Dr Rashmi Homoeopathy

Dr Rashmi Homoeopathy Dr Rashmi's Homoeopathy is a holistic way of Healing the suffering Humanity. Homoeopathy is completely safe and free of side effects .

In clinic and online consultation facility is available.

DIGESTIVE  DISTURBANCES CLINICAL TIPS The strange digestive disturbancesof CINA lead to consideration ofMAGNESIA CARBONI...
28/01/2026

DIGESTIVE DISTURBANCES

CLINICAL TIPS
The strange digestive disturbances
of CINA lead to consideration of
MAGNESIA CARBONICA Reverting to the strictly nervy type, one considers the possibility of IGNATIA, and with this nervous restless, fidgety type there is always the possibility that ZINCUM may be called for.

https://g.co/kgs/t4Qe8PM Dr Rashmi

27/01/2026

THE MIND METHOD IN HOMEOPATHY

IN HOMEOPATHY, THE METHOD FOCUSES ON UNDERSTANDING THE INNER STATE OF THE PATIENT. IT LOOKS BEYOND PHYSICAL SYMPTOMS AND GENTLY ADDRESSES THE EMOTIONAL AND MENTAL ROOTS OF ILLNESS.

Homeopaths focus not only to cure patients present illnesses and sufferings but also his long term well being.

26/01/2026

अस्थमा (Asthma)

अस्थमा एक श्वसन संबंधी रोग है, जो लंबे समय तक रोगी को प्रभावित करता है। ये फेफड़ों के श्वसन मार्ग को प्रभावित करता है, जिससे उसकी श्लेष्मा झिल्ली कई पर्यावरणीय कारकों के प्रति संवेदनशील हो जाती है, जो अधिकतर स्वस्थ लोगों के लिए नुकसानदायक नहीं होते।
अस्थमा अटैक आने पर व्यक्ति की श्वासनलियां सूज जाती हैं, जिससे श्वसन मार्ग संकुचित होता है और फेफड़ों तक हवा जाना कम हो जाती है। अस्थमा के सबसे आम लक्षण हैं, खासी के दौरे पड़ना, सास लेने में दिक़्क़त. छाती मे जकडन महसूस होना, सास फुलना और घबराहट । ये लक्षण दिन में किसी भी समय अचानक हो सकते हैं, लेकिन ये ठंड के मौसम में और सुबह के समय अधिक देखे जाते हैं।
अस्थमा के लक्षण आमतौर पर हवा में मौजूद एलर्जी करने वाले पदार्थों (पराग, धूल-मिट्टी, जानवर के बाल आदि) के संपर्क में आने से उत्तेजित होते हैं। खराब मौसम और फ्लू , जुकाम जैसी बीमारियों से समस्या बढ़ सकती है। कुछ मामलों में, ऐसी भावनाओं और एक्सरसाइज इस से भी व्यक्ति को अस्थमा का अटैक आ सकता है, जो सांस लेने के तरीके को प्रभावित करती हैं। अस्थमा के हल्के अटैक कुछ मिनट तक रह सकते हैं, लेकिन इसके गंभीर प्रकार घंटों तक समस्या पैदा कर सकते हैं और इनके लिए हॉस्पिटल जाने की आवश्यकता होती है।
अस्थमा का पता लगाने के लिए लक्षणों की जांच की जाती है और अस्थमा अटैक का तरीका व समय देखा जाता है। फेफड़ों के कार्य की जांच करने के लिए कुछ श्वसन संबंधी टेस्ट भी किए जा सकते हैं। समस्या को उत्तेजित करने वाले कारक का पता लगाने के लिए एलर्जी टेस्ट भी किए जा सकते हैं।
ऐसी कुछ होम्योपैथिक दवाएं उपलब्ध हैं, जो अस्थमा के लक्षणों को कम करने व जीवनशैली को सुधारने में मदद करती हैं और इन दवाओं के कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होते हैं। नक्स वोमिका, ब्रायोनीया, ऐपीकाक, आर्सेनिकम एल्बम, कार्बो वेजीटेबिलिस और नेट्रम सल्फ्यूरिकम ऐसी होम्योपैथिक दवाएं हैं, जो क्रोनिक अस्थमा को ठीक करने के लिए उपयोग की जाती हैं।

अस्थमा का इलाज करने के लिए उपयोगी होम्योपैथिक दवाएं नीचे दी गई हैं:
* आर्सेनिकम एल्बम (Arsenicum Album)�सामान्य नाम: आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड (Arsenic trioxide)�लक्षण: निम्नलिखित लक्षण अनुभव होने पर इस दवा का उपयोग किया जाता है:
* लेट न पाना।
* दम घुटने की भावना होना।
* श्वसन नलिकाओं में संकुचन।
* सीने में जलन।
* तेज खांसी होना, जो आधी रात के बाद बढ़ जाती है।
* पीठ के बल लेटने पर खांसी बढ़ जाना।
* दाएं फेफड़े की ऊपरी तरफ दर्द।
* घरघराहट।
* पीठ के ऊपरी हिस्से में कंधों के बीच दर्द होना।
* शराब पीने के बाद सूखी खाँसी।
* रात के समय बेचैनी होना।
* थोड़ा सा शारीरिक परिश्रम करने पर भी बहुत थकान हो जाना।
* दवा खाने की इच्छा न होना।
* सिर दर्द
* सिर में खुजली के साथ डैंड्रफ होना।
* नाक से पतला व पानी वाला रिसाव होना।
* नाक बंद होना।
* बिना रुके छींक आना।
* सांस लेने में दिक्कत होना, खासकर खुली हवा में।
* श्वसन संबंधी लक्षण घर के अंदर बेहतर होना।
* नाक पर मुँहासे होना।
* गले में सूजन और संकुचन।
* निगलने में कठिनाई।
* पेट में दर्द।�
* ब्रोमियम (Bromium)�सामान्य नाम: ब्रोमाइन (Bromine)�लक्षण: इस दवा से कई एलर्जिक श्वसन संबंधी समस्याएं बेहतर की जा सकती है। निम्नलिखित लक्षणों में इस दवा का उपयोग किया जाता है:
* नाक में दर्द।
* नाक की ऊपरी तरफ दबाव महसूस होना।
* काली खाँसी, जो 10 दिन या उससे अधिक दिन तक रहती है।
* सूखी खांसी के साथ आवाज़ बैठना।
* सांस लेते समय खांसी आना।
* सांस फूलना।
* ऐसा महसूस होना जैसे श्वसन नलिकाओं में धुआं भर गया है।
* सांस अंदर खींचते समय सीने में ठंडक महसूस होना।
* दम घुटना।
* नींद में झटके लगना।
* नींद से उठने पर कंपन और कमजोरी ।
* झुकने पर सिरदर्द।
* आंखों में चुभन वाला दर्द।�
* कार्बो वेजीटेबिलिस (Carbo vegetabilis)�सामान्य नाम: वेजीटेबल चारकोल (Vegetable charcoal)�लक्षण: इस दवा की मदद से नीचे दिए लक्षण ठीक किए जा सकते हैं:
* नाक साफ़ करते समय या ज़ोर लगाने पर नाक से खून आना।)
* नाक के आगे का हिस्सा लाल हो जाना।
* नाक पर खुजली।
* नाक पर वैरी को स्वयं ही होना।
* गर्म व नम मौसम में खांसी।
* छींक न आना।
* खांसी के साथ गले में खुजली।
* उल्टी में बलगम आना।
* काली खांसी।
* गला बैठना, जो अधिकतर शाम के समय होता है।
* सांस लेने में दिक्कत, जो शाम के समय बदतर हो जाता है।
* बार-बार खांसी आना।
* सीने में जलन के साथ खांसी।
* शाम के समय श्वसन संबंधी लक्षण बढ़ जाना।
* चेहरे पर नीलापन आना।
* सांस ठंडी होना।
* अत्यधिक गर्मी महसूस होना, जो हवा करने से बेहतर हो जाती है।
* त्वचा नीली होने के साथ अस्थमा होना।
* अंधेरे में और कम रौशनी में जाने की इच्छा न होना।
* बार-बार याददाश्त खोना।
* सिरदर्द होना।
* बाल झड़ना।
* चेहरे पर सूजन और पीलापन।
* तैरते हुए काले धब्बे नज़र आना।
* आँखों में जलन हो।
* जीभ पर सफेद ब्राउन परत जमना।
* पेट में संकुचन जैसा दर्द होना, जो छाती तक फैलता है।
* पाचन कमजोर और धीरे होना।
* पेट के क्षेत्र में दर्द और खिंचाव होना, जैसे वजन उठाने से होता है।
* हाथ-पैर भारी और सुन्न होना।
* त्वचा नीली होना व छूने पर ठंडी महसूस होना।
* ठंडे मौसम में लक्षण बेहतर होना।�
* कैमोमाईला (Chamomilla)�सामान्य नाम: जर्मन कैमोमाइल (German chamomile)�लक्षण: निम्नलिखित लक्षण अनुभव होने पर इस दवा का उपयोग किया जाता है:
* बेचैनी के साथ चिड़चिड़ापन।
* बार-बार मूड बदलना।
* तेज सिरदर्द।
* कान बजना।
* हर प्रकार की गंध के लिए संवेदनशील हो जाना।
* गर्म पेय पदार्थ पीने की इच्छा न होना।
* खाने-पीने के बाद पसीना आना।
* सोते समय आंखें आधी खुली होना।
* कूल्हे में असहनीय दर्द।
* टखने में दर्द , खासकर दोपहर के समय।
* गले में सूजन और संकुचन।
* छाती में जकड़न।
* छाती में से बलगम की आवाज़ आना, खासकर बच्चों में।
* ताप से और खुली हवा में लक्षण बिगड़ जाना।
* गर्मी और नम मौसम में श्वसन संबंधी लक्षण बेहतर होना।�
* आइपेकाकुआना (Ipecacuanha)�सामान्य नाम: आइपेकाक रुट (Ipecac root)�लक्षण: नीचे दिए लक्षणों में इस दवा से आराम मिलता है:
* शोर अच्छा न लगना।
* चीज़ें समझने में समय लगना और उत्सुकता।
* ध्यान भटकना।
* गंध को समझने में दिक्कत।
* नाक बंद होना।
* निगलते समय गले में दर्द और संवेदनशीलता।
* गले में संकुचन महसूस होना।
* रात के समय खांसी के साथ सिरदर्द और पेट दर्द।
* खांसते समय दम घुटना और सांस फूलना।
* खांसते समय चेहरे पर नीलापन आना।
* बिना मतली के उल्टी होना, लेकिन ज़्यादातर इससे पहले खांसी होती है।
* खांसी और बलगम एक कारण छाती से आवाज़ आना।
* खांसी, जो बाईं तरफ लेटने से शुरू हो जाती है।
* काली खांसी के साथ नाक व मुंह से खून आना।
* खांसी करते समय खाने की उल्टी होना।
* लगातार खांसी के साथ शरीर में जकड़न।
* शाम के समय दम घुटने वाली खांसी।
* सांस फूलना।
* साँस में बदबू आना।
* खुली हवा में तेज खांसी होना।
* सांस अंदर खींचते समय ज़ोर लगने के कारण आवाज़ आना।
* छाती पर भारीपन महसूस होना।
* थोड़ा सा भी हिलने-डुलने पर सांस फूलना।
* धड़कन तेज होना है और छाती में ऐंठन।
* छाती पर खुजली वाले धब्बे।�
* नेट्रम सल्फ्यूरिकम (Natrum sulphuricum)�सामान्य नाम: सलफेट ऑफ़ सोडियम (Sulphate of sodium)�लक्षण: नीचे दिए लक्षण ठीक करने के लिए इस दवा का उपयग किया जाता है:
* चलने पर और कोई भी शारीरिक काम करने पर सांस फूलना।
* खांसते समय छाती की दाईं तरफ दर्द होना।
* सीने में खुरदरापन और सूखापन होने के कारण सूखी खांसी होना।
* रात के समय खांसी बढ़ना और बैठने से व दोंनो हाथों से छाती को पकड़ने से बेहतर होना।
* उबासी लेते समय छाती में दर्द।
* सुबह के समय अस्थमा अटैक बदतर हो जाना।
* छाती में दर्द व दबाव महसूस होना।
* रात के समय गर्दन मे दर्द।
* लगदार उदास रहना।
* सुबह के समय और डिनर करने के बाद वर्टिगो।
* पढ़ने के कारण सिरदर्द।
* नाक से खून आना।
* बार-बार छींक आना।
* नाक बंद होना।
* रौशनी नजर आना।
* चेहरे पर खुजली के साथ त्वचा का रंग पीला पड़ना।
* दिन के समय सुस्ती आना।
* नींद में हाथ-पैर में झटके पड़ना।�
* नक्स वोमिका (Nux Vomica)�सामान्य नाम: पाइजन नट (Poison nut)�लक्षण: नीचे दिए लक्षणों को इस दवा से ठीक किया जा सकता है:
* छाती में ऐंठन के साथ संकुचन।
* लगातार पेट भरा हुआ महसूस होने के साथ अस्थमा।
* लगातार खांसी के साथ छाती फटने की भावना होना।
* धीरे-धीरे सांस लेना।
* सांस फूलना।
* सूखी व खुशक खांसी।
* तेज सिरदर्द के साथ खांसी।
* आवाज़ भारी होना।
* पीठ में जलन।
* जबड़े का संकुचन।
* सुबह के समय मतली।
* खाने के बाद पेट दर्द होना।
* पेट फूलना।
* सुबह के 3 बजे के बाद नींद न आना।
* टांगें सुन्न होना।
* खाने के बाद उनींदापन।
* सुबह के समय व मानसिक तनाव से लक्षण बदतर होना, लेकिन आरामदायक नींद के बाद बेहतर हो जाना। �
* पल्सेटिला (Pulsatilla)�सामान्य नाम: विंड फ्लावर (Wind flower)�लक्षण: इस दवा को निम्नलिखित स्थितियों में दिया जाता है:
* माथे की दाईं ओर दर्द होना।
* स्ट्रेस और काम के प्रेशर से सिरदर्द बढ़ जाना।
* पलको की सुजन।
* प्यास लगने के साथ मुँह सुखना।
* जीभ पर पिली या सफेद परत जमना।
* फैट वाला खाना खाने की इच्छा न होना।
* पेट फूलना।
* आवाज़ बैठना।
* शाम व रात के समय सूखी खांसी। खांसी को कम करने के लिए बैठने की आवश्यकता होना।
* सुबह के समय बलगम वाली खांसी।
* सांस फूलना।
* दाईं तरफ लेटने पर धड़कन तेज़ होना और चिंता।
* लेटने पर गला घुटने जैसा महसूस होना।
* सुबह उठने पर तरो-ताज़ा महसूस न करना।
* दोपहर के समय अत्यधित उनींदापन।
* पीठ में दर्द के साथ गर्दन में तेज दर्द।
* कंधों की पिछली तरफ बीच में दर्द होना।

होम्योपैथिक दवाएं प्राकृतिक पदार्थों से बनाई जाती हैं, जिनसे समस्या के आम लक्षण और व्यक्ति के विशिष्ट लक्ष्णों को ठीक करने में मदद मिलती है। इन दवाओं को व्यक्ति की जरुरत के अनुसार मिश्रण बनाकर बहुत ही कम मात्रा में उपयोग किया जाता है, जिससे इनके साइड इफ़ेक्ट नहीं होते। होम्योपैथिक उपचार में आपको किसी दवा से एलर्जी होने की संभावना भी कम होती है क्योंकि इन दवाओं को व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक लक्षणों का अवलोकन करने के बाद ही चुना जाता है। हालांकि, असरदार उपचार के लिए एक योग्य व अनुभवी डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही दवा लेनी चाहिए।

डॉक्टर रश्मि शर्मा
होम्योपैथिक विशेषज्ञ
वी एच एम एस, एम सी ए एच (मुंबई)
(संपर्क के लिए इस नंबर पर परामर्श करें-8080098380)

#अस्थमा #अस्थमा का इलाज

25/01/2026
24/01/2026

जब गुदा में छोटे-छोटे कट या दरार उत्पन्न होते हैं, और उनमें दर्द होता है, तो उस स्थिति को फिशर कहा जाता है। मुख्य रूप से फिशर गुदा के बाहर होते हैं और इसके उत्पन्न होने के कई कारण होते हैं। कुछ मुख्य कारण है जैसे - सख्त स्टूल पास होना, लम्बे समय तक डायरिया होना, बहुत ज्यादा कब्ज या प्रेगनेंसी।

कई मामलों में देखा गया है कि उन दरारों में जख्म बन जाते हैं और उन जख्मों से खून भी बहने लगते हैं। कई बार देखा गया है कि लोग फिशर के लक्षणों को बवासीर के लक्षण (Bawaseer ke lakshan in hindi) समझ लेते हैं, जिसके कारण इलाज में बहुत देर हो जाती है और स्थिति गंभीर हो जाती है।

फिशर के लक्षण - Symptoms Of Fissure And Fistula
आमतौर पर एनल फिशर से जुड़े कुछ लक्षण में एनल एरिया में मल त्याग के दौरान तेज दर्द महसूस होता है। इसमें खुनी मल के साथ एनल और उसके आस-पास लगातर जलन या खुजली होती महसूस होती है। आमतौर पर एनल एरिया के आसपास पानी भी दिखाई देता है।

फिशर के लक्षण:

* मल त्याग करते वक्त दर्द होना।
* जलन होना।
* कभी कभी रक्ततस्राव होना।

फिशर होने के कारण (Causes Of Fissure ) :

* तनाव
* लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहना
* कब्ज़
* मल त्याग करते वक्त बहुत जोर लगाना
यह फिशर के मुख्य लक्षण है जो आम तोर पर देखने को मिल जाते है |

फिशर होने के कारण - Causes Of Fissure
एनल फिशर होने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इसके मलाशय का कैंसर (re**al cancer), वजाइनल चाइल्डबर्थ, अप्राकृतिक यौन संबंध, और लंबे समय तक दस्त होने की समस्या हो सकती है। ज्यादातर मामलों में फिशर गोने के कारण मल त्याग में रुकावट या फिर कब्ज हो सकता है। ये उन मांसपेशियों को फाड़ देता है एनल के अंदर से दबाने वाले सिस्टम को कंट्रोल करता है।

लंबे समय से डायरिया होना- (Persistent Diarrhea )
डायरिया यानी दस्त होना। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक दस्त होते रहें, तो इससे एनल फिशर होने का रिस्क बढ़ जाता है। फिशर के मुख्य लक्षण है जो आम तोर पर देखने को मिल जाते है बार-बार दस्त होने के कारण शरीर से काफी मात्रा में पानी निकल जाता है। इस वजह से स्किन काफी ज्यादा ड्राई हो जाती है और एनल ओपनिंग में कट लग जाता है। वैसे भी एनल स्किन काफी सेंसिटिव होती है। इस वजह से एनल फिशर (A**l fissure in hindi) होने पर काफी ज्यादा दर्द का अहसास भी होता है।

* इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज- Inflammatory Bowel Disease:
फिशर, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज के कारण भी हो सकता है। इसका मतलब है जिस व्यक्ति को अक्सर कब्ज की समस्या रहती है या फिर दस्त बने रहते हैं, उन्हें एनल फिशर हो सकता है। इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज में दो तरह की कंडीशन आती है। एक क्रोहन डिजीज (Crohn's disease) और अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis)। इसका मतलब है कि गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) ट्रैक में लंबे समय से चल रही सूजन। इस सूजन के कारण अक्सर मरीज को फिशर की प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है।

* प्रेग्नेंसी या डिलीवरी- Pregnancy And Childbirth :
डिलीवरी के दौरान दबाव बनाते समय एनल लाइनिंग में घाव हो जाता है या कट लग जाता है। सामान्य तौर पर इसको कब्ज (constipation) से जोड़कर देखा जाता है। अगर किसी महिला को कब्ज है, तो डिलीवरी के लिए दबाव बनाते समय फिशर की समस्या हो सकती है। ये बात अलग है कि जिन महिलाओं को कब्ज नहीं है, उन्हें भी डिलीवरी के दौरान दबाव बनाने के कारण एनल फिशर हो सकता है।

* एनल ट्रॉमा के कारण- A**l Trauma
अगर किसी को सेक्सुअल एक्टिविटी के दौरान एनल में चोट लग जाए, तो भी एनल फिशर होने का रिस्क बढ़ जाता है। हालांकि, सबके साथ ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है। लेकिन, अगर एसटीआई (STI), जैसे सिफलिस और हर्पीस जैसी घातक बीमारियां हैं, तो भी एनल फिशर हो सकता है। इससे एनल कैनाल पूरी तरह डैमेज हो सकती है या फिर इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।

* एनल फिशर से कैसे करें बचाव-
एनल फिशर से बचाव के लिए आप कुछ उपाय आजमा सकते हैं, जैसे की अगर डायरिया की वजह से एनल फिशर है, तो पहले उसका इलाज करवाएं। ज्यादा से ज्याद खुद को हाइड्रेट रखें, ताकि मल त्याग करते समय तकलीफ कम हो। अपनी डाइट में हेल्दी चीजें शामिल करें, जैसे फाइबर खाएं और फ्लूइड इनटेक ज्यादा लें। आप प्रभावित हिस्से में नारियल तेल या कोई भी लुब्रिकेंट लगा सकते हैं।

बवासीर और फिशर का होम्योपैथिक इलाज —

होम्योपैथी एक प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है जो "समान से समान का इलाज" के सिद्धांत पर काम करती है। यह शरीर की प्राकृतिक उपचार प्रक्रियाओं को उत्तेजित करने के लिए अत्यधिक तनु पदार्थों का उपयोग करती है।
बवासीर और फिशर के मामले में, होम्योपैथिक दवाएं उपचार को बढ़ावा देने, दर्द को कम करने और पुनरावृत्ति को रोकने में विशेष रूप से प्रभावी हो सकती हैं।

बवासीर और फिशर के लिए सबसे अच्छी होम्योपैथी दवाये-

एस्कुलस हिप्पोकैस्टेनम
एस्कुलस विशेष रूप से सूखे, बाहरी बवासीर के लिए उपयोगी है जिसमें तेज दर्द और पीठ के निचले हिस्से में पीड़ा होती है । मल त्याग करने के बाद भी मलाशय में भारीपन महसूस हो सकता है।

नाइट्रिक एसिड
नाइट्रिक एसिड तब अत्यधिक प्रभावी होता है जब विदर के साथ-साथ काटने, चीरने जैसा दर्द हो और मल त्याग के दौरान चमकीला लाल रक्तस्राव हो । मल त्याग के बाद दर्द कई घंटों तक बना रह सकता है।

सिलिसिया
सिलिसिया, क्रोनिक एनल फिस्टुला के लिए एक प्रमुख दवा है , खासकर उन मामलों में जहां मवाद निकलता हो , गहरा संक्रमण हो और घाव भरने में देरी होती हो।

रैटानहिया
रैटानहिया गुदा विदर के लिए सबसे उपयुक्त है, जिसमें मल त्याग के बाद भी लंबे समय तक तीव्र जलन और दर्द बना रहता है। गुदा में नुकीले टुकड़े या कांच चुभने जैसा अहसास भी हो सकता है।

हेममेलिस
हेममेलिस बवासीर से होने वाले रक्तस्राव, दर्द, सूजन और थकान के लिए एक बेहतरीन दवा है । यह रक्तस्राव को नियंत्रित करने और नसों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है।

सल्फर
सल्फर एक गहन प्रभाव डालने वाली संवैधानिक औषधि है जो दीर्घकालिक या बार-बार उभरने वाले लक्षणों में सहायक होती है । यह तीव्र खुजली, जलन और स्नान करने या रात में होने वाली समस्याओं में उपयोगी है।

नोट – ऊपर दी गई दवाइयाँ केवल जानकारी के लिए हैं। डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवा लें। स्वयं से दवा न लें।

**lfissure #फिशर #होम्योपैथी

24/01/2026
23/01/2026

#होम्योपैथिकडॉक्टर

तू है तो दिल धड़कता है, तू है तो साँस आती है · तू ना तो घर घर नहीं लगता, तू है तो डर नहीं लगता · तू है तो ग़म ना आते हैं...
22/01/2026

तू है तो दिल धड़कता है, तू है तो साँस आती है · तू ना तो घर घर नहीं लगता, तू है तो डर नहीं लगता · तू है तो ग़म ना आते हैं, तू है तो मुस्कुराते हैं · Love You Dear Hubby ❤️😍😘
#होम्योपैथिकडॉक्टर

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