26/08/2025
सहज होना कठिन था पर सहज होना चुना हमने,
झुकाया सिर न तूफ़ाँ में अडिग होना चुना हमने,
कहाँ आसान है जग में स्वयं की शर्त पर जीना,
बने हिस्सा न भेड़ों का,अलग होना चुना हमने!!!
संघर्षों से गुज़रकर भी मुस्कुराना चुना हमने,
अँधेरों में दिये बनकर जगमगाना चुना हमने,
जहाँ सब समझौते कर चले दौलत की खातिर,
हमने सच्चाई के संग सफ़र निभाना चुना हमने!!
ठोकरों को राह का सिंगार होना चुना हमने,
हर ज़ख़्म को अपनी पहचान होना चुना हमने,
जहाँ भीड़ भटक जाती है झूठी चमक के पीछे,
सच की मशाल थाम कर चलना चुना हमने!!