Physiotherapy "the life changing Science"

Physiotherapy "the life changing Science" Study and research behind the science of Physiotherapy.

Cervical spondylitis एक ऐसी बीमारी जिससे युवा आजकल ज्यादा ग्रसित होते जा रहे हैं ,सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस में हमारे गर्दन...
05/04/2021

Cervical spondylitis एक ऐसी बीमारी जिससे युवा आजकल ज्यादा ग्रसित होते जा रहे हैं ,सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस में हमारे गर्दन के आसपास की हड्डियों में असामान्य बढ़ोतरी या vertebrae के बीच डिस्क पर तनाव या calcium degeneration ,Cervical spine में चोट लगने से होता है। लगातार लंबे समय तक कंप्यूटर तथा लैपटॉप या मोबाइल फोन पर देर तक गर्दन झुका कर काम करने से या अनियमित खानपान एवं जीवन शैली से होता है। Cervical spondylitis में गर्दन में दर्द अकड़न ,हाथ में झुनझुनाहट या जलन ,मिचली आना ,उल्टी, चक्कर आना ,मांसपेशियों में कमजोरी एवं शरीर के निचले अंगों में कमजोरी इत्यादि लक्षण आते हैं ,सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस का उपचार फिजियो थेरेपी से बहुत प्रभावी तरीके से किया जाता है।जिसमे intervertebral traction से सर्वाइकल स्पाइन के डिस्क पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जाता है एवम हीट थेरेपी या कोड थेरेपी ,IFT या TENS एवम cervical manipulation, exercise से बहुत प्रभावी तरीके से किया जाता है।
Dr. Amit kumar pandey
Physiotherapist
Agrawal multispecility
Hospital and trama centere

Arthritis जिसे हम जोड़ों में दर्द के नाम से जानते है।आज कल जोड़ों में दर्द की समस्या बहुत सामान्य हो गई है और यह हमारे द...
29/08/2020

Arthritis जिसे हम जोड़ों में दर्द के नाम से जानते है।आज कल जोड़ों में दर्द की समस्या बहुत सामान्य हो गई है और यह हमारे दैनिक जीवन से सामान्य गतिविधियों में बहुत समस्या पैदा करती है अर्थराइटिस में रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द अकड़न या सूजन आ जाती है ।इसमें जोड़ों में गाठे बन जाती है।जिसमें चुभने जैसी पीड़ा होती है इसलिए इसे गठिया भी कहते हैं अर्थराइटिस बहुत से प्रकार की होती है लेकिन तीन प्रकार की अर्थराइटिस लोगों में सामान्यतः देखी जाती है । ओस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटाइड अर्थराइटिस, प्सोरियातिक अर्थराइटिस। ओस्टियोआर्थराइटिस यह सामान्यतः बड़े जोड़ों अर्थात घुटने में सामान्यता होती है इसमें घुटने में दर्द, सूजन, घुटने में अकड़न ,घुटने मोड़ने में समस्या ,सीढ़ी चढ़ने में दर्द, एवं जोड़ों में विकृतियां होने लगती हैं इसमें मुख्यतः चार स्टेज होते हैं पहले स्टेज में घुटने में दर्द होता है 10% कार्टिलेज लॉस हो जाता है दूसरे स्टेज में स्पेस कम हो जाता है दर्द के साथ-साथ osteophytes बनने लगते हैं तीसरे स्टेज में जॉइंट में स्पेस बहुत कम हो जाता है और दर्द के साथ-साथ सूजन और अकड़न जाता है चौथी स्टेज में दर्द के साथ साथ जॉइंट में स्पेस लगभग समाप्त हो जाता है इसमें 60% कार्टिलेज का लॉस हो जाता है और ज्वाइंट में osteophytes के साथ साथ विकृतियां आ जाती है। ओस्टियोआर्थराइटिस का इलाज फिजियोथेरेपी से बहुत ही इफेक्टिव तरीके से किया जाता है जिसमें electrotherapy ,hot therapy ,exercise therapy,muscles streaching,core exercise, strengthing exercise,balance exercise,proprioception exercise,swiss ball exercise इत्यादि के माध्यम से जोड़ों के दर्द ,सूजन ,को कम करने मांसपेशियों को मजबूत करने एवं जोड़ों होने वाले विकृतियों का treatment किया जाता है जिससे रोगी अपने सामान्य दिनचर्या इत्यादि को आसानी से कर सकता है।
Dr. Amit kumar pandey
( Physiotherapist)
Agrawal multispecility hospital and trama
Care centere Siddharth nagar

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Lucknow

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