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*खट्टी डकारें और मुंह में वापस आता खाना*क्या यह महज एसिडिटी है या किसी बड़ी बीमारी का संकेत?क्या आपने कभी गौर किया है कि ...
10/02/2026

*खट्टी डकारें और मुंह में वापस आता खाना*

क्या यह महज एसिडिटी है या किसी बड़ी बीमारी का संकेत?

क्या आपने कभी गौर किया है कि भरपेट भोजन करने के बाद अचानक गले में जलन महसूस होती है और खाया हुआ खाना वापस मुंह तक आ जाता है? चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे GERD (Gastroesophageal Reflux Disease) या आम भाषा में 'एसिड रिफ्लक्स' कहा जाता है। उत्तर भारत की बदलती जीवनशैली और मसालों के शौकीन समाज में यह समस्या अब महामारी की तरह फैल रही है।

अक्सर लोग इसे 'मामूली गैस' समझकर एक ईनो या एंटासिड खाकर टाल देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह अनदेखी आपके भोजन नली को हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त कर सकती है? आइए जानते हैं इस समस्या के गहरे कारण, इसके गंभीर कॉम्प्लीकेशन्स और विज्ञान द्वारा प्रमाणित उपचार।

*♦️क्यों आता है खाना वापस?♦️*

*♦️मुख्य कारण♦️*

हमारे शरीर में भोजन नली (Esophagus) और पेट के बीच एक दरवाज़ा होता है जिसे LES (Lower Esophageal Sphincter) कहते हैं। इसका काम भोजन को पेट में जाने देना और फिर कसकर बंद हो जाना है ताकि एसिड वापस ऊपर न आए।

*♦️LES का ढीला पड़ना♦️*

जब यह वॉल्व कमजोर हो जाता है, तो पेट का एसिड और अधपचा भोजन वापस गले की ओर भागने लगता है।

*♦️हाइयटल हर्निया♦️ (Hiatal Hernia)*

यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट का ऊपरी हिस्सा डायाफ्राम (पेट और छाती को अलग करने वाली मांसपेशी) के माध्यम से छाती में ऊपर की ओर खिसक जाता है।

*♦️मंदाग्नि ♦️(Slow Digestion)*

आयुर्वेद के अनुसार, यदि आपकी जठराग्नि कमजोर है, तो भोजन पेट में पड़ा-पड़ा सड़ने लगता है और गैस के दबाव से ऊपर की ओर धकेला जाता है।

*दुर्लभ लेकिन सच कुछ चौंकाने वाले तथ्य दांतों का सड़ना*

क्या आप जानते हैं कि बार-बार मुंह में खाना वापस आने से आपके दांत खराब हो सकते हैं? पेट का एसिड दांतों के 'इनेमल' को गला देता है, जिससे सेंसिटिविटी और कैविटी बढ़ जाती है।

*♦️रात की खांसी♦️*

कई बार लोग सूखी खांसी का इलाज करवाते रहते हैं, जबकि उसका असली कारण एसिड रिफ्लक्स होता है जो सोते समय फेफड़ों की नली में सूक्ष्म जलन पैदा करता है।

*♦️सलाइवा टेस्ट ♦️*

यदि खाना वापस आने के साथ आपके मुंह में अचानक बहुत ज्यादा थूक (Saliva) बनने लगता है, तो यह शरीर का एक सुरक्षा तंत्र है जो एसिड को बेअसर करने की कोशिश कर रहा होता है।

*क्या इसके कोई कॉम्प्लिकेशन्स (जटिलताएं) हैं?*

जी हाँ, इसे नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। लंबे समय तक एसिड रिफ्लक्स रहने पर ये समस्याएं हो सकती हैं:

*एसोफैगल स्ट्रक्चर (Esophageal Stricture)*

बार-बार एसिड के संपर्क में आने से भोजन नली में घाव (Scar tissue) बन जाते हैं, जिससे नली संकरी हो जाती है और खाना निगलने में तकलीफ होती है।

*बैरेट का अन्नप्रणाली*
(Barrett’s Esophagus)

यह सबसे खतरनाक स्थिति है।
इसमें भोजन नली की कोशिकाएं बदल जाती हैं, जो भविष्य में एसोफैगल कैंसर का कारण बन सकती हैं।

*अस्थमा और निमोनिया*

एसिड के छोटे कण सांस नली में जाकर फेफड़ों में संक्रमण पैदा कर सकते हैं।

*प्रमाणित उपचार और बचाव के टिप्स (Proven Treatment)*

विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही इस समस्या के समाधान के लिए जीवनशैली में बदलाव को प्राथमिकता देते हैं:

*1 'लेफ्ट साइड' सोने का नियम*

विज्ञान कहता है कि बाईं करवट (Left side) सोने से पेट भोजन नली के नीचे रहता है, जिससे गुरुत्वाकर्षण के कारण एसिड ऊपर नहीं आ पाता।

*2 भोजन के बाद 'वज्रासन'*

भोजन के तुरंत बाद लेटने के बजाय 10-15 मिनट वज्रासन में बैठें। यह पाचन क्रिया को तेज करता है और गैस के दबाव को कम करता है।

*3 खाने के बीच पानी का त्याग*

भोजन के दौरान बहुत अधिक पानी पीने से पेट का एसिड पतला हो जाता है, जिससे पाचन धीमा होता है। खाना खाने के 45 मिनट बाद ही पानी पिएं।

*4 'सौंफ और मिश्री' का जादू*

भोजन के बाद एक चम्मच सौंफ चबाना केवल माउथ फ्रेशनर नहीं है; सौंफ में ऐसे तेल होते हैं जो पेट की मांसपेशियों को शांत करते हैं और LES को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

*5 रात का भोजन और सोने के बीच का अंतर*

सोने से कम से कम 3 घंटे पहले खाना खा लें। लेटने से पहले पेट खाली होना चाहिए ताकि रिफ्लक्स की संभावना शून्य हो जाए।

*♦️निष्कर्ष♦️*

मुंह में खाना वापस आना केवल एक असहज स्थिति नहीं, बल्कि आपके शरीर की एक चेतावनी है। सही खान-पान, तनाव प्रबंधन और समय पर डॉक्टरी सलाह लेकर आप अपनी भोजन नली को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं। याद रखें, पेट स्वस्थ है तो पूरा शरीर स्वस्थ है।

डायबिटीज़ में नसों की जलन👉 (Neuropathy) अगर समय पर संभाल ली जाए, तो बढ़ने से रोकी जा सकती है। घरेलू उपाय अलग-अलग और पूरा...
30/01/2026

डायबिटीज़ में नसों की जलन

👉 (Neuropathy) अगर समय पर संभाल ली जाए, तो बढ़ने से रोकी जा सकती है।

घरेलू उपाय अलग-अलग और पूरा सेफ प्लान

नसों की जलन क्यों होती है? (संक्षेप में)

लंबे समय तक शुगर ज़्यादा रहना

Vitamin B12 / D की कमी
उम्र के साथ नसों की कमजोरी
पैरों में ब्लड सर्कुलेशन कम होना

घरेलू उपाय (रोज़ करने योग्य)

*1 पैरों की सही देखभाल (सबसे ज़रूरी)*

गुनगुने पानी से पैर धोएँ (गरम नहीं)

अच्छे से सुखाएँ

रात को नारियल तेल / तिल का तेल हल्का सा लगाएँ

नंगे पाँव बिल्कुल न चलें।

*2 डाइट से नसों को ताक़त*

दूध / दही

हरी सब्ज़ियाँ

मूंग दाल

अखरोट (1–2)

अलसी (1 चम्मच)

शराब, तंबाकू = नसों की सबसे बड़ी दुश्मन

*3 हल्की एक्सरसाइज़*

20–30 मिनट धीमी वॉक
कुर्सी पर बैठकर पैर ऊपर-नीचे
पंजों को गोल-गोल घुमाना

ब्लड फ्लो बढ़ता है = जलन कम होती है।

*4 रात की जलन में राहत*

सोने से पहले पैर ऊँचे रखें
ठंडी हवा सीधे पैरों पर न लगे
ढीले कॉटन मोज़े पहनें।

मेडिकल उपाय (डॉक्टर की सलाह से)

1 Vitamin सपोर्ट
Vitamin B12 / B-Complex

Vitamin D (अगर कमी हो)

B12 की कमी में जलन बहुत बढ़ जाती है।

2 नसों की दवाएँ

3 शुगर का स्थिर कंट्रोल

HbA1c 7–7.5% (60+ में)
बहुत कम शुगर भी नसों को नुकसान देती है

*क्या न करें*

गरम पानी में पैर डुबोना

हीटर / गरम बोतल पैरों पर लगाना

दर्द सहते रहना

खुद से दवा बदलना

कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ?

जलन रोज़ बढ़ रही हो

सुन्नपन बढ़ने लगे

पैरों में छाले / घाव

रात में नींद न आए

कमजोरी या चलने में लड़खड़ाहट

7- दिन का आसान “नसों की देखभाल रूटीन”

सुबह: हल्की वॉक
दोपहर: संतुलित खाना
शाम: पैर की एक्सरसाइज़
रात: तेल से हल्की मालिश + पैर ऊँचे

याद रखने का गोल्डन नियम

*“शुगर कंट्रोल + विटामिन + पैर की देखभाल = नसों की सुरक्षा”*

🟣🟣🟣*♦️कमर दर्द ♦️*BACK PAIN आज के समय में हर उम्र के लोग कमर दर्द (Back Pain) से परेशान हैं। जहां पहले यह समस्या उम्रदरा...
26/01/2026

🟣🟣🟣

*♦️कमर दर्द ♦️*

BACK PAIN

आज के समय में हर उम्र के लोग कमर दर्द (Back Pain) से परेशान हैं। जहां पहले यह समस्या उम्रदराज लोगों में अधिक देखी जाती थी, वहीं अब 20–30 साल के युवाओं में भी यह आम हो गई है। आयुर्वेद के अनुसार, कमर दर्द केवल हड्डियों या मांसपेशियों का मामला नहीं, बल्कि यह वात दोष की वृद्धि और शरीर की धातु क्षीणता का संकेत भी हो सकता है।

कमर दर्द के प्रमुख कारण (आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से)
वात दोष का असंतुलन – ठंडी, सूखी हवा, अनियमित खान-पान, देर रात तक जागना, तनाव आदि वात को बढ़ाकर जोड़ों और स्नायु में सूजन व दर्द उत्पन्न करते हैं।

मज्जा और अस्थि धातु की कमजोरी – कैल्शियम, विटामिन D की कमी या अधिक श्रम से हड्डियां और स्नायु कमजोर हो जाते हैं।

*♦️मांसपेशियों में तनाव ♦️*

लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठना या खड़े रहना।

*♦️किडनी या पाचन से जुड़ी गड़बड़ियां♦️*

कभी-कभी कमर दर्द का कारण गुर्दे की समस्या या अग्निमांद्य (पाचन कमजोरी) भी होती है।

*♦️भारी वस्तु उठाना या चोट लगना ♦️*

स्नायु और लिगामेंट में खिंचाव।

आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णन
चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में कटिशूल और कटिग्रह का वर्णन मिलता है, जो आज के समय के कमर दर्द से मेल खाता है। आयुर्वेद में इसका प्रमुख कारण वातजन्य विकार बताया गया है और इसके लिए स्नेहन (तेल मालिश), स्वेदन (स्टीम), बस्ती (औषधीय एनिमा) और औषधि सेवन की सलाह दी जाती है।

*♦️घरेलू उपचार (Home Remedies)♦️*

*♦️मेथी दाना और हल्दी दूध♦️*

1 चम्मच मेथी दाना पाउडर और ½ चम्मच हल्दी को गुनगुने दूध में मिलाकर सोने से पहले पिएं।

यह हड्डियों को मजबूत और सूजन कम करता है।

*♦️गर्म तिल का तेल मालिश♦️*

तिल के तेल में लहसुन और अजवाइन डालकर गर्म करें, ठंडा होने पर कमर पर हल्के हाथ से मालिश करें।

वात दोष शांत और मांसपेशियों का तनाव कम होता है।

*♦️अजवाइन और नमक की पोटली सेक♦️*

अजवाइन और मोटा नमक हल्का भूनकर कपड़े में बांध लें और हल्के से सेक करें।

यह रक्तसंचार बढ़ाता और दर्द कम करता है।

*♦️गिलोय और अश्वगंधा चूर्ण♦️*

गिलोय और अश्वगंधा पाउडर (2-3 ग्राम) सुबह-शाम गुनगुने दूध या पानी से लें।

हड्डियों और स्नायु को ताकत देता है।

*♦️धनिया और सौंफ का काढ़ा♦️*

पाचन सुधारता है और गैस से होने वाला कमर दर्द कम करता है।

कमर दर्द में लाभकारी आहार
गर्म, ताजा और हल्का पचने वाला भोजन

हरी पत्तेदार सब्जियां, मूंग दाल, तिल, बादाम, अखरोट

हल्दी, अदरक, लहसुन, मेथी, गिलोय का प्रयोग

पर्याप्त पानी और धूप से विटामिन D की पूर्ति

*♦️बचाव के लिए क्या न करें♦️*

देर तक एक ही पोजीशन में बैठना

ठंडी सतह पर सोना

जंक फूड, ठंडे पेय, अत्यधिक मसालेदार भोजन

अधिक भार उठाना या झटके से मुड़ना

*♦️योग और जीवनशैली♦️*

भुजंगासन, मकरासन, शलभासन – कमर की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं।

सुबह 15 मिनट सूर्य नमस्कार

रोजाना 30–40 मिनट टहलना

मानसिक तनाव कम करने के लिए प्राणायाम और ध्यान

*♦️निष्कर्ष ♦️*

कमर दर्द केवल अस्थायी परेशानी नहीं, यह आपके शरीर में वात असंतुलन, धातु क्षीणता और जीवनशैली की गड़बड़ी का संकेत है। आयुर्वेदिक उपचार और घरेलू नुस्खों से न सिर्फ दर्द से राहत मिल सकती है, बल्कि हड्डियों और स्नायु को दीर्घकालिक मजबूती भी मिलती है।

*मुंह का अत्यधिक सूखना (Dry Mouth / लार कम बनना)*एक छोटा लक्षण, बड़ी चेतावनीअक्सर लोग मुंह सूखने को साधारण प्यास या मौसम...
03/01/2026

*मुंह का अत्यधिक सूखना (Dry Mouth / लार कम बनना)*

एक छोटा लक्षण, बड़ी चेतावनी

अक्सर लोग मुंह सूखने को साधारण प्यास या मौसम का असर मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेद इसे शरीर के भीतर चल रहे असंतुलन का स्पष्ट संकेत मानता है। लगातार मुंह सूखना, लार का कम बनना (Xerostomia) केवल असहजता नहीं, बल्कि पाचन, दांत, गला और पूरे स्वास्थ्य पर असर डालने वाली स्थिति हो सकती है।

*♦️मुंह सूखना क्या है?♦️*

जब मुंह में लार (Saliva) सामान्य मात्रा में नहीं बनती या जल्दी सूख जाती है, तो इस स्थिति को मुख शोष कहा जाता है। लार केवल मुंह को गीला रखने के लिए नहीं, बल्कि भोजन पचाने, दांतों की रक्षा और संक्रमण से बचाव के लिए अत्यंत आवश्यक होती है।

♦️♦️♦️♦️♦️♦️

*मुंह सूखने के मुख्य कारण (Why It Happens) आधुनिक कारण*

शरीर में पानी की कमी (Dehydration)

ज्यादा चाय, कॉफी, तंबाकू या शराब

तनाव, चिंता और नींद की कमी

कुछ दवाइयों का लंबे समय तक सेवन

सर्दियों में कम पानी पीने की आदत

*♦️आयुर्वेदिक कारण♦️*

वात दोष की वृद्धि – शुष्कता, रूखापन और कमजोरी

पित्त दोष का प्रकोप – अत्यधिक गर्मी, जलन

अग्नि का असंतुलन – पाचन कमजोर होना

ओज क्षय – रोग प्रतिरोधक शक्ति में कमी

आयुर्वेद में इसे मुख शोष या रस धातु की कमी से जोड़ा गया है।

*♦️आयुर्वेद में वर्णन♦️*

चरक संहिता के अनुसार, जब शरीर में रस धातु क्षीण हो जाती है, तब लार, त्वचा की नमी और ताजगी कम होने लगती है। यह आगे चलकर थकान, कब्ज, मुंह की दुर्गंध और बार-बार संक्रमण का कारण बन सकती है।

*♦️मुंह सूखने के लक्षण♦️*

बार-बार पानी पीने की इच्छा

बोलते समय गला सूखना

स्वाद में कमी

होंठ और जीभ का रूखापन

*मुंह से दुर्गंध*

आयुर्वेद की 7 सिद्ध और प्रमाणित उपचार विधियां

1️⃣ घृत पान (Desi Ghee Therapy)

सुबह खाली पेट ½ चम्मच देशी घी गुनगुने पानी के साथ लें।

➡️ लाभ: रस धातु को पोषण, मुंह की शुष्कता दूर।

2️⃣ मुलेठी चूर्ण

½ चम्मच मुलेठी पाउडर शहद के साथ चूसें।

*➡️ लाभ: लार स्राव बढ़ाता है, गले को ठंडक देता है।*

3️⃣ तिल तेल से ऑयल पुलिंग

सुबह 1 चम्मच तिल तेल मुंह में 5–7 मिनट घुमाएं।

➡️ लाभ: लार ग्रंथियां सक्रिय होती हैं।

4️⃣ आंवला रस

20–30 ml ताजा आंवला रस रोज़ लें।

➡️ लाभ: पित्त शमन, मुंह में नमी बढ़ाता है।

5️⃣ सौंफ–धनिया पानी

1 चम्मच सौंफ + 1 चम्मच धनिया रातभर भिगोकर सुबह पानी पिएं।

➡️ लाभ: शरीर की आंतरिक शुष्कता कम।

6️⃣ नस्य कर्म (हल्का)

गाय के घी की 2 बूंदें नाक में डालें (सुबह)।

➡️ लाभ: सिर और मुख क्षेत्र में नमी संतुलन।

7️⃣ शीतल आहार

दूध, नारियल पानी, मुनक्का, खीरा, लौकी शामिल करें।
➡️ लाभ: वात-पित्त संतुलन।

*♦️क्या न करें♦️*

अत्यधिक मसालेदार व तला भोजन

ज्यादा कैफीन

धूम्रपान

देर रात जागना

*♦️निष्कर्ष♦️*

मुंह सूखना केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पूरे शरीर के संतुलन से जुड़ा संकेत है। आयुर्वेद इसकी जड़ पर काम करता है—दोष शमन, धातु पोषण और अग्नि संतुलन। समय रहते सही आहार, दिनचर्या और औषधियों से इस समस्या को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

Wishing you and your family a Happy New Year 2026 filled with prosperity, good health, and continued success in all your...
01/01/2026

Wishing you and your family a Happy New Year 2026 filled with prosperity, good health, and continued success in all your endeavors.

🟢🟣🟢*नारियल  पानी के क्या फायदे हैं?*                                        नारियल पानी के अलग अलग तरह के काफी फायदे हैं...
13/12/2025

🟢🟣🟢
*नारियल पानी के क्या फायदे हैं?*

नारियल पानी के अलग अलग तरह के काफी फायदे हैं। यह न केवल आपके एनर्जी रेजुवेनशन (energy rejuvenation)के लिए बल्कि ग्लोइंग स्किन के लिए भी बहुत अच्छा है। नारियल पानी आपके इंटरनल फिजियोलॉजिकल फंक्शन्स के लिए समान रूप से आशाजनक लाभ देता है।

आइए उनके बारे में विस्तार से जानें

ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है
अक्सर जिम और व्यायाम के प्रति उत्साही लोग, कसरत से पहले या बाद के पेय के रूप में नारियल पानी शामिल करते हैं। होमोजिनस मिनरल्स

इलेक्ट्रोलाइट्स, और पोटेशियम लेवल्स स्वेटी वर्कआउट सेशन के लगभग तुरंत बाद एनर्जी लेवल्स को फिर से रिजुवेनेट और बूस्ट कर देते हैं।

स्टोर से खरीदे गए एनर्जी या स्पोर्ट्स ड्रिंक की तुलना में, नेचुरल नारियल पानी में शुगर कम होती है और यह शरीर को अच्छी तरह से हाइड्रेट करता है। इसके अलावा, नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स और पोटेशियम का लेवल मसल्स की रिकवरी में सहायता करता है, जिससे ओवरआल एनर्जी लेवल्स में वृद्धि होती है।

*वजन घटाने को बढ़ावा देता है(Promotes Weight Loss)*

वजन घटाना एक सब्जेक्टिव और नॉन -लीनियर सफर है। कुछ दिनों में, आप अपने अतिरिक्त वज़न को जल्दी से कम सकते हैं, जबकि अन्य तरीकों में काफी मेहनत लग सकती है। हालांकि, अन्य सुगरी ड्रिंक्स की तुलना में नारियल पानी वजन घटाने वाला एक हेल्थी ड्रिंक है।

बाजार से खरीदे जाने वाले हाइली प्रोसेस्ड ड्रिंक्स की तुलना में नारियल पानी में कम चीनी होती है। एक गिलास नारियल पानी में लगभग 44 कैलोरी होती है, जो कार्बोनेटेड एनर्जी ड्रिंक्स से काफी कम है।

लेकिन, क्या हम वजन घटाने के लिए खाली पेट नारियल पानी पी सकते हैं? यह काफी व्यक्तिपरक विकल्प है। हालांकि, हम आपके दिन की शुरुआत इसके साथ करने के बजाय मिड-डे हाइड्रेशन के लिए एक गिलास या एक कप नारियल पानी रखने की सलाह देंगे।

एंटीऑक्सीडेंट लाभ हो सकता है

आश्चर्यजनक रूप से, पर्याप्त नारियल पानी में शरीर में फ्री रेडिकल से होने वाले नुकसान को कम करने के फायदे हैं। प्री-क्लीनिकल ट्रायल्स ( preclinical trials) में पाया गया कि नारियल पानी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट आपके शरीर में फ्री रेडिकल के प्रभाव को कम करके आपके स्वास्थ में सुधार करते हैं।

इसके अलावा, नारियल पानी में लीवर-प्रोटेक्टिव प्रॉपर्टीज होती हैं। बिना किसी फॉर्मर ट्रीटमेंट के विशेष रूप से डैमेज्ड लीवर वाले रोगियों में नारियल पानी न केवल एंटीऑक्सिडेंट, बल्कि ब्लडस्ट्रीम में उच्च कोलेस्ट्रॉल मार्करों को कम करने में समान रूप से आशाजनक लाभ देता है।

4.डायबेटिक्स में ब्लड ग्लूकोस लेवल्स को मैनेज करना (Manage Blood Glucose Levels in Diabetics)

टाइप-2 डायबिटीज ग्लोबल कंसर्न बनता जा रहा है। जबकि लोग स्टोर से खरीदे गए शुगरी ड्रिंक्स या “शुगर -फ्री ” ऑप्शन्स के लिए पहुंचते हैं, उनमें से कोई भी उनकी स्थिति के लिए अच्छा नहीं होता है।

कुछ मात्रा में शुगर होने के बावजूद, प्राकृतिक नारियल पानी डायबेटिक्स में उच्च ब्लड ग्लूकोस लेवल्स को नियंत्रित करने में काफी लाभ देता है।

प्री-क्लीनिकल ट्रायल्स ब्लड ग्लूकोस लेवल्स को कम करने में नारियल पानी के आशाजनक प्रभावों का सुझाव देते हैं। हालांकि, परिणाम अभी साबित नहीं हुए हैं। लो शुगर लेवल्स के अलावा, नारियल पानी में मैग्नीशियम होता है, जो डायबेटिक्स में इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करता है।

हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है(Improves Heart Health)

यह कहना सही है कि नारियल पानी हार्ट सहित एक नहीं बल्कि कई इंटरनल ऑर्गन्स की रक्षा करता है। नारियल पानी के सेवन का सीधा संबंध ब्लडस्ट्रीम में कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट से है।

इसके अलावा, यह ब‌डे हुए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकता है और ब्लडस्ट्रीम में अतिरिक्त ट्राइग्लिसराइड के लेवल को कम कर सकता है। इन दोनों का हृदय स्वास्थ्य पर खराब प्रभाव पड़ता है।

रोजाना या कभी-कभी नारियल पानी पीने से ब्लडस्ट्रीम में उच्च घनत्व(high-density) वाले लिपोप्रोटीन के प्रोडक्शन पर सीधा प्रभाव पड़ता है, जिससे आगे चलकर, हार्ट की रक्षा होती है।

6.किडनी की पथरी को रोकें(Prevent Kidney Stones)

किडनी की पथरी कैल्शियम, ऑक्सालेट (calcium, oxalate) और अन्य तत्वों के अधिक जमा होने के कारण विकसित होती है जो किडनी में क्रिस्टल बनाने के लिए एक साथ जुड़ जाते हैं। दुनिया की 12% जनसंख्या को प्रभावित करने वाली यह एक बेहद दर्दनाक स्थिति है।

अध्ययनों से संकेत मिलता है कि न केवल पानी बल्कि नारियल पानी को नियमित पीने का सीधा संबंध रोगियों में किडनी की पथरी को मैनेज करने से है । सिर्फ इलाज के रूप में ही नहीं, नारियल पानी किडनी की पथरी को रोकने में भी अत्यधिक गुणकारी है।

नारियल पानी शरीर से पोटैशियम साइट्रेट (potassium citrate) और क्लोराइड (chloride) के अतिरिक्त तत्वों को बाहर निकाल देता है, जिससे किडनी स्टोन की घटना कम हो जाती है।

*पाचन को बढ़ावा देता है(Promotes Digestion)*

नारियल पानी में मैंगनीज (manganese) का लेवल पाचन क्रिया को बढ़ावा देता है और शरीर में बोवल मूवमेंट्स (bowel movements)को नियंत्रित करता है।

इसके अलावा, नारियल पानी में ऑप्टीमल हाइड्रेशन के साथ ट्रेस डाइटरी फाइबर होते हैं जो बिना पचे हुए खाने को पचाने में मदद करते हैं । यह एसिड रिफ्लक्स वाले रोगियों के लिए अच्छा है और सूजन और पेट की परेशानी के रिस्क को कम करता है।

*हाइड्रेशन का प्रबल स्रोत( Potent Source of Hydration)*

पानी के अलावा, नारियल पानी हाइड्रेशन का एक बहुत ही आशाजनक स्रोत है। यदि आप सादे पानी के बिग फैन नहीं हैं, तो नारियल पानी का थोड़ा मीठा और नट्टी(nutty) फ्लेवर एक रिफ्रेशिंग चेंज हो सकता है।

नारियल पानी में हाई लेवल के नुट्रिएंट्स भी होते हैं, जो आर्टिफीसियल फ्लेवरिंग एजेंट्स (जो आपको स्टोर से खरीदे गए जूस में मिलते हैं) की तुलना में बहुत अधिक हेल्थी होता है। पैकेज्ड या बोतलबंद नारियल पानी के बजाय नेचुरल नारियल पानी को शैल से बाहर निकालने का प्रयास करें।

*शरीर को डिटॉक्स कर सकता है(Might Detox the Body)*

नारियल पानी में ऑप्टीमल एंटीऑक्सीडेंट लेवल्स शरीर में किडनी और लिवर फंक्शन्स को नियंत्रित करता है, जिससे शरीर में टॉक्सिन्स को समाप्त किया जाता है।

विटामिन सी, अन्य एंटीऑक्सिडेंट और नारियल पानी के हाइड्रेटिंग फॉर्मूला का कॉम्बिनेशन नेचुरल बॉडी फंक्शन्स में सुधार करता है और स्किन की अपीयरेंस (appearance) में सुधार करता है।

नारियल पानी शरीर में कोलेजन सिंथेसिस में भी सुधार करता है, जिससे स्किन पर महीन रेखाओं और झुर्रियों(wrinkles) का दिखना कम होता है।

यूरिनरी ट्रैक्ट के इन्फेक्शन के रिस्क को कम करता है(Reduces risks of Urinary Tract Infection)
यूरिनरी ट्रैक्ट में संचित(Accumulated) यूरिन या टॉक्सिन्स बैक्टीरिया के विकास की ओर ले जाते हैं, जिससे संक्रमण का रिस्क बड जाता है। नारियल पानी एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक (diuretic) है, जो यूरिन उत्पादन को काफी हद तक बढ़ाता है।ऐसा करने से यूरिन और किडनी के ओवरआल फंक्शन्स बेहतर होते हैं, जिससे शरीर के अतिरिक्त टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

इसलिए, यदि आप कम यूरिन आउटपुट या हाइड्रेशन की कमी के कारण यूटीआई (UTI) को कॉन्ट्रैक्ट करते हैं, तो डेली डाइट में ताजा नारियल पानी शामिल करने से मदद मिल सकती है।

*तनाव को नियंत्रित करें(Regulate Stress)*

हालांकि काफी दूर-दूर तक का संबंध है, नारियल पानी लोगों में थकान और तनाव को कम करने में लाभकारी सिद्ध हुआ है।नारियल पानी में हाई नुट्रिएंट्स और रिफ्रेशिंग प्रॉपर्टीज होती हैं, जो शरीर को शांत करती हैं और व्यक्ति को आराम करने की अनुमति देते हैं। नारियल पानी में मौजूद शुगर्स और मिनरल्स एनर्जी लेवल्स को भी बढ़ा सकते हैं।

*स्वस्थ त्वचा में योगदान(Contributes to Healthier Skin)*

जैसा कि हमने पहले बताया, नारियल पानी कोलेजन प्रोडक्शन को बढ़ावा देता है। साथ ही, इसमें त्वचा की सुरक्षा करने वाले गुण होते हैं। हाइड्रेशन, एंटीऑक्सीडेंट गुणों के साथ, लंबे समय में स्किन की अपीयरेंस(skin’s appearance) में सुधार करता है।

यहां तक कि एक अध्ययन में भी मुँहासे को कम करने में नारियल पानी में प्रोमिसिंग बेनिफिट्स (promising benefits) पाए गए। नारियल पानी का सेवन शरीर में फ्री रेडिकल डैमेज को कम करता है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

*पाचन को बढ़ावा देता है(Promotes Digestion)*

नारियल पानी में मैंगनीज (manganese) का लेवल पाचन क्रिया को बढ़ावा देता है और शरीर में बोवल मूवमेंट्स (bowel movements)को नियंत्रित करता है।

इसके अलावा, नारियल पानी में ऑप्टीमल हाइड्रेशन के साथ ट्रेस डाइटरी फाइबर होते हैं जो बिना पचे हुए खाने को पचाने में मदद करते हैं । यह एसिड रिफ्लक्स वाले रोगियों के लिए अच्छा है और सूजन और पेट की परेशानी के रिस्क को कम करता है।

*हाइड्रेशन का प्रबल स्रोत( Potent Source of Hydration)*

पानी के अलावा, नारियल पानी हाइड्रेशन का एक बहुत ही आशाजनक स्रोत है। यदि आप सादे पानी के बिग फैन नहीं हैं, तो नारियल पानी का थोड़ा मीठा और नट्टी(nutty) फ्लेवर एक रिफ्रेशिंग चेंज हो सकता है।

नारियल पानी में हाई लेवल के नुट्रिएंट्स भी होते हैं, जो आर्टिफीसियल फ्लेवरिंग एजेंट्स (जो आपको स्टोर से खरीदे गए जूस में मिलते हैं) की तुलना में बहुत अधिक हेल्थी होता है। पैकेज्ड या बोतलबंद नारियल पानी के बजाय नेचुरल नारियल पानी को शैल से बाहर निकालने का प्रयास करें।

*शरीर को डिटॉक्स कर सकता है(Might Detox the Body)*

नारियल पानी में ऑप्टीमल एंटीऑक्सीडेंट लेवल्स शरीर में किडनी और लिवर फंक्शन्स को नियंत्रित करता है, जिससे शरीर में टॉक्सिन्स को समाप्त किया जाता है।

विटामिन सी, अन्य एंटीऑक्सिडेंट और नारियल पानी के हाइड्रेटिंग फॉर्मूला का कॉम्बिनेशन नेचुरल बॉडी फंक्शन्स में सुधार करता है और स्किन की अपीयरेंस (appearance) में सुधार करता है।

नारियल पानी शरीर में कोलेजन सिंथेसिस में भी सुधार करता है, जिससे स्किन पर महीन रेखाओं और झुर्रियों(wrinkles) का दिखना कम होता है।

यूरिनरी ट्रैक्ट के इन्फेक्शन के रिस्क को कम करता है(Reduces risks of Urinary Tract Infection)
यूरिनरी ट्रैक्ट में संचित(Accumulated) यूरिन या टॉक्सिन्स बैक्टीरिया के विकास की ओर ले जाते हैं, जिससे संक्रमण का रिस्क बड जाता है। नारियल पानी एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक (diuretic) है, जो यूरिन उत्पादन को काफी हद तक बढ़ाता है।ऐसा करने से यूरिन और किडनी के ओवरआल फंक्शन्स बेहतर होते हैं, जिससे शरीर के अतिरिक्त टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

इसलिए, यदि आप कम यूरिन आउटपुट या हाइड्रेशन की कमी के कारण यूटीआई (UTI) को कॉन्ट्रैक्ट करते हैं, तो डेली डाइट में ताजा नारियल पानी शामिल करने से मदद मिल सकती है।

*तनाव को नियंत्रित करें(Regulate Stress)*

हालांकि काफी दूर-दूर तक का संबंध है, नारियल पानी लोगों में थकान और तनाव को कम करने में लाभकारी सिद्ध हुआ है।नारियल पानी में हाई नुट्रिएंट्स और रिफ्रेशिंग प्रॉपर्टीज होती हैं, जो शरीर को शांत करती हैं और व्यक्ति को आराम करने की अनुमति देते हैं। नारियल पानी में मौजूद शुगर्स और मिनरल्स एनर्जी लेवल्स को भी बढ़ा सकते हैं।

*स्वस्थ त्वचा में योगदान(Contributes to Healthier Skin)*

जैसा कि हमने पहले बताया, नारियल पानी कोलेजन प्रोडक्शन को बढ़ावा देता है। साथ ही, इसमें त्वचा की सुरक्षा करने वाले गुण होते हैं। हाइड्रेशन, एंटीऑक्सीडेंट गुणों के साथ, लंबे समय में स्किन की अपीयरेंस(skin’s appearance) में सुधार करता है।

यहां तक कि एक अध्ययन में भी मुँहासे को कम करने में नारियल पानी में प्रोमिसिंग बेनिफिट्स (promising benefits) पाए गए। नारियल पानी का सेवन शरीर में फ्री रेडिकल डैमेज को कम करता है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

हीमोग्लोबिन आपकी लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद एक प्रकार का प्रोटीन है जो आपके द्वारा साँस ली जाने वाली ऑक्सीजन को आपके पू...
04/12/2025

हीमोग्लोबिन आपकी लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद एक प्रकार का प्रोटीन है जो आपके द्वारा साँस ली जाने वाली ऑक्सीजन को आपके पूरे शरीर की मांसपेशियों और ऊतकों तक पहुँचाता है। ऑक्सीजन के बिना, आपकी मांसपेशियों को सामान्य रूप से कार्य करने के लिए आवश्यक ऊर्जा नहीं मिल पाएगी।

हीमोग्लोबिन कार्बन डाइऑक्साइड को भी ग्रहण करता है और उसे आपके फेफड़ों में वापस भेजता है ताकि आप उसे बाहर निकाल सकें। यह आवश्यक प्रक्रिया कार्बन डाइऑक्साइड के विषाक्त स्तर को रोकने में मदद करती है।

हीमोग्लोबिन के स्तर में गिरावट के कई संभावित कारण हो सकते हैं। कुछ सबसे आम कारण ये हैं:

आहार: आयरन, फोलेट या विटामिन B12 की कमी वाला आहार आपके शरीर की हीमोग्लोबिन उत्पादन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
रक्त की हानि: अत्यधिक रक्तस्राव हीमोग्लोबिन के स्तर को कम कर सकता है, लेकिन पेट के अल्सर, गर्भाशय फाइब्रॉएड या भारी मासिक धर्म के कारण लंबे समय तक रक्त की हानि भी इसमें योगदान दे सकती है।
गर्भावस्था: गर्भावस्था के दौरान, आपके रक्त की मात्रा में काफी वृद्धि होती है, जिससे आपके हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो सकता है।

आनुवंशिक स्थितियाँ: G6PD की कमी, सिकल सेल एनीमिया, स्फेरोसाइटोसिस और थैलेसीमिया जैसी वंशानुगत स्वास्थ्य स्थितियाँ लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर सकती हैं।
कैंसर: ल्यूकेमिया और लिम्फोमा सहित कुछ प्रकार के कैंसर आपके लाल रक्त कोशिकाओं के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं।
क्रोनिक किडनी रोग: गुर्दे की कार्यक्षमता में कमी का मतलब हो सकता है कि आपका शरीर पर्याप्त एरिथ्रोपोइटिन नहीं बना पा रहा है, जो लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के लिए आवश्यक हार्मोन है।
दवा: एंटीरेट्रोवाइरल दवाएं और कीमोथेरेपी दवाएं आपकी अस्थि मज्जा को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन कम हो सकता है।

हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए, आयरन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे पत्तेदार सब्ज़ियाँ, रेड मीट और दालें खाएँ, और अवशोषण में सुधार के लिए इन्हें विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों जैसे संतरे और टमाटर के साथ मिलाएँ। आपको अंडे, डेयरी उत्पाद और बीन्स जैसे फोलेट और विटामिन बी12 के स्रोतों को भी शामिल करना चाहिए, और भोजन के साथ कॉफ़ी या चाय से बचना चाहिए, क्योंकि ये आयरन के अवशोषण में बाधा डाल सकते हैं। नियमित व्यायाम, हाइड्रेटेड रहना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार आयरन सप्लीमेंट लेना भी मददगार हो सकता है।
आहार में बदलाव
• आयरन युक्त खाद्य पदार्थ खाएँ:
हीम (पशु-आधारित) और गैर-हीम (पौधे-आधारित) दोनों आयरन स्रोतों को शामिल करें।
• हीम आयरन: रेड मीट, चिकन, मछली और अंडे।
• गैर-हीम आयरन: पालक, केल, दाल, छोले, बीन्स, टोफू और फोर्टिफाइड अनाज।
• विटामिन सी का सेवन बढ़ाएँ:
आयरन के अवशोषण को बढ़ाने के लिए आयरन युक्त भोजन के साथ विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
• उदाहरण: खट्टे फल, स्ट्रॉबेरी, कीवी, शिमला मिर्च, टमाटर और अमरूद।
• पर्याप्त मात्रा में फोलेट और विटामिन बी12 सुनिश्चित करें:
ये लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के लिए ज़रूरी हैं।
• स्रोत: पत्तेदार सब्ज़ियाँ, दालें, बीन्स, अंडे, डेयरी उत्पाद और फोर्टिफाइड अनाज।
• कच्चे लोहे के बर्तनों में पकाएँ:
पारंपरिक लोहे के बर्तनों का उपयोग करने से आपके भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ सकती है।
जीवनशैली में बदलाव
• आयरन अवरोधकों से बचें: भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफ़ी का सेवन न करें, क्योंकि ये आयरन के अवशोषण को बाधित कर सकते हैं। साथ ही, भोजन के समय उच्च कैल्शियम वाले खाद्य पदार्थों या सप्लीमेंट्स से बचें।
• हाइड्रेटेड रहें: रक्त की मात्रा और ऑक्सीजन के प्रवाह के लिए पर्याप्त पानी पीना ज़रूरी है।
• नियमित व्यायाम करें: पैदल चलना, योग और शक्ति प्रशिक्षण जैसी गतिविधियाँ लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ावा दे सकती हैं।
• पर्याप्त आराम करें: रक्त निर्माण और समग्र स्वास्थ्य के लिए उचित नींद ज़रूरी है।

एसिडिटी ACIDITYएसिडिटी (Acidity) होने पर शरीर के अंदर क्या-क्या होता है, इसे आसान भाषा में समझिए*एसिडिटी होने पर शरीर मे...
03/12/2025

एसिडिटी ACIDITY

एसिडिटी (Acidity) होने पर शरीर के अंदर क्या-क्या होता है, इसे आसान भाषा में समझिए

*एसिडिटी होने पर शरीर में क्या होता है?*

1 पेट में एसिड ज़्यादा बनता है

पेट में HCl (Hydrochloric Acid) बनता है जो पाचन में जरूरी है।
लेकिन जब यह ज़रूरत से ज्यादा बन जाए, तो एसिडिटी होती है।

2 पेट की दीवार (Mucosa) में जलन

अधिक एसिड पेट की भीतरी परत को चिढ़ाता है, जिससे
जलन
दर्द
भारीपन
(इन सबका कारण यही होता है)

3 एसिड ऊपर की ओर लौटता है (Acid Reflux)

जब एसिड भोजन नली (esophagus) में ऊपर जाता है तो

छाती में जलन (Heartburn)
खट्टा पानी मुंह में आना
गले में जलन
होती है।

4 LES (Lower Esophageal Sphincter) कमजोर पड़ जाता है

LES एक वाल्व है जो पेट का एसिड ऊपर जाने से रोकता है।
एसिडिटी में यह ढीला हो जाता है, जिससे एसिड ऊपर जाता रहता है।

5 गैस और पेट फूलना

अधिक एसिड से खाना सही से नहीं पचता, जिससे पेट में गैस बनने लगती है।
पेट फूलना
डकारें आना
इन सबका कारण यही है।

6 सूजन (Inflammation) हो सकती है

लगातार एसिडिटी रहने से
Gastritis
Esophagitis
Ulcer
जैसी समस्या भी हो सकती है।

*♦️एसिडिटी के आम लक्षण♦️*

सीने में जलन
खट्टा-डकार
गला जलना
पेट भारी रहना
खाना पचने में दिक्कत
भूख कम लगना
सुबह कड़वाहट महसूस होना

*♦️ एसिडिटी क्यों होती है?♦️*

देर रात खाना
बहुत मसालेदार भोजन
खाना खाने के तुरंत बाद लेट जाना
अधिक कॉफी/चाय
खाली पेट रहना
तनाव
अधिक तेल वाली चीजें
धूम्रपान/शराब

*♦️जल्दी राहत कैसे मिले?♦️*

1 गिलास ठंडा दूध

1 चम्मच सौंफ

1 गिलास नारियल पानी

2–3 तुलसी के पत्ते

गुनगुना पानी

हल्का खाना।

*♦️आयुर्वेदिक फॉर्मूला ♦️*

काली मिर्च = 2 ग्राम पावडर

एक गिलास गुनगुना पानी में एक नींबू निचोड़ लें

इस काली मिर्च के पावडर को इस पानी से सुबह खाली पेट निगल लीजिए।।

15 दिन तक उपाय करना है मात्र।।

*♦️तुरंत राहत के लिए ♦️*

*दो ग्राम सौंफ पाउडर*

*एक ग्राम जीरा पाउडर*

मिसरी आधा चम्मच अलग से मिक्स कर सकते है।। जरूरी नहीं ना भी मिलाए तो चलेगा।।

ताजे पानी से इस पावडर का आधा चम्मच ले खाने के बाद।।

बवासीर जैसी कई समस्या लोगों के लिए बड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन इसका आयुर्वेदिक इलाज बिना किसी सर्जरी या ऑपरेशन के भी ...
23/11/2025

बवासीर जैसी कई समस्या लोगों के लिए बड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन इसका आयुर्वेदिक इलाज बिना किसी सर्जरी या ऑपरेशन के भी किया जा सकता है।

आज ही नेचर ग्लोबल हेल्थकेयर मल्टीस्पेशलिटी पॉलीक्लिनिक का आयुर्वेदिक इलाज अपनाकर अपने जीवन को स्वस्थ बनाएं। यह इलाज 100% आयुर्वेदिक है और आपके रोग को जड़ से ख़त्म कर सकता है।

तो आज ही जानिए इस आयुर्वेदिक इलाज का लाभ और बवासीर की समस्या से बाहर।

परामर्श के लिए आज ही कॉल करें 91+ 7651867770
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*साइटिका पेन*सबसे आम समस्या जो लोगो में डॉक्टर्स को देखने को मिलती है वो है सियाटिकासाइटिका (sciatica) नाडी, जिसका उपरी ...
02/11/2025

*साइटिका पेन*

सबसे आम समस्या जो लोगो में डॉक्टर्स को देखने को मिलती है वो है सियाटिका

साइटिका (sciatica) नाडी, जिसका उपरी सिरा लगभग 1 इंच मोटा होता है, प्रत्येक नितंब के नीचे से शुरू होकर टाँग के पिछले भाग से गुजरती हुई पाँव की एडी पेर ख़त्म होती है| इस नाडी का नाम इंग्लीश में साइटिका नर्व है| इसी नाडी में जब सूजन ओर दर्द के कारण पीड़ा होती है तो इसे वात शूल अथवा साइटिका का दर्द कहते है...

इस रोग का आरंभ अचानक ओर तेज दर्द के साथ होता है| 30 से 40 साल की उम्र के लोगो में ये समस्या आम होती है |साइटिका का दर्द एक समय मे सिर्फ़ एक ही टाँग मे होता है| सर्दियों के दिनो में ये दर्द और भी बढ़ जाता है |रोगी को चलने मे कठिनाई होती है| रोगी जब सोता या बैठता है तो टाँग की पूरी नस खींच जाती है ओर बहुत तकलीफ़ होती है|

*♦️इसके कई कारण हो सकते है*

जैसे सर्दी लगने(कोल्ड स्ट्रोक), अधिक चलने से, मलावरोध (शोच न होना),स्त्रियॉं में गर्भ की अवस्था,या गर्भाशय का अर्बुद (Tumour),तथा मेरुदंड (spine) की विकृतियाँ, आदि से, किसी तंत्रिका या तंत्रिका मूलों (नर्व रूट) पर पड़ने वाले दबाव से उत्पन्न होता है। कभी-कभी यह नसों की सूजन (तंत्रिकाशोथ Neuritis) से भी होता है।

*♦️सियाटिका का इलाज..*

How to cure sciatica?

*♦️सामग्री..*

4 लहसुन की कलियाँ 200 ml दूध

*♦️तैयार करने की विधि ♦️*

लहसुन को काट कर दूध में डाल दें | दूध को कुछ मिनट तक उबालें | उबालने के बाद इसे मीठा करने के लिए थोडा शहद मिला लें | इस दूध का रोजाना सेवन करें जब तक दर्द खत्म न हो जाये.....

♦️♦️♦️♦️♦️

*साइटिका का दर्द गृध्रसी दर्द Sciatica*

साइटिका का दर्द, यह दर्द कूल्हे से एड़ी तक खींचता हुआ लगता है।

घी, मैदा लकड़ी, आमा हल्दी, मिश्री सब चीजें 10 ग्राम। ये पंसारी के मिलती है। इनको पीसकर दूध और पानी (दोनों चीजें ढाई सौ ग्राम) में उबालें। पानी जल जाने पर छानकर गरम-गरम पीए और कुछ ओढ़ कर लेट जाए। पसीना आने पर अंदर ही अंदर पोछतें रहे, हवा बिल्कुल ना लगने दे। यह उपाय दिन में तीन बार करें और खाए कुछ भी नहीं। 4 दिन में साइटिका में आराम आ जाएगा।

साइटिका का दर्द होने पर एरण्ड के बीज की 5 मिंगी, दूध में पीस कर पीने से लाभ होता है। यह उपाय कमर दर्द में भी उपयोगी है।

15 ग्राम और एक चम्मच नमक ले और दोनों को 1 किलो पानी में तेज उबाले। इसमें एक कपड़ा भिगोकर दर्द वाले स्थान पर सेक करें। इस प्रकार रोज दो बार करें। लगभग 15 दिन में साइटिका का दर्द ठीक हो जाएगा।

साइटिका के दर्द में एक चम्मच अदरक के रस में आधा चम्मच घी मिलाकर पीना चाहिए। यह उपाय वात और कमर व जाँघ के दर्द में भी लाभप्रद है।

*♦️त्रिकटु + त्रिफला मिश्रण ♦️*रोगों का सर्वनाशक अमृत योग आयुर्वेद में त्रिकटु (सौंठ, पिपली, मरीच) और त्रिफला (हरड़, बहे...
30/10/2025

*♦️त्रिकटु + त्रिफला मिश्रण ♦️*

रोगों का सर्वनाशक अमृत योग

आयुर्वेद में त्रिकटु (सौंठ, पिपली, मरीच) और त्रिफला (हरड़, बहेड़ा, आंवला) दोनों ही अत्यंत प्रसिद्ध औषधियाँ हैं।
जब इन्हें मिलाकर सेवन किया जाता है, तो यह शरीर के अंदर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है,

पाचन को मजबूत करता है, चर्बी गलाता है, और रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है।

इसी कारण इसे आयुर्वेद में “सर्वरोगनिवारक चूर्ण” कहा गया है।

*♦️संक्षिप्त परिचय♦️*

त्रिकटु = सौंठ + पिपली + काली मिर्च

त्रिफला = हरड़ + बहेड़ा + आंवला

दोनों का संयोजन शरीर के आम (toxins) को जलाता है और त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करता है।

*♦️ मुख्य लाभ ♦️*

1 पाचन और गैस की समस्या में अमृत समान

यह भोजन को जल्दी पचाता है, गैस, अपच, डकार और पेट दर्द को मिटाता है।

2 शरीर की चर्बी और मोटापा घटाता है

यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और अतिरिक्त चर्बी गलाने में मदद करता है।

3 रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है

आंवला और पिपली के संयोजन से शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।

4 रक्त शुद्ध करता है और त्वचा को निखारता है

त्रिफला का रक्तशोधक गुण त्वचा की चमक और दाग-धब्बे दूर करता है।

5 कब्ज और एसिडिटी में लाभकारी

हरड़ और सौंठ मिलकर पेट को साफ रखते हैं और पित्त दोष को संतुलित करते हैं।

6 सर्दी-खांसी और कफ रोगों में उपयोगी

त्रिकटु कफ को गलाकर सांस की नलियों को साफ करता है।

7 लीवर और आँतों की सफाई करता है

यह यकृत (liver) को सक्रिय रखता है और शरीर में जमा विषैले पदार्थ बाहर निकालता है।

*♦️ बनाने की विधि ♦️*

*♦️सामग्री (Ingredients)♦️*

1 सौंठ (सूखी अदरक) – 50 ग्राम

2 काली मिर्च – 50 ग्राम

3 पिपली – 50 ग्राम

4 हरड़ – 50 ग्राम

5 बहेड़ा – 50 ग्राम

6 आंवला – 50 ग्राम

*♦️विधि (Preparation)♦️*

1 सभी औषधियों को अलग-अलग धोकर सुखा लें।

2 बारीक पीसकर बारीक छलनी से छान लें।

3 अब त्रिकटु चूर्ण (पहले तीन घटक) और त्रिफला चूर्ण (अगले तीन घटक) बराबर मात्रा में मिलाएँ।

4 इसे एयरटाइट शीशी में भरकर छायादार स्थान पर रखें।

*♦️ सेवन विधि ♦️*

मात्रा

1 चम्मच (लगभग 3–5 ग्राम)

समय

सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले

*♦️सहायक द्रव्य♦️*

गर्म पानी (पाचन या मोटापा के लिए)

शहद (खांसी, बलगम या इम्यूनिटी के लिए)

*♦️सावधानियाँ♦️*

अत्यधिक मात्रा में सेवन से जलन या पित्त बढ़ सकता है।

गर्भवती महिलाएँ और बहुत अधिक कमजोर लोग वैद्य की सलाह से ही लें।

गर्मी के मौसम में ठंडे प्रभाव वाले आहार (दूध, घी, फल) साथ में लें।

*♦️निष्कर्ष ♦️*

त्रिकटु + त्रिफला मिश्रण एक ऐसा संयोजन है जो शरीर को भीतर से शुद्ध कर देता है।
यह न केवल रोगों को दूर करता है, बल्कि शरीर को हल्का, ऊर्जावान और रोगमुक्त बनाए रखता है।
नियमित सेवन से आप पाएँगे

“पाचन ठीक, त्वचा साफ, मन प्रसन्न और शरीर मजबूत।”

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Lucknow
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