02/05/2020
Korona कोरोना
परिचय बचाव एवं चिकित्सा
चाइनीज वायरस मुकुट की तरह का होने की वजह से यह नाम पड़ा इसका साईज ६२ नैनो मीटर या ५ मायक्रान होता है । इसका बाह्य आवरण फैट ( वसा ) से और अंतर भाग प्रोटीन से बना होता है । यह वसा की उपस्थित मे फलता -फूलता है। इसलिए यह किसी भी fat emulsifier की उपस्थित में नष्ट हो जाता है alchohol भी fat emulsifier होता है। साथ ही क्षारिय पदार्थ भी वसा को नष्ट करने मे सक्षम होते है।
वसा से ही कफ बनता है प्रकरांतर से मुंह और गले मे सबसे पहले पाया जाता है अतः यहीं पर ही इसे फलने फूलने का मौका मिल जाता है ।
लक्षण - सबसे पहले हल्का ज्वर महसूस होता है श्वास भारी होने लगती है पश्चात जुकाम,बुखार में तेजी,खांसी गले में दर्द,श्वास लेने में तकलीफ, छींक सीने मे जकणन आदि लक्षण प्रकट होने लगते है ।
बचाव - आपस में जितनी दूरी हो सके बना के रखे दूसरों के मोबाइल,गाड़ी,रूमाल,तौलिया,वस्त्र आदि का उपयोग न करें।बाहरी लोगों से नगद रूपया,कागज,सामान आदि का लेन-देन करने के पश्चात साबुन या क्षारिय पदार्थ से हाथ मुँह जरुर धो ले। किसी भी संदेहास्पद जगह की यात्रा के पश्चात पानी में फिटकरी ( हल्का दूधिया ) घोलकर साबुन या लिक्विड सोप से स्नान जरुर कर ले और कपड़ों को भी इसी तरह वायरस मुक्त कर ले ।
चिकित्सा - तमाम अनुभवों के विश्लेषण के पश्चात निम्नलिखित औषधियों का प्रयोग सबसे ज्यादा उपयुक्त जानकर प्रस्तावित करता हूँ ।
१- सुदर्शन वनस्पति - इस वायरस में समस्या इसका सूक्ष्म शरीर और कोशिकाओं के अंदर घुसकर रहना और अपनी जनसंख्या वॄद्धि करना है ;अर्थात कोई ऐसी औषधि चाहिए जो विषाणुओं (वायरस )को बाहरी तौर पर ही न मारे वरन् कोशिकाओं के भीतर घुस कर मारे। सदियों से यह औषधि हमारे जीवन का अभिन्न अंग रही थी हर घर मे लगाई जाती थी । पाश्चात्य चिकित्सा का प्रभाव बढ़ जाने से गायब होती चली गई। यह विषाणु रोधी (anti virus) ,मलेरिया रोधी (anti malerial), वात पित्त नाशक(anti inflammatory) है ।यह औषधि मुँह मे जाते ही अपना प्रभाव दिखाना शुरु कर देती है ।पहली खुराक से ही रोग नष्ट होने लगता है ।इसका प्रयोग मैने कठिन से कठिन रोगों पर किया है।निरोगी व्यक्ति भी इसके सेवन से अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कुछ ही खुराक से बढाॖ सकता है।
सेवन विधि - इसके पत्तों का रस २० मिली के लगभग और १ग्राम स्फटिका भस्म मिलाकर हल्का गुनगुना कर के धीरे धीरे पीना चाहिए; ६-६ घंटे के अंतराल पर । मेरा मानना है कि मात्र ४ खुराक मे ही रोगी ठीक हो जायेगा ।(प्रारम्भिक अवस्था में )
यदि रोग तीसरे चरण में हो अर्थात फेफड़े मे तकलीफ हो तो इसके १ घंटे बाद हरताल गोदंती भस्म १ ग्राम शहद में मिलाकर या गरम पानी में घोलकर देना चाहिए ।
यह वनस्पति न उपलब्ध हो तो इससे बनी औषधियों का भी प्रयोग कर सकते हैं यथा - सुदर्शन चूर्ण, महासुदर्शन चूर्ण, सुदर्शन क्वाथ,सुदर्शन घन बटी,महासुदर्शन घन वटी (डाबर),त्रिसून (झंडू) आदि ।क्वाथ २० मिली १ग्राम स्फटिका भस्म ४ घंटे के अंतराल से। गोलियों को २-२ गोली गरम पानी में घोलकर १ग्राम स्फटिका भस्म मिलाकर ४-४ घंटे के अंतराल पर देना चाहिए।
स्फटिका ना हो तो टंकण या गोदंती भस्म का भी प्रयोग कर सकते है ।
यह वनस्पति "सुदर्शन" है अपने घर में जरुर लगाए।
पथ्यापथ्य - मीठी और वसा युक्त आहार ग्रहण न करे। इससे वायरस को फलने फूलने का मौका मिल जाता है
उप कथन- इस औषधि के सेवन से वमन हो सकता है;हो सके तो प्रयास करके और वमन करे।घबराये नही इससे कफ खत्म होगा और राहत मिलेगी।
और अधिक जानकारी के लिए (9415778022) WhatsApp no. पर सम्पर्क कर सकते हैं।
आप सभी स्वस्थ रहे; सुरक्षित रहे। अपने घर मे रहे;अपनों के साथ रहे।
।।दीर्घायु भवति।।
।।शुभम भूयात्।।
शुभकामनाओं के साथ
गगन चंद्र सिंघानिया एवं वैदिक ऑर्गेनिक परिवार ।
भीमताल, नैनीताल, उत्तराखंड 263136
Email - Vedikorg@gmail.com