आयुर्वेद ही समाधान Lets go Back to root's

आयुर्वेद ही समाधान Lets go Back to root's We are dealing in natural herb's and Ayurveda medicine's for you and your's family health and wellne

10/08/2025

*इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है*.

वात पित्त कफ के दोष तीनों को संतुलित करे इस आयुर्वेदिक उपाय से...अंत तक जरुर पढ़ें।

❤❤❤वात पित्त और कफ के दोष:-

💜पोस्ट को धयान से 2 बार पढ़े

💚इस जानकारी से संबंधित यह तीसरा पोस्ट है

शरीर 3 दोषों से भरा है

वात(GAS) -लगभग 80 रोग

पित्त(ACIDITY)- लगभग 40 रोग

कफ(COUGH) -लगभग 28 रोग

💚यहां सिर्फ त्रिदोषो के मुख्य लक्षण बतये जायेगे और वह रोग घरेलू चिकित्सा से आसानी से ठीक होते है

💚सभी परहेज विधिवत रहेंगे जैसे बताता हूं

💙जिस इंसान की बड़ी आंत में कचड़ा होता है बीमार भी केवल वही होता है

💙एनीमा एक ऐसी पद्धति है जो बड़ी आंत को साफ करती है और किसी भी रोग को ठीक करती है

💚संसार के सभी रोगों का कारण इन तीन दोष के बिगड़ने से होता है

💛वात(GAS) अर्थात वायु:-💛

--शरीर मे वायु जहां भी रुककर टकराती है, दर्द पैदा करती है, दर्द हो तो समझ लो वायु रुकी है

--पेट दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, घुटनो का दर्द ,सीने का दर्द आदि

--डकार आना भी वायू दोष है

--चक्कर आना,घबराहट और हिचकी आना भी इसका लक्षण है

💙कारण:-

--गैस उत्तपन्न करने वाला भोजन जैसे कोई भी दाल आदि गैस और यूरिक एसिड बनाती ही है

--यूरिक एसिड जहां भी रुकता है उन हड्डियों का तरल कम होता जाता है हड्डियां घिसना शुरू हो जाती है ,उनमे आवाज आने लगती है, उसे डॉक्टर कहते है कि ग्रीस ख़त्म हो गई, या फिर स्लिप डिस्क या फिर स्पोंडलाइटिस, या फिर सर्वाइकल आदि

--प्रोटीन की आवश्यकता सिर्फ सेल्स की मरम्मत के लिए है जो अंकुरित अनाज और सूखे मेवे कर देते है

--मैदा औऱ बिना चोकर का आटा खांना

--बेसन की वस्तुओं का सेवन करना

--दूध और इससे बनी वस्तुओं का सेवन करना

-आंतो की कमजोरी इसका कारण व्यायाम न करना।

👉🏻 तन बिगड़ने वाला भोजन से

👉🏻 मन बिगड़ने वाले विचार से

👉🏻 मनोदीशा बिगड़ने वाले लोगों से कैसे दूर रहे।

💜निवारण:-

--अदरक का सेवन करें,यह वायु खत्म करता है, रक्त पतला करता है कफ भी बाहर निकालता है, सोंठ को लेकर रात में गुनगने पानी से आधा चम्मच खायेँ

--लहसुन किसी भी गैस को बाहर निकालता है,

यदि सीने में दर्द होने लगे तो तुरन्त 8-10 कली लहसुन खा ले, ब्लॉकेज में तुरंत आराम मिलता है

--लहसुन कफ के रोग और टीबी के रोग भी मारता है

--सर्दी में 2-2 कली सुबह शाम, और गर्मी में 1-1 कली सुबह शाम ले, और अकेला न खायेँ सब्जी या फिर जूस , चटनी आदि में कच्चा काटकर डालकर ही खायेँ

--मेथीदाना भी अदरक लहसुन की तरह ही कार्य करता है

💜प्राकृतिक उपचार:-

गर्म ठंडे कपड़े से सिकाई करे, अब उस अंग को पहले छुएं यदि वो गर्म है तो ठंडे सिकाई करे और वह अंग अगर ठंडा है तो गर्म सिकाई करे औऱ अगर न गर्म है और न ठंडा तो गर्म ठंडी सिकाई करे एक मिनट गर्म एक मिनट ठंडा ।

💛कफ(COUGH):-💛

--मुंह नाक से आने वाला बलगम इसका मुख्य लक्षण है

--सर्दी जुखाम खाँसी टीबी प्लूरिसी निमोनिया आदि इसके मुख्य लक्षण है

--सांस लेने में तकलीफ अस्थमा आदि या सीढी चढ़ने में हांफना

💙कारण:-

--तेल एव चिकनाई वाली वस्तुओं का अधिक सेवन

--दूध और इससे बना कोई भी पदार्थ

--ठंडा पानी औऱ फ्रिज की वस्तुये खांना

--धूल ,धुंए आदि में अधिक समय रहना

--धूप का सेवन न करना

💜निवारण:-

--विटामिन C का सेवन करे यह कफ का दुश्मन है यह संडास के रास्ते कफ निकालता है, जैसे आवंला

--लहसुन, यह पसीने के रूप में कफ को गलाकर निकालता है

--Bp सामान्य हॉगा

--ब्लड सर्कुलेशन ठीक हॉगा

--नींद अच्छी आएगी

--अदरक भी सर्वश्रेष्ठ कफ नाशक है

💜प्राकृतिक उपचार

--एक गिलास गुनगने पानी मे एक चम्मच नमक डालकर उससे गरारे करे

--गुनगने पानी मे पैर डालकर बैठे, 2 गिलास सादा।पानी पिये और सिरर पर ठंडा कपड़ा रखे, रोज 10 मिनट करे

--रोज 30-60 मिनट धूप ले ।

💛पित्त(ACIDITY):-पेट के रोग💛

--वात दोष और कफ दोष में जितने भी रोग है उनको हटाकर शेष सभी रोग पित्त के रोग है, BP, शुगर, मोटापा, अर्थराइटिस, आदि

--शरीर मे कही भी जलन हो जैसे पेट मे जलन, मूत्र त्याग करने के बाद जलन ,मल त्याग करने में जलन, शरीर की त्वचा में कही भी जलन,

--खट्टी डकारें आना

--शरीर मे भारीपन रहना

💜कारण:-

--गर्म मसाले, लाल मिर्च, नमक, चीनी, अचार

--चाय ,काफी,सिगरेट, तम्बाकू, शराब,

--मांस ,मछली ,अंडा

--दिनभर में सदैव पका भोजन करना

--क्रोध, चिंता, गुस्सा, तनाव

--दवाइयों का सेवन

--मल त्याग रोकना

--सभी 13 वेग को रोकना जैसे छींक, पाद, आदि

💜निवारण

--पुराने रोग और नए रोग का एक ही समाधान बता रहा हु

--फटे हुए दूध का पानी पिये, गर्म दूध में नीम्बू डालकर दूध को फाड़े, वह पानी छानकर पिए, पेट का सभी रोग में रामबाण है, सभी प्रकार का बुखार भी दूर करता है

--फलो व सब्जियों का रस, जैसे अनार का रस, लौकी का रस, पत्ता गोभी का रस आदि

--निम्बू पानी का सेवन

💜प्राकृतिक उपचार

--पेट को गीले कपड़े से ठंडक दे

--रीढ़ की हड्डी को ठंडक देना, लकवा इसी रीढ़ की हड्डी की गर्मी से होता है, गीले कपड़े से रीढ़ की हड्डी पर पट्टी रखें

--व्यायाम ,योग करे

--गहरी नींद ले

इलाज से बेहतर बचाव है

स्वदेशी बने प्रकृति से जुड़े

*आपसे निवेदन है ज्यादा से ज्यादा शेयर करें*

03/02/2025

हरड़े भरड़े आँवले, लो तीनो सम तोल।
कूट पीस कर छानिए,त्रिफला है अनमोल।।

पाँच भाँति के नमक से,करो चूर्ण तैयार।
दस्तावर है औषधि, कहते पंचसकार।।

ताजे माखन में सखी, केसर लेओ घोल।
मुख व होठों पर लगा,रंग गुलाब अमोल।।

सूखी मेंथी लीजिए, खाएँ मन अनुसार।
किसी तरह पहुँचे उदर,मेटे बहुत विकार।।

ठंड जुकाम भारी लगे, नाक बंद हो जाय।
अजवायन को सेंक कर, सूंघे तो खुल जाय।।

चर्म रोग में पीसिए, अजवायन को खूब।
लेप लगाओ साथिया,मिलता लाभ बखूब।।

फोड़े फुंसी होय तो, अजवायन ले आय।
नींबू रस में पीस कर,औषध मान लगाय।।

अजवाइन गुड़ घी मिला,हल्का गर्म कराय।
वात पित्त कफ संतुलन, सर्दी में हो जाय।।

भारी सर्दी पोष की, करती बेदम हाल।
अदरक नींबू शहद को,पीना संग उबाल।।

मेंथी अजवायन उभय,हरती उदर विकार।
पाचन होता संतुलित, खाएँ किसी प्रकार।।

अदरक के रस में शहद, लेना सखे मिलाय।
पखवाड़े नियमित रखो,श्वाँस कास मिटजाय।

मक्का की रोटी भली,खूब लगाओ भोग।
पाचन के संग लाभ दे,क्षय में रखे निरोग।।

छाछ दही घी दूध ये, शुद्ध हमारा भोज।
गाय पाल सेवा करो ,मेवा पाओ रोज।।

गाजर रस मय आँवला,पीना पूरे मास।
रक्त बने भरपूर तो,नयनन भरे उजास।।

बथुआ केंहि विधि खाइए,मिले लाभ भरपूर।
पाचन भी अच्छा करे, रहे बुढ़ापा दूर।।

चौंलाई में गुण बहुत, रक्त बढ़े भरपूर।
हरी सब्जियों से रहे,मानुष तन मन नूर।।

पालक मेथी मूलियाँ,स्वास्थ्य रक्त दातार।
हरी सब्जियां नित्य लो,रहलो सदाबहार।।

जूस करेला पीजिए, प्रतिदिन बारहो मास।
मधुहारे तुमसे सदा, हो सुखिया आभास।।

दातुन करिए नीम की,होय न दंत विकार।
नीम स्वयं ही वैद्य है, समझो सही प्रकार।।
जामुन की दातुन करो, गुठली लेय चबाय।
मधुमेही को लाभ हो ,प्रदर प्रमेह नशाय।।

दातुन करो बबूल की,हिलते कभी न दंत।
तन मन शीतलता रहे, शूल बचाओ पंत।।

कच्ची पत्ती नीम की ,प्रातः नित्य चबाय।
रक्त साफ करके सखे,यह मधुमेह मिटाय।।

सदाबहारी फूल जो, प्रात चबालो आप।
दूर करे मधुमेह को, खाओ मधु को माप।।

तुलसी पत्ते औषधी, पीना सदा उबाल।
कितनी भी सर्दी पड़े,होय न बाँका बाल।।

चूर्ण बना कर आँवले, खाओ बारह मास।
नहीं जरूरत वैद्य की,जब तक तन में श्वाँस।

संध्या भोजन बाद में, थोड़ा सा गुड़ खाय।
पाचन भी अच्छा रहे, बुरी डकार न आय।।

लहसुन डालो तेल में,अजवायन अरु हींग।
जोड़ो में मलते रहो , नहीं चुभेंगे सींग।।

सब्जी में खाओ लहसुन, हरता कई विकार।
नेमी धर्मी डर रहे, खाएँ खूब विचार।।

कैसे भी खा लीजीए ,करे सदा ही लाभ।
ग्वार पाठा बल खूब दे,आए तन में आभ।।

दाल चीनि जल घोल कर,पीजिए दोनो वक्त।
पेचिस में आराम हो, मल हो जाए सख्त।।

दालचीनि मुख राखिए, जैसे पान सुबास।
मुख कभी न आएगी, गन्दी श्वाँस कुबास।।

दूध पियो नित ही भला,हल्का मीठा डाल।
ग्रीष्म ऋतु में पीजिए,संगत मिला रसाल।।

ग्वारपाठ रस आँवला ,करे पित्त को नष्ट।
नित्य निहारा पीजीए,स्वास्थ्य रहेगा पुष्ट।।

तीन भाग रस आँवला,एक भाग मधु साथ।
प्रातः सायं पीजिए, नेत्र नए हो जात।।

हल्दी डालें दूध में, छोटी चम्मच एक।
कफ खाँसी के शूल मिट,स्वस्थ रहोगे नेक।।
हल्दी चम्मच एक भर, पीवे छाछ मिलाय।
खुजली फुन्शी दाद भी,जल्दी से मिटजाय।।
बेसन नींबू नीर मधु, सबको लेय मिलाय।
चेहरे पर लेपन करो,सुन्दरता बढ़ि जाय।।

शहद मिला कर दूध पी,जीवन रहे निरोग।
दीर्घायु होकर करो, जीवन के सुखभोग।।

भोजन के संग छाछ तो,होती अमरित मान।
स्वस्थ पुष्ट तन मन रहे, बनी रहेगी शान।।

सौ रोगों की औषधी, देखी परखी मान।
पिए गुनगुना नीर तो,बनी रहे तन जान।।

दिन के भोजन में रखो, दही कटोरी एक।
पाचक रस निर्माण कर,मेटे व्याधि अनेक।।

अजवायन की भाप से,मिटे शीत के रोग।
गर्म भाप को सूँघिए ,रहना शीत निरोग।।

लो अजवायन छाछ से,पेट रहे तन्दरुस्त।
कीड़े मरते पेट के, भोजन करना मस्त।।

सौंफ हींग सेंधा नमक, पीपल उसमे डाल।
जीरा छाछ मिला य पी, रहे न उदर मलाल।।

भूतों को सावन पिला, कार्तिक पिला सपूत।
ग्रीष्मकाल में सब पियो,उत्तम छाछ अकूत।।

शर्मा बाबू लाल के, नुस्खे सब आदर्श।
सोच समझ लेना मगर,करो वैद्य से मर्श।।

01/02/2025

एलोवेरा आपके शरीर के लिए अपने जीवन के लिए संजीवनी बूटी से कम नहीं है अगर आप हर रोज एलोवेरा का सेवन करो तो आपके शरीर में आएंगे अद्भुत बदलाव

हर दिन एलोवेरा पानी पीने के 10 कारण ⤵️

1➡️.पाचन में सुधार करता है
एलोवेरा में एंजाइम्स होते हैं जो भोजन को तोड़ने, पोषक तत्वों के अवशोषण में सुधार लाने और आपके पाचन तंत्र को शांत करने में सहायता करते हैं।

2➡️.रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है

विटामिन सी, ई और बी12 जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर एलोवेरा आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और मुक्त कणों से लड़ने में मदद करता है।

3➡️.आपके शरीर को हाइड्रेट करता है

पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर एलोवेरा पानी आपको हाइड्रेटेड रखने के लिए एकदम सही है, खासकर गर्म मौसम में या व्यायाम के बाद।

3➡️.त्वचा के स्वास्थ्य का समर्थन करता है

एलोवेरा के प्राकृतिक हाइड्रेशन और एंटीऑक्सीडेंट
आपकी त्वचा के लिए अद्भुत काम करते हैं, शुष्कता को कम करते हैं और भीतर से लोच में सुधार करते हैं।

4➡️.वजन घटाने में सहायक

कम कैलोरी और अधिक फाइबर युक्त एलोवेरा पानी भूख को नियंत्रित करने और स्वस्थ वजन प्रबंधन में सहायता कर सकता है।

5➡️.सूजन को कम करता है

एलोवेरा में सूजन रोधी गुण होते हैं
एलोवेरा में सूजनरोधी गुण होते हैं जो गठिया जैसी स्थितियों के कारण होने वाले जोड़ों के दर्द और सूजन को कम कर सकते हैं।

6➡️.हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है

यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है।

7➡️.रक्त शर्करा के स्तर को संतुलित करता है

एलोवेरा रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए जाना जाता है, जिससे यह मधुमेह रोगियों के लिए एक अच्छा विकल्प बन जाता है।

8➡️.शरीर को डिटॉक्सिफाई करता है

एलोवेरा स्वाभाविक रूप से आपके यकृत और गुर्दे से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे समग्र विषहरण को बढ़ावा मिलता है।

9➡️.ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है
एलोवेरा के पानी में मौजूद भरपूर पोषक तत्व आपके शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे आपको पूरे दिन सक्रिय रहने में मदद मिलती है।

10➡️.मौखिक स्वास्थ्य में सुधार करता है

इसके रोगाणुरोधी गुण प्लाक को कम करने और मसूड़ों की सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं, जिससे आपका मुंह स्वस्थ रहता है।

घर पर एलोवेरा पानी कैसे बनाएं:➡️
घर पर एलोवेरा पानी कैसे बनाएं घर पर एलोवेरा पानी बनाना सरल है और यह सुनिश्चित करता है कि आपको बिना किसी अतिरिक्त चीनी या परिरक्षक के एक ताजा, प्राकृतिक पेय मिल रहा है।

सामग्री: 1 बड़ा एलोवेरा पत्ता 2 कप पानी शहद या नींबू (स्वाद के लिए वैकल्पिक)

एलोवेरा जेल तैयार करें➡️

एलोवेरा की एक बड़ी पत्ती काटें और उसके मोटे बाहरी छिलके को छील लें। चम्मच की मदद से अंदर का साफ जेल निकाल लें। जेल को अच्छी तरह से धो लें ताकि उसमें मौजूद पीला लेटेक्स निकल जाए, क्योंकि इसका स्वाद कड़वा हो सकता है।

सामग्री को मिश्रित करें➡️

एलोवेरा जेल को 2 कप पानी के साथ ब्लेंडर में डालें। चिकना होने तक ब्लेंड करे । फिर उसमें शहद नींबू स्वाद अनुसार आप डाल सकते हो ।

ज़्यादातर आदमी अमरूद खाते हैं लेकिन उन्हें अमरूद की पत्ती  के फायदे का  पता नही होता कितनी महत्वपूर्ण हैअमरूद की पत्ती क...
01/02/2025

ज़्यादातर आदमी अमरूद खाते हैं लेकिन उन्हें अमरूद की पत्ती के फायदे का पता नही होता कितनी महत्वपूर्ण है
अमरूद की पत्ती किस प्रकार से हमारे लिए लाभदायक है......

*****अमरूद के पत्तों का इस्तेमाल सदियों से पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता रहा है और वे पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं।

1. जीवाणुरोधी और सूजनरोधी गुण: अमरूद के पत्ते बैक्टीरिया के विकास को रोकते हैं और सूजन को कम करते हैं।

2. पाचन में सुधार: अमरूद के पत्ते दस्त, पेचिश और पेट में ऐंठन जैसी पाचन समस्याओं को शांत करने में मदद कर सकते हैं।

3. रक्त शर्करा को कम करता है: अध्ययनों से पता चला है कि अमरूद के पत्तों का अर्क रक्त शर्करा के स्तर को कम करने और इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करने में मदद कर सकता है।

4. प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है: अमरूद के पत्तों में विटामिन सी और ए होते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करते हैं
5. 5. स्वस्थ त्वचा और बालों को बढ़ावा देता है: अमरूद के पत्तों का अर्क त्वचा की बनावट में सुधार, सूजन को कम करने और यहां तक ​​कि बालों के विकास को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है!

6. एंटीऑक्सीडेंट गुण: अमरूद के पत्ते एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो कोशिका क्षति से बचाने और पुरानी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

7. कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक: कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि अमरूद के पत्तों के अर्क में कैंसर विरोधी गुण हो सकते हैं, हालांकि इस पर अधिक शोध की आवश्यकता है।

8. मौखिक स्वास्थ्य का समर्थन करता है: अमरूद के पत्तों का उपयोग मसूड़ों की सूजन और दांत दर्द जैसी मौखिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है।

9. चिंता और तनाव को कम करने में मदद कर सकता है: अमरूद के पत्ते के अर्क में एंग्जियोलिटिक (चिंता कम करने वाला) प्रभाव पाया गया है।

10. लीवर के स्वास्थ्य का समर्थन करता है: अमरूद के पत्तों में हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण पाए गए
आप अमरूद के पत्तों को चाय, कैप्सूल या अर्क के रूप में सेवन कर सकते हैं। हालाँकि, औषधीय प्रयोजनों के लिए अमरूद के पत्तों का उपयोग करने से पहले किसी स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना आवश्यक है

30/01/2025

🙏 #गिलोय एक ही ऐसी बेल है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं। इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है।

कहते हैं कि देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला और इस अमृत की बूंदें जहां-जहां छलकीं, वहां-वहां गिलोय की उत्पत्ति हुई।

#इसका वानस्पिक नाम( Botanical name) टीनोस्पोरा कॉर्डीफोलिया (tinospora cordifolia है। इसके पत्ते पान के पत्ते जैसे दिखाई देते हैं और जिस पौधे पर यह चढ़ जाती है, उसे मरने नहीं देती। इसके बहुत सारे लाभ आयुर्वेद में बताए गए हैं, जो न केवल आपको सेहतमंद रखते हैं, बल्कि आपकी सुंदरता को भी निखारते हैं।

ानते_हैं_गिलोय_के_फायदे…....

#गिलोय बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। यह खून को साफ करती है, बैक्टीरिया से लड़ती है। लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल भी गिलोय के बहुत सारे कामों में से एक है। ये दोनों ही अंग खून को साफ करने का काम करते हैं।

#ठीक करती है बुखार

अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो उसे गिलोय का सेवन करना चाहिए। गिलोय हर तरह के बुखार से लडऩे में मदद करती है। इसलिए डेंगू के मरीजों को भी गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है। डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आने वाले बुखार से भी गिलोय छुटकारा दिलाती है।

#गिलोय के फायदे – डायबिटीज के रोगियों के लिए

गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है। इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिसका फायदा टाइप टू डायबिटीज के मरीजों को होता है।

#पाचन शक्ति बढ़ाती है

यह बेल पाचन तंत्र के सारे कामों को भली-भांति संचालित करती है और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद कती है। इससे व्यक्ति कब्ज और पेट की दूसरी गड़बडिय़ों से बचा रहता है।

#कम करती है स्ट्रेस

गलाकाट प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तनाव या स्ट्रेस एक बड़ी समस्या बन चुका है। गिलोय एडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता (एंजायटी) के स्तर को कम करती है। इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरूस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है।

#बढ़ाती है आंखों की रोशनी

गिलोय को पलकों के ऊपर लगाने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाएं।

#अस्थमा में भी फायदेमंद

मौसम के परिवर्तन पर खासकर सर्दियों में अस्थमा को मरीजों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से गिलोय की मोटी डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए। इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा।

#गठिया में मिलेगा आराम

गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुंचाती है।

#अगर हो गया हो एनीमिया, तो करिए गिलोय का सेवन

भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीडि़त रहती हैं। इससे उन्हें हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होती है। गिलोय के सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है।

#बाहर निकलेगा कान का मैल

कान का जिद्दी मैल बाहर नहीं आ रहा है तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीस कर उबाल लें। ठंडा करके छान के कुछ बूंदें कान में डालें। एक-दो दिन में सारा मैल अपने आप बाहर जाएगा।

#कम होगी पेट की चर्बी

गिलोय शरीर के उपापचय (मेटाबॉलिजम) को ठीक करती है, सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है। ऐसा होने से पेट के आस-पास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वजन कम होता है।

#खूबसूरती बढ़ाती है गिलोय

गिलोय न केवल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालों पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है….

#जवां रखती है गिलोय

गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं, जिसकी कामना हर किसी को होती है। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं तो घाव बहुत जल्दी भरते हैं। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाएं। अब एक बरतन में थोड़ा सा नीम या अरंडी का तेल उबालें। गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाएं। ठंडा करके घाव पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है।

#बालों की समस्या भी होगी दूर

अगर आप बालों में ड्रेंडफ, बाल झडऩे या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं तो गिलोय के सेवन से आपकी ये समस्याएं भी दूर हो जाएंगी।

#गिलोय का प्रयोग ऐसे करें :--

अब आपने गिलोय के फायदे जान लिए हैं, तो यह भी जानिए कि गिलोय को इस्तेमाल कैसे करना है…

#गिलोय जूस

गिलोय की डंडियों को छील लें और इसमें पानी मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें। छान कर सुबह-सुबह खाली पेट पीएं। अलग-अलग ब्रांड का गिलोय जूस भी बाजार में उपलब्ध है।

#काढ़ा

चार इंच लंबी गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट लें। इन्हें कूट कर एक कप पानी में उबाल लें। पानी आधा होने पर इसे छान कर पीएं। अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग, अदरक, तुलसी भी डाल सकते हैं।

#पाउडर

यूं तो गिलोय पाउडर बाजार में उपलब्ध है। आप इसे घर पर भी बना सकते हैं। इसके लिए गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सुखा लें। सूख जाने पर मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाकर रख लें।

#गिलोय वटी

बाजार में गिलोय की गोलियां यानी टेबलेट्स भी आती हैं। अगर आपके घर पर या आस-पास ताजा गिलोय उपलब्ध नहीं है तो आप इनका सेवन करें।

साथ में अलग-अलग बीमारियों में आएगी काम

अरंडी यानी कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउट(जोड़ों का गठिया) की समस्या में आराम मिलता है।इसे अदरक के साथ मिला कर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है।खांड के साथ इसे लेने से त्वचा और लिवर संबंधी बीमारियां दूर होती हैं।आर्थराइटिस से आराम के लिए इसे घी के साथ इस्तेमाल करें।कब्ज होने पर गिलोय में गुड़ मिलाकर खाएं।

#साइड इफेक्ट्स का रखें ध्यान

वैसे तो गिलोय को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के कोई गंभीर दुष्परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं लेकिन चूंकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है। इसलिए इस बात पर नजर रखें कि ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम न हो जाए।

#गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय के सेवन से बचना चाहिए। पांच साल से छोटे बच्चों को गिलोय न दें।

🙏 #एक निवेदन :-- अपने घर में बड़े गमले या आंगन में जंहा भी उचित स्थान हो गिलोय की बेल अवश्य लगायें यह बहु उपयोगी वनस्पति ही नही बल्कि आयुर्वेद का अमृत और ईश्वरीय वरदान है।
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 #गुर्दे हमारे शरीर का एक अहम हिस्सा है यह शरीर की मूत्र प्रणाली का एक हिस्सा है और हमारे शरीर में जो भी  विषैला तत्व पा...
18/01/2025

#गुर्दे हमारे शरीर का एक अहम हिस्सा है यह शरीर की मूत्र प्रणाली का एक हिस्सा है और हमारे शरीर में जो भी विषैला तत्व पाए जाते हैं उनको मूत्र के रास्ते बाहर निकाल देते हैं

#किडनी की सफाई कैसे करें

गुर्दे आपके रक्त से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ को छानते हैं, जिससे आपका शरीर संतुलित और हाइड्रेटेड रहता है। उन्हें स्वस्थ रखना समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

1. #हाइड्रेशन: किडनी को स्वस्थ रखने के लिए भरपूर पानी पीना सबसे आसान और सबसे प्रभावी तरीका है। हाइड्रेटेड रहने से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है और किडनी में पथरी बनने से रोकता है।

2. #नींबू पानी: नींबू के रस में साइट्रिक एसिड होता है, जो कैल्शियम के छोटे-छोटे जमाव को घोलकर किडनी स्टोन को रोकने में मदद कर सकता है। अपने दिन की शुरुआत हल्के से सफाई के लिए गर्म नींबू पानी से करें।

3. #अजमोद चाय: अजमोद एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक के रूप में कार्य करता है, जो मूत्र उत्पादन को बढ़ाता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। ताजे अजमोद को पानी में उबालें, छान लें और इसे चाय की तरह पिएं।

4. #क्रैनबेरी जूस: बिना चीनी वाला क्रैनबेरी जूस बैक्टीरिया को मूत्र मार्ग में चिपकने से रोककर गुर्दे के स्वास्थ्य का समर्थन करता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

15/01/2025

त्रिफला सेवन के लाभ
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1⭐ शिशिर ऋतू में ( 14 जनवरी से 13 मार्च) 5 ग्राम त्रिफला को आठवां भाग छोटी पीपल का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।

2⭐ बसंत ऋतू में (14 मार्च से 13 मई) 5 ग्राम त्रिफला को बराबर का शहद मिलाकर सेवन करें।

3⭐ ग्रीष्म ऋतू में (14 मई से 13 जुलाई ) 5 ग्राम त्रिफला को चोथा भाग गुड़ मिलाकर सेवन करें।

4⭐ वर्षा ऋतू में (14 जुलाई से 13 सितम्बर) 5 ग्राम त्रिफला को छठा भाग सैंधा नमक मिलाकर सेवन करें।

5⭐ शरद ऋतू में(14 सितम्बर से 13 नवम्बर) 5 ग्राम त्रिफला को चोथा भाग देशी खांड/शक्कर मिलाकर सेवन करें।

6⭐ हेमंत ऋतू में (14 नवम्बर से 13 जनवरी) 5 ग्राम त्रिफला को छठा भाग सौंठ का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।

ओषधि के रूप में त्रिफला
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⭐ रात को सोते वक्त 5 ग्राम (एक चम्मच भर) त्रिफला चुर्ण हल्के गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज दूर होता है।
अथवा त्रिफला व ईसबगोल की भूसी दो चम्मच मिलाकर शाम को गुनगुने पानी से लें इससे कब्ज दूर होता है।
इसके सेवन से नेत्रज्योति में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है।

⭐ सुबह पानी में 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण साफ़ मिट्टी के बर्तन में भिगो कर रख दें, शाम को छानकर पी ले। शाम को उसी त्रिफला चूर्ण में पानी मिलाकर रखें, इसे सुबह पी लें। इस पानी से आँखें भी धो ले। मुँह के छाले व आँखों की जलन कुछ ही समय में ठीक हो जायेंग।

⭐ शाम को एक गिलास पानी में एक चम्मच त्रिफला भिगो दे सुबह मसल कर नितार कर इस जल से आँखों को धोने से नेत्रों की ज्योति बढती है।

⭐ एक चम्मच बारीख त्रिफला चूर्ण, गाय का घी10 ग्राम व शहद 5 ग्राम एक साथ मिलाकर नियमित सेवन करने से आँखों का मोतियाबिंद, काँचबिंदु, द्रष्टि दोष आदि नेत्ररोग दूर होते है। और बुढ़ापे तक आँखों की रोशनी अचल रहती है।

⭐ त्रिफला के चूर्ण को गौमूत्र के साथ लेने से अफारा, उदर शूल, प्लीहा वृद्धि आदि अनेकों तरह के पेट के रोग दूर हो जाते है।

⭐ त्रिफला शरीर के आंतरिक अंगों की देखभाल कर सकता है, त्रिफला की तीनों जड़ीबूटियां आंतरिक सफाई को बढ़ावा देती हैं।

⭐ चर्मरोगों में (दाद, खाज, खुजली, फोड़े-फुंसी आदि) सुबह-शाम 6 से 8 ग्राम त्रिफला चूर्ण लेना चाहिये।

⭐ मोटापा कम करने के लिए त्रिफला के गुनगुने काढ़े में शहद मिलाकर ले।त्रिफला चूर्ण पानी में उबालकर, शहद मिलाकर पीने से चरबी कम होती है।

त्रिफला, शहद और घृतकुमारी तीनो को मिला कर जो रसायन बनता है वह सप्त धातु पोषक होता है। त्रिफला रसायन कल्प त्रिदोषनाशक, इंद्रिय बलवर्धक विशेषकर नेत्रों के लिए हितकर, वृद्धावस्था को रोकने वाला व मेधाशक्ति बढ़ाने वाला है। दृष्टि दोष, रतौंधी (रात को दिखाई न देना), मोतियाबिंद, काँचबिंदु आदि नेत्ररोगों से रक्षा होती है और बाल काले, घने व मजबूत हो जाते हैं।
दो माह तक सेवन करने से चश्मा भी उतर जाता है।

विधिः👉 500 ग्राम त्रिफला चूर्ण, 500 ग्राम देसी गाय का घी व 250 ग्राम शुद्ध शहद मिलाकर शरदपूर्णिमा की रात को चाँदी के पात्र में पतले सफेद वस्त्र से ढँक कर रात भर चाँदनी में रखें। दूसरे दिन सुबह इस मिश्रण को काँच अथवा चीनी के पात्र में भर लें।

सेवन-विधि👉 बड़े व्यक्ति10 ग्राम छोटे बच्चे 5 ग्राम मिश्रण सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लें दिन में केवल एक बार सात्त्विक, सुपाच्य भोजन करें। इन दिनों में भोजन में सेंधा नमक का ही उपयोग करे। सुबह शाम गाय का दूध ले सकते हैं।सुपाच्य भोजन दूध दलिया लेना उत्तम है कल्प के दिनों में खट्टे, तले हुए, मिर्च-मसालेयुक्त व पचने में भारी पदार्थों का सेवन निषिद्ध है। 40 दिन तक मामरा बादाम का उपयोग विशेष लाभदायी होगा। कल्प के दिनों में नेत्रबिन्दु का प्रयोग अवश्य करें।

मात्राः 4 से 5 ग्राम तक त्रिफला चूर्ण सुबह के वक्त लेना पोषक होता है जबकि शाम को यह रेचक (पेट साफ़ करने वाला) होता है। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन करें तथा एक घंटे बाद तक पानी के अलावा कुछ ना खाएं और इस नियम का पालन कठोरता से करें ।

सावधानीः👉 दूध व त्रिफला के सेवन के बीच में दो ढाई घंटे का अंतर हो और कमजोर व्यक्ति तथा गर्भवती स्त्री को बुखार में त्रिफला नहीं खाना चाहिए।

घी और शहद कभी भी सामान मात्रा में नहीं लेना चाहिए यह खतरनाख जहर होता है ।

त्रिफला चूर्ण के सेवन के एक घंटे बाद तक चाय-दूध कोफ़ी आदि कुछ भी नहीं लेना चाहिये।

त्रिफला चूर्ण हमेशा ताजा खरीद कर घर पर ही सीमित मात्रा में (जो लगभग तीन चार माह में समाप्त हो जाये ) पीसकर तैयार करें व सीलन से बचा कर रखे और इसका सेवन कर पुनः नया चूर्ण बना लें।
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13/01/2025

मर्दाना ताकत बढ़ाने के लिए खजूर कैसे खाएं?

आयुर्वेद में खजूर को एक उत्तम आहार और औषधि के रूप में जाना जाता है, जो शरीर के ऊर्जा स्तर को बढ़ाने, ताकत को बढ़ाने और संपूर्ण स्वास्थ्य को सुधारने के लिए बहुत फायदेमंद है। खजूर विशेष रूप से पुरुषों की मर्दाना ताकत और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है। खजूर में उच्च स्तर पर विटामिन्स, खनिज, अमीनो एसिड्स, और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर को शक्ति और ऊर्जा प्रदान करते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार खजूर का सेवन कैसे करें:

1. खजूर और दूध का मिश्रण

• विधि: खजूर को आधे घंटे के लिए पानी में भिगोकर उसे नरम कर लें। फिर इसे छीलकर दूध में डालें और अच्छी तरह उबालें। इस मिश्रण को रोजाना सुबह-शाम सेवन करें।

• लाभ: यह मिश्रण शरीर को ताकत प्रदान करता है, खासकर मर्दाना शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। खजूर और दूध का संयोजन शरीर के उत्तेजक तत्वों को सशक्त करता है और ऊर्जा का स्रोत बनता है।

2. खजूर और घी का सेवन

• विधि: खजूर के 4-5 दानों को कूट कर उसमें एक चम्मच घी मिलाएं। इसे सुबह खाली पेट या फिर रात में सोने से पहले सेवन करें।

• लाभ: खजूर और घी का यह संयोजन शरीर को संपूर्ण पोषण प्रदान करता है और मर्दाना ताकत को बढ़ाता है। यह जोड़ों को भी ताकत प्रदान करता है और शरीर को पोषण देता है।

3. खजूर और बादाम का मिश्रण

• विधि: 4-5 खजूरों को 6-7 बादाम के साथ रात भर पानी में भिगोकर रखें। सुबह इसे छीलकर पीस लें और इसका पेस्ट बना लें। इसे नियमित रूप से सुबह सेवन करें।

• लाभ: बादाम में ताजगी और ऊर्जा होती है, जबकि खजूर मर्दाना शक्ति को बढ़ाता है। इस संयोजन से शारीरिक और मानसिक ऊर्जा मिलती है और मर्दाना ताकत को बढ़ावा मिलता है।

4. खजूर और अश्वगंधा का सेवन

• विधि: खजूर और अश्वगंधा चूर्ण को मिला कर सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें।

• लाभ: अश्वगंधा के आयुर्वेदिक गुण मर्दाना शक्ति को बढ़ाते हैं और खजूर के साथ सेवन करने से शक्ति में वृद्धि होती है। यह मानसिक और शारीरिक दोनों ही प्रकार की ऊर्जा को संतुलित करता है।

5. खजूर और काजू का मिश्रण

• विधि: 5-6 खजूर और 5-6 काजू को एक साथ पीसकर खाएं।

• लाभ: काजू में पोटेशियम, मैग्नीशियम, और जिंक जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को ताकत देते हैं। खजूर और काजू का यह मिश्रण मर्दाना ताकत को बढ़ाने के लिए आदर्श है।

खजूर के सेवन के फायदे:

• विटामिन और मिनरल्स: खजूर में प्रचुर मात्रा में विटामिन A, C, और B-complex, और खनिज जैसे आयरन, पोटेशियम, और कैल्शियम होते हैं, जो शरीर को सशक्त बनाते हैं।

• सांतिक गुण: खजूर वात, पित्त और कफ दोषों को संतुलित करता है, जिससे शरीर की प्राकृतिक ऊर्जा और ताकत बढ़ती है।

• पोषण: यह शरीर को ऊर्जा और पोषण प्रदान करता है, जिससे शारीरिक कमजोरी दूर होती है।

• हृदय और रक्त संचार: खजूर रक्त संचार को बेहतर बनाता है, जो शारीरिक ताकत और सक्रियता को बढ़ाता है।

• सहायक शक्ति बढ़ाने के लिए: खजूर का नियमित सेवन पुरुषों में संतानोत्पत्ति क्षमता और मर्दाना शक्ति को बढ़ाता है।

13/01/2025

Gond Katira Benefits:
हर कोई हेल्दी और फिट रहना चाहता है, लेकिन कामकाज और भागदौड़ के चलते अपनी हेल्थ पर अधिक ध्यान नहीं रख पाते। ऐसे में कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने का खतरा भी बढ़ जाता है और शरीर जल्दी ढलने लगता है।

हालांकि, आमतौर पर 40 की उम्र का पड़ाव पार करते ही शरीर में बदलाव आने लगते हैं। उम्र बढ़ना तो स्वाभाविक है, लेकिन सावधानी बरत ली जाए, तो हेल्दी शरीर के साथ ही 50 साल की उम्र में भी जवान दिखा जा सकता है। अगर, आप भी लंबे समय तक जवान दिखाना चाहते हैं तो अपने आहार में गोंद कतीरा को शामिल कर लें। गोंद कतीरा (Tragacanth Gum) एक प्राकृतिक गोंद है, जो पेड़ों से निकाला जाता है। यह आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इसमें कई औषधीय गुण होते हैं जो इसे सेहत के लिए लाभकारी बनाते हैं। जानिए गोंद कतीरा के फायदे (Gond Katira Ke Fayde) और उपयोग।

गोंद कतीरा दिखने में क्रिस्टल जैसा होता है और पानी में मिलाने पर ये जेली जैसा बन जाता है। गोंद कतीरे में प्रोटीन, फॉलिक एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और फाइबर जैसे कई कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। गोंद करीता का सेवन करने से स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं।

गोंद कतीरा के फायदे

ऊर्जा बढ़ाने में सहायक

गोंद कतीरा शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। यह शारीरिक कमजोरी को दूर करता है और तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। इसे शेक या दूध में मिलाकर पीने से ताकत बढ़ती है।

पाचन में सुधार

गोंद कतीरा का सेवन करने से पाचन में सुधार किया जा सकता है। पाचन की समस्या से परेशान लोगों के लिए गोंद कतीरा बहुत असरदार हो सकता है। गोंद कतीरा पाचन तंत्र को मजबूत करता है और कब्ज की समस्या को दूर करता है।

हड्डियों को मजबूत बनाना

गोंद कतीरा को पानी में मिलाने पर ये जेली जैसा बन जाता है। इसके साथ ही इसमें कैल्शियम और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, जिससे हड्डियों को मजबूती मिलती है।

त्वचा के लिए अच्छा

गोंद कतीरा का सेवन करने से त्वचा में निखार आता है। यह त्वचा को नमी युक्त बनाए रखता है और झुर्रियों को कम करता है। इसका उपयोग फेस पैक के रूप में भी किया जा सकता है।

गोंद कतीरा किन बीमारियों में फायदेमंद

डायबिटीज- यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है और डायबिटीज रोगियों के लिए लाभकारी है।

पेट की समस्याएं- यह कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में यह राहत प्रदान करता है।

सूजन- गोंद कतीरा शरीर के अंदरूनी सूजन को कम करने में सहायक है।

गठिया और जोड़ों का दर्द- हड्डियों और जोड़ों की समस्याओं में इसका सेवन फायदेमंद है।

कैसे करें गोंद कतीरा का सेवन

गर्मियों में इसे पानी में भिगोकर फुला लें और ठंडे दूध, शर्बत या शेक में मिलाकर सेवन करें। ऐसे ही सर्दियों में इसे घी में भूनकर और लड्डू या हलवे के रूप में खाएं। इसके अलावा गोंद कतीरा का उपयोग फेस पैक में मिलाकर या मॉइस्चराइजर के रूप में किया जा सकता है।
DDadima ke Gharelu Nuskhe - घरेलू नुस्खे

12/01/2025

#कहते है कि #अति हर चीज की बुरी होती है।

कोइ भी खाना अधिक न खाए ।अपने पेट से थोड़ा कम ही खाए। #जादाखाना खाने से acidity और gas`की समस्या हो जाती है। सुबह के समय `दूध के साथ नाशता करे, दोपहर को 12 से 2 बजे के बीच खाना खाए।फिर रात के समय 8 बजे तक खाना खा लेना चाहिए ।

कभी कभी कुछ चीजें बहुत मनपसंद होने के कारण हम बहुत ज्यादा खा लेते हैं। अगर आपने ज्यादा खा ली हैं तो कैसे पचायें--

1- केले की अधिकता में दो छोटी इलायची खा लीजिये।

2- आम पचाने के लिए आधा चम्म्च सोंठ का चूर्ण और गुड faak ले।

3- जामुन ज्यादा खा लिया तो 3-4 चुटकी नमक खा ले।

4- सेब ज्यादा हो जाए तो दालचीनी का चूर्ण एक ग्राम खा ले।

5- खरबूज के लिए आधा कप चीनी का शरबत

6- तरबूज के लिए सिर्फ एक लौंग

7- अमरूद के लिए सौंफ

8- नींबू के लिए नमक

9- बेर के लिए सिरका

10- गन्ना ज्यादा चूस लिया हो तो 4-5 बेर खा लीजिये

11- चावल ज्यादा खा लिया है तो आधा चम्म्च अजवाइन पानी से निगल लीजिये

12- बैगन के लिए सरसो का तेल एक चम्म्च

13- मूली ज्यादा खा ली हो तो एक चम्म्च काला तिल चबा लीजिये

14- बेसन ज्यादा खाया हो तो मूली के पत्ते चबाएं

15- खाना ज्यादा खा लिया है तो थोड़ी दही खाइये

16- मटर ज्यादा खाई हो तो अदरक चबाएं

17- इमली या उड़द की दाल या मूंगफली या शकरकंद या जिमीकंद ज्यादा खा लीजिये तो फिर गुड खाइये।

18- मुंग या चने की दाल ज्यादा खाये हों तो एक चम्म्च सिरका पी लीजिये

19- मकई ज्यादा खा गये हो तो मट्ठा पीजिये

20- घी या खीर ज्यादा खा गये हों तो काली मिर्च चबाएं

21- खुमानी ज्यादा हो जाए तो ठंडा पानी पीयें

22- पूरी कचौड़ी ज्यादा हो जाए तो गर्म पानी पीजिय

अगर सम्भव हो तो भोजन के साथ एक/आधे नींबू का रस एक कप गुन गुने पानी में मिला कर पीजिये या भोजन में निचोड़ लीजिये , खाया पिया सब पच भी जाएगा और 8०% बीमारियों से भी बचे रहेंगे।```
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