संजीवनी आँखों का हस्पताल, नाहन , हिमाचल प्रदेश

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संजीवनी आँखों का हस्पताल, नाहन , हिमाचल प्रदेश Sanjivni Eye Healthcare Nahan provide various type Eye Care services under one roof.

19/10/2018
Wish you all Happy Janmashtami
03/09/2018

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Free Eye check up camp at gram panchayat sainwala(H.P.).
02/09/2018

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Sanjivni Family Celebrating 72th Independence DayAt AMBALA | Naraingarh | Nahan Centres.
20/08/2018

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12/08/2018
कांटेक्ट लेंस के फायदे 1. कांटेक्ट लेन्स का प्रयोग करके आप चश्मों की तुलना में ज़्यादा अच्छे तरीके से आसपास की चीज़ें देख ...
03/08/2018

कांटेक्ट लेंस के फायदे
1. कांटेक्ट लेन्स का प्रयोग करके आप चश्मों की तुलना में ज़्यादा अच्छे तरीके से आसपास की चीज़ें देख सकते हैं।
2. आप अलग अलग व्यक्ति की ज़रुरत के आधार पर कांटेक्ट लेंस ले सकते हैं।
3. इससे आपको हमेशा चश्मे पहनने की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
4. कांटेक्ट लेन्स से आपके आँखों की समस्या सुलझने की ज़्यादा संभावना होती है।
आकर्षक दिखें
कांटेक्ट लेन्स चश्मे का विकल्प है जो आपके चेहरे को आधा ढककर रखते हैं। अब समय आ गया है कि आप उन भारी चश्मों को छोड़कर कांटेक्ट लेंस का प्रयोग करें। चाहे आप किसी सामूहिक कार्यक्रम में जाएं या किसी दोस्त की शादी में, कांटेक्ट लेंस आपकी प्राकृतिक सुंदरता बाहर लाते हैं।
आँखों की समस्या को छिपाना
अगर आप चश्मा पहनते हैं तो लोगों को देखकर ही यह पता चलता है कि आपको आँखों की समस्या है। पर आँखों पर कांटेक्ट लेंस लगाने से कोई बता ही नहीं पाएगा कि आपको ऐसी कोई समस्या भी है। इससे आप अपनी आँखों की पावर भी छिपा सकते हैं।
बेहतरीन लुक
कुछ लोग आकर्षक लुक पाने के लिए ही रंगीन कांटेक्ट लेंस लेते हैं। इससे आपकी आँखों की पुतली का रंग बदल जाता है और आपका नया व्यक्तित्व उभरकर सबके सामने आता है। लेंस की क्षमता, जिस तरह आप विभिन्न रंग के चश्मे चुनते हैं, ठीक उसी तरह आप कांटेक्ट लेंस लेंस के प्रकार भी चुन सकते हैं।
किफायती
लेंस की क्षमता, एक समय था जब कांटेक्ट लेंस काफी महंगे आते थे। सिर्फ पैसे वाले लोग ही कांटेक्ट लेंस खरीद सकते थे। पर अब विज्ञान ने उन्नति कर ली है और हर श्रेणी का व्यक्ति कांटेक्ट लेंस खरीद सकता है। कुछ पावर वाले लेंस भी चश्मों से सस्ते होते हैं।

पिंक आई क्या होती है'पिंक आई' या 'कंजंक्टिवाइटिस' आँख की बाहरी पर्त कंजंक्टिवा और पलक के अंदरूनी सतह के संक्रमण को कहते ...
02/08/2018

पिंक आई क्या होती है
'पिंक आई' या 'कंजंक्टिवाइटिस' आँख की बाहरी पर्त कंजंक्टिवा और पलक के अंदरूनी सतह के संक्रमण को कहते हैं। साधारण भाषा में इसे "आँख आना" भी कहते हैं। यह प्रायः एलर्जी या संक्रमण द्वारा होता है। यह संक्रमण अधिकांशतः मानवों में ही होता है, किंतु कहीं कहीं कुत्तों में भी पाया गया है। कंजंक्टिवाइटिस को बोलचाल की भाषा में आँख आना कहते हैं।इसकी वजह से आँखें लाल, सूजन युक्त, चिपचिपी [कीचड़युक्त] होने के साथ-साथ उसमें बाल जैसी चुभने की समस्याएं हो सकती हैं।

बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस:-
दोनों आँखों से बहुत अधिक कीचड़ आना।आँखों से गाढ़ा पदार्थ निकलता रहता है। इसकी वजह से कई बार सोकर उठने पर पलकें एक साथ चिपक जाती हैं। इसमें डॉक्टरी सलाह से एंटीबायोटिक ड्रॉप्स या ऑइंटमेंट का इस्तेमाल करें।

वायरल कंजंक्टिवाइटिस:-
कीचड़युक्त पानी काम आना, एक आँख से पानी आना।आमतौर पर यह इन्फेक्शन पहले एक आँख में होता है, मगर आसानी से दूसरी आँख में भी फैल सकता है। गुनगुने या फिर नमक मिले पानी अथवा बोरिक एसिड पाउडर से दिन में कई बार आँखों को धोएं। डॉक्टरी सलाह लें

एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस:-
दोनों आँखों से पानी आना, खुजली होना और लाली आना।यह आमतौर पर दोनों आँखों को प्रभावित करता है। वायरल कंजंक्टिवाइटिस में बताए उपायों पर अमल करें।

लक्षण

आँखों का सफेद भाग लाल हो जाना

आँखों में खुजली होना

आँख से पानी जैसा तरल पदार्थ निकलना

गर्मियों में धूप का चश्‍मा क्यों लगाना चाहिएसर्दियों की तुलना में गर्मी में यूवी रेडिएशन तीन गुना ज्यादा होता है। इसलिए ...
01/08/2018

गर्मियों में धूप का चश्‍मा क्यों लगाना चाहिए

सर्दियों की तुलना में गर्मी में यूवी रेडिएशन तीन गुना ज्यादा होता है। इसलिए गर्मियां शुरू होते ही धूप के चश्मे की जरूरत महसूस होने लगती है। तेज धूप में अल्ट्रावॉयलेट किरणें आंखों पर असर डालती हैं। ऐसे में आंखों को सूरज की तेज रोशनी और खतरनाक यूवी किरणों के कारण होने वाली परेशानी से बचाने के लिए सनग्‍लास को उपयोगी माना जाता है। लेकिन कई लोग कड़ी धूप में यूं ही निकल जाते हैं और चिलचिलाती धूप में आंखों पर बिना चश्मा चढ़ाये बाहर जाने पर आंखों में जलन, पानी गिरना, सिर चकराना, जी मिचलाना जैसी शिकायतें होने लगती हैं। धूप का चश्‍मा ना केवल फैशन के तौर पर ट्रेंडी होते हैं बल्‍कि इन्‍हें आंखों के स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्‍टी से भी महत्‍वपूर्ण माना जाता है। आइये जानें कि गर्मियों में धूप का चश्‍मा लगाना क्‍यों जरूरी है।

रेटिना को बचाये
धूप का चश्‍मा सूरज से निकलने वाली घातक यूवी किरणों से आंखों की रेटीना को बचाने का काम करता है। तेज धूप के कारण आंखों की रोशनी पर प्रतिकूल असर पडऩे के साथ ही धूल के कण रेटिना को नुकसान पहुंचा सकते हैं। धूप के चश्मे का इस्तेमाल कर आंखों को सुरक्षित रखा जाता है। इसलिए जब भी घर से बाहर जाये तो अपनी आंखों की सुरक्षा के लिए इसे लगाना न भूलें।

कॉर्निया को सुरक्षित रखे
तेज धूप में निकलने पर सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से आंखों के ऊपर बनी टीयर सेल यानी आंसूओं की परत टूटने या क्षतिग्रस्त होने लगती है। और यह कॉर्निया के लिए हानिकारक हो सकता है। यानी आंखों के कॉर्निया को भी यूवी किरणों से उतना ही नुकसान पहुंचता है जितना कि रेटीना को। लेकिन धूप में जाते समय काला चश्‍मा पहनने से आप इस समस्‍या बच सकते हैं।

बेसल सेल कार्सिनोमा
धूप का चश्‍मा न लगाने से बेसल सेल कार्सिनोमा की समस्‍या भी हो सकती है। यह त्वचा कैंसर का सबसे आम प्रकारों में से एक है। यह आंखों के सूरज की रोशनी के संपर्क में आने के कारण होता है। बेसल सेल कार्सिनोमा पलक की त्‍वचा का कैंसर है।

कंजेक्टिवा को रखे सुरक्षित
आंखों की निचली व ऊपरी पलकों की बाहरी परत को कंजेक्टिवा कहते हैं यह आपकी आंखों में एक बहुत ही संवेदनशील भाग होता है। जब इस मेंबरेन को धूप से दिक्‍कत होती है तब इसमें खुजली होना शुरु हो जाती है। इसमें वायरल, बैक्टीरियल व एलर्जिक संक्रमण कंजक्टिवाइटिस कहलाता है। इसलिये धूप में जाते समय इसे कवर करने के लिए आपको सनग्‍लास पहनना बहुत जरूरी होता है।

मोतियाबिंद के जोखिम से बचाये
मोतियाबिंद आंखों का आम रोग है जो ज्‍यादा उम्र के व्‍यक्‍तियों को अपने चपेट में लेती है। लेकिन सूरज से निकलने वाली घातक यूवी किरणों से भी यह समस्‍या हो सकती है। इसमें आंखों का लेंस धुंधला हो जाता है जिससे देखने में कठिनाई मसूस होती है। बहुत देर तक धूप में रहने से कोर्टियल कैटरेक्ट का जोखिम दोगुना हो जाता है। इसलिए अल्ट्रावायलेट से सुरक्षा देने वाले चश्मे पहनने चाहिए ताकि नुकसानदेह विकिरण से सीधे सम्पर्क न हो।

सावधानी
धूप के चश्मे लेते समय दो बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना जरूरी है। एक तो चश्मे का साइज बड़ा हो और दूसरा उसकी क्वालिटी अच्छी हो। यानी की वह यूवी किरणों से पूरी सुरक्षा प्रदान करें। और तब तक सनग्‍लास का इस्‍तेमाल करें जब तक शीशे में स्क्रैच या धुंधलापन न आ जायें। इसी तरह हलके रंग में तेज रोशनी से आंखों का बचाव सही तरह से नहीं हो पाता है। लैंस के रंग का चुनाव कुछ इस तरह से करना चाहिए, जिस से आंखों का धूप से बचाव हो सके।

धूप के चश्‍मे का चयन
धूप का चश्मा खरीदने से पहले यह बात भली-भांति समझनी चाहिए कि यह कोई फैशन की वस्तु नहीं बल्कि यह आंखों के आराम हेतु एक उपयोगी वस्तु है। साथ ही धूप का चश्मा धूप, धूल, धुंआ तथा अदृश्य कीटाणुओं से आंखों की रक्षा करता है किन्तु सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य है, चश्मों के लैंसों का उचित व उपयुक्त चयन। यदि लैंसों का चुनाव सावधानीपूर्वक नहीं किया गया और लगातार लंबे समय तक घटिया लैंस का चश्मा पहना गया तो इससे आपकी आंखों को नुकसान हो सकता है।

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Nahan
173001

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