04/02/2026
आतंकवाद के खिलाफ 'कड़वा' लेकिन 'सच्चा' प्रहार! 🔥
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह विचार आज चर्चा का विषय बना हुआ है। अक्सर जब भी कोई आतंकी हमला होता है, तो बुद्धिजीवियों का एक वर्ग तुरंत सक्रिय हो जाता है और यह राग अलापने लगता है कि "आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता।" लेकिन क्या वाकई स्थिति इतनी सीधी है?
इस वायरल इमेज में दिया गया तर्क सीधा और धारदार है। इसमें कहा गया है कि जब किसी आतंकी को ढेर किया जाए, तो उसे दफनाने के बजाय जला देना चाहिए। दावे के मुताबिक, जैसे ही यह कदम उठाया जाएगा, वही लोग जो कल तक "आतंक का कोई धर्म नहीं" कह रहे थे, वे अचानक धर्म की दुहाई देने के लिए सड़कों पर उतर आएंगे।
कैप्शन के मुख्य बिंदु:
दोहरा मापदंड: क्या आतंकवाद को लेकर हमारी संवेदनाएं चयनात्मक (selective) हैं?
सख्त संदेश: अगर आतंक का कोई मजहब नहीं, तो उसके अंतिम संस्कार पर हंगामा क्यों?
राष्ट्रहित सर्वोपरि: देश की सुरक्षा से समझौता करने वालों के लिए कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए।
यह पोस्ट केवल एक विचार नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए एक आईना है जो तुष्टिकरण की राजनीति में उलझकर सच्चाई से आंखें मूंद लेते हैं। अब समय आ गया है कि हम आतंकवाद को उसी की भाषा में जवाब दें और इन दोहरे मापदंडों को बेनकाब करें।
आपकी इस पर क्या राय है? क्या आप इस विचार से सहमत हैं? नीचे कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें और इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें! 🇮🇳