07/03/2026
होलीं के दिन एक 11 साल की हिंदू बच्ची के हाथ से गलती से पानी से भरा गुब्बारा नीचे गली में गिर जाता है, उसी समय गली से गुजर रही उनकी पड़ोस में रहने वाली एक मुस्लिम आंटी पर वह गुब्बारा गिर जाता है!
उन्हें गुस्सा आ जाता है और बहस शुरू हो जाती है, हिंदू महिलाओं ने तुरंत माफ़ी भी माँग ली और मामला वहीं खत्म हो गया!
लेकिन रात करीब 11 बजे जब उस बच्ची का भाई तरुण अपने दोस्तों के साथ होली खेलकर घर लौट रहा था, तब कुछ मुस्लिम लड़कों ने उस पर हमला कर दिया!
इलाज के दौरान तरुण की मौत हो गई।
मामला दिल्ली के उत्तम नगर का हैं।
सोचने वाली बात यह है कि हम किस तरह के समाज में जी रहे हैं, जहाँ 11 साल की बच्ची की गलती भी माफ़ नहीं की जा सकती?
एक समय था जब गांवों और शहरों में हिंदू-मुस्लिम मिलकर होली खेलते थे,
पिछले कई सालों से समाज में जो हिंदू-मुस्लिम की नफ़रत का बीज बोया जा रहा है, उसका असर अब साफ दिखाई देने लगा है,
हमें समझना होगा कि ऐसे छोटे-छोटे मामलों की वजह से किसी की जान लेना सही नहीं हो सकता!
ऐसे मामलों के बाद कई बार पूरे मुस्लिम समाज को निशाना बनाया जाता है, उनके घर तोड़े जाते हैं,
लेकिन सच यह है कि ऐसे मामले एक (example) बन जाते हैं और उसका नुकसान कई पीढ़ियों को उठाना पड़ता है!
मैं मुस्लिम समाज से भी गुज़ारिश करता हूँ कि जब भी उनके आसपास ऐसा मामला हो, जहाँ उनके अपने लोग गलत हों, तो उनका विरोध करें,
यही गुज़ारिश हिंदू समाज से भी है — क्योंकि कई बार हिंदू समाज के लोगों ने भी बहुत मासूम मुसलमानों की जान ली है!
दुख की बात यह है कि कई जगह अपराध करने वालों का विरोध करने के बजाय उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया जाता है।
हमें नफरत नहीं, इंसाफ और इंसानियत का साथ देना चाहिए।
क़ुरआन में फ़रमाया गया है:
जिसने किसी एक बेगुनाह इंसान का क़त्ल किया, समझों उसने पूरी इंसानियत का क़त्ल कर दिया,और जिसने एक जान बचाई, समझों उसने पूरी इंसानियत को बचा लिया!
इसी तरह हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया:
मुसलमान वह है जिसकी ज़ुबान और हाथ से दूसरे लोग महफ़ूज़ रहें।
(सहीह बुख़ारी)