06/03/2026
🙏🌹🌹जय शीतला माता की 🙏🌹🌹
शीतला अष्टमी पर बासी भोजन की परंपरा
आमतौर पर लगभग हरेक पूजा-पाठ मे शुद्ध और ताजा भोग लगाया जाता है. लेकिन शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा है. बासी और ठंडा भोजन का भोग लगाने पर माता प्रसन्न होती हैं. इसलिए शीतला अष्टमी के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता है. सप्तमी तिथि पर ही घरों में पुरी, पकौड़ी, कढ़ी, मीठे चावल, हलवा, आदि जैसे व्यंजन तैयार किए जाते हैं और अगले दिन शीतला अष्टमी पर इन चीजों का भोग लगाया जाता है. बासी भोजन का भोग लगने के कारण इस पर्व को कई स्थानों पर ‘बसौड़ा’ या ‘बासोड़ा’ जैसे नामों से भी जाना जाता है. शीतला अष्टमी पर शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है.
शीतला अष्टमी का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता की पूजा होती है. शीतला माता को रोग-शोक और विशेषकर चेचक व त्वचा रोगों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है. ‘शीतला’ शब्द का अर्थ होता है शीतलता प्रदान करने वाली देवी. लोक मान्यता के अनुसार, शीतला माता के आशीर्वाद से ही घर-परिवार में स्वास्थ्य और सुख-शांति बनी रहती है.