01/08/2018
गर्मियों में धूप का चश्मा क्यों लगाना चाहिए
सर्दियों की तुलना में गर्मी में यूवी रेडिएशन तीन गुना ज्यादा होता है। इसलिए गर्मियां शुरू होते ही धूप के चश्मे की जरूरत महसूस होने लगती है। तेज धूप में अल्ट्रावॉयलेट किरणें आंखों पर असर डालती हैं। ऐसे में आंखों को सूरज की तेज रोशनी और खतरनाक यूवी किरणों के कारण होने वाली परेशानी से बचाने के लिए सनग्लास को उपयोगी माना जाता है। लेकिन कई लोग कड़ी धूप में यूं ही निकल जाते हैं और चिलचिलाती धूप में आंखों पर बिना चश्मा चढ़ाये बाहर जाने पर आंखों में जलन, पानी गिरना, सिर चकराना, जी मिचलाना जैसी शिकायतें होने लगती हैं। धूप का चश्मा ना केवल फैशन के तौर पर ट्रेंडी होते हैं बल्कि इन्हें आंखों के स्वास्थ्य की दृष्टी से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आइये जानें कि गर्मियों में धूप का चश्मा लगाना क्यों जरूरी है।
रेटिना को बचाये
धूप का चश्मा सूरज से निकलने वाली घातक यूवी किरणों से आंखों की रेटीना को बचाने का काम करता है। तेज धूप के कारण आंखों की रोशनी पर प्रतिकूल असर पडऩे के साथ ही धूल के कण रेटिना को नुकसान पहुंचा सकते हैं। धूप के चश्मे का इस्तेमाल कर आंखों को सुरक्षित रखा जाता है। इसलिए जब भी घर से बाहर जाये तो अपनी आंखों की सुरक्षा के लिए इसे लगाना न भूलें।
कॉर्निया को सुरक्षित रखे
तेज धूप में निकलने पर सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से आंखों के ऊपर बनी टीयर सेल यानी आंसूओं की परत टूटने या क्षतिग्रस्त होने लगती है। और यह कॉर्निया के लिए हानिकारक हो सकता है। यानी आंखों के कॉर्निया को भी यूवी किरणों से उतना ही नुकसान पहुंचता है जितना कि रेटीना को। लेकिन धूप में जाते समय काला चश्मा पहनने से आप इस समस्या बच सकते हैं।
बेसल सेल कार्सिनोमा
धूप का चश्मा न लगाने से बेसल सेल कार्सिनोमा की समस्या भी हो सकती है। यह त्वचा कैंसर का सबसे आम प्रकारों में से एक है। यह आंखों के सूरज की रोशनी के संपर्क में आने के कारण होता है। बेसल सेल कार्सिनोमा पलक की त्वचा का कैंसर है।
कंजेक्टिवा को रखे सुरक्षित
आंखों की निचली व ऊपरी पलकों की बाहरी परत को कंजेक्टिवा कहते हैं यह आपकी आंखों में एक बहुत ही संवेदनशील भाग होता है। जब इस मेंबरेन को धूप से दिक्कत होती है तब इसमें खुजली होना शुरु हो जाती है। इसमें वायरल, बैक्टीरियल व एलर्जिक संक्रमण कंजक्टिवाइटिस कहलाता है। इसलिये धूप में जाते समय इसे कवर करने के लिए आपको सनग्लास पहनना बहुत जरूरी होता है।
मोतियाबिंद के जोखिम से बचाये
मोतियाबिंद आंखों का आम रोग है जो ज्यादा उम्र के व्यक्तियों को अपने चपेट में लेती है। लेकिन सूरज से निकलने वाली घातक यूवी किरणों से भी यह समस्या हो सकती है। इसमें आंखों का लेंस धुंधला हो जाता है जिससे देखने में कठिनाई मसूस होती है। बहुत देर तक धूप में रहने से कोर्टियल कैटरेक्ट का जोखिम दोगुना हो जाता है। इसलिए अल्ट्रावायलेट से सुरक्षा देने वाले चश्मे पहनने चाहिए ताकि नुकसानदेह विकिरण से सीधे सम्पर्क न हो।
सावधानी
धूप के चश्मे लेते समय दो बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना जरूरी है। एक तो चश्मे का साइज बड़ा हो और दूसरा उसकी क्वालिटी अच्छी हो। यानी की वह यूवी किरणों से पूरी सुरक्षा प्रदान करें। और तब तक सनग्लास का इस्तेमाल करें जब तक शीशे में स्क्रैच या धुंधलापन न आ जायें। इसी तरह हलके रंग में तेज रोशनी से आंखों का बचाव सही तरह से नहीं हो पाता है। लैंस के रंग का चुनाव कुछ इस तरह से करना चाहिए, जिस से आंखों का धूप से बचाव हो सके।
धूप के चश्मे का चयन
धूप का चश्मा खरीदने से पहले यह बात भली-भांति समझनी चाहिए कि यह कोई फैशन की वस्तु नहीं बल्कि यह आंखों के आराम हेतु एक उपयोगी वस्तु है। साथ ही धूप का चश्मा धूप, धूल, धुंआ तथा अदृश्य कीटाणुओं से आंखों की रक्षा करता है किन्तु सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य है, चश्मों के लैंसों का उचित व उपयुक्त चयन। यदि लैंसों का चुनाव सावधानीपूर्वक नहीं किया गया और लगातार लंबे समय तक घटिया लैंस का चश्मा पहना गया तो इससे आपकी आंखों को नुकसान हो सकता है।