Dr Atul Krishna

Dr Atul Krishna General Surgeon & Founder Of Subharti Group

06/12/2025

भारत के युगपुरुष डाक्टर भीमराव अंबेडकर साहिब को उनके परिनिर्वाण दिवस पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि। हम किसी भी मान्यता को मानने वाले हों, हमें याद करना होगा कि डाक्टर अंबेडकर ने कहा था कि जाति विहीन समाज के बिना स्वराज्य अधूरा है। यह वाक्य जितना प्रासांगिक स्वतंत्रता से पहले था, उतना आज भी है। यदि हमें आतंकवाद से लड़ना और जीतना है, अपने देश अखंड एवं तथा सनातन को सुरक्षित रखना है, तो शीघ्रता-शीघ्र हमें इस ओर ठोस कदम उठाने होंगे । ये ही बाबा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी........

05/12/2025

एक ऐसा डाक्टर जिसने अपनी डाक्टरी के अतिरिक्त देश की स्वतंत्रता के लिये भी काम किया। उत्तराखंड के सपूत डाक्टर गैरोला ने जहां एक ओर नेताजी के साथ मिल कर विदेश में क्रांति की लहर उत्पन्न करने में अपना योगदान दिया तो भारत आकर अहिंसावादी विचारधारा के अंतर्गत भी योगदान दिया। अपने वीरों को जनो। अपने क्रांतिकारियों को नहीं जानोगे तो अपने देश को कैसे पहचानोगे?

03/12/2025

जाति छोड़ो-सनातन जोड़ो। क्या मेरी तरह आप भी अपने नाम से जाति का नाम हटा कर अपने पिता-माता-दादा-दादी या गाँव-नगर-देश लगा कर अपनी पहचान को राष्ट्रहित से जोड़ सकते हैं? अगर हाँ तो मुझे 90450 09720 नंबर पर अपनी सूचना दें।

01/12/2025

संतों-मुनियों और भँतों का कार्य धर्म प्रचार करना है; वे अहिंसा का ही पाठ पढ़ाएंगे। पर ध्यान रखें तथागत बुद्ध ने सम्यक अहिंसा की बात कही थी। ऐसी अहिंसा की न सोचें जो हमें दुर्बल बनाती है। हम सशक्त होंगे तभी अपने सनातन धर्म प्रचारकों की रक्षा कर पाएंगे। हिन्दू-जैन-बौद्ध-सिख-लिंगयाती-आदि सभी सनातन धर्म के अंतर्गत आते हैं।

29/11/2025

हमारी अधिकांश जनता में यह दोष रहा है कि संकट की स्थिति में समय समय पर अपना दीन-देश छोड़ दिया। इस गौरैया से सीखें कि संकट के समय घर छोड़ कर मत भागो, अपनी कितनी भी छोटी सामर्थ्य हो; तो भी संकट का सामना करो, आपको देख कर औरों का भी साहस बढ़ेगा। फिर देखना, आपकी पहल क्या रंग लाएगी......

28/11/2025

दिनांक 26 नवंबर को राष्ट्रीय संविधान दिवस था। भारत के संविधान बनाने का श्रेय बाबा साहिब डाक्टर भीम राव अंबेडकर जी को जाता है। किसी भी समिति में काम करने वाले एक-दो लोग ही होते हैं। भारत के संविधान को बनाने में डाक्टर अंबेडकर के अतिरिक्त श्री बी. एन. राव का हाथ था। आइए कुछ महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करें।

26/11/2025

संविधान निर्माता डाक्टर अंबेडकर साहिब ही एकमात्र ऐसे भारतीय नेता थे जिन्होनें खुल कर कहा था कि भारत का विभाजन धर्म के आधार पर नहीं होना चाहिए। उन्होनें नेहरू-गांधी को आगाह किया था कि यदि आप भारत के धर्म के आधार पर विभाजन को स्वीकार करें तो मात्र इस दशा के साथ स्वीकार करें कि विभाजन के साथ सारे मुसलमान पाकिस्तान चले जाएँ और वहाँ से सारे सनातनी भारत आ जाएँ......

24/11/2025

दैनिक व्यवहार में यह मस्तिष्क में रखें कि पहले हमारा देश है, उसके बाद हमारी कोई भी मान्यता या आवश्यकता है। अतः प्रत्येक आचरण से पूर्व दोहराएँ देश प्रथम सदैव प्रथम। अपने वीरों के नारे को न भूलें और न ही उसे बोलने में संकोच करें। आइए पुरज़ोर बोलें वंदे-मातरम.....

22/11/2025

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवम्बर 1828 को हुआ था और उनके जन्म के 2 वर्ष और तीन दिन बाद 22 नवम्बर 1830 को एक और महान वीरांगना का जन्म हुआ था जो रानी झाँसी की महिला सेना की सेनापति थी I उनका नाम था झलकारी बाई I झलकारी बाई की जाति कहीं पिछड़े वर्ग में गिनी जाती है तो कहीं दलित वर्ग में I दोनों वीरांगनाओं के बलिदान को सादर नमन है.........

19/11/2025

सनातन सोच और विदेशी सोच में बहुत बड़ा अंतर है I अकबर और सिकंदर ने लाखों लोगों का युद्धों में खून बहाया और अपने राज्य का विस्तार किया, और विदेशी सोच से वे महान कहलाये I जबकि सम्राट अशोक कलिंग पर विजय कर अजेय बन जाने और अपने राज्य को अत्यधिक विस्तार देने के कारण महान नहीं कहलाये I वे तब महान कहलाये जब उन्होनें प्रेम-करुणा-मैत्री का रास्ता अपना कर लोकहितकारी कार्य किये......

18/11/2025

भ्रष्टाचार – सरकार किसी भी पार्टी की हो या आ जाए, हमारे देश में भ्रष्टाचार सर चढ़ कर बोलता है I सबके पास बहाने हैं I उनके दृष्टिकोण से भ्रष्टाचार उनकी इच्छा नहीं मजबूरी है I सोचिये, मूल रूप से दोषी है कौन? मेरे विचार से हम-आप ही हैं I हम में से ही तो कोई नेता-अधिकारी-मंत्री-व्यापारी-आदि बनता है ! अतः सभी वर्गों पर, या कहें कि अपने पर ही कार्यवाही होनी चाहिए ......

17/11/2025

17 नवंबर 1928 को स्वतंत्रता आंदोलन के आरंभिक प्रणेताओं में एक, पंजाब केसरी लाला लाजपत राय जी ने अपना बलिदान दिया था। आप लाल-बाल-पाल नाम से प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानियों की त्रिवेणी में लाल थे। आपने 1905 में स्वतंत्रता के लिए तब स्वदेशी - आंदोलन तब आरंभ कर दिया था जब गांधी जी भारत आए भी नहीं थे। नमन है ऐसे प्रातः स्मरणीय क्रांतिकारी को..........

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