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डायबिटीज और हाइपरटेंशन है? यानी दातून करना भूल चुके हो...तो वापसी कीजिये, तुरंत ❣️❣️❣️सन 1990 से पहले कितने लोगों को डाय...
05/09/2021

डायबिटीज और हाइपरटेंशन है? यानी दातून करना भूल चुके हो...तो वापसी कीजिये, तुरंत ❣️❣️❣️

सन 1990 से पहले कितने लोगों को डायबिटीज़ होता था? कितने लोग हाइपरटेंशन से त्रस्त थे? नब्बे के दशक के साथ हर घर में एक डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर का रोगी आ गया, क्यों? बहुत सारी वजहें होंगी, जिनमें हमारे खानपान में बदलाव को सबसे खास माना जा सकता है। बदलाव के उस दौर में एक चीज बहुत ख़ास थो जो खो गयी, पता है ना क्या है वो? दातून ❤️...गाँव देहात में आज भी लोग दातून इस्तमाल करते दिख जाएंगे लेकिन शहरों में दातून पिछड़ेपन का संकेत बन चुका है। गाँव देहात में डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन के रोगी यदा कदा ही दिखेंगे या ना के बराबर ही होंगे। वजह साफ है, ज्यादातर लोग आज भी दातून करते हैं। तो भई, डायबिटीज़ और हाइ ब्लड प्रेशर के साथ दातून का क्या संबंध, यही सोच रहे हो ना?..तो आज आपका दिमाग हिल जाएगा..और फिर सोचिएगा, हमने क्या खोया, क्या पाया?🤔

ये जो बाज़ार में टूथपेस्ट और माउथवॉश आ रहे हैं ना, 99.9% सूक्ष्मजीवों का नाश करने का दावा करने वाले, उन्हीं ने सारा बंटाधार कर दिया है। ये माउथवॉश और टूथपेस्ट बेहद स्ट्राँग एंटीमाइक्रोबियल होते हैं और हमारे मुंह के 99% से ज्यदा सूक्ष्मजीवों को वाकई मार गिराते हैं। इनकी मारक क्षमता इतनी जबर्दस्त होती है कि ये मुंह के उन बैक्टिरिया का भी खात्मा कर देते हैं, जो हमारी लार (सलाइवा) में होते हैं और ये वही बैक्टिरिया हैं जो हमारे शरीर के नाइट्रेट (NO3-) को नाइट्राइट (NO2-) और बाद में नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) में बदलने में मदद करते हैं। जैसे ही हमारे शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड की कमी होती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है। ये मैं नहीं कह रहा, दुनियाभर की रिसर्च स्ट्डीज़ बताती हैं कि नाइट्रिक ऑक्साइड का कम होना ब्लड प्रेशर को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। जर्नल ऑफ क्लिनिकल हायपरेटेंस (2004) में 'नाइट्रिक ऑक्साइड इन हाइपरटेंशन' टाइटल के साथ छपे एक रिव्यु आर्टिकल में सारी जानकारी विस्तार से छपी है। और, नाइट्रिक ऑक्साइड की यही कमी इंसुलिन रेसिस्टेंस के लिए भी जिम्मेदार है। समझ आया खेल? नाइट्रिक ऑक्साइड कैसे बढ़ेगा जब इसे बनाने वाले बैक्टिरिया का ही काम तमाम कर दिया जा रहा है? ब्रिटिश डेंटल जर्नल में 2018 में तो बाकायदा एक स्टडी छपी थी जिसका टाइटल ही ’माउथवॉश यूज़ और रिस्क ऑफ डायबिटीज़’ था। इस स्टडी में बाकायदा तीन साल तक उन लोगों पर अध्धयन किया गया जो दिन में कम से कम 2 बार माउथवॉश का इस्तमाल करते थे और पाया गया कि 50% से ज्यादा लोगों को प्री-डायबिटिक या डायबिटीज़ की कंडिशन का सामना करना पड़ा।

अब बताओ करना क्या है? कितना माउथवॉश यूज़ करेंगे? कितने टूथपेस्ट लाएंगे सूक्ष्मजीवों को मार गिराने वाले? दांतों की फिक्र करने के चक्कर में आपके पूरे शरीर की बैंड बज रही है सरकार.. गाँव देहातों में तो दातून का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है, और ये दातून मुंह की दुर्गंध भी दूर कर देते हैं और सारे बैक्टिरिया का खात्मा भी नहीं करते। मेरे #पातालकोट में तो आदिवासी टूथपेस्ट, टूथब्रश क्या होते हैं, जानते तक नहीं। अब आप सोचेंगे कि #दीपकआचार्य ने टूथपेस्ट और माउथवॉश को लेकर इतनी पंचायत कर ली तो दातून के प्रभाव को लेकर किसी क्लिनिकल स्टडी की बात क्यों नही की? तो भई, अब दातून से जुड़ी स्टडी की भी बात हो जाए। बबूल और नीम की दातून को लेकर एक क्लिनिकल स्टडी जर्नल ऑफ क्लिनिकल डायग्नोसिस एंड रिसर्च में छपी और बताया गया कि स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस की वृद्धि रोकने में ये दोनों जबर्दस्त तरीके से कारगर हैं। ये वही बैक्टिरिया है जो दांतों को सड़ाता है और कैविटी का कारण भी बनता है। वो सूक्ष्मजीव जो नाइट्रिक ऑक्साइड बनाते हैं जैसे एक्टिनोमायसिटीज़, निसेरिया, शालिया, वीलोनेला आदि दातून के शिकार नहीं होते क्योंकि इनमें वो हार्ड केमिकल कंपाउंड नहीं होते जो माउथवॉश और टूथपेस्ट में डाले जाते हैं। फटाफट इस जानकारी को शेयर करें, गंगा नहा लें ❤️

चलते चलते एक बात और बता दूं, आदिवासी दांतों पर दातून घुमाने के बाद एकाध बार थूकते है, बाद में दांतों पर दातून की घिसाई तो करते हैं और लार को निगलते जाते हैं? लिंक समझ आया? लार में ही तो असल खेल है। ये हिंदुस्तान का ठेठ देसी ज्ञान है बाबू❤️

ज्यादा पंचायत नहीं करुंगा, मुद्दे की बात ये है कि वापसी करो, थोड़ा #भटको और चले आओ दातून की तरफ..कसम से।

बासी पानी जे पिये, ते नित हर्रा खाय।
मोटी दतुअन जे करे, ते घर बैद न जाय।।

#देशकाज्ञान #हर्बलवर्बल

18/12/2020

सर्दी हो या फिर गर्मियों का मौसम हो, आपको पानी पीना नहीं छोड़ना चाहिए. आपको हर रोज करीब 2.5 लीटर से 3 लीटर तक पानी का सेवन करना ही चाहिए. गर्म पानी पीने से आपकी पाचन क्रिया भी स्ट्रॉन्ग रहती है. कब्ज जैसी परेशानी से भी निजात मिलती है. आप डिहाइड्रेशन से भी बचते हैं. गर्म पानी पीने से आपकी इम्यूनिटी भी मजबूत होती है.

आइए आपको बताते हैं कि गर्म पानी पीने से आपके शरीर में और कौन से फायदे हो सकते हैं-

गर्म पानी पीने के फायदे

अगर आपको सर्दी या फिर जुकाम हो गया है तो आपको जरूर गर्म पानी का सेवन करना चाहिए. ये आपके शरीर में दवा की तरह काम करेगा और आपका गला पहले से बेहतर लगने लगेगा.

गर्म पानी मोटे लोगों के लिए वरदान है. ये आपके शरीर से एक्स्ट्रा फैट को बाहर निकाल देता है. इसलिए अगर आप मोटे हैं तो रोज गर्म पानी का सेवन कीजिए, जिससे कि आप हेल्दी हो जाएंगे.

रोज सुबह गर्म पानी में नींबू की कुछ बूंदें डालकर पीने से आपके शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

कब्ज की परेशानी से आज हर दूसरा शख्स जूझ रहा है. ऐसे में अगर आप गर्म पानी का सेवन करते हैं तो आपकी पाचन शक्ति काफी मजबूत हो जाएगी और आपके कब्ज की शिकायत खत्म हो जाएगी.

गर्म पानी पीने से एक फायदा ये भी है कि आपके शरीर में जमा विषाक्त पदार्थ स्वत: ही बाहर निकल जाते हैं.

गर्म पानी का फायदा पीरियड्स में भी होता है. अगर आपको दर्द की शिकायत रहती है तो गर्म पानी का सेवन आपके लिए बहुत ही फायदेमंद होने वाला है. गर्म पानी आपके पेट की मांसपेशियों की ऐंठन को जल्द ही ठीक कर देता है.

गर्म पानी से आपके बालों के झड़ने की गति भी रुक जाती है और आपको बाल पहले से और भी घने और मजबूत हो जाते हैं.

गर्म पानी के सेवन से आपकी झुर्रियां, मुंहासे और त्वचा संबंधी अन्य दूसरी बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं.

गर्म पानी आपके शरीर के दर्द या थकान को कम करके आपको तनाव मुक्त भी करता है.

आप अपने दांत चमकाने के लिए भी गर्म पानी का सेवन कर सकते हैं.

नई दिल्ली: केरल से शुरू हुए निपाह वायरस का खौफ पूरे भारत में है. दिल्ली-एनसीआर के लोगों को भी अलर्ट कर दिया गया है. इस अ...
27/05/2018

नई दिल्ली: केरल से शुरू हुए निपाह वायरस का खौफ पूरे भारत में है. दिल्ली-एनसीआर के लोगों को भी अलर्ट कर दिया गया है. इस अज्ञात इन्फेक्शन के चलते हाई अलर्ट घोषित किया गया है. केरल में हुई रहस्यमयी मौतों का कारण 'निपाह वायरस (NiV)' को बताया गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने निपाह को एक उभरती बीमारी करार दे चुका है. WHO के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ की एक नस्ल में पाया जाता है. यह वायरस उनमें प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है. चमगादड़ जिस फल को खाती है, उनके अपशिष्ट जैसी चीजों के संपर्क में आने पर यह वायरस किसी भी अन्य जीव या इंसान को प्रभावित कर सकता है. ऐसा होने पर ये जानलेवा बीमारी का रूप ले लेता है. ये वायरस तीन फलों में हो सकता है. ऐसे में इन्हें भूलकर भी न खाएं.

केरल से आने वाले फल
केरल में फैले निपाह वायरस से फिलहाल दिल्ली में कोई खतरा नहीं है. लेकिन, चिकित्सकों का कहना है कि लोगों को बचाव के उपाय जरूर कर लेने चाहिए. केरल से जो केले आ रहे हैं, उनको खाने से बचें. अगर खाना ही है तो अच्छे से धोकर खाएं. क्योंकि, उत्तर भारत में ज्यादातर केले, केरल से आते हैं. ऐसे में इन्हें खाना सेहत के लिए सही नहीं है.

धोकर खाएं खजूर और आम
खजूर और आम को भी धोकर खाएं. रमजान के महीने में खजूर सबसे ज्यादा खाए जाते हैं. दिल्ली में बड़ी मात्रा में केले और खजूर केरल से मंगाए जाते हैं. निपाह वायरस से प्रभावित केरल के कालीकट और मल्लापुरम जिले में केले और खजूर की बड़ी मात्रा है. एम्स के डॉक्टर्स की टीम यहां जांच कर रही है. ऐसे में यहां से आने वाले फलों को ध्यान से खाना चाहिए.

क्या हैं निपाह (NiV) के लक्षण
मनुष्‍यों में निपाह वायरस, encephalitis से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से ब्रेन में सूजन आ जाती है. बुखार, सिरदर्द, चक्‍कर, मानसिक भ्रम, कोमा और आखिर में मौत, इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं. 24-28 घंटे में यदि लक्षण बढ़ जाए तो इंसान को कोमा में जाना पड़ सकता है. कुछ केस में रोगी को सांस संबंधित समस्‍या का भी सामना करना पड़ सकता है.

भारतीय सेना भी चिंतित
केरल के कोजिकोडे जिले में फैले निपाह वायरस ने भारतीय सेना को भी चिंता में डाल दिया है. निपाह वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सेना के डायरेक्‍टर जनरल आफ मेडिकल सर्विसेस की तरफ से एक एडवाइजरी आर्मी के सभी छह कमांड हेडक्‍वाटर्स को भेजी गई है. सेना की एडवाइजरी में बताया गया है कि निपाह वायरस के संक्रमण से अब तक केरल के कोजिकोडे जिले में अब तक तीन मौतें हो चुकी है. हालांकि केरल सरकार ने निपाह वायरस से दस लोगों के मौत की पुष्टि की है.

सेना ने दी जवानों को सलाह
केरल सहित भारत में इस वायरस को पहली बार डि‍टेक्‍ट किया गया है. सेना ने अपने सभी सैनिकों और अधिकारियों को सलाह दी है कि इस संक्रमण से बचने के लिए चमगादड़ और सुअर से दूरी बनाकर रखें. सेना ने खास तौर पर अपने सैनिकों को ताकीत किया है कि संक्रमित इलाकों में पेड़ो से जमीन पर गिरे फलों का सेवन बिल्‍कुल भी न करें. इन फलों के खाने से वे संक्रमण का शिकार हो सकते हैं.

डेंगू और चिकनगुनिया एक आम समस्या है लेकिन ध्यान न दिया जाए तो यह जानलेवा हो सकती है। क्या हैं इसके लक्षण और कैसे बचें इस...
03/10/2017

डेंगू और चिकनगुनिया एक आम समस्या है लेकिन ध्यान न दिया जाए तो यह जानलेवा हो सकती है। क्या हैं इसके लक्षण और कैसे बचें इससे, जानें।
मौसम बदलने के साथ ही लोगों को बुखार और ज़ुकाम के अलावा कई तरह की बीमारियां परेशान करने लगती हैं। इन दिनों चिकनगुनिया और डेंगू होने का खतरा भी बढ़ जाता है और कई बार हम पहचान नहीं पाते हैं कि रोगी को चिकनगुनिया या डेंगू बुखार है या फिर सामान्य बुखार है। ऑनक्वेस्ट लैबोरेट्रीज़, नई दिल्ली के डॉ. रवि गौर बता रहे हैं, चिकनगुनिया, डेंगू और सामान्य बुखार के बीच अंतर, जिससे पता लगाया जा सकता है कि रोगी को कौन-सा बुखार है।

1. चिकनगुनिया और डेंगू बुखार के लक्षण लगभग एक जैसे ही होते हैं लेकिन डेंगू चिकनगुनिया की तुलना में ज्य़ादा खतरनाक होता है। चिकनगुनिया की वजह से होने वाला दर्द कुछ महीनों या वर्षों तक बना रह सकता है। चिकनगुनिया 1 से 12 दिन तक रहता है लेकिन इसके लक्षण कई दिनों तक शरीर में मौज़ूद रहते हैं जैसे कि जोड़ों का दर्द। डेंगू 3 से 7 दिन तक रहता है लेकिन डेंगू में कमज़ोरी बहुत ज्य़ादा होती है क्योंकि शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या लगातार गिरती रहती है। सामान्य बुखार में तापमान कुछ समय बाद कंट्रोल हो जाता है।

2. चिकनगुनिया में बुखार, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द और आंखों में तकलीफ जैसी समस्याएं होती हैं जबकि डेंगू में त्वचा पर रैशेज़ कम होते हैं और आंखों पर भी कम असर पड़ता है। वहीं सामान्य बुखार में सिर्फ शरीर का तापमान बढ़ता है और खांसी हो सकती है। चिकनगुनिया एक वायरस है, जो मच्छर के काटने से होता है। जैसे ही वायरस शरीर में प्रवेश करता है, वैसे ही बुखार, खांसी, ज़ुकाम के लक्षण पनपने लगते हैं।

3. चिकनगुनिया में हाथ-पैरों के जोड़ों में दर्द होता है और सूजन भी आ जाती है। साथ ही दर्द सुबह के व$क्त ज्य़ादा होता है। वहीं डेंगू में कमर की मांसपेशियों में दर्द होता है और कंधे व घुटने में भी दर्द बना रहता है। सामान्य बुखार में ऐसा नहीं होता।
बचाव है ज़रूरी
शरीर को पूरी तरह ढककर रखें। इस मौसम में फुल स्लीव्स कपड़े पहनें।
आप चाहें ऑफिस में हो या घर पर, आपका बच्चा पार्क में हो या स्कूल में या आप शॉपिंग कर रही हों या फिर मॉल जैसी सार्वजनिक जगह पर हों, मच्छर-रोधी क्रीम का इस्तेमाल करके ही घर से बाहर निकलें।
कुछ लोगों को इसके लोशन या क्रीम से चिपचिपाहट महसूस होने लगती है। ऐसे में बाज़ार में मिलने वाले स्प्रे का भी इस्तेमाल कर सकती हैं, जिससे आपका घर रहेगा मच्छर-रहित।
मार्केट में आजकल रिस्ट बैंड और पैचेज़ भी उपलब्ध हैं। ये उन बच्चों के लिए हैं, जो जेल या क्रीम लगवाने में आनाकानी करते हैं। ये उनके लिए बेहतर विकल्प हैं। पैच को सिर्फ कपड़ों पर लगाना होता है, जिससे मच्छर दूर भाग जाएंगे।
जेल एलोवेरा और सिट्रोनेला के गुणों से भरपूर है। इसे यूज़ करने से किसी तरह की स्किन एलर्जी नहीं होती।

अगर आप भी ब्लड प्रेशर से परेशान है तो इस चमत्कारी औषिधि नारियल के बारे मे बहुत कम जानते हैनारियल पानी आपके शरीर को ठंडा ...
18/06/2017

अगर आप भी ब्लड प्रेशर से परेशान है तो इस चमत्कारी औषिधि नारियल के बारे मे बहुत कम जानते है
नारियल पानी आपके शरीर को ठंडा तो करती ही है साथ ही डायजिस्टिव सिस्टम को भी स्ट्रांग बनाती है। इस पानी के कारण आपका हार्ट भी सही ढंग से काम करता है। नारियल पानी की मदद से शरीर के हर दाग-धब्बे मिटाए जा सकते हैं। जो लोग किसी कारण आग की चपेट में आकर जल जाते हैं या फिर किसी एक्सीडेंट के कारण उन्हें दाग को झेलना पड़ता है, ऐसे लोगों को नारियल पानी का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। यह हर तरह के नए-पुराने निशान मिटाने में सक्षम है।

क्या है फायदा

नारियल पानी की मदद से हम अपने शरीर को हाइड्रेट करने में मदद कर सकते हैं। इसलिए कहते हैं कि तप-तपाती गर्मी के मौसम में नारियल का पानी किसी अमृत से कम नहीं है। यह आपके शरीर के अंदर जाकर तुरंत उसे ठंडा बनाता और एनर्जी देता। सादा पानी की जगह इस पानी को रोज़ पिएं और फायदा देखें।
ध्यान रहें, सिर्फ एक या दो दिन ही नहीं, बल्कि रोजाना एक ग्लास नारियल पानी पिएं। एक हफ्ते में शरीर का ब्लड प्रेशर बहुत नॉर्मल हो जाएगा और भविष्य में दोबारा इसके लिए दवा लेने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
मोटे लोगों के लिए नारियल पानी सबसे बेस्ट मानी जाती है अपना वजन कम करने के लिए। मोटापा में घंटों-घंटों भर अपना पसीना बहाने के बजाय इस पानी को पीया करें और फिर देखें कमाल, आपका वजन बड़ी तेज़ी से घटता चला जाएगा। नारियल पानी को अगर हम ‘कैलोरी-फ्री’ ड्रिंक कहे तो गलत नहीं होगा।
नारियल पानी में पोटैशियम की मात्रा मौजूद होती है। यह तो हम सभी जानते हैं कि पोटैशियम हमारे शरीर के लिए सबसे जरूरी मिनरल होती है। अगर रोजाना नारियल पानी पिएं तो यह कमी भी पूरी हो सकती है।
बता दें कि अगर आप एक हफ्ते भी नारियल पानी को पिएंगे, तो आपके शरीर में मैग्निशियम की कमी पूरी भी हो जाएगी। इससे इतना मैग्निशियम मिल सकता है कि आने वाले कई सालों तक बड़ी-बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है।

दिल से लेकर दिमाग तक सब ‘खराब’ कर देंगे ये फास्ट फूड फास्ट फूड के शौकीन  : फ़ास्ट फ़ूड एक ऐसी चीज़ हैं जो सभी को पसंद होता ...
16/06/2017

दिल से लेकर दिमाग तक सब ‘खराब’ कर देंगे ये फास्ट फूड


फास्ट फूड के शौकीन : फ़ास्ट फ़ूड एक ऐसी चीज़ हैं जो सभी को पसंद होता हैं. लोगों को घर के खाने से ज्यादा बाहर का फ़ास्ट फ़ूड खाना पसंद होता हैं. फास्ट फूड के शौकीन लोग ज्यादातर पिज्जा, बर्गर, सैंडविच, चिप्स, फ्रेंच फ्राइज खाते हैं. ये सारी चीजें खाने में तो बहुत स्वादिष्ट लगती हैं. लेकिन ये हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है. इन फ़ास्ट फ़ूड को खाने से बहुत से तरह की बीमारियां हो जाती है.

आप भी अगर फ़ास्ट फ़ूड लवर हैं तो आज हम आपको इन फूड से होने वाली बीमारियों के बारें में जो कि हमारे लिए बहुत खतरनाक है.

पिज्जा

आज के समय में पिज्जा चलन में आ गया हैं. खासकर बच्चों और युवाओं में ये बहुत पसंद किया जाता हैं. लेकिन शयद आप इससे होने वाली बीमारी से अंजान है इसी लिए आप से बहुत चाव से खाते हैं. असल में पिज़्ज़ा को रोजाना खाने से दिल संबंधी बीमारी हो सकती है. इसमें कोलेस्ट्रोल के कारण आपकी आर्ट्रीज बंद हो सकती हैं और इससे हार्ट अटैक भी आ सकता है.

बर्गर

बर्गर खाने से तो मजेदार लगता है लेकिन ये भी हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं बर्गर खाने से वजन तो बढ़ता ही है साथ ही दिल की बीमारी भी होती है बर्गर सीधा हमारे शरीर के डाइटरी कोलेस्ट्रोल को तेजी से बढ़ाता है.

मोमोज

मोमोज खाने में बहुत लाजवाब लगता हैं. यह मैदे से बनाया जाता हैं. मैदे में हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है इसलिए मोमोज खाने से शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है. जिससे डायबिटीज होने का खतरा हो जाता है.

चाउमीन

चाइनीज फूड सबसे अधिक लोकप्रिय हो गया है, फिर बात अगर चाउमीन की हो तो क्या कहना. बच्‍चे हों या युवा या फिर बुजुर्ग सभी इसके दीवाने हैं। लेकिन स्‍वाद के दीवाने शायद ये नहीं जानते है कि स्‍वादिष्‍ट स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक हो सकता है. चाइनीज फूड में सोडियम की अधिक मात्रा और स्‍वाद को बढ़ाने के लिए किया जाने वाला अजीनोमोटो और सोया उत्‍पादों का इस्‍तेमाल शरीर के लिए धीमा जहर है.

सरसों का तेल दिल के लिए लाभकारीआवश्यक वसा अम्ल और प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट्स के आदर्श अनुपात वाला सरसों का तेल स्वास्थ्यव...
09/06/2017

सरसों का तेल दिल के लिए लाभकारी

आवश्यक वसा अम्ल और प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट्स के आदर्श अनुपात वाला सरसों का तेल स्वास्थ्यवर्धक खाद्य तेलों में से एक है, जो दिल के लिए बेहद लाभकारी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्वाद से तीखे सरसों के तेल में लगभग 60 प्रतिशत मोनोसैचुरेटेड वसा अम्ल (एमयूएफए), 21 प्रतिशत पॉलीअनसेचुरेटेड वसा (पीयूएफए) और लगभग 12 प्रतिशत संतृप्त वसा होती है

द्वारका स्थित वेंकटेश्वर अस्पताल की रीति कपूर ने आईएएनएस से कहा, “स्वास्थ्यवर्धक वसा कहलाने वाले उच्चस्तरीय एमयूएफए और पीयूएफए अच्छे कोलेस्ट्रॉल को सुधारने के साथ ही हृदय के स्वास्थ्य और निम्न बुरे कोलेस्ट्रॉल को भी ठीक स्तर पर बनाए रखता है।”

इसके अलावा इसमें 1:2 आदर्श अनुपात में छह प्रतिशत ओमेगा-3 वसा अम्ल (एन-3) और 15 प्रतिशत ओमेगा-6 (एन-6) सहित दो आवश्यक वसा अम्ल होते हैं। ये हृदय के लिए बहुत लाभकारी माने जाते हैं, क्योंकि ये कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित करते हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि सरसों का तेल शरीर में ट्राइग्लीसराइड्स (रक्त में पाया जाने वाला वसा) को कम कर हृदय को स्वस्थ रखता है।

गुड़गांव में कोलंबिया एशिया अस्पताल की पोषण विशेषज्ञ परमीत कौर ने आईएएनएस से कहा, “हृदय अनुकूल तेल को कोलेस्ट्रॉल और असंतृप्त वसा रहित, निम्न संतृप्त वसा, उच्च मोनोअनसैचुरेटेड वसा और पॉलीअनसेचुरेटेड वसा युक्त होना चाहिए। इसके अलावा तेल में एन6 से एन3 अम्ल का आर्दश अनुपात होना चाहिए। सरसों का तेल इन सभी मानदंडों को पूरा करता है।”

इस शोध के अनुसार, खाना पकाने में सरसों के तेल के उपयोग से हृदय रोग के सबसे सामान्य प्रकार कोरोनरी आर्टरी डिसीस (सीएडी) की संभावना लगभग 70 प्रतिशत तक कम हो जाती है।

यह रक्त के प्रवाह को ठीक करने और शरीर को उच्च रक्तचाप से बचाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरसों का तेल जैतून तेल से भी अधिक फायदेमंद हो सकता है। इसके साथ ही यह वनस्पति तेल जैसे अन्य रिफाइंड तेल से भी बेहतर होता है।

पुरी ऑइल मिल्स लिमिटेड के डीजीएम (कॉर्पोरेट कम्यूनिकेशंस) उमेश वर्मा का मानना है, “पांच गुना महंगे जैतून के तेल में ओमेगा-6 (एन6) और ओमेगा-3 (एन3) वसा अम्ल आर्दश अनुपात नहीं होता है, जो हृदय की जलिटलताओं को रोकने में कारगर होता है। जबकि सरसों के तेल में इसका अनुपात 1.2 का होता है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुसंशित अनुपात 1.25 के काफी करीब है।”

सरसों के तेल का इस्तेमाल भोजन के अलावा कई अन्य कामों जैसे शरीर और नवजात शिशुओं और वयस्कों के शरीर और बाल की मालिश में किया जाता है। इसका पेट और त्वचा के रोगों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

तेल के उत्पादन के दौरान बीटा कैरोटीन विटामिन ए में परिवर्तित हो जाता है, जो बालों को बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा है। इसके अलावा इसमें लौह तत्व, वसा अम्ल, कैल्शियम और मैग्नीशियम भी पाए जाते हैं, जो बालों के पोषण में मदद करते हैं।

दुनिया में तबाही मचाने के बाद जीका ने मारी भारत में एंट्री, डब्ल्यूएचओ ने की पुष्टि दुनिया में तबाही मचाने के बाद अब भार...
29/05/2017

दुनिया में तबाही मचाने के बाद जीका ने मारी भारत में एंट्री, डब्ल्यूएचओ ने की पुष्टि
दुनिया में तबाही मचाने के बाद अब भारत में जीका वायरस प्रवेश कर चुका है। इस बात का खुलासा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने किया। डब्ल्यूएचओ ने अहमदाबाद में तीनों मामलों की पुष्टि की है। सभी मामले शहर के बापूनगर इलाके के बताए जा रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ की साइट के मुताबिक देश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुजरात में अहमदाबाद के बापूनगर इलाके में जीका वायरस के तीन मामले पाए हैं।

अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेज में आरटी-पीसीआर टेस्ट के माध्यम से जीका वायरस के मामलों की पुष्टि की गई है।

इससे पहले जनवरी में पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वीरोलॉजी की लैब में आरटी-पीसीआर टेस्ट में इसकी पुष्टि हुई थी।

बीते साल 10-16 फरवरी के बीच हुए एक्यूट फर्बाइल इलनेस (एएफआई) सर्विलांस के दौरान अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेज में कुल 93 खून के सैंपल लिए गए थे। एक सैंपल 64 वर्षीय पुरुष का था, जिसमें 8 दिन की फर्बाइल इलनेस सामने आई। यहां उसे पॉजिटिव पाया गया था।
9 नवंबर 2016 को 34 साल की महिला ने बीजे मेडिकल कॉलेज में शिशु को जन्म दिया। सब कुछ ठीक था, लेकिन डिलीवरी के बाद अस्पताल में रुकने के दौरान उसे हल्का बुखार हुआ। रिकॉर्ड में गर्भवती होने के दौरान न तो उसे बुखार था और न ही पिछले तीन महीनों में रहा था। उसकी ओर से यहां के वायरल रिसर्च और डायग्नॉस्टिक लैबोरेट्री (वीआरडीएल) में एक सैंपल डेंगू के टेस्ट के लिए दिया गया। बाद में उसमें जीका वायरस पॉजिटिव पाया गया।
इसी साल जनवरी में 6-12 तारीख के बीच एंटेनैटल क्लीनिक (एएनसी) सर्विलांस चला था। 111 खून के सैंपल उसमें लिए गए थे, जिसमें 22 साल की एक गर्भवती महिला में जीका वायरस की पुष्टि हुई थी।
ख़बरों के मुताबिक अहमदाबाद नगर निगम में एंटोमोलाजिस्ट डा। विजय कोहली ने बताया कि उन्होंने भी कुछ घंटों पहले ही रिपोर्ट पढ़ी है और फिलहाल उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

उन्होंने कहा कि मामले से निपटने के लिए एहतियात बरतना होगा। मच्छरों को जड़ से मिटाने के लिए काम करना होगा।

वहीं गांधीनगर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ (आईआआईपीएफ) में एडिश्नल प्रोफेसर डा। दीपक बी सक्सेना ने बताया कि हमें अब और भी सर्तक रहना होगा।

जीका और डेंगू इसी वायरस से फैलता है। जीका ऐसे में आसानी से फैल सकता है। हमारे आसपास खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में हमें इसकी निगरानी के लिए कोई व्यवस्था चाहिए।

संगठन की साइट यह भी बताती है कि जीका वायरस ने निपटने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स भी गठित की गई है।

इसमें उनके साथ बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सचिव और स्वास्थ्य शोध विभाग के सचिव भी होंगे। यह जीका के बढ़ते मामलों पर निगाह रखेंगे।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शंकर चौधरी और स्वास्थ्य अधिकारी से जब इस बारे में तलब करने की कोशिश की गई तो कोई जवाब न मिल सका।

जीका से निपटने के लिए डब्ल्यूएचओ ने सलाह देते हुए बताया है कि लोगों को इससे बचाव की आवश्यकता है। इसके लिए मच्छरों को पनपने नहीं देना चाहिए। हल्के रंग के और ढंके हुए कपड़े पहनें। घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें, जिससे मच्छर घर में न घुस पाएं। मॉस्कीटो रेपेलेंट का इस्तेमाल करें।

इन घरेलू उपायों से एक मि‍नट में दूर हो जाएगा सिर दर्द तेज़ पत्ती की काली चाय में निम्बू का रस निचोड़ कर पीने से सर दर्द ...
24/05/2017

इन घरेलू उपायों से एक मि‍नट में दूर हो जाएगा सिर दर्द
तेज़ पत्ती की काली चाय में निम्बू का रस निचोड़ कर पीने से सर दर्द में अत्यधिक लाभ होता है.

२ .नारियल पानी में या चावल धुले पानी में सौंठ पावडर का लेप बनाकर उसे सर पर लेप करने भी सर दर्द में आराम पहुंचेगा.

३. सफ़ेद चन्दन पावडर को चावल धुले पानी में घिसकर उसका लेप लगाने से भी फायेदा होगा.

४. सफ़ेद सूती का कपडा पानी में भिगोकर माथे पर रखने से भी आराम मिलता है.

५. लहसुन पानी में पीसकर उसका लेप भी सर दर्द में आरामदायक होता है.

६. लाल तुलसी के पत्तों को कुचल कर उसका रस दिन में माथे पर २ , ३ बार लगाने से भी दर्द में राहत देगा.

७. चावल धुले पानी में जायेफल घिसकर उसका लेप लगाने से भी सर दर्द में आराम देगा.

८. हरा धनिया कुचलकर उसका लेप लगाने से भी बहुत आराम मिलेगा.

९ .सफ़ेद सूती कपडे को सिरके में भिगोकर माथे पर रखने से भी दर्द में राहत मिलेगी.

02/04/2017

*लू लगना*

लू लगने से मृत्यु क्यों होती है?

हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगो की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है?

👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है।

👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है।

👉 पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है।( बंद कर देता है )

👉 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है।

👉 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त मे उपस्थित प्रोटीन पकने लगता है .

👉 स्नायु कड़क होने लगते है इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते हैं।

👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन ) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है।

👉 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक- एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है।

👉गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोडा थोडा पानी पीते रहना चाहिए, और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए।
Equinox phenomenon: इक्विनॉक्स प्रभाव आने वाले दिनों में भारत को प्रभावित करेगा।

कृपया 12 से 3 के बीच ज्यादा से ज्यादा घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें।

तापमान 40 डिग्री के आस पास विचलन की अवस्था मे रहेगा।

यह परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यातप की स्थिति उत्पन्न कर देगा।

(ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है।)

कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें।

किसी भी अवस्था मे कम से कम 3 ली. पानी जरूर पियें।किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 ली. पानी जरूर लें।

जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें। किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है।

ठंडे पानी से नहाएं। मांस का प्रयोग छोड़ें या कम से कम करें।

फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें।

हीट वेव कोई मजाक नही है।

एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है।

शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है।

अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें।

जनहित मे इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें।

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24/03/2017

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