31/01/2026
गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र में गौ आधारित जैविक कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसान भाइयों के लिए एक **मार्गदर्शन शिविर एवं चर्चा सत्र** का सफल एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। इस शिविर का प्रमुख उद्देश्य रासायनिक खेती के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए गौ आधारित, स्वदेशी एवं पर्यावरण-अनुकूल जैविक कृषि पद्धतियों की वैज्ञानिक जानकारी किसानों तक पहुँचाना था।
इस कार्यक्रम में **22 गांवों से 170 से अधिक किसान भाई** उत्साहपूर्वक सम्मिलित हुए। विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने खेती में गौ आधारित उत्पादों के उपयोग, मिट्टी की उर्वरता संरक्षण, उत्पादन लागत में कमी, फसल गुणवत्ता में वृद्धि तथा मानव-स्वास्थ्य पर इसके सकारात्मक प्रभावों को लेकर गहन रुचि दिखाई।
शिविर में गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र के **कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. हेमंत जांभेकर जी** की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने अपने मार्गदर्शन में गौ आधारित जैविक कृषि के वैज्ञानिक आधार, अनुसंधान निष्कर्षों तथा इसके दीर्घकालीन आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
साथ ही, **डॉ. संजय एकापुरे जी (कोषाध्यक्ष, कृषि एवं गौ विशेषज्ञ)** एवं **कार्यकारिणी सदस्य श्री सतीश मोहोड जी** ने किसानों का सविस्तार मार्गदर्शन किया। उन्होंने खेती से जुड़े व्यावहारिक प्रश्नों—जैसे गोबर-गोमूत्र आधारित इनपुट्स की तैयारी, फसल रोग प्रबंधन, लागत-लाभ विश्लेषण तथा चरणबद्ध रूप से जैविक खेती अपनाने की प्रक्रिया—पर समाधानकारक एवं सरल उत्तर देकर किसानों की शंकाओं का निराकरण किया।
चर्चा सत्र में किसानों ने अपने अनुभव साझा किए तथा यह स्वीकार किया कि गौ आधारित जैविक कृषि न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण एवं समाज के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। **सभी उपस्थित किसानों ने गौ आधारित जैविक कृषि को अपनाने का सामूहिक संकल्प** व्यक्त किया।
उल्लेखनीय है कि गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र द्वारा निरंतर **प्रशिक्षण शिविर, खेत-स्तरीय मार्गदर्शन, अनुसंधान, प्रायोगिक प्रदर्शन, पंचगव्य उत्पादों का विकास एवं किसानों से सतत संवाद** जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। इन सतत पहलों के माध्यम से केंद्र का लक्ष्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना, खेती की लागत घटाना तथा गौ आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है।
यह शिविर गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र के उन्हीं सतत प्रयासों की एक सशक्त कड़ी सिद्ध हुआ, जिसने किसानों में आत्मविश्वास, जागरूकता और टिकाऊ कृषि की दिशा में ठोस कदम बढ़ाने की प्रेरणा प्रदान की।