Dr. Sweety Srivastava -Clinical psychologist

Dr. Sweety Srivastava -Clinical psychologist Dr. Sweety Srivastava, RCI LC. Clinical Psychologist
SAKSHAM:The Coping Center
Psyche Solution
Psychological Services
(HEAL WITHOUT MEDICINE)
Lucknow

01/11/2025
इस दीपावली पर अपने भीतर की रोशनी को पहचानिए।डर से ज़्यादा उजाला, और चिंता से ज़्यादा सुकून आपके जीवन में हो।आपका मन प्रस...
20/10/2025

इस दीपावली पर अपने भीतर की रोशनी को पहचानिए।
डर से ज़्यादा उजाला, और चिंता से ज़्यादा सुकून आपके जीवन में हो।
आपका मन प्रसन्न और हृदय शांत रहे।
शुभ दीपावली!

16/10/2025

> “अपनी कमाई का 10% शौक पूरे करने में लगाओ…
सात पीढ़ियों का बंदोबस्त करने नहीं आए…
थोड़े दिन बाद दाँत और आँत जवाब दे देंगे…”

ये विचार भावनात्मक रूप से बहुत सच्चा और संतुलन सिखाने वाला है।
आइए इसे दो दृष्टिकोणों से समझते हैं — (१) व्यावहारिक और (२) दार्शनिक/आध्यात्मिक।

🌱 (१) व्यावहारिक दृष्टिकोण से:

✔️ सही बात:

जीवन सिर्फ “कमाने और बचाने” के लिए नहीं है।

अपने शौक, रुचियाँ, यात्राएँ, और छोटी खुशियाँ ज़रूरी हैं — ये मानसिक स्वास्थ्य और संतोष का हिस्सा हैं।

10% खर्च सीमा बुद्धिमान है — न ज़्यादा, न कम। यह “balance between enjoyment and responsibility” सिखाती है।

⚖️ ध्यान रखने योग्य:

अगर कोई व्यक्ति परिश्रम से कमाता है और ज़रूरतों, भविष्य और बुजुर्गावस्था की योजना पहले से बनाता है, तो ही “शौक पर खर्च” का महत्व रहता है।

आर्थिक अनुशासन (बचत, बीमा, निवेश) के बिना सिर्फ “मस्ती” करने से भविष्य में तनाव बढ़ सकता है।

🧩 इसलिए यह विचार कहता है — “Enjoy wisely, not recklessly.”

🕉️ (२) दार्शनिक / आध्यात्मिक दृष्टिकोण से:

यह विचार गीता के उस भाव से मिलता-जुलता है —
“कर्म करते रहो, फल की चिंता मत करो।”
यानी, जीना वर्तमान में सीखो।

जीवन का उद्देश्य सिर्फ संचित करना नहीं, बल्कि अनुभव करना भी है।

“पूत सपूत तो काहे धन संचय, पूत कपूत तो काहे धन संचय” — यह संत कबीर की सूक्ति है, जो सिखाती है कि धन संचित करने का अंतहीन चक्र व्यर्थ है अगर बुद्धि नहीं है।

💡 निष्कर्ष:

👉 100% सही है — अगर इसे “संयमित आनंद” के रूप में अपनाया जाए।

अपने और परिवार के भविष्य की ज़रूरतें पहले पूरा करें,

फिर अपनी कमाई का एक हिस्सा खुशी और अनुभवों पर खर्च करें।

क्योंकि जीवन का अर्थ सिर्फ जीविका नहीं — जीवन-रस है।

Dr. Sweety Srivastava

मंजिल तक पहुंचना आसान नहीं होता। रास्ते में बाधाएं, रुकावटें आती हैं। समस्याएं आपकी परीक्षा लेती हैं। उनसे डरना नहीं है।...
11/09/2025

मंजिल तक पहुंचना आसान नहीं होता। रास्ते में बाधाएं, रुकावटें आती हैं। समस्याएं आपकी परीक्षा लेती हैं। उनसे डरना नहीं है। समाधान निकालना है। तभी मंजिल तक पहुँच पाएंगे।

10/09/2025

जैसे उबलते पानी में कभी परछाई नहीं दिखती.. ठीक उसी प्रकार परेशान मन से समाधान भी नहीं दिखते.. शांत होकर देखिए सभी समस्याओं का हल मिल जायेगा..

🌸 “Face every challenge with a smile, just like Kanha turned every problem into a leela.”🪔 “Krishna says: Change your th...
16/08/2025

🌸 “Face every challenge with a smile, just like Kanha turned every problem into a leela.”
🪔 “Krishna says: Change your thoughts, and you change your destiny.”
✨ “कन्हैया की बांसुरी की तरह आपका जीवन भी मधुर संगीत से गूंजता रहे। 🎶 शुभ जन्माष्टमी 💫”

हर दिन एक नई शुरुआत है"हर सुबह हमें एक नया मौका देती है – बीते कल की गलतियों से सीखकर, आज को बेहतर बनाने का।"संदेश: गलती...
25/07/2025

हर दिन एक नई शुरुआत है

"हर सुबह हमें एक नया मौका देती है – बीते कल की गलतियों से सीखकर, आज को बेहतर बनाने का।"
संदेश: गलती होना सामान्य है, लेकिन हर दिन सुधार का मौका है।

"जो कुछ भी हो, जीवित रहो।मृत्यु से पहले मत मरना।खुद को खो मत देना, उम्मीद मत खोना, दिशा मत खोना। खुद से, अपने शरीर की हर...
09/07/2025

"जो कुछ भी हो, जीवित रहो।
मृत्यु से पहले मत मरना।
खुद को खो मत देना, उम्मीद मत खोना, दिशा मत खोना। खुद से, अपने शरीर की हर कोशिका से, अपनी त्वचा की हर तंतु से जीवित रहो।

जीवित रहो, सीखो, अध्ययन करो, सोचो, पढ़ो, बनाओ, आविष्कार करो, रचनात्मक बनो, बोलो, लिखो, सपने देखो, डिज़ाइन करो।
अपने भीतर जीवित रहो, बाहर भी जीवित रहो, दुनिया के रंगों से अपने आप को भरो, शांति से अपने आप को भरो, आशा से अपने आप को भरो।
खुशी से जीवित रहो।

जिंदगी में सिर्फ एक ही चीज़ है जिसे तुम्हें व्यर्थ नहीं करना चाहिए,
और वो है खुद ज़िंदगी..."
साभार 🙏

24/05/2025

🗨एक पति ने अपने गुस्सैल पत्नी से तंग आकर उसे कीलों से भरा एक थैला देते हुए कहा ,"तुम्हें जितनी बार क्रोध आए तुम थैले से एक कील निकाल कर बाड़े में ठोंक देना !"

🙂पत्नी को अगले दिन जैसे ही क्रोध आया उसने एक कील बाड़े की दीवार पर ठोंक दी। यह प्रक्रिया वह लगातार करती रही।

☺धीरे धीरे उसकी समझ में आने लगा कि कील ठोंकने की व्यर्थ मेहनत करने से अच्छा तो अपने क्रोध पर नियंत्रण करना है और क्रमशः कील ठोंकने की उसकी संख्या कम होती गई।

😊एक दिन ऐसा भी आया कि पत्नी ने दिन में एक भी कील नहीं ठोंकी।

🤷🏻‍♂उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई। वे बहुत प्रसन्न हुए और कहा, "जिस दिन तुम्हें लगे कि तुम एक बार भी क्रोधित नहीं हुई, ठोंकी हुई कीलों में से एक कील निकाल लेना।"

👱‍♀️पत्नी ऐसा ही करने लगी। एक दिन ऐसा भी आया कि बाड़े में एक भी कील नहीं बची। उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई।

पति उस पत्नी को बाड़े में लेकर गए और कीलों के छेद दिखाते हुए पूछा, "क्या तुम ये छेद भर सकती हो?"

😋पत्नी ने कहा,"नहीं जी"

🥲पति ने उसके कन्धे पर हाथ रखते हुए कहा,"अब समझी, क्रोध में तुम्हारे द्वारा कहे गए कठोर शब्द, दूसरे के दिल में ऐसे छेद कर देते हैं, जिनकी भरपाई भविष्य में तुम कभी नहीं कर सकते !"

👉सन्देश : जब भी आपको क्रोध आये तो सोचिएगा कि कहीं आप भी किसी के दिल में कील ठोंकने तो नहीं जा रहे 😀😀

बेशक होली रंगों और मस्ती का त्योहार है लेकिन इसका उतना ही जुड़ाव सेहत से भी है। होली परंपराओं पर विज्ञान कहता है कि यह त...
13/03/2025

बेशक होली रंगों और मस्ती का त्योहार है लेकिन इसका उतना ही जुड़ाव सेहत से भी है। होली परंपराओं पर विज्ञान कहता है कि यह त्योहार शरीर को स्वस्थ रखने के साथ वातावरण से मच्छर, बैक्टीरिया और कीटों को खत्म करने का काम करता है। होलिका दहन के दौरान परिक्रमा करने पर शरीर में मौजूद बैक्टीरिया का दम घुटने लगता है और अधिक तापमान के संपर्क में आने से ये खत्म होने लगती हैं। होली की परंपराओं और रंगों से सेहत का सीधा जुड़ाव है।होली के समय मौसम में बदलाव हो रहा होता है। धीरे-धीरे खत्म होती सर्दी और बढ़ती गर्मी के कारण वातावरण में बैक्टीरिया, कीट और मच्छरों की संख्या बढ़ती है। होलिका दहन के कारण अचानक वातावरण का तापमान तेजी से बढ़ने पर बैक्टीरिया और कीटों का दम घुटने लगता है। इनकी संख्या में तेजी से कमी आती है। होलिका दहन के दौरान परिक्रमा करने से बॉडी में मौजूद जीवाणु खत्म होने लगते हैं।होली में इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग रंग एक थैरेपी की तरह काम करते हैं। कई तरह के रंग शरीर और दिमाग को संतुलित रखते हैं। साथ ही यह आपके दिमाग को बूस्ट करते हैं। इसे देखने पर शरीर में हार्मोन और रसायन रिलीज होते हैं जो रोगों से राहत दिलाते हैं। वर्तमान में रोगों को खत्म करने वाली कलर थैरेपी भी इसी खूबी का ही हिस्सा हैl
Psychologically, participating in festivals like Holi triggers the release of endorphins—our body's natural feel-good chemicals. The sheer joy and excitement that come with playing with colours can elevate one's mood, making it a powerful tool for mental well-being. Moreover, Holi offers a break from routine.

एक दादी अपनी पोती को सलाह देते हुए बोलीं: "बिटिया, अपनी ज़िंदगी में कभी तीन चीज़ों को छोड़ना मत: सबसे खूबसूरत कपड़े पहनन...
11/03/2025

एक दादी अपनी पोती को सलाह देते हुए बोलीं: "बिटिया, अपनी ज़िंदगी में कभी तीन चीज़ों को छोड़ना मत: सबसे खूबसूरत कपड़े पहनना, सबसे अद्भुत जगहों पर यात्रा करना, और सबसे कीमती खजाने रखना।"

पोती हैरान होकर बोली, "पर दादी, हम अमीर नहीं हैं। मैं यह कैसे कर सकती हूँ?"

समझदार दादी मुस्कुराई और बोली, "अगर तुम अपने कपड़े आत्मविश्वास और दयालुता के साथ पहनोगी, तो साधारण कपड़े भी सबसे सुंदर लगेंगे। अगर तुम अपने आस-पास की दुनिया को जिज्ञासा और आश्यर्च के साथ देखोगी, तो हर जगह एक अद्भुत जगह बन जाएगी। और अगर तुम अपने प्यारे रिश्तों और यादों को संजोओगी, तो तुम सबसे कीमती खजाने के मालिक बन जाओगी।"

पोती की आँखों में समझ की चमक आ गई और उसने अपनी दादी को गले लगा लिया, इस अमूल्य पाठ के लिए आभारी होकर।

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B-98, Beside Lara Beauty Mantra, Behind Bhumigat Parking, Bhootnath Market, Indira Nagar
Lucknow
226016

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Tuesday 5pm - 8pm
Wednesday 5pm - 8pm
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