुग।
चार समय : सुबह, शाम, दिन, रात।
चार अप्सरा : उर्वशी, रंभा, मेनका, तिलोत्तमा।
चार गुरु : माता, पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु।
चार प्राणी : जलचर, थलचर, नभचर, उभयचर।
चार जीव : अण्डज, पिंडज, स्वेदज, उद्भिज।
चार वाणी : ओम्कार्, अकार्, उकार, मकार्।
चार आश्रम : ब्रह्मचर्य, ग्राहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास।
चार भोज्य : खाद्य, पेय, लेह्य, चोष्य।
चार पुरुषार्थ : धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष।
चार वाद्य : तत्, सुषिर, अवनद्व, घन।

पाँच तत्व : पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल, वायु।
पाँच देवता : गणेश, दुर्गा, विष्णु, शंकर, सुर्य।
पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ : आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा।
पाँच कर्म : रस, रुप, गंध, स्पर्श, ध्वनि।
पाँच उंगलियां : अँगूठा, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा।
पाँच पूजा उपचार : गंध, पुष्प, धुप, दीप, नैवेद्य।
पाँच अमृत : दूध, दही, घी, शहद, शक्कर।
पाँच प्रेत : भूत, पिशाच, वैताल, कुष्मांड, ब्रह्मराक्षस।
पाँच स्वाद : मीठा, चर्खा, खट्टा, खारा, कड़वा।
पाँच वायु : प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान।
पाँच इन्द्रियाँ : आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा, मन।
पाँच महायज्ञ : भूतयज्ञ, मनुष्ययज्ञ, पितृयज्ञ, देवयज्ञ एवं ब्रह्मयज्ञ।
पाँच वटवृक्ष : सिद्धवट (उज्जैन), अक्षयवट (Prayagraj), बोधिवट (बोधगया), वंशीवट (वृंदावन), साक्षीवट (गया)।
पाँच पत्ते : आम, पीपल, बरगद, गुलर, अशोक।
पाँच कन्या : अहिल्या, तारा, मंदोदरी, कुंती, द्रौपदी।

छ: ॠतु : शीत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, बसंत, शिशिर।
छ: ज्ञान के अंग : शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष।
छ: कर्म : देवपूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप, दान।
छ: दोष : काम, क्रोध, मद (घमंड), लोभ (लालच), मोह, आलस्य।

सात छंद : गायत्री, उष्णिक, अनुष्टुप, वृहती, पंक्ति, त्रिष्टुप, जगती।
सात स्वर : सा, रे, ग, म, प, ध, नि।
सात सुर : षडज्, ॠषभ्, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद।
सात चक्र : सहस्त्रार, आज्ञा, विशुद्ध, अनाहत, मणिपुर, स्वाधिष्ठान, मुलाधार।
सात वार : रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि।
सात मिट्टी : गौशाला, घुड़साल, हाथीसाल, राजद्वार, बाम्बी की मिट्टी, नदी संगम, तालाब।
सात महाद्वीप : जम्बुद्वीप (एशिया), प्लक्षद्वीप, शाल्मलीद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप, पुष्करद्वीप।
सात ॠषि : वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भारद्वाज, अत्रि, वामदेव, शौनक।
सात ॠषि : वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र, भारद्वाज।
सात धातु (शारीरिक) : रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, वीर्य।
सात रंग : बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल।
सात पाताल : अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल।
सात पुरी : मथुरा, हरिद्वार, काशी, अयोध्या, उज्जैन, द्वारका, काञ्ची।
सात धान्य : उड़द, गेहूँ, चना, चांवल, जौ, मूँग, बाजरा।

आठ मातृका : ब्राह्मी, वैष्णवी, माहेश्वरी, कौमारी, ऐन्द्री, वाराही, नारसिंही, चामुंडा।
आठ लक्ष्मी : आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी।
आठ वसु : अप (अह:/अयज), ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्युष, प्रभास।
आठ सिद्धि : अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व।
आठ धातु : सोना, चांदी, ताम्बा, सीसा जस्ता, टिन, लोहा, पारा।

नवदुर्गा : शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री।
नवग्रह : सुर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु।
नवरत्न : हीरा, पन्ना, मोती, माणिक, मूंगा, पुखराज, नीलम, गोमेद, लहसुनिया।
नवनिधि : पद्मनिधि, महापद्मनिधि, नीलनिधि, मुकुंदनिधि, नंदनिधि, मकरनिधि, कच्छपनिधि, शंखनिधि, खर्व/मिश्र निधि।

दस महाविद्या : काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्तिका, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला।
दस दिशाएँ : पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, आग्नेय, नैॠत्य, वायव्य, ईशान, ऊपर, नीचे।
दस दिक्पाल : इन्द्र, अग्नि, यमराज, नैॠिति, वरुण, वायुदेव, कुबेर, ईशान, ब्रह्मा, अनंत।

दस अवतार (विष्णुजी) : मत्स्य, कच्छप, वाराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि।

दस सति : सावित्री, अनुसुइया, मंदोदरी, तुलसी, द्रौपदी, गांधारी, सीता, दमयन्ती, सुलक्षणा, अरुंधती।

उक्त जानकारी शास्त्रोक्त 📚 आधार पर हैं।

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