Dr. Ekta Singh

Dr. Ekta Singh Asst.

Professor, Agronomy (CV Raman Awardee) ll " Certificate Excellence " as a Pathbreaker - Special Attendee Bharat Young Leaders Dialogue 2026 ll Icon of Bihar, 2026 ll World Research Fellow, UK ll FRS, UK ll
Matribhasha Ratna ll

26/03/2026
26/03/2026

जागेश्वरी देवी मंदिर चंदेरी मध्यप्रदेश

🙏 जय माँ जागेश्वरी

जागेश्वरी देवी मंदिर चंदेरी मध्यप्रदेश चंदेरी की पहाड़ियों में स्थित यह प्राचीन गुफा मंदिर माँ शक्ति का अद्भुत धाम है। य...
26/03/2026

जागेश्वरी देवी मंदिर चंदेरी मध्यप्रदेश

चंदेरी की पहाड़ियों में स्थित यह प्राचीन गुफा मंदिर माँ शक्ति का अद्भुत धाम है। यहाँ देवी का केवल मुख दर्शन होता है और गुफा में बहती प्राकृतिक जलधारा इसकी दिव्यता को और बढ़ाती है।

नवरात्रि में यहाँ भक्तों की विशेष भीड़ उमड़ती है और मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना माँ अवश्य पूरी करती हैं।
🙏 जय माँ जागेश्वरी

हिमालय की नीरव, दिव्य और अलौकिक गोद में जहाँ शिखर स्वयं आकाश से संवाद करते प्रतीत होते हैं, वहीं विराजती हैं लोकआस्था की...
23/03/2026

हिमालय की नीरव, दिव्य और अलौकिक गोद में जहाँ शिखर स्वयं आकाश से संवाद करते प्रतीत होते हैं, वहीं विराजती हैं लोकआस्था की अधिष्ठात्री, करुणा और शक्ति की मूर्त स्वरूप माँ नंदा देवी। वे केवल एक देवी नहीं, अपितु उत्तराखंड की आत्मा हैं एक ऐसी बेटी, जो जन्म लेती है, स्नेह पाती है, और फिर अपने कर्तव्यों की राह पर अग्रसर हो जाती है।

पुराणों और लोकगाथाओं में वर्णित है कि नंदा देवी राजा हेमंत और माता मेनावती की सुकन्या के रूप में अवतरित हुईं। उनके व्यक्तित्व में कोमलता और अदम्य शक्ति का अद्भुत समन्वय था। समय के साथ उनका विवाह भगवान शिव से हुआ और वे हिमालय की उच्चतम, निर्मल और दिव्य शिखरों में सदैव के लिए प्रतिष्ठित हो गईं मानो स्वयं प्रकृति ने उन्हें अपने हृदय में स्थान दिया हो।

किन्तु यह कथा केवल दिव्यता की नहीं, भावनाओं की भी है। नंदा देवी हर बारह वर्षों में अपने मायके नौटी गाँव लौटती हैं। यह आगमन केवल एक देवी का आगमन नहीं, बल्कि हर उस बेटी की वापसी है, जो अपने जन्मस्थान से दूर जाकर भी अपने मूल से जुड़ी रहती है। इसी भावभूमि पर आरंभ होती है महान और तपःपूर्ण नंदा देवी राजजात लगभग 280 किलोमीटर की वह यात्रा, जो श्रद्धा को पग-पग पर परखती है।

दुर्गम पथ, ऊँचे पर्वत, शीतल वायु और अनिश्चित मौसम सब कुछ मानो भक्त की आस्था की परीक्षा लेते हैं। परन्तु जब हृदय में माँ के प्रति समर्पण हो, तब हर कठिनाई सरल प्रतीत होती है। यह यात्रा केवल पैरों से नहीं, आत्मा से तय की जाती है

जहाँ हर कदम एक प्रार्थना बन जाता है और हर श्वास एक मंत्र।
यह परंपरा हमें यह भी सिखाती है कि जीवन केवल प्राप्ति का नहीं, त्याग और समर्पण का भी नाम है। जैसे एक पुत्री अपने कर्तव्यों के लिए अपने घर से विदा होती है, वैसे ही माँ नंदा देवी का यह आवागमन हमें जीवन के गहनतम भावों से परिचित कराता है विरह, प्रेम, स्मृति और पुनर्मिलन।

नन्दे देवि जगन्माते शैलराजसुते शुभे।
त्वं नमामि जगद्धात्रि सर्वकामार्थसिद्धये॥

हिमालये तु निवसन्तीं पार्वतीं परमेश्वरीम्।
भक्तानुग्रहकर्त्रीं तां नन्दां वन्दे पुनः पुनः॥

माँ नंदा देवी की यह कथा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की चेतना है—एक ऐसा आलोक, जो हमें अपनी संस्कृति, अपनी जड़ों और अपने संबंधों की गहराई का अनुभव कराता है।

🙏 उनकी कृपा से जीवन में सदैव संतुलन, श्रद्धा और शांति बनी रहे। 🙏 जय माता दी ☺️🙏

— डा. एकता सिंह

उत्तराखंड की पावन वादियों में बसा कसार देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रहस्यों, ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का...
23/03/2026

उत्तराखंड की पावन वादियों में बसा कसार देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रहस्यों, ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत केंद्र है। यहाँ की हर शिला, हर वायु कण, मानो किसी अनदेखी शक्ति की कहानी कहता है…
कहा जाता है कि यह सम्पूर्ण क्षेत्र पृथ्वी के उस अद्वितीय भू-चुंबकीय घेरे के प्रभाव में आता है, जिसे Van Allen Radiation Belt के नाम से जाना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यहाँ जमीन के नीचे एक शक्तिशाली भू-चुंबकीय पिंड विद्यमान है, जिसे कुछ शोधकर्ता “ग्रेविटी पॉइंट 8” जैसे रहस्यमयी नामों से संबोधित करते हैं। यह वही कारण है कि यहाँ की ऊर्जा सामान्य स्थानों से भिन्न और अधिक सशक्त महसूस होती है।

यही कारण है कि NASA सहित कई वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की रुचि इस क्षेत्र में रही है। यहाँ का चुंबकीय प्रभाव इतना गहन बताया जाता है कि कई बार जीपीएस और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल क्षणिक रूप से बाधित हो जाते हैं—मानो प्रकृति स्वयं हमें तकनीक से दूर कर आत्मा से जुड़ने का संदेश दे रही हो।

कसार देवी केवल विज्ञान का विषय नहीं, बल्कि साधना और ध्यान का भी परम केंद्र है। अनेक साधकों और योगियों ने यहाँ ध्यान लगाकर एक विशेष “कॉस्मिक ऊर्जा” के अनुभव की बात कही है। यहाँ की शांति, मन को भीतर तक छू जाती है—जैसे ब्रह्मांड की अनंत ऊर्जा सीधे आत्मा में प्रवाहित हो रही हो।
विश्व के अन्य रहस्यमयी और ऊर्जावान स्थलों की तरह, कसार देवी की तुलना माचू पिच्चू और स्टोनहेंज से भी की जाती है। इन सभी स्थानों में एक समानता है एक अदृश्य, किंतु गहन ऊर्जा का प्रवाह, जो मानव चेतना को ऊँचे स्तर तक ले जाने की क्षमता रखता है।

पौराणिक दृष्टि से भी यह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि माता कौशिकी ने इसी पावन भूमि पर शुंभ और निशुंभ जैसे असुरों का संहार किया था। मंदिर के गर्भगृह में आज भी माता के सिंह के पंजों के चिह्न होने की आस्था श्रद्धालुओं को गहरे भाव से जोड़ती है।

यहाँ आने वाला हर व्यक्ति केवल एक यात्री नहीं रहता, बल्कि एक साधक बन जाता है। कसार देवी सिखाती है कि सच्ची शक्ति बाहर नहीं, भीतर छिपी होती है बस उसे अनुभव करने की आवश्यकता है।

यह स्थान केवल देखा नहीं जाता… इसे महसूस किया जाता है।
यहाँ केवल दर्शन नहीं होते… यहाँ आत्मा का साक्षात्कार होता

जय माता दी 🙏☺️

— डा. एकता सिंह

21/03/2026

आस्था का झूला, माँ का स्नेह

उत्तराखंड के पावन चम्पावत स्थित हिंगलाज मंदिर में “झूला झूलना” केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भक्त और माँ के बीच प्रेम का अद्भुत संवाद है।
यहाँ झूला झुलाना उस भाव को व्यक्त करता है, जहाँ भक्त माँ को बालरूप में स्नेहपूर्वक झुलाते हैं—मानो अपनी भक्ति को स्पर्श और अनुभूति का रूप दे रहे हों। साथ ही, यह मान्यता भी है कि मनोकामना पूर्ण होने पर झूला झूलकर भक्त अपनी कृतज्ञता माँ को समर्पित करते हैं।
झूले की गति हमें जीवन का सत्य भी सिखाती है
उतार-चढ़ाव तो आते हैं, पर माँ हिंगलाज की कृपा हर पल साथ रहती है।
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

🌺 जहाँ आस्था झूलती है, वहाँ माँ स्वयं मुस्कुराती हैं।
जय माँ हिंगलाज! 🙏

— डा. एकता सिंह

21/03/2026

हिमालय की शांत वादियों में स्थित चम्पावत का हिंगलाज मंदिर केवल एक धाम नहीं, बल्कि आस्था का वह दीप है जो सरहदों के पार भी समान रूप से प्रज्वलित है। इसे बलूचिस्तान स्थित प्राचीन हिंगलाज माता मंदिर का ही दिव्य प्रतिबिंब माना जाता है।
यहाँ माँ की उपस्थिति किसी स्थान की मोहताज नहीं, बल्कि श्रद्धा की गहराई में अनुभव होती है। जहाँ विश्वास है, वहीं शक्ति है और जहाँ शक्ति है, वहीं माँ हिंगलाज का वास है।

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

🌺 जय माँ हिंगलाज — एक शक्ति, अनंत स्वरूप। 🙏

— डा. एकता सिंह

हिमालय की गोद में आस्था का दिव्य आलोकचम्पावत का हिंगलाज मंदिर उत्तराखंड की पवित्र वादियों में बसा चम्पावत सदियों से देवी...
21/03/2026

हिमालय की गोद में आस्था का दिव्य आलोक
चम्पावत का हिंगलाज मंदिर

उत्तराखंड की पवित्र वादियों में बसा चम्पावत सदियों से देवी-भक्ति और शक्ति-आराधना का केंद्र रहा है। इन्हीं दिव्य स्थलों में से एक है हिंगलाज माता का यह पावन मंदिर, जिसे श्रद्धालु पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित प्राचीन शक्ति-पीठ हिंगलाज माता मंदिर का ही दूसरा रूप मानते हैं।

यहाँ पहुँचते ही मन को एक अद्भुत शांति का अनुभव होता है। हिमालय की शीतल हवा, मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि और श्रद्धालुओं की भक्ति सब मिलकर ऐसा वातावरण रचते हैं मानो स्वयं शक्ति का साक्षात् आशीर्वाद इस भूमि पर बरस रहा हो।

कहा जाता है कि माँ हिंगलाज केवल एक स्थान की देवी नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त शक्ति का प्रतीक हैं। जो भक्त बलूचिस्तान के मूल धाम तक नहीं पहुँच पाते, वे यहाँ आकर उसी दिव्यता का अनुभव करते हैं। यही कारण है कि यह मंदिर सीमाओं से परे आस्था के एक सेतु के रूप में स्थापित हो चुका है।

माँ की आराधना में भक्तों की श्रद्धा अक्सर इस भावना के साथ प्रकट होती है कि देवी केवल संकटों का नाश ही नहीं करतीं, बल्कि जीवन में साहस, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करती हैं।


या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति के रूप में विराजमान हैं, उन दिव्य माताशक्ति को बार-बार नमस्कार है।
चम्पावत का यह हिंगलाज मंदिर हमें यह भी स्मरण कराता है कि सच्ची आस्था भौगोलिक सीमाओं से बंधी नहीं होती। भक्त जहाँ भी सच्चे मन से माँ को पुकारता है, वहाँ देवी का आशीर्वाद स्वतः प्रकट हो जाता है।

आज यह पावन स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का भी प्रतीक बन चुका है। यहाँ आने वाला हर श्रद्धालु अपने साथ विश्वास, शांति और माँ की कृपा का अनुभव लेकर लौटता है।

🌺 माँ हिंगलाज की कृपा आप सब पर बनी रहे।
जय माँ हिंगलाज! 🙏

— डा. एकता सिंह

दिनांक 20 मार्च 2026 — यह दिवस मेरे जीवन के उन दिव्य और अविस्मरणीय क्षणों में सदा के लिए अंकित हो गया, जब देवभूमि उत्तरा...
20/03/2026

दिनांक 20 मार्च 2026 — यह दिवस मेरे जीवन के उन दिव्य और अविस्मरणीय क्षणों में सदा के लिए अंकित हो गया, जब देवभूमि उत्तराखंड की पुण्य धरा में माँ वाराही मंदिर के नव-निर्माण हेतु आयोजित भूमि पूजन एवं भव्य शिलान्यास समारोह में सम्मिलित होने का सुअवसर प्राप्त हुआ।

यह केवल एक निर्माण का प्रारंभ नहीं, अपितु आस्था के पुनर्जागरण, संस्कृति के पुनर्स्मरण और सनातन चेतना के नवोदय का मंगल उद्घोष है। इस पावन अवसर पर उत्तराखंड के यशस्वी मुख्यमंत्री जी के कर-कमलों द्वारा शिलान्यास सम्पन्न हुआ मानो परंपरा और प्रगति ने एक साथ नव युग की ओर कदम बढ़ाया हो।

माँ वाराही जो भगवान के वराह अवतार की अद्भुत, तेजस्वी एवं रहस्यमयी शक्ति स्वरूपा हैं धर्म की अधिष्ठात्री, अधर्म की संहारिका और भक्तों की अभयदाता मानी जाती हैं। उनका स्वरूप केवल पूजनीय ही नहीं, बल्कि साधना, शक्ति और संरक्षण का जीवंत प्रतीक है। उनकी उपासना में भय का नाश, आत्मबल का जागरण और चित्त की शुद्धि निहित है।
देवभूमि उत्तराखंड की आत्मा उसकी प्राचीन परंपराओं, लोक-आस्थाओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में स्पंदित होती है। यहाँ के मंदिर केवल ईश्वर-आराधना के स्थल नहीं, बल्कि लोकजीवन के धड़कते केंद्र हैं—जहाँ पर्व, परंपरा, संस्कृति और सामाजिक समरसता एक साथ पल्लवित होती है। माँ वाराही मंदिर का यह नव-निर्माण निश्चित ही धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा प्रदान करेगा और साथ ही स्थानीय आस्था, आजीविका तथा अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ करेगा।

आदरणीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं प्रेरणादायी मार्गदर्शन में हमारी सरकार इन पावन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए संकल्पबद्ध है। यह प्रयास केवल स्थापत्य का विस्तार नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक अस्मिता को सुदृढ़ करने का एक सशक्त माध्यम है।
आज का यह दिव्य अवसर हृदय में श्रद्धा, कृतज्ञता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर गया। यह अनुभव हुआ कि यह केवल मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि विश्वास, परंपरा और सनातन आत्मा के पुनर्प्रतिष्ठा का महायज्ञ है।

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जय माँ वाराही 🙏
जय माँ बराही, देवीधुरा (चम्पावत) 🙏

20/03/2026

आज मैने, दिनांक 20 मार्च, 2026 को...माता बराही देवी जी की ऐतिहासिक "भव्य मंदिर निर्माण" के शुभ बेला के उपलक्ष्य पर भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में सौभाग्यशाली उपस्थिति दर्ज कराई.. और इस अलौकिक आयोजन की प्रत्यक्षदर्शी बनी।
जय माता बराही, देवीधुरा, चम्पावत, उत्तराखंड ❤️🙏🙏

☺️🙏
19/03/2026

☺️🙏

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