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कब्ज की जड़ सिर्फ पेट में नहीं, आपकी दिनचर्या में हैअच्छा खाना खाते हैं, फिर भी कब्ज क्यों?हर सुबह पेट नहीं, मन भी अटका ...
05/02/2026

कब्ज की जड़ सिर्फ पेट में नहीं, आपकी दिनचर्या में है
अच्छा खाना खाते हैं, फिर भी कब्ज क्यों?
हर सुबह पेट नहीं, मन भी अटका हुआ लगता है?
कब्ज एक गलती से नहीं, रोज़ की आदतों से बनती है
पेट की दवा छोड़ते ही कब्ज क्यों लौट आती है?

कब्ज के जड़ कारण जिन्हें लोग समझ नहीं पाते
#कब्ज

कब्ज और शरीर की लय का संबंध
शरीर एक समयबद्ध मशीन की तरह काम करता है।
जब यह लय बिगड़ती है,
तो सबसे पहले असर पाचन पर पड़ता है।
कब्ज इसी असंतुलन का परिणाम है।

पेट को आराम कब मिलता है
लगातार खाते रहना,
या देर रात खाना
पेट को आराम नहीं देता।
बिना आराम के
पाचन कमजोर होता चला जाता है।

क्यों सुबह का समय सबसे अहम है
सुबह का समय
आंतों के सक्रिय होने का होता है।
अगर इस समय
जल्दी, तनाव या आलस हावी हो,
तो यह natural प्रक्रिया दब जाती है।

कब्ज और आधुनिक जीवनशैली
कम चलना,
ज्यादा बैठना,
और लगातार स्क्रीन देखना
आंतों की गति को धीमा करता है।
यह कारण अक्सर नजरअंदाज हो जाता है।

कब्ज को नजरअंदाज करने का खतरा
जब शरीर के छोटे संकेत
बार-बार अनदेखे किए जाते हैं,
तो वही संकेत
धीरे-धीरे बीमारी का रूप ले लेते हैं।

समस्या लौटने की असली वजह
जब हम कारण नहीं बदलते,
तो इलाज टिकता नहीं।
इसीलिए कब्ज
बार-बार वापस आती है।

❓ FAQs

Q1. क्या सही समय पर खाना सच में इतना ज़रूरी है?
हाँ, समय पाचन की ताकत तय करता है।

Q2. देर रात सोना कब्ज बढ़ा सकता है?
हाँ, इससे पाचन की प्राकृतिक लय बिगड़ती है।

Q3. क्या कम चलना भी कारण बन सकता है?
बिल्कुल, movement की कमी से आंतें सुस्त हो जाती हैं।

Q4. दवा से राहत क्यों टिकती नहीं?
क्योंकि दवा कारण नहीं, सिर्फ लक्षण दबाती है।

Q5. क्या तनाव सच में पेट को प्रभावित करता है?
हाँ, पेट और नर्व सिस्टम सीधे जुड़े होते हैं।

#कब्जसमस्या
#पाचन









क्या आपका ब्रेकफास्ट ही वजन बढ़ा रहा है?सुबह की एक गलती, दिनभर वजन बढ़ाती हैमहंगे diet नहीं, सही देसी नाश्ता चाहिडाइट शु...
05/02/2026

क्या आपका ब्रेकफास्ट ही वजन बढ़ा रहा है?
सुबह की एक गलती, दिनभर वजन बढ़ाती है
महंगे diet नहीं, सही देसी नाश्ता चाहि
डाइट शुरू की है? पहले ब्रेकफास्ट समझिए
वजन घटाने के लिए सबसे सही देसी ब्रेकफास्ट कौन सा है


🔹 Description

🔸 क्यों ब्रेकफास्ट सबसे ज़रूरी है

रात भर शरीर fasting में रहता है
सुबह का खाना
metabolism को direction देता है

🔸 ब्रेकफास्ट skip करने की गलती

नाश्ता छोड़ने से
दोपहर में ज़्यादा खाने की tendency बढ़ती है

🔸 वजन बढ़ने का hidden reason

सुबह मीठा
या सिर्फ चाय-बिस्किट
fat storage को बढ़ावा देता है

🔸 देसी ब्रेकफास्ट का फायदा

देसी खाना
शरीर को पहचान में आता है
इसलिए digestion बेहतर होता है

🔸 Protein का रोल

protein muscle loss रोकता है
और fat burning support करता है

🔸 Fiber क्यों ज़रूरी

fiber gut साफ रखता है
और craving control करता है

🔸 समय का असर

सुबह 7–9 बजे
हल्का लेकिन संतुलित नाश्ता
वजन घटाने में मदद करता है

🔸 consistency का महत्व

एक दिन सही खाने से कुछ नहीं होता
रोज़ सही खाना
धीरे-धीरे असर दिखाता है

यही sustainable weight loss का रास्ता है
🔹 FAQs

Q1. क्या ब्रेकफास्ट छोड़ने से वजन घटता है?
नहीं, इससे metabolism slow होता है और वजन बढ़ सकता है।

Q2. वजन घटाने के लिए सबसे ज़रूरी क्या है?
सुबह protein और fiber का सही balance।

Q3. क्या फल अकेले खाना सही है?
नहीं, फल के साथ protein ज़रूरी है।

Q4. देसी ब्रेकफास्ट बेहतर क्यों है?
क्योंकि वह Indian digestion के अनुसार होता है।

Q5. कितने दिन में असर दिखता है?
2–3 हफ्तों में भूख और energy में फर्क दिखता है।







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रोज़ 10 मिनट का सूर्य नमस्कार, शरीर में क्या बदलता है जानिएक्या सिर्फ सूर्य नमस्कार से पूरा शरीर फिट रह सकता है?जब शरीर ...
05/02/2026

रोज़ 10 मिनट का सूर्य नमस्कार, शरीर में क्या बदलता है जानिए
क्या सिर्फ सूर्य नमस्कार से पूरा शरीर फिट रह सकता है?
जब शरीर थक जाए और मन टूटने लगे, तब सूर्य नमस्कार क्यों सहारा बनता है?
दवा नहीं, डाइट नहीं, सिर्फ सूर्य नमस्कार का असर
उम्र बढ़ रही है, लेकिन शरीर साथ दे सकता है
सूर्य नमस्कार के फायदे और सही तरीका

सूर्य नमस्कार और सुबह की दिनचर्या
सूर्य नमस्कार दिन की rhythm सेट करता है।
सुबह का शरीर जकड़ा हुआ होता है।
यह अभ्यास उसे धीरे धीरे खोलता है।

Mental clarity का असर
नियमित सूर्य नमस्कार करने वाले लोग
decision लेने में ज्यादा clear होते हैं।
सोच में भारीपन कम होता है।

Digestive rhythm सुधरती है
यह सिर्फ पेट साफ करने का अभ्यास नहीं।
यह पाचन का समय ठीक करता है।
भूख और हल्कापन natural हो जाता है।

काम करने की क्षमता
दिन भर की energy एकसार रहती है।
दोपहर की सुस्ती कम होती है।
काम में focus बढ़ता है।

Lifestyle disorder में भूमिका
आज की बीमारियां lifestyle से जुड़ी हैं।
सूर्य नमस्कार body को movement देता है।
Static life के नुकसान कम करता है।

श्वास और शरीर का तालमेल
हर posture के साथ सांस जुड़ी है।
यह lungs और nerves को train करता है।

Ageing पर असर
जो लोग नियमित करते हैं
उनकी flexibility देर तक बनी रहती है।
Joint stiffness धीरे आती है।

Self-discipline की शुरुआत
रोज़ mat बिछाना
अपने आप से commitment है।
यहीं से self-care शुरू होती है।

Consistency का महत्व
कम राउंड लेकिन रोज़ बेहतर है।
अचानक ज्यादा करने से लाभ नहीं।

किसके लिए खास फायदेमंद
Office workers
Students
Middle age group
और sedentary lifestyle वाले लोग।

#सूर्यनमस्कार
#योग
#योगसेस्वास्थ्य








कब्ज की शुरुआत यहीं से होती है, लेकिन हम समझते नहींरोज टॉयलेट जाते हैं, फिर भी कब्ज क्यों?पेट ठीक नहीं, तो मन भी भारी क्...
04/02/2026

कब्ज की शुरुआत यहीं से होती है, लेकिन हम समझते नहीं
रोज टॉयलेट जाते हैं, फिर भी कब्ज क्यों?
पेट ठीक नहीं, तो मन भी भारी क्यों रहता है?
कब्ज सिर्फ पेट की नहीं, आदतों की बीमारी है
पेट साफ कराने की आदत, कब्ज को क्यों बढ़ाती है?
कब्ज को हल्के में लेने की भूल और उसके असर
#कब्जसमस्या

कब्ज एक आदत कैसे बनती है
कब्ज अक्सर अचानक नहीं होती।
यह रोज़मर्रा की छोटी गलतियों से बनती है।
समय पर न खाना,
जल्दी-जल्दी खाना,
और शरीर की सुनने की आदत न होना
कब्ज को मजबूत करता है।

पेट और दिमाग का सीधा रिश्ता
पेट सिर्फ पाचन का अंग नहीं है।
यह नर्व सिस्टम से जुड़ा हुआ है।
जब मन में तनाव होता है,
तो आंतें भी सिकुड़ने लगती हैं।
यही वजह है कि
कई लोगों की कब्ज
तनाव में बढ़ जाती है।

क्यों पाउडर से समस्या बढ़ती है
पेट साफ करने वाले पाउडर
शरीर को बाहर से काम करने के लिए मजबूर करते हैं।
धीरे-धीरे
आंतें खुद काम करना भूल जाती हैं।
यहीं से निर्भरता शुरू होती है।

शुरुआती संकेतों को पहचानना क्यों ज़रूरी है
अगर समय रहते
भारीपन, असंतोष, गैस
जैसे संकेत समझ लिए जाएँ,
तो आगे की बड़ी समस्याएँ रोकी जा सकती हैं।

कब्ज को बीमारी बनने से कैसे रोका जाए
कब्ज को दबाने के बजाय
समझना ज़रूरी है।
जब तक कारण नहीं सुधरते,
तब तक स्थायी आराम संभव नहीं होता।

आज का सहायक उपाय
🌿 कब्ज की शुरुआती अवस्था में एक safe आदत
सुबह उठते ही
एक गिलास गुनगुना पानी
धीरे-धीरे बैठकर पिएँ।
इसके बाद
कम से कम 10–15 मिनट शरीर को समय दें।
तुरंत टॉयलेट जाने की ज़िद न करें।
यह आदत
आंतों को signal देना सिखाती है
कि अब दिन की शुरुआत हो रही है।
👉 यह कोई दवा नहीं है,
लेकिन लंबे समय में
कब्ज को जड़ पकड़ने से रोकने की
सबसे सरल शुरुआत है।

❓ FAQs

Q1. क्या रोज टॉयलेट जाना मतलब कब्ज नहीं है?
नहीं, अगर पेट पूरी तरह साफ न लगे तो कब्ज मानी जाती है।

Q2. कब्ज में तुरंत दवा लेना सही है?
बार-बार दवा लेने से समस्या दबती है, खत्म नहीं होती।

Q3. कब्ज तनाव से बढ़ सकती है?
हाँ, मन और आंतों का सीधा संबंध होता है।

Q4. क्या कब्ज अपने आप ठीक हो सकती है?
शुरुआती अवस्था में सही आदतों से सुधार संभव है।

Q5. कब डॉक्टर या वैद्य को दिखाना चाहिए?
जब समस्या पुरानी हो जाए या दवा पर निर्भरता बन जाए।

#कब्ज
#पेटकीसमस्या



#पाचन





अचानक घबराहट क्यों होती है? वजह डर नहीं, शरीर का signal हैदिल तेज़ धड़कता है, सांस अटकती है… क्या ये Panic Disorder है?स...
04/02/2026

अचानक घबराहट क्यों होती है? वजह डर नहीं, शरीर का signal है
दिल तेज़ धड़कता है, सांस अटकती है… क्या ये Panic Disorder है?
सब ठीक होते हुए भी क्यों लगता है कुछ बहुत गलत होने वाला है?
Panic Attack कमजोरी नहीं, शरीर की भाषा है
घबराहट का डर छोड़िए, समझ बढ़ाइए
Panic Disorder की असली वजह क्या है?
#घबराहट

🔹 Panic और Fear में फर्क

हर डर panic नहीं होता।
Fear किसी कारण से जुड़ा होता है।
Panic बिना कारण अचानक आता है।

🔹 Body क्यों react करती है

Brain का safety system overreact कर जाता है।
यह fight or flight mode activate कर देता है।
भले ही असली खतरा न हो।

🔹 Control खोने का भ्रम

Panic में सबसे बड़ा डर control खोने का होता है।
असल में control जाता नहीं।
सिर्फ sensation तेज़ हो जाती है।

🔹 बार-बार क्यों आता है

पहला attack डर छोड़ जाता है।
अगला attack उसी डर की memory से आता है।
यहीं cycle बनती है।

🔹 दबा हुआ stress

लंबे समय का emotional दबाव
शरीर में बिना बोले जमा होता रहता है।
एक दिन panic के रूप में बाहर आता है।

🔹 नींद का गहरा connection

कम नींद nervous system को कमजोर करती है।
Panic का risk कई गुना बढ़ जाता है।

🔹 Overthinking का रोल

हर sensation को खतरा मान लेना
panic को बार-बार invite करता है।

🔹 Avoidance problem

अटैक के डर से जगहों से बचना
समस्या को और मजबूत करता है।

🔹 Healing कैसे होती है

समझ बढ़ने से डर घटता है।
Routine, breathing और सही guidance से
brain दुबारा safe feel करना सीखता है।

🔹 Recovery संभव है

Panic permanent नहीं होता।
सही approach से पूरी तरह manage हो सकता है।


#घबराहट


#दिलकीधड़कन






खांसी की दवा से पहले, गले को समझना ज़रूरी हैआपकी खांसी गले से है या आदत से?जब आवाज़ साथ छोड़ दे, तब गला नहीं दिल परेशान ...
04/02/2026

खांसी की दवा से पहले, गले को समझना ज़रूरी है
आपकी खांसी गले से है या आदत से?
जब आवाज़ साथ छोड़ दे, तब गला नहीं दिल परेशान होता है
एक मीठी जड़, और गले की पुरानी परेशानी
खराश दबाइए नहीं, शांत कीजिए
मुलेठी: गले की सुरक्षा का आयुर्वेदिक तरीका
#गलेकीदेखभाल

🔹 गले की समस्या क्यों बार-बार लौटती है

गला शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा है।
यह ठंडी हवा, गर्म चाय, धूल और आवाज़ के दबाव से
सीधे प्रभावित होता है।
इसलिए यहां समस्या जल्दी बनती है
और देर से ठीक होती है।

🔹 खांसी हमेशा बीमारी नहीं होती

हर खांसी इंफेक्शन नहीं होती।
कई बार यह गले की dryness
या nerve irritation की प्रतिक्रिया होती है।
ऐसे में syrup अस्थायी राहत देता है
लेकिन कारण वहीं का वहीं रहता है।

🔹 मुलेठी का असर सतह से आगे

मुलेठी सिर्फ taste नहीं बदलती।
यह गले की lining को protect करती है।
बार-बार खांसने की reflex को
धीरे-धीरे शांत करती है।

🔹 बच्चों और बुज़ुर्गों में क्यों उपयोगी

जिनका गला जल्दी सूखता है
या आवाज़ जल्दी बैठ जाती है
उनमें मुलेठी
soft और gentle support देती है।

🔹 मौसम बदलने पर गले को कैसे बचाएं

मौसम के बदलाव में
गले को dryness से बचाना
सबसे ज़रूरी कदम है।
मुलेठी इसमें daily care की तरह काम करती है।

🔹 कब सावधानी ज़रूरी है

हर अच्छी चीज़ की सीमा होती है।
रोज़ अधिक मात्रा
या बिना ज़रूरत लंबे समय तक
मुलेठी का सेवन
ठीक नहीं माना जाता।

❓ FAQs

Q1. क्या मुलेठी सूखी खांसी में फायदेमंद है?
हाँ, यह गले की dryness को शांत करती है।

Q2. क्या इसे रोज़ लिया जा सकता है?
कम मात्रा में, सीमित समय तक ही।

Q3. बच्चों को दे सकते हैं?
बहुत हल्की मात्रा, वैद्य की सलाह से।

Q4. क्या यह तुरंत असर करती है?
यह धीरे-धीरे soothing effect देती है।

Q5. क्या BP वालों को सावधानी चाहिए?
हाँ, नियमित सेवन से पहले सलाह ज़रूरी है।

#मुलेठी #खांसीउपचार #गलेकीखराश



द्राक्षारिष्ट: कमजोरी और थकान के लिए आयुर्वेदिक समाधान #द्राक्षारिष्ट  द्राक्षारिष्ट: कमजोरी में धीरे लेकिन गहराई से काम...
03/02/2026

द्राक्षारिष्ट: कमजोरी और थकान के लिए आयुर्वेदिक समाधान
#द्राक्षारिष्ट
द्राक्षारिष्ट: कमजोरी में धीरे लेकिन गहराई से काम करने वाली औषधि
क्या आपकी थकान सिर्फ नींद से नहीं जा रही?
जब शरीर थक जाए और मन भी साथ न दे
Energy drink नहीं, आयुर्वेदिक ताकत का सही तरीका
रोज़ थकान क्यों बनी रहती है, कारण शरीर में ही है

द्राक्षारिष्ट को समझना ज़रूरी क्यों है
आज की कमजोरी केवल काम की नहीं होती।
अक्सर शरीर का पोषण स्तर गिर चुका होता है।
ऐसे में सिर्फ stimulants समाधान नहीं होते।

थकान के पीछे छुपा असली कारण
कमजोर पाचन से शरीर को ऊर्जा नहीं मिलती।
खाया हुआ भोजन ठीक से रस नहीं बन पाता।
यही धीरे-धीरे थकान बन जाता है।

द्राक्षारिष्ट की खासियत
यह तुरंत energy देने वाली दवा नहीं है।
यह शरीर की process को सुधारने पर काम करता है।
इसीलिए इसका असर स्थायी होता है।

कब इसे चुनना सही रहता है
जब थकान रोज़ की आदत बन जाए।
जब नींद लेने पर भी freshness न आए।
जब भूख होते हुए भी ताकत न लगे।

भोजन और द्राक्षारिष्ट का संबंध
खाली पेट लेने से कभी-कभी भारीपन हो सकता है।
भोजन के बाद लेने से absorption बेहतर होता है।
पानी मिलाकर लेने से पाचन पर दबाव नहीं पड़ता।

लंबे समय के फायदे
शरीर की सहनशक्ति धीरे बढ़ती है।
बार-बार बीमार पड़ने की प्रवृत्ति घटती है।
मन और शरीर दोनों में steadiness आती है।

किन्हें सावधानी रखनी चाहिए
डायबिटीज में मात्रा पर विशेष ध्यान ज़रूरी है।
खुद से मात्रा बढ़ाना सही नहीं।
नियमितता, मात्रा से ज़्यादा अहम है।

निष्कर्ष
द्राक्षारिष्ट कोई shortcut नहीं है।
यह शरीर को समझकर काम करने वाली औषधि है।
सही समय और सही अपेक्षा ज़रूरी है।

🔹 FAQs

Q1. क्या द्राक्षारिष्ट रोज़ लिया जा सकता है?
हाँ, सही मात्रा में और भोजन के बाद लिया जा सकता है।

Q2. कितने समय में असर दिखता है?
आमतौर पर 2–3 हफ्तों में हल्का फर्क महसूस होता है।

Q3. क्या यह वजन बढ़ाता है?
नहीं, यह संतुलन बनाता है, अनावश्यक वजन नहीं बढ़ाता।

Q4. क्या इसे रात में ले सकते हैं?
रात में भोजन के बाद लेना सुरक्षित रहता है।

Q5. क्या यह सभी उम्र के लोग ले सकते हैं?
वयस्कों के लिए अधिक उपयुक्त है, बच्चों में वैद्य सलाह ज़रूरी।

#द्राक्षारिष्ट #आयुर्वेद #कमजोरी



स्वस्थ जीवन के लिए आयुर्वेदिक दिनचर्या क्यों ज़रूरी है?   आयुर्वेदिक दिनचर्या: बिना दवा, रोज़ का स्वास्थ्य उपायक्या आपकी...
03/02/2026

स्वस्थ जीवन के लिए आयुर्वेदिक दिनचर्या क्यों ज़रूरी है?

आयुर्वेदिक दिनचर्या: बिना दवा, रोज़ का स्वास्थ्य उपाय
क्या आपकी सुबह आपकी सेहत बिगाड़ रही है?
हम बीमार इसलिए नहीं होते, क्योंकि शरीर कमज़ोर ह
आयुर्वेद क्यों सुबह से ही जीवन सुधारने को कहता है?

दिनचर्या सिर्फ routine नहीं होती
यह शरीर की biological clock को समझने का तरीका है।

आयुर्वेद मानता है कि
हर अंग का अपना active समय होता है।

अगर हम उस समय के खिलाफ चलते हैं,
तो धीरे-धीरे imbalance शुरू होता है।

सुबह देर तक सोना
केवल आलस नहीं,
बल्कि कफ और heaviness बढ़ाने वाला कारण बनता है।

खाली पेट मोबाइल देखना
मन को बाहर खींच लेता है,
इससे दिन की शुरुआत ही restless हो जाती है।

दिनचर्या का असली लाभ
तुरंत नहीं,
धीरे-धीरे महसूस होता है।

जो लोग कहते हैं
“मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता”
अक्सर वही लोग
बाद में digestion, sleep या anxiety की शिकायत करते हैं।

आयुर्वेद extreme discipline नहीं सिखाता।
वह कहता है
जो कर सको, उतना ही करो।

अगर पूरा routine नहीं बन पा रहा,
तो सिर्फ timing सुधारिए।

खाने का समय,
सोने का समय,
और उठने का समय।

जब समय ठीक होता है,
तो शरीर खुद सहयोग करता है।

दिनचर्या का सबसे बड़ा फायदा
यह है कि
यह dependency नहीं बनाती।

ना दवा पर,
ना supplement पर।

बस awareness पर।
🔹 FAQs

Q1. क्या दिनचर्या सभी के लिए एक जैसी होती है?
नहीं, प्रकृति और उम्र के अनुसार बदलाव ज़रूरी है।

Q2. क्या दिनचर्या फॉलो करने से दवा बंद हो सकती है?
नहीं, यह supportive lifestyle है, replacement नहीं।

Q3. कितने दिन में असर दिखता है?
अक्सर 2–3 हफ्तों में subtle बदलाव महसूस होते हैं।

Q4. क्या working people दिनचर्या अपना सकते हैं?
हाँ, छोटे adjustments से भी शुरुआत हो सकती है।

Q5. क्या बच्चों के लिए भी दिनचर्या ज़रूरी है?
हाँ, सही आदतें बचपन में सबसे आसान होती हैं।

#आयुर्वेद #दिनचर्या #स्वस्थजीवन


HLA-B27 और साधारण कमर दर्द में क्या अंतर है   सबसे पहले एक साफ बातHLA-B27 एक test है,कमर दर्द एक symptom।Test और Pain को...
02/02/2026

HLA-B27 और साधारण कमर दर्द में क्या अंतर है


सबसे पहले एक साफ बात
HLA-B27 एक test है,
कमर दर्द एक symptom।

Test और Pain को mix करना गलती है
अक्सर लोग report देखते ही
pain को उसी से जोड़ देते हैं।

साधारण कमर दर्द कैसे होता है
गलत posture,
ज़्यादा बैठना,
वजन उठाना,
muscle strain।

इस pain का behavior कैसा होता है
काम करने से बढ़ता है,
आराम से घटता है।

सुबह उठते समय स्थिति
साधारण pain में
सुबह stiffness कम रहती है।

HLA-B27 related pain अलग क्यों लगता है
यह pain muscles से नहीं,
inflammation से जुड़ा होता है।

इस pain का pattern अलग होता है
आराम से बढ़ना,
movement से कम होना।

Morning stiffness key clue है
30–60 मिनट तक शरीर खुलने में समय लगे
तो ध्यान देना चाहिए।

Night pain warning हो सकता है
रात में नींद टूटे
तो ignore नहीं करना चाहिए।

Pain location भी फर्क दिखाती है
HLA-B27 pain अक्सर
कमर के नीचे, hips के पास होता है।

Painkiller से अस्थायी शांति
दर्द दबता है,
problem छुप जाती है।

HLA-B27 positive होने का मतलब
risk थोड़ा बढ़ सकता है,
लेकिन disease confirm नहीं होती।

Diagnosis pain से बनता है
report, symptoms और imaging
तीनों मिलकर picture बनाते हैं।

सबसे बड़ी गलती
हर back pain को AS मान लेना।

सबसे सही approach
observe, compare,
फिर evaluate।

🔹 FAQs

क्या HLA-B27 होने से कमर दर्द तय है?
नहीं, कई लोग life भर बिना pain रहते हैं।

साधारण back pain कितने दिन रहता है?
आमतौर पर कुछ दिन से हफ्तों में ठीक हो जाता है।

HLA-B27 pain कब suspect करें?
जब pain 3 महीने से ज़्यादा चले।

X-ray normal हो तो pain false है?
नहीं, early stage में X-ray normal हो सकता है।

Ayurveda इसमें कैसे देखता है?
Pain के nature और digestion को देखकर।












दिल को दवा नहीं, सुबह की समझ चाहिएक्या आपकी सुबह दिल के लिए सही है?दिल चुपचाप सब सहता है, सुबह से हHeart problem की शुरु...
02/02/2026

दिल को दवा नहीं, सुबह की समझ चाहिए
क्या आपकी सुबह दिल के लिए सही है?
दिल चुपचाप सब सहता है, सुबह से हHeart problem की शुरुआत सुबह से होती है
10 मिनट की सुबह, 10 साल का फर्क
दिल को स्वस्थ रखने की सही सुबह की शुरुआत

🔹 दिल की बीमारी अचानक क्यों नहीं होती
दिल से जुड़ी समस्या
अक्सर धीरे-धीरे बनती है।
शरीर संकेत देता है
लेकिन हम अनदेखा कर देते हैं।

🔹 सुबह का समय क्यों अहम है
सुबह nervous system reset होता है।
Hormonal balance इसी समय बनता है।
यही समय दिल की rhythm तय करता है।

🔹 Stress और Heart का सीधा कनेक्शन
लगातार तनाव
दिल की धड़कन बिगाड़ता है।
सुबह की जल्दबाज़ी
इस तनाव को बढ़ा देती है।

🔹 नींद और Heart Health
कम नींद
High BP का कारण बनती है।
सुबह उठते ही थकान
दिल पर extra load डालती है।

🔹 पेट और दिल का रिश्ता
खराब digestion
Heart discomfort बढ़ाता है।
Gas, acidity
छाती में pressure बनाते हैं।

🔹 नमक और पानी का संतुलन
सुबह dehydration
Blood को गाढ़ा करता है।
इससे दिल को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

🔹 आयुर्वेदिक नजरिया
आयुर्वेद दिल को
केवल एक अंग नहीं मानता।
यह मन और प्राण का केंद्र है।

🔹 छोटी आदत, बड़ा असर
सुबह की 10–15 मिनट की समझदारी
लंबे समय की सुरक्षा बन सकती है।

FAQs

Q1. क्या सुबह चाय दिल के लिए नुकसानदायक है?
खाली पेट चाय heart stimulation बढ़ाती है, नियमित आदत ठीक नहीं।

Q2. BP के मरीज सुबह क्या न करें?
अचानक उठकर भागदौड़ और तनाव से बचें।

Q3. क्या सिर्फ वॉक से दिल ठीक रह सकता है?
वॉक मदद करती है, पर lifestyle साथ में जरूरी है।

Q4. अर्जुन हर किसी के लिए safe है?
सामान्य मात्रा में safe है, फिर भी दवा साथ हो तो सलाह लें।

Q5. मोबाइल सुबह कब देखना ठीक है?
कम से कम 30 मिनट बाद।

#दिल_स्वास्थ्य #हृदय_देखभाल #सुबह_की_आदत


सफेद दिखता है, पर शरीर को भारी पड़ता हैये 5 चीजें रोज़ खा रहे हैं? एक बार सोचिएडाइट की 5 सफेद चीजें जो चुपचाप नुकसान करत...
02/02/2026

सफेद दिखता है, पर शरीर को भारी पड़ता है
ये 5 चीजें रोज़ खा रहे हैं? एक बार सोचिए
डाइट की 5 सफेद चीजें जो चुपचाप नुकसान करती हैं

पूरी तरह बंद नहीं कर पा रहे? तो ये तरीका अपनाइए
क्या आपकी प्लेट की सफेदी ही बीमारी की जड़ है?
जो रोज़ खाते हैं, वही धीरे-धीरे कमजोर कर रहा है

🔸 क्यों सफेद चीजें ज़्यादा खाई जाती हैं

सफेद चीजें जल्दी पकती हैं
सस्ती लगती हैं
और स्वाद में आसान होती हैं

🔸 समस्या स्वाद नहीं, आदत है

हम भूख से ज़्यादा
आदत के कारण खाते हैं
यहीं से imbalance शुरू होता है

🔸 शरीर कैसे react करता है

शुरुआत में कुछ महसूस नहीं होता
लेकिन धीरे-धीरे
पाचन कमजोर होने लगता है

🔸 सफेदी और empty calories

ज्यादातर सफेद चीजें
energy देती हैं
पर nutrition नहीं

🔸 बच्चों पर असर

बच्चों में focus की कमी
जल्दी थकान
और sugar craving बढ़ती है

🔸 बुज़ुर्गों के लिए जोखिम

BP
जोड़ों का दर्द
और सूजन बढ़ सकती है

🔸 पूरी तरह बंद क्यों मुश्किल होता है

क्योंकि taste memory बनी रहती है
और social eating भी जुड़ी होती है

🔸 समाधान extreme नहीं, balance है

आयुर्वेद gradual सुधार सिखाता है
ना कि अचानक रोक

🔸 सही तरीका

कम मात्रा
सही समय
और सही संयोजन

यही sustainable स्वास्थ्य का रास्ता है
🔹 FAQs

Q1. क्या सफेद चीजें बिल्कुल बंद करनी चाहिए?
नहीं, मात्रा और frequency control करना ज़्यादा ज़रूरी है।

Q2. क्या कभी-कभी मैदा खाना ठीक है?
हाँ, अगर रोज़ न हो और साथ में फाइबर लिया जाए।

Q3. सफेद चावल किसे कम करने चाहिए?
शुगर, वजन या पेट की समस्या वालों को।

Q4. बच्चों के लिए सबसे नुकसानदायक कौन सी है?
पैक्ड सफेद ब्रेड और ज्यादा चीनी।

Q5. बदलाव कितने दिन में दिखता है?
2–3 हफ्तों में पाचन और ऊर्जा में फर्क दिखता है।





जानना चाहते हैं आपकी प्रकृति कैसी है?5 मिनट में सवालों के जवाब देंऔर अपनी Dosha Prakriti खुद समझें।अपनी प्रकृति समझिए, ब...
01/02/2026

जानना चाहते हैं आपकी प्रकृति कैसी है?
5 मिनट में सवालों के जवाब दें
और अपनी Dosha Prakriti खुद समझें।
अपनी प्रकृति समझिए, बिना डर और बिना दवा
क्या आप सच में जानते हैं आपकी शरीर की प्रकृति क्या है?
शरीर रोज़ बोलता है, हम सुनना भूल गए
एक ही टेस्ट, 5 मिनट… और शरीर की बड़ी सच्चाई
बीमारी से पहले शरीर क्या बता रहा है?
5 मिनट में अपनी प्रकृति पहचानें | आयुर्वेदिक Self Test


🌿 Self-Knowledge क्यों ज़रूरी है

आयुर्वेद इलाज से पहले समझ सिखाता है।
समझ दवा की नहीं, व्यक्ति की होती है।
यही वजह है कि प्रकृति ज्ञान को आधार माना गया है।

🧠 टेस्ट का असली उद्देश्य

यह टेस्ट label लगाने के लिए नहीं है।
यह आपको अपने शरीर को observe करना सिखाता है।
सवालों के जवाब में आपकी daily reality छुपी होती है।

🔍 A, B, C का मतलब

A विकल्प शरीर की हलचल दिखाता है।
B विकल्प तीव्रता और गर्मी दर्शाता है।
C विकल्प स्थिरता और भारीपन की ओर इशारा करता है।

🌡️ क्यों एक जैसा लक्षण सबमें अलग दिखता है

किसी को कब्ज जल्दी होती है।
किसी को जलन ज्यादा सताती है।
किसी को सर्दी बार-बार होती है।
यह फर्क प्रकृति से आता है।

⚠️ Common confusion

लोग वर्तमान परेशानी को ही पहचान मान लेते हैं।
जबकि यह असंतुलन भी हो सकता है।
इसलिए बचपन के traits ज़्यादा भरोसेमंद होते हैं।

🧘 Observation की आदत

जो व्यक्ति अपने शरीर को रोज़ देखता है
उसे अचानक बीमारी कम चौंकाती है।
Self-awareness ही आयुर्वेद का पहला इलाज है।

🌿 आयुर्वेद का practical संदेश

प्रकृति जानना कोई जटिल ज्ञान नहीं।
यह रोज़मर्रा के अनुभव से जुड़ा है।
बस सही सवाल पूछने की जरूरत है।

#प्रकृति
#आयुर्वेद
#स्वास्थ्यज्ञान








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