17/02/2025
*अर्धनारीश्वर: शिव और शक्ति का दिव्य स्वरूप*
अर्धनारीश्वर भगवान शिव और माता पार्वती का एक दिव्य और अलौकिक रूप है, जो सृष्टि में संतुलन, एकता और समरसता का प्रतीक है। इस रूप में भगवान शिव का दाहिना भाग उनका तेजस्वी और तपस्वी स्वरूप दर्शाता है, जबकि बायां भाग माता पार्वती की कोमलता, सृजनात्मकता और करुणा का प्रतीक है।
शिव के इस रूप में आधा शरीर जटाजूटधारी, गंगा को धारण करने वाला, त्रिशूल और डमरू से युक्त होता है, जो उनके संहारक और योगी स्वरूप को दर्शाता है। वहीं, माता पार्वती का भाग आभूषणों और श्रृंगार से सुसज्जित होता है, जो शक्ति, ममता और सौंदर्य का प्रतीक है। यह रूप यह संदेश देता है कि पुरुष और स्त्री दोनों ही समान रूप से सृष्टि का अभिन्न हिस्सा हैं और एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।
अर्धनारीश्वर और कुंभ महापर्व
कुंभ महापर्व, जो मानव जाति के आध्यात्मिक उत्थान और पवित्र स्नान का अवसर है, शिव और शक्ति के इस संतुलन को दर्शाने का सबसे बड़ा उदाहरण है। प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन होता है, जो शिव और शक्ति के मिलन जैसा दिव्य अनुभव कराता है। कुंभ का पर्व भगवान शिव की तपस्या, योग और वैराग्य के महत्व को दर्शाता है, वहीं शक्ति (पार्वती) की कृपा से यह संसार के कल्याण का अवसर बनता है।
जो श्रद्धालु कुंभ में अर्धनारीश्वर के इस दिव्य स्वरूप का ध्यान करते हैं और पवित्र स्नान करते हैं, वे जीवन में संतुलन, आत्मज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करते हैं। शिव की शक्ति और पार्वती की ममता से ओत-प्रोत यह पर्व संपूर्ण मानवता को यह सिखाता है कि सृजन और संहार दोनों ही जीवन के महत्वपूर्ण पहलू हैं, और जब तक शिव और शक्ति का संतुलन बना रहेगा, तब तक सृष्टि भी फलती-फूलती रहेगी।
हर हर महादेव!!
ॐ नमः शिवाय!!
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