Board of Naturopathy and Yoga Systems of Medicine-BNYSM नेचुरोपैथी एंड योगा

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Board of Naturopathy and Yoga Systems of Medicine-BNYSM नेचुरोपैथी एंड योगा नमस्कार अब आप भी नेचुरोपैथी योग के मान It does not substitute proper treatment under expert medical guidance.

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हमें यह ज्ञात हो चुका है कि रोगों का इलाज हमारे चारों ओर उपस्थिति प्राकृतिक तत्वों की सहायता से किया जा सकता है। इन्हीं तत्वों के कारण ही हमारा जीवन चलता रहता है। यदि किसी कारणवश यह अंसतुलित हो जाता है तो हमारा स्वास्थ्य खराब हो जाता है। एक ऐसी प्राचीन चिकित्सा प्रणाली जो बिना दवाओं के ही, व्यायाम, विश्राम, स्वच्छता, उपवास, आहार, पानी, हव

ा, प्रकाश, मिट्टी आदि के संतुलित उपयोग से ही शरीर को रोगों से मुक्त कर देती है तथा व्यक्ति को स्वस्थ और दीर्घ जीवन का रास्ता दिखाती है वह ``प्राकृतिक चिकित्सा`` पद्धति कहलाती है....कई रोगों की प्राकृतिक चिकित्सा - Yoga and Naturopathy:
योग और नेचुरोपैथी – बेहतर स्वास्थ्य पाने का प्राकृतिक तरीका
आज के समय में औद्योगीकरण का विकास और टेक्नोलॉजी ने मानव जीवन के सामने ऐसी स्थितिया पैदा करदी है जिसके चलते लोगो ने अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना बिलकुल छोड़ दिया है| यदि हम स्वास्थ्य की बात करे तो अच्छा स्वास्थ्य पाना कोई एक दिन का खेल नही है, इसके लिए आपका सालो का प्रयास, आत्म नियंत्रण और इच्छा शक्ति चाहिए होती है|
स्वस्थ शरीर का बहुत अधिक महत्व है| यह खुशी का एक स्त्रोत है जो हमें अपने प्रियजनों के साथ मिलनसार बातचीत का माहौल बनाने में मदद करता है। एक अच्छा स्वास्थ्य मनुष्य को प्रकृति द्वारा दिया गया सबसे अच्छा उपहार है| लेकिन आज के वक्त में व्यक्ति अपनी यांत्रिक जीवन शैली में इतना अधिक व्यस्त होता जा रहा है की उसने खुद को प्रकृति से बिलकुल विमुख कर दिया है|
एक अच्छे स्वास्थ्य से धनि होने के लिए व्यक्ति प्रकृति द्वारा दिए गए रिसोर्सेज को इस्तेमाल करने के बजाय उल्टा उससे दूर जा रहा है| अच्छे स्वास्थ्य से उन्मुख होने के कारण आज कम उम्र के लोगो में ही मोटापा व अन्य बीमारिया देखने को मिल रही है| इस निराशाजनक स्थिति में यदि फिर भी कोई उम्मीद की किरण है तो वो है प्राकृतिक चिकित्सा और योग| इसलिए आज हम बात करेंगे Yoga and Naturopathy के बारे में|

योग और नेचुरोपैथी एक अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करने में मदद करते है साथ ही जीवन की गुणवत्ता भी बढाते है| कई सारी बीमारिया जो की आधुनिक युग ने दी है जैसे की स्ट्रोक, कैंसर, मधुमेह, गठिया आदि नियंत्रित होती है और अन्य रोंग भी नहीं होते है|
नेचुरोपैथी एक प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली है जिसमे दवाओ का उपयोग किये बिना रोगों को ठीक किया जाता है| यह एक प्राचीन और पारंपरिक विज्ञान है जो हमारे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक पहलुओं को एकीकृत करता है। नेचुरोपैथी में कई रोगों को रोकने की क्षमता है और जो रोंग हो चुके है उसका इलाज आप कर सकते है|
Naturopathy Treatment का मुख्य उद्देश्य लोगो को अपनी दिनचर्या बदलकर स्वस्थ रहने की कला सिखाना है| इससे ना केवल आपके रोंग ठीक होते है बल्कि आपका शरीर भी मजबूत बनता है और आपके चेहरे पर चमक आती है|
नेचुरोपैथी में क्या तकनीक शामिल होती है?
इसका चार भागो में वर्गीकरण किया गया है:-
• भोजन
• मिट्टी
• पानी
• और मालिश थेरेपी
आप यह भी पढ़ सकते है:- जानिए योग क्या है और इसके समस्त प्रकारों का वर्णन
खाद्य थेरेपी: खाद्य थेरेपी की बात की जाये तो हम इसमें कोशिश करते है की जितना संभव हो किसी भी आहार को उसके प्राकृतिक रूप में ही खाया जाये| प्राकृतिक रूप में सेवन करने पर कई खाद्य पदार्थ अपने आप में एक दवा है| आपको इसमें मुख्य रूप से लेना है ताजे फल, ताजा हरी पत्तेदार सब्जियां और अंकुरित अनाज|
आहार को लेना ही काफी नहीं है आपको इस बात पर गौर करना होगा की किस चीज़ को कितने अनुपात में लेना है| साथ ही आपको अपने पेट का कुछ हिस्सा खाली भी छोड़ना जरुरी है|
मिट्टी थेरेपी: शरीर से मादक द्रव्यों निकालने के लिए, मिट्टी का स्नान और मिट्टी का लैप दोनों का इस्तेमाल किया जाता है| यह विशेष रूप से उच्च रक्तचाप, तनाव, सिर दर्द, चिंता, कब्ज, गैस्ट्रिक और त्वचा विकार आदि बीमारियों के लिए किया जाता है| Mud Therapy in Naturopathy बहुत ही प्रभावी है|
जल चिकित्सा: नेचुरोपैथी में जल चिकित्सा भी अपनाई जाती है जिसमे स्वच्छ, ताजे और ठंडे पानी का उपयोग किया जाता है| इस उपचार के बाद, शरीर ताजा और सक्रिय महसूस करता है। इस चिकित्सा के अलग अलग बीमारियों के लिए अलग अलग परिणाम है|
1. हिप बाथ आपके जिगर, बड़ी आंत, पेट, और गुर्दे की दक्षता में सुधार करता है|
2. फुल स्टीम बाथ आपकी त्वचा के पोर्स को खोलता है और मादक द्रव्यों को बाहर निकालता है|
3. एक हॉट फूट बाथ आपको अस्थमा, घुटने के दर्द, सिर दर्द, अनिद्रा, और मासिक धर्म जैसी अनियमितताओं के साथ मदद करता है|
4. इसके अलावा पुरे शरीर की पानी से मालिश की जाती है जिससे विषाक्त पदार्थो को शरीर से दूर किया जाता है|
नेचुरोपैथी कई बीमारियों को दूर करने और रोगों से राहत दिलाने में मदद करती है| जो भी व्यक्ति रिलैक्स होना चाहते है वो इसका इस्तेमाल कर सकते है| इस बात में कोई संदेह नहीं है की यह अपने आप में चिकित्सीय पद्धति है|
ऊपर आपने जाना Yoga and Naturopathy उपरोक्त बताई गयी बातो से आप जान गए होंगे की नेचुरोपैथी आपके लिए कितनी फायदेमंद है और योग के बारे में तो हम शुरुवात से ही बात करते आ रहे है| योग भी एक प्राकृतिक पद्धति है जो हमें कई बीमारियों से निजात दिलाने में मदद करती है|
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सहज, सरल , स्वस्थ , घरेलु उपचार बिना साइड इफेक्ट ,बिना दुष्प्रभाव होम रेमेडी आप सभी के लिए अपनो के लिये !
हम यह जानकारी देना चाहते है कि आप घरेलू दवाओ का उपयोग करके भी स्वस्थ रह सकते हैं ।यहाँ पर दी जानकारी की सत्यता को प्रमाणित नहीं किया गया है | और न ही किसी लीगल या सरकारी संस्था द्वारा इसे प्रमाणित किया गया है | यहाँ पर दी गयी सलाह या जानकारी आपके ज्ञानवर्धन के लिए है और इसे इस्तेमाल करने से पहले किसी विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही इस्तेमाल करे | किसी भी नुक्सान के लिए वेबसाइट या इससे जुड़े हुए लोग जिम्मेदार नहीं हैं |यहाँ पर कई लेखकों द्वारा जानकारी प्रकाशित की गयी है जिसकी सत्यता और कॉपीराइट के बारे में हमें जानकारी नहीं हैं

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With All India Naturopathy and Yoga Research Council-AINYRC – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
15/07/2025

With All India Naturopathy and Yoga Research Council-AINYRC – I just got recognized as one of their top fans! 🎉

🧘‍♀️ Board of Naturopathy and Yoga Systems of Medicine-BNYSM नेचुरोपैथी एंड योगा presents प्राकृतिक चिकित्सा और योग में ...
15/07/2025

🧘‍♀️ Board of Naturopathy and Yoga Systems of Medicine-BNYSM नेचुरोपैथी एंड योगा presents प्राकृतिक चिकित्सा और योग में करियर का रास्ता:
D.N.Y.S. और C.N.Y.S. कोर्स क्या हैं? पूरी जानकारी यहां पढ़ें! 👇

आज के समय में नेचुरोपैथी और योग न केवल एक हेल्दी लाइफस्टाइल का जरिया हैं, बल्कि एक प्रोफेशनल करियर का मजबूत विकल्प भी बनते जा रहे हैं। यदि आप मेडिकल लाइन में जाना चाहते हैं लेकिन MBBS या BAMS संभव नहीं हो पा रहा — तो ये कोर्स आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं।

📘 1️⃣ D.N.Y.S. (Diploma in Naturopathy & Yogic Sciences)
⏳ अवधि: लगभग 3 से 3.5 वर्ष
🎯 उद्देश्य: प्राकृतिक चिकित्सा, योग, आहार-विज्ञान, हाइड्रोथेरेपी, एक्यूप्रेशर आदि का गहन अध्ययन
🏥 पाठ्यक्रम में शामिल हैं:

एनाटॉमी व फिजियोलॉजी (मानव शरीर की संरचना और क्रिया)

योगिक साइंस, प्राणायाम व ध्यान

नेचुरल थैरेपी, हर्बल मेडिसिन

न्यूट्रिशन (आहार चिकित्सा)

केस स्टडी व क्लिनिकल प्रैक्टिस

👩‍⚕️ कौन कर सकता है:
10वीं/12वीं पास छात्र, आयुर्वेद या हेल्थ सेक्टर में रुचि रखने वाले व्यक्ति

💼 कैरियर विकल्प:

योग और नेचुरोपैथी क्लिनिक खोल सकते हैं

हेल्थ वेलनेस सेंटर में काम

हेल्थ काउंसलर या थेरेपिस्ट

सरकारी/NGO प्रोजेक्ट्स में स्वास्थ्य सेवाएं

📗 2️⃣ C.N.Y.S. (Certificate in Naturopathy & Yogic Sciences)
⏳ अवधि: 1 वर्ष
🎯 उद्देश्य: योग और प्राकृतिक चिकित्सा की बुनियादी समझ
📚 टॉपिक्स:

योगासन, प्राणायाम, मेडिटेशन

हर्बल होम रेमेडीज़

बेसिक न्यूट्रिशन एंड डाइट प्लानिंग

सस्ती और प्राकृतिक स्वास्थ्य विधियाँ

✅ कौन कर सकता है:
कोई भी इच्छुक व्यक्ति — छात्र, गृहिणी, योग शिक्षक, हेल्थ वर्कर आदि

💼 उपयोग:

खुद और अपने परिवार की हेल्थ बेहतर करने के लिए

छोटे स्तर पर योग क्लास या काउंसलिंग शुरू करने के लिए

आगे D.N.Y.S. या BNYS जैसी पढ़ाई में प्रवेश हेतु बेस बनाना

⚠️ ध्यान रखें:
🔍 इन कोर्सेज को चुनते समय यह जरूर जांचें कि संस्थान और बोर्ड मान्यता प्राप्त (recognized) हैं या नहीं। कुछ जगह केवल सर्टिफिकेट दिया जाता है लेकिन उसका औपचारिक मूल्य नहीं होता।

🎓 डिग्री और गवर्नमेंट जॉब की चाह हो तो BNYS जैसे मान्यताप्राप्त डिग्री कोर्स चुनें।

💬 अगर आप हेल्थ सेक्टर में सेवा करना चाहते हैं लेकिन MBBS जैसी पढ़ाई संभव नहीं, तो D.N.Y.S. और C.N.Y.S. आपके लिए एक नई शुरुआत का रास्ता बन सकते हैं।

#योगचिकित्सा #प्राकृतिकचिकित्सा

क्या दही में नमक डालकर खाना हानिकारक है? जानिए आयुर्वेद क्या कहता है?हाल ही में एक चर्चा तेज़ी से फैल रही है कि दही में ...
10/07/2025

क्या दही में नमक डालकर खाना हानिकारक है? जानिए आयुर्वेद क्या कहता है?

हाल ही में एक चर्चा तेज़ी से फैल रही है कि दही में नमक डालकर खाना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इस दावे के पीछे क्या वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक तर्क हैं? आइए विस्तार से जानते हैं।

आयुर्वेद की दृष्टि से दही
आयुर्वेद के अनुसार दही एक पौष्टिक खाद्य पदार्थ है, जो वात दोष को संतुलित करता है, लेकिन यह पित्त और कफ को बढ़ा सकता है। यही कारण है कि इसे संतुलित मात्रा में और सही संयोजन के साथ खाने की सलाह दी जाती है।
दही में नमक क्यों नहीं डालना चाहिए?

आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार:
• नमक एक एंटी-बैक्टीरियल तत्व है, जो दही में पाए जाने वाले लाभकारी जीवाणुओं (प्रोबायोटिक्स) को नष्ट कर सकता है।
• ये जीवाणु हमारे पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं और एंजाइम्स की क्रिया को बेहतर बनाते हैं।
• जब आप दही में नमक मिलाते हैं, तो इन बैक्टीरिया की संख्या घट जाती है, जिससे दही के सारे लाभ लगभग समाप्त हो जाते हैं।
स्वास्थ्य पर असर
• नमक मिलाकर दही खाने से पाचन क्रिया प्रभावित हो सकती है।
• हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक और यहां तक कि डिमेंशिया जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
• जिन लोगों को हाइपरटेंशन है, उन्हें दही में नमक मिलाने से परहेज़ करना चाहिए।
दही के साथ क्या खाना चाहिए?
• दही को गुड़ या मिश्री के साथ खाना ज्यादा लाभकारी माना गया है।
• आयुर्वेद कहता है कि गुड़ मिलाने से दही में मौजूद जीवाणुओं की संख्या बढ़ती है, जिससे इसका स्वास्थ्यवर्धक गुण और भी बेहतर हो जाता है।
• भगवान श्रीकृष्ण भी दही में मिश्री डालकर खाते थे — यह परंपरा भी इसका प्रमाण मानी जाती है।

दही और खट्टे फलों का संयोजन क्यों नहीं करें?
• दही और खट्टे फलों (जैसे संतरा, नींबू, अनानास, मौसंबी) में अलग-अलग प्रकार के एंजाइम्स होते हैं।
• इन्हें एक साथ खाने से पाचन तंत्र में गड़बड़ी हो सकती है और एसिडिटी या अपच जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

निष्कर्ष:
दही एक अमूल्य स्वास्थ्यवर्धक आहार है, लेकिन इसे सही तरीके से और सही संयोजन में खाना ज़रूरी है। दही में नमक मिलाना उसकी गुणवत्ता को नष्ट कर सकता है। बेहतर होगा कि आप दही को मीठे पदार्थों जैसे गुड़ या मिश्री के साथ सेवन करें — यह स्वाद और सेहत दोनों के लिए लाभकारी रहेगा।

🧘‍♂️ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025 – एक वैश्विक सफलता 🌍Board of Naturopathy and Yoga Systems of Medicine (BNYSM), मेरठ को...
08/07/2025

🧘‍♂️ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025 – एक वैश्विक सफलता 🌍
Board of Naturopathy and Yoga Systems of Medicine (BNYSM), मेरठ को गर्व है कि हमने इस वर्ष का अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी सफलता पूर्वक मनाया।

20 जून 2025 को रोमानिया के फोकशानी (Bălcescu Park) में “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” थीम पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसका नेतृत्व जेन और उनकी टीम ने किया। यह आयोजन आयुष मंत्रालय की थीम को समर्पण, समावेशिता और सामाजिक एकता के साथ जीवंत करता है।

इस आयोजन की खास बातें:
✅ सैकड़ों नागरिक, विशेष आवश्यकता वाले बच्चे और युवा जुड़े
✅ मानसिक स्वास्थ्य, आत्म-सशक्तिकरण और समावेशिता पर प्रेरक सत्र
✅ स्थानीय प्रशासन, चिकित्सा विशेषज्ञों और मीडिया का सहयोग
✅ सभी प्रतिभागियों को BNYSM द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए
✅ “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से सम्पन्न आयोजन

BNYSM 2007 से आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार योग और प्राकृतिक चिकित्सा को वैज्ञानिक एवं प्रमाणिक रूप में समाज तक पहुंचाने के लिए कार्यरत है। हमारे प्रशिक्षक विश्वभर में स्वास्थ्य, संतुलन और समरसता का संदेश फैला रहे हैं।
🙏 हम जेन, उनकी टीम, स्वयंसेवकों, Focșani नगर प्रशासन, चिकित्सा विशेषज्ञों और सभी सहयोगियों का हृदय से धन्यवाद करते हैं।
योग से जुड़ें – जीवन से जुड़ें।

On June 20, 2025, a grand event was held at Bălcescu Park, Focșani, Romania, under the theme “One Earth, One Health”, led by Jane and her dedicated team. This event brought the AYUSH Ministry’s theme to life with dedication, inclusivity, and social unity.
Highlights of the event:
✅ Yoga loving Citizens, children with special needs, and youth participated
✅ Inspirational sessions on mental health, self-empowerment, and inclusivity
✅ Support from local administration, medical experts, and media
✅ Certificates awarded to all participants by BNYSM
✅ The event concluded with the spirit of “Vasudhaiva Kutumbakam” (The world is one family)

Since 2007, BNYSM has been working under the guidelines of the AYUSH Ministry to promote yoga and naturopathy in a scientific and authentic manner to society. Our trained instructors are spreading messages of health, balance, and harmony worldwide.

🙏 We sincerely thank Jane, her team, volunteers, the Focșani municipal administration, medical experts, and all collaborators.
Join yoga – connect with life.

🧘‍♀️– Board of Naturopathy and Yoga Systems of Medicine (BNYSM), भारत
🇮🇳🌿🌍🇷🇴

पेट में मरोड़ के कारण और इलाज - Pet Mein Marod Ke Karan Aur Ilaj in Hindi  पेट में मरोड़ का तात्पर्य पेट के किसी भी हिस्स...
27/02/2024

पेट में मरोड़ के कारण और इलाज - Pet Mein Marod Ke Karan Aur Ilaj in Hindi



पेट में मरोड़ का तात्पर्य पेट के किसी भी हिस्से में हो रहे दर्द या ऐंठन या अन्य प्रकार के पेट की सनसनी से है. पेट के मरोड़ में मध्यम, तीव्र या बार-बार आने-जाने वाला दर्द हो सकता है. पेट में मरोड़ के ज्यादातर लक्षण चिंताजनक नहीं होते हैं व इसका आसानी से पता चल जाता है और इलाज हो जाता है. पर कभी-कभी पेट दर्द या पेट में मरोड़ किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं. पेट में मरोड़ के कई कारण हो सकते हैं. यह अपच, कब्ज या पेट में वायरस के कारण हो सकते हैं. महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान भी पेट में दर्द या मरोड़ हो सकते हैं. पेट में मरोड़ का इलाज इस समस्या के कारण के आधार पर किया जाता है. आगे हम पेट में मरोड़ के कारण व उसके इलाज के बारे में जानेंगे.
पेट में मरोड़ के कारण- Pet Mein Marod Ke Karan
• गैस्ट्रोएंटराइटिस (पेट का फ्लू) के कारण: - पेट के फ्लू (गैस्ट्रोएंटराइटिस) के कारण भी पेट में दर्द या मरोड़ हो सकता है. पेट के फ्लू का ज्यादातर मामला बैक्टीरिया या वायरस के कारण होते हैं, जिसमें इनके लक्षण समान्यतः कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं. पर लक्षण यदि 2 दिन से अधिक समय तक रहे तो यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या, जैसे संक्रमण,अन्य सूजन या जलन का संकेत हो सकता है.

• गैस: - जिस खाद्य पदार्थ को शरीर पचा नहीं सकता है उसे जब छोटी आंत के बैक्टीरिया तोड़ते हैं तो आंत में गैस का दबाव बनता है. गैस के इस दबाव के बढ़ने से पेट में दर्द या मरोड़ हो सकता है. इस गैस के कारण पेट फूलना या डकार जैसी भी समस्याएँ हो सकती हैं.

• इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS): - जो लोग आईबीएस यानि इरिटेबल बाउल सिंड्रोम से पीड़ित होते हैं, वे कुछ प्रकार के खाद्य पदार्थों को पचाने में असमर्थ होते हैं. इस रोग से पीड़ित लोगों को मुख्य रूप से पेट में दर्द के लक्षण होते हैं, जो सामान्यतः मल त्याग के बाद ठीक हो जाता है. इस रोग में अन्य लक्षण गैस, मतली या पेट में फुलाव भी हो सकते हैं.

• एसिड रिफ्लक्स: - कभी-कभी पेट के एसिड पीछे की तरफ चले जाते हैं और गले तक पहुँच जाते हैं. जिस कारण से पेट में जलन और दर्द होता है. एसिड रिफ्लक्स में पेट संबंधी अन्य लक्षण जैसे फुलाव या मरोड़ भी होते सकते हैं.

• उल्टी: - किसी भी कारण से यदि उल्टी हो तो इससे पेट में दर्द या मरोड़ की समस्या हो सकती है. उल्टी से पेट में जलन भी हो सकती है.

• कब्ज: - कब्ज में आंतों में मल जमा हो जाते हैं व शरीर से बाहर नहीं निकलते हैं तब इस कारण से कॉलन में दबाव बढ़ जाता है. इस दबाव के वजह से कब्ज पीड़ित व्यक्ति के पेट में दर्द होने लगता है.

• गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डीजीज (GERD): - जिन्हें GERD यानि गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डीजीज रहता है उन्हें पेट में दर्द हो सकता है. इस बीमारी में पेट में दर्द के साथ ही छाती में जान और मतली भी हो सकती है.

• पेट या पेप्टिक अल्सर: - पेट का अल्सर या घाव यदि ठीक नहीं होते हैं तो वे पेट में गंभीर व अस्थिर दर्द पैदा कर सकते हैं. पेट या पेप्टिक अल्सर का सबसे सामान्य कारण बैक्टीरियल संक्रमण होता है. नॉन स्टेरॉयड एंटी इन्फ्लेमेटरी दवाओं (NSAIDS) का अधिक प्रयोग से भी पेप्टिक अल्सर हो सकता है.

• क्रोहन रोग: - क्रोहन रोग पाचन तंत्र के परतों में सूजन व जलन पैदा करता है, जिससे पेट में दर्द होता है. इस रोग में पेट में गैस का बनना, दस्त, उल्टी या पेट में फुलाव भी हो सकता है.

• सीलिएक रोग: - सीलिएक रोग में पेट में दर्द हो सकता है. सीलिएक रोग में ग्लूटेन से एलर्जी होने लगती है. ग्लूटेन एक प्रकार का प्रोटीन है जो कई प्रकार के अनाज जैसे गेहूँ, जौ इत्यादि में पाया जाता है. ग्लूटेन से एलर्जी होने पर छोटी आंत में सूजन व जलन होने लगती है, जिससे दर्द भी होता है. इस कारण से इस रोग में पेट में दर्द होती है.

• मांसपेशियों में खिंचाव या तनाव: - रोज के कामकाज के दौरान किसी भी कारण से यदि पेट की मांसपेशियों में चोट या खिंचाव आ जाता है तो इस कारण से पेट में मरोड़ की शिकायत हो सकती है. पेट की एकसरसाइज के कारण भी पेट की मांसपेशियों में खिंचाव हो सकता है.

• मासिक धर्म के दौरान: - मासिक धर्म के दौरान पेट में दर्द या मरोड़ की शिकायत हो सकती है. मासिक धर्म के दौरान पेट में जलन व सूजन या कब्ज जैसे समस्याएँ भी हो सकती है.

• मूत्र मार्ग या मूत्राशय में संक्रमण: - मूत्र मार्ग या मूत्राशय में बैक्टीरिया द्वारा संक्रमण के फैल जाने से भी पेट में मरोड़ की समस्या होती है. इस प्रकार संक्रमण होने से पेट के निचले हिस्से में फुलाव के अलावा दर्द व दबाव का अनुभव हो सकता है.
पेट में मरोड़ के इलाज- Pet Me Marod Ka Ilaj in Hindi
वैसे तो पेट में मरोड़ के इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि यह समस्या किस कारण से है. जिस कारण से भी पेट में मरोड़ हो उस आधार पर ही इसका सही इलाज किया जा सकता है. पर फिर भी कुछ घरेलू नुस्खे हैं जिससे पेट में मरोड़ के समस्या में आराम मिलता है. आगे ऐसे ही कुछ घरेलू नुस्खे की चर्चा करते हैं:
1. मेथी: - एक कटोरी में दही लेकर उसमें मेथी के कुछ दाने को पीसकर अच्छी तरह मिला लेना चाहिए. स्वाद के लिए इसमें थोड़ा सा काला नमक भी मिला सकते हैं. मेथी मिला इस दही के सेवन पेट की मरोड़ में लाभ पहुंचाता है.
2. ईसबगोल: - कई बार पेट में मरोड़ का कारण अपच हो सकता है. ऐसी स्थिति में दो चम्मच ईसबगोल एक कटोरी दही में मिलाकर खाना चाहिए. इससे आंतों की सफाई भी होती है व पेट की मरोड़ भी ठीक होती है.
3. आजवाइन: - पेट में मरोड़ होने पर तीन ग्राम आजवाइन को तवा पर भून कर इसमें सेंधा नमक या काला नमक मिलाकर पानी के साथ सेवन करना चाहिए. भुना हुआ आजवाइन को इस तरह दिन में दो बार सेवन करने से पेट की मरोड़ ठीक हो जाती है.
4. मूली: - पेट में मरोड़ होने पर मूली को अच्छी तरह धोकर व छीलकर छोटे-छोटे टुकड़े में काट लेना चाहिए. फिर इन टुकड़ों पर काला नमक या सेंधा नमक और काली मिर्च छिड़क कर खा लेना चाहिए. इससे पेट के मरोड़ व दर्द में आराम मिलता है.

sabhar : lybrate.com

हिलते दाँतोँ को स्थिर करेगा और पायरिया जैसी व्याधियोँ से दूर रखेगा।इसे लटजीरा, अपामार्ग और चिरचिटा भी कहते हैँ और राजमार...
23/01/2024

हिलते दाँतोँ को स्थिर करेगा और पायरिया जैसी व्याधियोँ से दूर रखेगा।
इसे लटजीरा, अपामार्ग और चिरचिटा भी कहते हैँ और राजमार्गोँ व रेलवे लाइनोँ के किनारे बहुतायत मेँ पाया जाता है।
आप लटजीरा का पौधा उगा लेँ। साथ मेँ दो-चार बार इसका एक २-३ इञ्च का डण्ठल लेकर मुंह मेँ डाल लेँ और कम से कम ४-५ मिनट चबाने के पश्चात चबाया हुआ डण्ठल थूँक देँ। यह एक दातून के समान है पर इसके पश्चात कुल्ला न करेँ और निकले हुए रस को मुँह मॅ` ही रहने देँ। यह हिलते दाँतोँ को स्थिर करेगा और पायरिया जैसी व्याधियोँ से दूर रखेगा।

जानिए कुछ ऐसी बातें जो खाना खाते समय ध्यान रखनी चाहिए…खाना खाते समय यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो स्वास्थ्य लाभ के स...
05/01/2024

जानिए कुछ ऐसी बातें जो खाना खाते समय ध्यान रखनी चाहिए…

खाना खाते समय यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो स्वास्थ्य लाभ के साथ ही देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त की जा सकती है। यहां जानिए कुछ ऐसी बातें जो खाना खाते समय ध्यान रखनी चाहिए…

1. पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुंह करके भोजन करना चाहिए। इस उपाय से हमारे शरीर को भोजन से अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
2. दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके भोजन करना अशुभ माना गया है। पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके भोजन करने से रोगों की वृद्धि होती है।
3. कभी भी बिस्तर पर बैठकर भोजन नहीं करना चाहिए। खाने की थाली को हाथ में लेकर भोजन नहीं करना चाहिए।
4. भोजन खड़े होकर नहीं, बल्कि बैठकर ही करना चाहिए। थाली को किसी बाजोट या लकड़ी की पाटे पर रखकर भोजन करना चाहिए।
5. टूटे-फूटे बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए। व्यक्ति को स्नान करके और पूरी तरह से पवित्र होकर ही खाना बनाना चाहिए।
6. खाना बनाते समय मन शांत रखना चाहिए। साथ ही, इस दौरान किसी की बुराई भी ना करें।
7. भोजन बनाना शुरू करने से पहले इष्टदेव का ध्यान करना चाहिए। किसी देवी-देवता के मंत्र का जाप भी किया जा सकता है।
8. भोजन करने से पहले अन्न देवता, अन्नपूर्णा माता का स्मरण करना चाहिए।
9. कभी-भी परोसे हुए खाने की बुराई नहीं करना चाहिए। इससे अन्न का अपमान होता है।
10. खाना खाने से पहले पांच अंगों (दोनों हाथ, दोनों पैर और मुंह) को अच्छी तरह से धो लेना चाहिए। मान्यता है कि भीगे हुए पैरों के साथ भोजन करना बहुत शुभ होता है। इससे स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होते हैं और उम्र बढ़ती है।

18/12/2023
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14/12/2023

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दही में नमक डालकर खाने की, आयुर्वेद के विशेषज्ञ कहते है यह आदत खतरनाक हो जाती है क्योंकि नमक डालने से दही जहर बन जाता है...
14/12/2023

दही में नमक डालकर खाने की, आयुर्वेद के विशेषज्ञ कहते है
यह आदत खतरनाक हो जाती है
क्योंकि नमक डालने से दही जहर बन जाता हैं
आइए जाने विस्तार से क्या है इस दावे का सच।
पिछले दिनों एक ही चर्चा सामने आई है की दही को अगर खाना है तो हमेशा मीठी चीजों के साथ खाना चाहिए जैसे चीनी गुड़ के साथ।
आयुर्वेद का कहना है कि दही में एसिडिक पाया जाता है, जिसको खाने से शरीर में पित्त और कफ बढ़ता है. हालांकि दही वात को कम करता है. वहीं, अगर आप दही में अधिक नमक डालकर इसे खाते हैं, तो इससे पित्त और कफ बढ़ता है. नमक एंटी-बैक्टीरियल है, जिससे दही में पाए जाने वाले अच्छे बैक्टीरिया मर जाते हैं.जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम है, उन्हें दही में नमक का सेवन करने से बचना चाहिए.
जब दही को आप लेंस के सहारा से देखा जाता हैं तो उसमें असंख्य बैक्टीरिया चलते फिरते नजर आते हैं और यह बैक्टीरिया आपके शरीर में जीवित अवस्था में जाना चाहिए। क्योंकि जवाब दही खाते हैं तो आपके अंदर एंजाइम प्रोसेस सुचारु रुप से चलता है। दही और कोई भी खट्टा फल एक साथ कभी भी नहीं खाना चाहिए. क्योंकि दही मैं भी खट्टापन होता है और संतरा, अनानास,मोसंबी और नींबू जैसे फलों में भी खट्टापन होता है. इन में अलग-अलग तरह के एंजाइम्स पाए जाते हैं. जिसकी वजह से इन दोनों को एक साथ पचाने में आपको परेशानी हो सकती है.
दही में नमक डालकर खाने से क्या नुकसान होता है?
दही और नमक मिलाकर खाने से स्ट्रोक हाइपरटेंशन डिमेंशिया और अन्य हार्ट डिजीज होने की संभावना बढ़ सकती है। दही में कई तरह के लाभकारी बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो नमक मिलने के कारण मर जाते हैं। ऐसे में दही के सारे पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। दही और नमक का एक साथ सेवन करने से डाइजेस्टिव सिस्टम पर इसका असर पड़ता है।
आप दही को केवल इन्हीं बैक्टीरिया के लिए खाते हैं आयुर्वेद की भाषा में दही को जीवाणु का घर माना जाता है 1 कप दही में आपको करोड़ों जीवाणुओं नजर आएंगे।
अगर आप सही में यह जो एक चुटकी नमक मिला दे तो 1 मिनट में सारे बैक्टीरिया मर जाएंगे और मरे हुए व्यक्ति रिया आपके शरीर में जाएंगे जो आपके किसी काम के नहीं आयेंगे अगर 1 किलो दही में एक चुटकी नमक डालेंगे तो दही के सारे बैक्टीरियल गुण खत्म हो जाएंगे क्योंकि नमक में जो केमिकल है वह जीवाणु के दुश्मन है।
दही को गुड़ के साथ खाएंगे तो गुड डालते ही जीवाणुओं की संख्या दोगुनी हो जाती है और वह सेहत के लिए फायदेमंद हो जाता है।
अगर दही में मिश्री को डाला जाए तो सोने पर सुहागा हो जाता है भगवान श्री कृष्ण दही में मिश्री डालकर खाते है।

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