Pharma Clinic

Pharma Clinic Pharmacy practice is the discipline of pharmacy which involves developing the professional roles of pharmacists

फार्म क्लिनिक से हम मरीजो का इलाज कर सकेगे जिससे मरीजो को झोला छाप डॉक्टर्स और हकीम वैध से अंग्रेजी दवा नही लेना पड़ेगा और मरीजो को सही सलाह और इलाज मिल पायेगा

26/11/2025

लगेगी आग तो आएंगे कई घर
इस लिस्ट में सिर्फ मेरा मकान थोड़ी है

फार्मासिस्ट को झोलाछाप बोलने वाले खुद झोलाछाप

RIP 😔
24/11/2025

RIP 😔

मजाक तक
18/11/2025

मजाक तक

17/11/2025
ये फार्मासिस्ट को झोलाछाप बोलता है और खुद को बड़ा डॉक्टर समझता है खुद तो नेचरोपैथी डिग्री करके एलोपैथी प्रैक्टिस सर्जरी ...
10/11/2025

ये फार्मासिस्ट को झोलाछाप बोलता है और खुद को बड़ा डॉक्टर समझता है खुद तो नेचरोपैथी डिग्री करके एलोपैथी प्रैक्टिस सर्जरी जैसे काम करता है

आजकल कुछ लोग योग और नेचुरोपैथी का छोटा सा कोर्स करके खुद को डॉक्टर बताने लगे हैं और राजधानी लखनऊ में हॉस्पिटल तक खोल रहे हैं।
क्या सिर्फ नेचरोपैथी कोर्स से किसी की जान की जिम्मेदारी ली जा सकती है?
यह लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ है, जिस पर प्रशासन को सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।

⚠️ स्वास्थ्य सेवा मज़ाक नहीं, जिम्मेदारी है!

These people are directly manufacturing medicines inside the pharmacy or selling sugar water, or medicines without APIs....
04/11/2025

These people are directly manufacturing medicines inside the pharmacy or selling sugar water, or medicines without APIs. They offer high discounts on medicines, which sometimes raises questions about the quality. In India, this has become very normal. That’s why a large number of fake medicines are being identified.

21/10/2025
😢
15/10/2025

😢

पीपीआर 2015: फार्मासिस्ट को हक़ दिलाने की ज़रूरतभारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में फार्मासिस्ट का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण ह...
14/10/2025

पीपीआर 2015: फार्मासिस्ट को हक़ दिलाने की ज़रूरत

भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में फार्मासिस्ट का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन फिर भी आज तक उन्हें वह संवैधानिक, व्यावसायिक और सामाजिक मान्यता नहीं मिल पाई है जिसके वे हक़दार हैं। इसी असंतुलन को सुधारने के लिए Pharmacy Practice Regulations (PPR) 2015 को बनाया गया था — लेकिन यह आज भी कई राज्यों में लागू नहीं हो पाया है।

॰ क्या है PPR 2015?

PPR 2015 भारतीय फार्मेसी परिषद (PCI) द्वारा जारी की गई एक रेगुलेशन है, जो देश में फार्मासिस्टों के पेशेवर कार्य, जिम्मेदारियाँ, कर्तव्य और अधिकारों को कानूनी दर्जा देती है। इसका उद्देश्य फार्मेसी को केवल “दवा बेचने” तक सीमित न रखकर, इसे क्लीनिकल हेल्थकेयर प्रोफेशन के रूप में स्थापित करना है।

॰ PPR 2015 लागू करना क्यों ज़रूरी है ?

1. फार्मासिस्ट को कानूनी पहचान और सम्मान
अभी तक फार्मासिस्ट को केवल "दवा वितरणकर्ता" समझा जाता है। PPR उन्हें एक क्लीनिकल एक्सपर्ट का दर्जा देता है।

2. मरीजों की सुरक्षा
फार्मासिस्ट दवा की खुराक, इंटरेक्शन, साइड इफेक्ट्स की जानकारी देकर मरीज को सुरक्षित इलाज में मदद करता है।

3. स्व-चिकित्सा और नकली दवाओं पर रोक
मरीज अक्सर बिना सलाह दवा लेते हैं। PPR के तहत फार्मासिस्ट की सलाह लेना आवश्यक होगा।

4. दवाओं के दुरुपयोग पर नियंत्रण
एंटीबायोटिक, नशे की दवाओं या स्टीरॉयड्स का दुरुपयोग रोकने में फार्मासिस्ट अहम भूमिका निभा सकता है — लेकिन अधिकार के बिना वह कुछ नहीं कर सकता।

5. स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाना:
डॉक्टर पर बोझ कम करना, रोगियों की बेहतर मॉनिटरिंग और ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवा पहुँचाना तभी संभव है जब फार्मासिस्ट को अधिकार मिले।
- वह जानता है कि किस मरीज को कौन सी दवा देनी है, और कब नहीं देनी चाहिए।
- फिर भी उसे केवल "सेल्समैन" समझा जाना अन्यायपूर्ण है।

॰ बिना PPR लागू किए नुकसान

- अयोग्य लोग फार्मेसी चला रहे हैं
- फार्मासिस्टों का शोषण हो रहा है
- जनता को दवा संबंधी सही परामर्श नहीं मिल रहा
- नकली/गलत दवाओं की बिक्री पर रोक नहीं लग पा रही

॰ PPR 2015 लागू करने से क्या होगा

- फार्मासिस्ट को दवा परामर्श, स्वास्थ्य शिक्षा, फार्माकोविजिलेंस, काउंसलिंग जैसे कार्यों का अधिकार मिलेगा
- दवाओं के दुरुपयोग पर नियंत्रण
- मरी

मध्य प्रदेश के मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट का रहना अनिवार्य किया गया है। बिना फार्मासिस्ट मेडिकल स्टोर चलाया तो 3 महीने ...
10/10/2025

मध्य प्रदेश के मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट का रहना अनिवार्य किया गया है। बिना फार्मासिस्ट मेडिकल स्टोर चलाया तो 3 महीने की सजा हो सकती है। इसे लेकर फार्मेसी काउंसिल ने नोटिस जारी किया है। बिना फार्मासिस्ट के दवा बिक्री पर रोक लगाई है। मेडिकल स्टोर को निर्देश बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा ना देने की अपील की है। गैर-पंजीकृत व्यक्ति को दवा का वितरण, बिक्री की अनुमति नहीं होगी। कमी मिली तो लाइसेंस तक निरस्त हो सकता है।
फार्मेसी काउंसिल ने लिखा- मध्यप्रदेश राज्य के समस्त चिकित्सालयों/फार्मेसी/मेडिकल स्टोर के संचालक/ फार्मासिस्ट को सूचित किया जाता है कि फार्मेसी अधिनियम 1948 की धारा 42 में विहित प्रावधान अनुसार मेडिकल प्रेक्टिशनर के प्रेस्किप्शन पर केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट द्वारा ही दवाइयां डिस्पेंस की जानी है। किसी गैर पंजीकृत व्यक्ति के द्वारा दवाइयों का डिस्पेंस/वितरण/विक्रय होना पाए जाने पर संबंधितों पर फार्मेसी एक्ट 1948 के तहत कानूनी कार्यवाही की जावेगी।
आगे कहा कि, फार्मेसी काउन्सिल ऑफ इंडिया नई दिल्ली के पत्र क्रमांक-19-1 / 2023-PCI / 3854-56 दिनांक 25.10.2023 कानून व न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) भारत शासन असाधारण राजपत्र स. 21 भाग ॥ खंड 1 दिनांक 11 अगस्त 2023 में प्रकाशित Jan vishwas (Amendment of Provisions) Act 2023 के कम संख्या पृष्ठ संख्या 13 संशोधन क्रमांक (D) अनुसार फार्मेसी एक्ट 1948 की धारा 42 के दंड प्रावधान में संशोधन करके गैर पंजीकृत फार्मासिस्ट के द्वारा दवा डिस्पेंसिंग करते पाए जाने पर 3 माह तक की सजा अथवा दो लाख रूपये का जुर्माना अथवा दोनों एक साथ होने का प्रावधान है। अत्यंत विषम परिस्थितियों में फार्मेसी एक्ट 1948 के प्रावधानों के तहत कौंसिल द्वारा संबंधित फार्मासिस्ट का रजिस्ट्रेशन को निरस्त भी किया जा सकता है।

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Lucknow
226018

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