14/10/2025
पीपीआर 2015: फार्मासिस्ट को हक़ दिलाने की ज़रूरत
भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में फार्मासिस्ट का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन फिर भी आज तक उन्हें वह संवैधानिक, व्यावसायिक और सामाजिक मान्यता नहीं मिल पाई है जिसके वे हक़दार हैं। इसी असंतुलन को सुधारने के लिए Pharmacy Practice Regulations (PPR) 2015 को बनाया गया था — लेकिन यह आज भी कई राज्यों में लागू नहीं हो पाया है।
॰ क्या है PPR 2015?
PPR 2015 भारतीय फार्मेसी परिषद (PCI) द्वारा जारी की गई एक रेगुलेशन है, जो देश में फार्मासिस्टों के पेशेवर कार्य, जिम्मेदारियाँ, कर्तव्य और अधिकारों को कानूनी दर्जा देती है। इसका उद्देश्य फार्मेसी को केवल “दवा बेचने” तक सीमित न रखकर, इसे क्लीनिकल हेल्थकेयर प्रोफेशन के रूप में स्थापित करना है।
॰ PPR 2015 लागू करना क्यों ज़रूरी है ?
1. फार्मासिस्ट को कानूनी पहचान और सम्मान
अभी तक फार्मासिस्ट को केवल "दवा वितरणकर्ता" समझा जाता है। PPR उन्हें एक क्लीनिकल एक्सपर्ट का दर्जा देता है।
2. मरीजों की सुरक्षा
फार्मासिस्ट दवा की खुराक, इंटरेक्शन, साइड इफेक्ट्स की जानकारी देकर मरीज को सुरक्षित इलाज में मदद करता है।
3. स्व-चिकित्सा और नकली दवाओं पर रोक
मरीज अक्सर बिना सलाह दवा लेते हैं। PPR के तहत फार्मासिस्ट की सलाह लेना आवश्यक होगा।
4. दवाओं के दुरुपयोग पर नियंत्रण
एंटीबायोटिक, नशे की दवाओं या स्टीरॉयड्स का दुरुपयोग रोकने में फार्मासिस्ट अहम भूमिका निभा सकता है — लेकिन अधिकार के बिना वह कुछ नहीं कर सकता।
5. स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाना:
डॉक्टर पर बोझ कम करना, रोगियों की बेहतर मॉनिटरिंग और ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवा पहुँचाना तभी संभव है जब फार्मासिस्ट को अधिकार मिले।
- वह जानता है कि किस मरीज को कौन सी दवा देनी है, और कब नहीं देनी चाहिए।
- फिर भी उसे केवल "सेल्समैन" समझा जाना अन्यायपूर्ण है।
॰ बिना PPR लागू किए नुकसान
- अयोग्य लोग फार्मेसी चला रहे हैं
- फार्मासिस्टों का शोषण हो रहा है
- जनता को दवा संबंधी सही परामर्श नहीं मिल रहा
- नकली/गलत दवाओं की बिक्री पर रोक नहीं लग पा रही
॰ PPR 2015 लागू करने से क्या होगा
- फार्मासिस्ट को दवा परामर्श, स्वास्थ्य शिक्षा, फार्माकोविजिलेंस, काउंसलिंग जैसे कार्यों का अधिकार मिलेगा
- दवाओं के दुरुपयोग पर नियंत्रण
- मरी