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*📝 PRODUCT SUMMARY OF OJASVI TEA☕🍃**🍃Direction For Use**☕AddAdd 5 g. of powder in 150 ml. of water. Boil still it reduce...
11/09/2018

*📝 PRODUCT SUMMARY OF OJASVI TEA☕🍃*

*🍃Direction For Use*
*☕AddAdd 5 g. of powder in 150 ml. of water. Boil still it reduces to half . Then add equal quantity of milk & sugar as per requirement preferably.*

*🍃Benefits*
*☕Daily use improve digestive power, memory, heart function, purifies blood, remove unwanted respiratory secretions, normalizes blood cholesterol & blood pressure.*

*☕By these action useful in poor apetite, constipation, lack of concentration, poor memory, excess sleep, headache, migraine, running nose, cough, bronchitis, asthma, heart diseases, blood impurities & related skin diseases etc.*

*🍃Main Ingredients*
*☕Cinnamomum cassia(tejpatta), zingiber officinale(sunthi), convolvulus pluricaulis (shankhpushpi), Bacopa monieri(brahmi) etc.*

🍃🌿🌿🌿☕🌿🌿🌿☕🌿🌿🌿☕🌿🌿🍃

🌸Available @ 🛒 हमारा पता 🛒 - ➖ गुरु सेवा
आर्युवैदिक - हर्बल और सत साहित्य सेंटर
शॉप न -७,अभिषेक को-ओप हाउसिंग सोसाइटी,डी-मार्ट के सामने
सेक्टर ९ ,ऐरोली,नवी-मुंबई -४००७०८
मोबाइल-९८३३६४१५५६/७७३८५२६७११
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अच्युताय हरिओम अडूसी अर्क(Achyutaya Hariom Ardusi Ark)क्षय(टी.बी.),नकसीर व रक्तपित्त,श्वास,कफ और खांसी की बीमारी में लाभ...
05/09/2018

अच्युताय हरिओम अडूसी अर्क(Achyutaya Hariom Ardusi Ark)
क्षय(टी.बी.),नकसीर व रक्तपित्त,श्वास,कफ और खांसी की बीमारी में लाभकारी ।

(1)Product Name :- Ardusi Ark
(2)Quantity :- 210 ml.
(3)Direction For Use :- 5 to 15 ml. once or twice a day on empty stomach with water ( Dose depends upon age, weight & illness of the individuals). OR as directed by physician.
Note :- Do not take milk 2 hr. before & 2 hr. after medicine.
(4)Benefits :- It liquifies and removes cough therefore useful in dry cough, productive cough, bronchitis. It produces slow but persistant bronchodilation on daily longterm use in asthma, COPD etc.
(5) Main Ingredients :- Adhatoda Vasica(ardusi).

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अच्युताय हरिओम नीम अर्क(Achyutaya Hariom Neem Ark)(रक्त शुद्धिकर ,पित्तशामक)दाद, खाज, खुजली, कील – मुँहासे, रक्तप्रदर, ग...
05/09/2018

अच्युताय हरिओम नीम अर्क(Achyutaya Hariom Neem Ark)

(रक्त शुद्धिकर ,पित्तशामक)

दाद, खाज, खुजली, कील – मुँहासे, रक्तप्रदर, गर्भाशय के रोग, पुराने त्वचा विकारों व आँखों के सर्व विकारों मे गुणकारी । दाह व पित्तशामक, पीलिया, पांडुरोग, रक्तपित्त, उलटी व यकृत के सब रोगों में लाभदायी । बाल झडना भी कम होता है ।

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अच्युताय हरिओम तुलसी अर्क (Achyutaya Hariom Tulsi Ark)यह सर्दी -जुकाम खांसी ,एसिडिटी ज्वर ,दस्त ,वमन,हिचकी ,मुख की दुर्ग...
05/09/2018

अच्युताय हरिओम तुलसी अर्क (Achyutaya Hariom Tulsi Ark)

यह सर्दी -जुकाम खांसी ,एसिडिटी ज्वर ,दस्त ,वमन,हिचकी ,मुख की दुर्गन्ध ,मन्दाग्नि ,पेचिस में लाभ दायी व हृदय के लिए हितकर है ,यह रक्त में से अतिरिक्त स्निग्धांश को हटाकर रक्त को शुद्ध करता है।यह सौन्दर्य ,बल ब्रह्मचर्य एवं स्मृती वर्धक व कीटाणु ,त्रिदोष और विषनाशक है ।

(1)Product Name :- Tulsi Ark
(2)Quantity :- 225 ml.
(3)Direction For Use :- 5 to 15 ml. once or twice a day on empty stomach with water ( Dose depends upon age, weight & illness of the individuals). OR as directed by physician.
Note :- Do not take milk 2 hr. before & 2 hr. after medicine.
(4)Benefits :- Tulsi is a blood purifier, antioxidant, heart tonic and balances blood cholesterol level.
Useful in skin disease, worm infestation, cancer, heart disease, high blood pressure, high blood cholesterol, pleural effusion, bronchitis, pneumonia, sinusitis, rhinitis, asthma & other kaphaj disorders etc.

(5) Main Ingredients :- ocimum sanctum(Tulsi).

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द्राक्षासव के फायदे – एक चमत्कारी आयुर्वेदिक टॉनिक | Drakshasava Benefits in Hindiद्राक्षासव क्या है : drakshasava kya h...
04/09/2018

द्राक्षासव के फायदे – एक चमत्कारी आयुर्वेदिक टॉनिक | Drakshasava Benefits in Hindi

द्राक्षासव क्या है : drakshasava kya hai

द्राक्षासव एक उत्तम आयुर्वेदिक योग है जो उदर रोगों को दूर करने एवं पाचक अंगों को शक्ति प्रदान करने के लिए प्रतिष्ठित, निरापद और अत्यंत गुणकारी औषधि के रूप में विख्यात है।

अनियमित और अनुचित ढंग से खान पान करने वाले प्राय: उदर रोग और पाचन संस्थान से संबंधित व्याधियों से ग्रस्त बने रहते हैं। ऐसी स्थिति में द्राक्षासव का सेवन बहुत हितकारी सिद्ध होता हैं। द्राक्षासव का निर्माण प्राय: सभी बड़े आयुर्वेदिक औषधि निर्मातागण करते हैं। इसलिए यह औषधि प्राय: आयुर्वेदिक औषधि बेचने वाले सभी छोटे बड़े स्टोर्स पर उपलब्ध रहती है ।

द्राक्षासव की सामाग्री : ingredients of drakshasava

प्रसिद्ध आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘योग रत्नाकर’ में इस औषधि का विवरण दिया गया है। इस औषधि के घटक द्रव्य इस प्रकार है

• बड़ी मुनक्का -5 सेर (किलो)
• मिश्री -5 सेर (किलो)
• शहद -5 सेर (किलो)
• धाय के फूल- 64 तोले
• शीतल मिर्च -4 तोले
• तेजपात -4 तोले
• दालचीनी -4 तोले
• इलायची -4 तोले
• नाग केशर 4- तोले
• लौंग- 4 तोले
• जायफल -4 तोले
• काली मिर्च -4 तोले
• पीपल- 4 तोले
• चित्रक मूल -4 तोले
• चव्य -4 तोले
• पीपलामूल -4 तोले
• निर्गुण्डी के बीज-4 तोले
• जल 4096 तोला।

द्राक्षासव बनाने की विधि : drakshasava banane ki vidhi

मुनक्का खराब, सूखी व सड़ी हुई न हो यह जांच करके ऐसी मुनक्का निकाल कर अलग कर दें और अच्छी मुनक्का पांच सेर वजन में लेकर कुचल लें और पानी में डाल कर उबालें। जब जल चौथाई भाग शेष बचे तब उतार कर मसल छान लें। इसमें मिश्री पीस कर शहद के साथ डाल दें और सभी 13 दवाओं को मोटा मोटा (जौ कूट) कूट कर डाल दें । थोड़े कपूर, अगर, चंदन को जला कर इसकी धूनी एक बरतन में देकर इस बरतन में यह मिश्रण डाल कर बरतन का मुंह ढक्कन से अच्छी तरह से बंद करके ढक्कन की दरार गीले आटे से बंद करके कपड़े से बांध कर रख दें और 45 दिन तक रखा रहने दें। इसके बाद इसे खोलकर छान लें और बाटलों में भर लें । द्राक्षासव बनाने की विधि और इसके घटक द्रव्यों में थोड़ी फेरबदल के साथ अन्य ग्रंथों में
भी इसका विवरण पढ़ने को मिलता है। किसी भी विधि और नुस्खे के अनुसार द्राक्षासव को बनाया जा सकता है।

जो चीज बाजार में मिल जाती हो उसे बाजार से खरीद कर प्रयोग कर लेना चाहिए | क्योंकि घर पर किसी औषधि को बनाने की योग्यता, क्षमता, कुशलता और विधि-विधान की जानकारी प्रत्येक व्यक्ति को नहीं हो सकती, फिर भी कुछ पाठक घटक द्रव्य और निर्माण विधि को भी बताने का आग्रह करते हैं। उनके संतोष के लिए हम योग के घटक द्रव्य और उसकी निर्माण विधि का विवरण भी प्रस्तुत कर दिया करते हैं।

सेवन की मात्रा और अनुपान : Dosage

इसे दो से तीन चम्मच भर मात्रा में सम भाग जल मिला कर भोजन के बाद दोनों वक्त सेवन करना चाहिए।

द्राक्षासव के फायदे , गुण और उपयोग : drakshasava ke fayde , gun aur upyog

1- यह औषधि अरुचि, आलस्य, थकावट व बेचैनी दूर कर स्फूर्ति व उत्साह बढ़ाती है|

2- मन को प्रफुल्लित रखती है, मन शुद्ध करती है और गहरी नींद लाती है।

3- यह जठराग्नि बढ़ाने वाली, बलवर्णवर्द्धक और शरीर को पोषण प्रदान करती है।

4- किसी भी रोग में शारीरिक शक्ति की रक्षा व निर्बलता दूर करने के लिए इसका सेवन हितकारी होता है।

5- यह एक प्रकार से सौम्य और धीमी गति से शरीर को शक्ति व स्फूर्ति देने वाला ऐसा टॉनिक है जो पाचन क्रिया को बल देकर, मल विसर्जन में सहयोग देकर और स्नायविक संस्थान को शक्ति देकर शरीर की निर्बलता और शिथिलता दूर करता रहता है।

6- रक्तार्श (खूनी बवासीर), पित्ताशें (पित्तजन्य बवासीर), उदावर्त (पेट में गैस का ऊपर को चढ़ना), रक्तगुल्म (रक्त का पिण्ड या ग्रंथि बनना), कृमि (पेट में छोटे छोटे कीड़े होना), नेत्र रोग, शिरोरोग, गले के रोग, ज्वर,आम विकार, पाण्डु व कामला आदि रोग का नाश करने में द्राक्षासव श्रेष्ठसहायक औषधि है।

7- आम ज्वर, जो कि आहार का उचित पाचन न होने पर होता है, द्राक्षासव के सेवन से पाचन का सुधार होने से दूर होता है।

8- ज्वर के दौरान होने वाली खांसी भी इसके सेवन से ठीक होती है।

9- पित्त कुपित होने से उत्पन्न विकारों का शमन करने के लिए इसका सेवन हितकारी है।

इसी से मिलती-जुलती एक दवा है। द्राक्षारिष्ट, जो बनाई तो इसी विधि से जाती है। पर इसके घटक द्रव्यों में थोड़ा अंतर होता है। इसमें शहद व मिश्री के स्थान पर गुड़ का उपयोग होता है। आसव और अरिष्ट्र में कोई विशेष अंतर नहीं है । चरक संहिता (सूत्र. 25/49) में 84 प्रकार के आसवों का विवरण प्रस्तुत करते हुए आसव की परिभाषा इस प्रकार से की गई है
एषामासवानामासुतत्वादासवसंज्ञा।
अर्थात् :- इन आसवों का आसव नाम इसलिए रखा गया है कि ये आसुत अर्थात् संधान क्रिया (Fermentation) के द्वारा निर्मित होते हैं। अरिष्ट के विषय में कहा है कि जो चिरकाल तक खराब न हो उसे अरिष्ट कहते हैं । बहरहाल आसव और अरिष्ट पर्यायवाची शब्द हैं।

यहां एक इशारा कर देना आवश्यक है कि आसव अरिष्ट शराब नहीं है और शराब और आसव अरिष्ट की जाति एक होते हुए भी आसव अरिष्ट औषधि गुणों से युक्त होने के कारण शराब से अलग गुण धर्म वाले होते हैं। आयुर्वेद ने मद्य और आसव के घटक द्रव्य, अवयव, गुण और दोनों की क्रिया में भेद बताया है अतः आसव या अरिष्ट पीने का मतलब शराब पीना नहीं है।

इसलिए जिन्हें भूख खुल कर न लगती हो, पाचन ठीक न होता हो, गैस ट्रबल और कब्ज रहता हो, शरीर दुर्बल रहता हो, थकावट और सुस्ती बनी रहती हो, ऐसे किशोर, नवयुवा, प्रौढ़ और वृद्ध अर्थात् किसी भी उम्र के स्त्रीपुरुष द्राक्षासव का नियमित रूप से 2-3 माह तक सेवन करें। छोटे बच्चों के लिए भी यह बहुत गुणकारीव उपयोगी है।

द्राक्षासव के नुकसान : drakshasava ke nuksan / Side effects

• गर्भावस्था के दौरान इसे ना ले |
• डॉक्टर की सलाह के अनुसार सटीक खुराक समय की सीमित अवधि के लिए लें।

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सुबह खाली पेट पानी पीने के 14 बड़े फायदे | Health Benefits Of Drinking Waterपरिचय :जल चिकित्सा हमारे शरीर के वज़न का दो ...
04/09/2018

सुबह खाली पेट पानी पीने के 14 बड़े फायदे | Health Benefits Of Drinking Water

परिचय :

जल चिकित्सा हमारे शरीर के वज़न का दो तिहाई भाग जल तथा सिर्फ एक तिहाई भाग ठोस है। हवा के बाद शरीर की दूसरी सबसे बड़ी आवश्यकता पानी है। जिसके बिना शरीर लम्बे समय तक नहीं चल सकता। दांत शरीर का सबसे ठोस पदार्थ कहा जा सकता है। उसमें भी दस प्रतिशत जल का अंश है। शरीर के अन्य भागों में हड्डियों में चौदह प्रतिशत से अधिक जलीय अंश हैं।

शरीर में जल का प्रमुख कार्य भोजन पचाने वाली विभिन्न प्रक्रियाओं में शामिल होना तथा शरीर की संरचना का निर्माण करना होता है। जल शरीर के भीतर विद्यमान गंदगी को पसीने एवं मलमूत्र के माध्यम से बाहर निकालने, शरीर के तापक्रम को नियंत्रित करने तथा शारीरिक शुद्धि के लिए बहुत उपयोगी तथा लाभकारी होता है। शरीर में जल की कमी से कब्ज, सीने में जलन, पेट के अल्सर, आंतों के रोग, थकान, गर्मियों में लू आदि की अधिक संभावना रहती है। जल पाचन क्रिया के लिए अति आवश्यक है। जल के कारण ही हमें छः प्रकार के रसों-मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, तीखा और कसैला आदि के अलग-अलग स्वाद का अनुभव होता है।

अतः हमें यह जानना और समझना आवश्यक है कि पानी का उपयोग हम कब और कैसे करें ? पानी कितना, कैसा और कब पीयें ? उसका तापमान कितना हो ? स्वच्छ शुद्ध, हल्का, छना हुआ पानी शरीर के तापक्रम के अनुकूल एवं उपयोगी होता है। पानी को जितना धीरे-धीरे चूंट-घूट पीयें उतना अधिक लाभप्रद होता है।

पानी कब और कैसे पीना चाहिये : pani kab aur kaise piye

भेषजं वारि जीर्णं वारि बल प्रदम्। भोजने चामृतं वारि भोजनान्ते विष प्रदम्॥
– चाणक्य नीति दर्पण

अपच होने पर जल पीना औषधि का काम करता है, भोजन के पच जाने पर जल पीना बलदायक होता है, भोजन के मध्यकाल में जल पीना अमृत के समान और भोजन के अन्त में जल पीना पाचन क्रिया के लिए हानिकारक होता है।

भोजन के तुरन्त पहले पानी पीने से भूख मर जाती है। भोजन के बीच में पानी पी सकते हैं, लेकिन ज्यादा नहीं। परन्तु वह पानी गुनगुना हो न कि बहुत ठण्डा। खाना खाने के पश्चात् आमाशय में लीवर पित्ताशय, पेन्क्रियाज आदि के श्राव और अम्ल मिलने से जठराग्नि प्रदीप्त होती है। अत: प्रायः पानी पीने की इच्छा होती है। परन्तु भोजन के तुरन्त बाद पानी पीने से पाचक रस पतले हो जाते हैं, जिसके कारण आमाशय में भोजन का पूर्ण पाचन नहीं हो पाता। फलतः भोजन से जो ऊर्जा मिलनी चाहिए, प्रायः नहीं मिलती। अतः भोजन के पश्चात् जितनी ज्यादा देर से पानी पीयेंगे, उतना पाचन अच्छा होता है। भोजन के दो घंटे पश्चात् जितनी आवश्यकता हो खूब पानी पीना चाहिए, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो।

सुबह खाली पेट पानी पीने के फायदे : subah khali pet pani pine ke fayde

प्रातः काल खाली पेट पानी पीने की क्रिया को उषा पान कहते हैं। उषा पान का पूर्ण लाभ बिना दातुन पानी पीने से मिलता है। रात को तांबे के बर्तन में रखा गया पानी अति उपयोगी होता है। हर रोज़ सुबह दो गिलास पानी पीना चाहिए और दो-चार महीनों में मात्रा बढ़ाते-बढ़ाते चार गिलास पानी पर आ जाइए। पानी पीने के पौने घंटे तक कुछ भी खाएं-पिएं नहीं। जिन लोगों को कब्ज की शिकायत हो उन्हें दो-तीन गिलास पानी पीकर दो-चार किलोमीटर पैदल चलना चाहिए। सुबह खाली पेट में पानी पीने से
1- बवासीर,
2-सूजन,
3-संग्रहणी,
4-ज्वर,
5-उदर रोग,
6-कब्ज,
7-आंत्ररोग,
8-मोटापा,
9-गुर्दे संबंधी रोग,
10-यकृत रोग,
11-नकसीर,
12-कमर दर्द,
13-आंख, कान आदि विभिन्न अंगों के रोगों से मुक्ति मिलती है।
14- नेत्र ज्योति में वृद्धि, बुद्धि निर्मल तथा सिर के बाल जल्दी सफेद नहीं होते अर्थात् अनेक रोगों में लाभ होता है। ( और पढ़े – चमत्कारिक ‘पानी प्रयोग )

शुद्ध पानी से रोगों का इलाज : health benefits of water

1. जल से शरीर के अन्दर की गर्मी एवं गंदगी दूर होती है।
2. खड़े-खड़े पानी पीने से गैस, वात विकार, घुटने तथा अन्य जोड़ों का दर्द, दृष्टि दोष, कानों के रोग होते हैं। अत: पानी बैठकर ही पीना चाहिए।
3. थकावट होने अथवा प्यास लगने पर धीरे-धीरे घुट-घूट पीना लाभप्रद होता है।
4. भय, क्रोध, मूर्च्छा, शोक व चोट लग जाने के समय अन्त:श्रावी ग्रन्थियों द्वारा छोड़े गये हानिकारक श्रावों के प्रभाव को कम करने के लिए पानी लाभप्रद होता है।
5. लू तथा गर्मी लग जाने पर ठंडा पानी व सर्दी जाने पर गर्म पानी पीना चाहिए, उससे शरीर को राहत मिलती है। पानी पीकर गर्मी के बाहर निकलने पर लू लगने की संभावना नहीं रहती।
6. उच्च अम्लता में भी अधिक पानी पीना चाहिए, क्योंकि यह पेट तथा पाचन नली के अन्दर कोमल सतह को जलन से बचाता है।
7. दिन में तीन घंटे के अन्तर पर पानी अवश्य पीना चाहिए, क्योंकि इससे अन्त:श्रावी ग्रन्थियों का श्राव पर्याप्त मात्रा में निकलता रहता है।
8. उपवास के समय पाचन अंगों को भोजन पचाने का कार्य नहीं करना पड़ता। अत: वे शरीर में जमे विजातीय तत्त्वों को आसानी से निकालना प्रारम्भ कर देते हैं। अधिक पानी पीने से उन तत्त्वों के निष्कासन में मदद मिलती है।
9. पेट में भारीपन, खट्टी डकारें आना, पेट में जलन तथा अपच आदि का कारण पाचन तंत्र में खराबी होता है। अत: ऐसे समय गरम पानी पीने से पाचन सुधरता है और उपरोक्त रोगों में राहत मिलती है।
10. डायरिया, हैजा व उल्टी, दस्त के समय उबाल कर ठंडा किया हुआ पानी पीना चाहिए, क्योंकि यह पानी कीटाणु रहित हो जाता है तथा दस्त के कारण शरीर में होने वाली पानी की कमी को रोकता है।
11. गले और नाक में गर्म जल की भाप से जुकाम और गले संबंधी रोगों में आराम मिलता है।
12. त्रिफला के पानी से आंखें धोने पर आंखों की रोशनी सुधरती है। रात भर मेथी दाना में भिगोया पानी पीने से पाचन संबंधी रोग ठीक होते
13. विशेष परिस्थितियों के अतिरिक्त स्नान ताजे पानी से ही करना चाहिये। ताजा पानी रक्त संचार को बढ़ाता है, जिससे शरीर में स्फूर्ति और शक्ति बढ़ती है जबकि गर्म पानी से स्नान करने पर आलस्य एवं शिथिलता बढ़ती है।
सुबह खाली पेट पानी पीने के 14 बड़े फायदे | Health Benefits Of Drinking Water

Achyutya-Bael Churna (Bilvadi Churna) या एगल Marmelos पाउडर कोलाइटिस, अल्सरेटिव कोलाइटिस, और आईबीएस के लिए एक अच्छा हर्ब...
30/08/2018

Achyutya-Bael Churna (Bilvadi Churna) या एगल Marmelos पाउडर कोलाइटिस, अल्सरेटिव कोलाइटिस, और आईबीएस के लिए एक अच्छा हर्बल उपचार है।

बायल या एगल मार्मेलोस पौधे है, जो कि सदस्यों के शरीर के माध्यम से आवश्यक विभिन्न प्रमुख तत्वों में अविश्वसनीय रूप से समृद्ध है, जो कि एक सतत निवास सुनिश्चित करता है। यह बीमारियों और बीमारियों की एक विस्तृत श्रृंखला से लड़ने में मदद करता है।

आईबीडी, आईबीएस और बोवेल गति का इलाज करता है

परिपक्व फल, बायल में रेचक अवस्था होती है। यह कब्ज का इलाज काफी हद तक करने में मदद करता है। और, बेकार फल दस्त, दस्त, और अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं के इलाज में पूरी तरह से शक्तिशाली है। यह आंतों के आंदोलन को रोकता है और सूजन बाउल रोग और आईबीएस के इलाज में विशेष रूप से कुशल है। फल में एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-डायरियल विशेषताएं होती हैं। यह संक्रमण की जड़ से संक्रमण से निपटने में मदद करता है। यह व्यक्तियों के शरीर के अंदर कोमल आंत्र क्रिया सुनिश्चित करता है।

लड़ाई माइक्रोबियल संक्रमण

एगल मार्मेलोस में एंटी-बैक्टीरियल हाउस हैं। यह स्टाफिलोकोकस ऑरियस, क्लेब्सीला निमोनिया, ई कोली, बैसिलस सबलिटिस, साल्मोनेला और अन्य जीवाणु संक्रमण के खिलाफ उपाय प्रदान करता है। बायल से तेल एक खाद्य संरक्षक के रूप में कार्य करता है। इसमें एंटीफंगल, एंटी-वायरल विशेषताएं हैं। यह माइक्रोबियल विकास को रोकता है और संग्रहीत भोजन की स्थायित्व बढ़ाता है। यह भोजन सामग्री को आराम से स्टोर करने के लिए एक सामान्य रणनीति भी प्रदान करता है। यह सूक्ष्म जीव के कुछ रूपों से 21 अधिक दूर युद्ध कर सकता है। यह अतिरिक्त रूप से शरीर को रोटावायरस, जिआर्डिया से दूर करने में मदद करता है और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट और आंत में बैक्टीरिया पर आक्रमण को प्रतिबंधित करता है।

मूल्य

80 ग्राम चर्न के लिए 20 रुपये

Achyutya-Bael Churna( Bilvadi Churna) or Aegle Marmelos Powder

Achyutya-Bael Churna( Bilvadi Churna) or Aegle Marmelos Powder is a best herbal remedy for colitis, ulcerative colitis, and IBS.

Bael or Aegle Marmelos is the plant, which is incredibly rich in various foremost elements required by way of the body of the members to make sure a sustained residing. It helps to fight a wide array of ailments and diseases significantly.

TREATS IBD, IBS AND BOWEL MOTION

The ripe fruit, bael has laxative residences. This helps to treat constipation to an enormous extent. And, the unripe fruit is entirely mighty in treating dysentery, diarrhea, and other gastrointestinal problems. It inhibits the intestinal movement and is particularly efficient in treating inflammatory Bowel disease and IBS. The fruit has anti-microbial and anti-diarrheal characteristics. It helps to deal with the infections correct from their roots. It ensures gentle bowel action inside the body of the individuals.

FIGHTS AWAY MICROBIAL INFECTION

Aegle marmelos has anti-bacterial houses. It supplies remedy against Staphylococcus aureus, Klebsiella pneumonia, E. Coli, Bacillus subtilis, Salmonella and other bacterial infections. The oil from bael acts as a food preservative. It has antifungal, anti-viral characteristics. It prevents the microbial development and increases the durability of the stored meals. It also provides an ordinary strategy to store meals materials comfortably. It may battle away 21 more than a few forms of the micro organism. It additionally helps the physique to do away with the rotavirus, Giardia and restrict the invasion of the bacteria in the gastrointestinal tract and the intestine.

PRICE

INR 20 for 80 gm churna

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आमला कैंडीआमला कैंडी मात्रा: - 500 ग्रामअमला कैंडी के लिए दिशा का उपयोग: - आमला कैंडी खुराक व्यक्तियों की उम्र, वजन और ब...
30/08/2018

आमला कैंडी

आमला कैंडी मात्रा: - 500 ग्राम
अमला कैंडी के लिए दिशा का उपयोग: - आमला कैंडी खुराक व्यक्तियों की उम्र, वजन और बीमारी पर निर्भर करता है। या चिकित्सक द्वारा निर्देशित करता है।
नोट: - दो घंटे दूध न लें। पहले और 2 घंटा। अमला कैंडी के बाद।
लाभ: - आमला कैंडी रस और वेरीया के उत्पादन में वृद्धि। पित्त विकारों में उपयोगी, जैसे आंतरिक गर्मी, जलती हुई आंखें, अतिसंवेदनशीलता, जलती हुई तलवों आदि। यह शुक्राणुरोधी, नाइटफॉल, ल्यूकोरोहा, मेनोरगैगिया को नियंत्रित करता है। आमला कैंडी कब्ज को साफ करता है और भूख बढ़ाता है।
मुख्य सामग्री: फिलेंथस एम्ब्लिका ऑफिसिनलिस (अमला), चीनी।

Amla Candy

Amla Candy Quantity :- 500gms
Direction For Amla Candy Use: - Amla Candy dose depends on upon age, weight & illness of the individuals. OR Does as directed by the physician.
Note:- Do not take milk two hr. Before & 2 hr. after Amla Candy.
Benefits:- Amla Candy Increase production of ras & veerya. Useful in pitta disorders, such as internal hotness, burning eyes, hyperacidity, burning soles, etc. It controls spermatorrhoea, nightfall, leucorrhoea, menorrhagia. Amla Candy clears constipation & increase appetite.
Main Ingredients : Phyllanthus emblica Officinalis(Amla), Sugar.

🌸Available @ 🛒 हमारा पता 🛒 - ➖ गुरु सेवा
आर्युवैदिक - हर्बल और सत साहित्य सेंटर
शॉप न -७,अभिषेक को-ओप हाउसिंग सोसाइटी,डी-मार्ट के सामने
सेक्टर ९ ,ऐरोली,नवी-मुंबई -४००७०८
मोबाइल-९८३३६४१५५६/७७३८५२६७११
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ACHYUTAYA SUVARNPRASH TABLETPrice: 170PRODUCT SUMMARY ACHYUTAYA SUVARNPRASH TABLET सुवर्णप्राश टेबलेट (Suvarna Prash Tab...
30/08/2018

ACHYUTAYA SUVARNPRASH TABLET
Price: 170
PRODUCT SUMMARY ACHYUTAYA SUVARNPRASH TABLET


सुवर्णप्राश टेबलेट (Suvarna Prash Tablet)लाभः सुवर्ण भस्म से पुष्य नक्षत्र में बनाई यह पुण्यदायी गोली आयु, शक्ति,मेधा, बुद्धि,कांति व जठराग्निवर्धक तथा ग्रहबाधा निवारक, उत्तम गर्भपोषक है । गर्भवती स्त्री इसका सेवन करके निरोगी, तेजस्वी, मेधावी संतती को जन्म दे सकती है ।

Achyutaya Suvarnprash गोली

लाभ: - यह सुवर्णप्रश (पूर्ण मस्तिष्क टॉनिक) शुद्ध सोने और केशर के साथ समृद्ध है शरीर के बौद्धिक, मानसिक और शारीरिक विकास के लिए सबसे अच्छा टॉनिक है। जब जीवन के ठंढ दिन से 2 साल तक दैनिक उपयोग करें। आयु का बच्चा श्रुतिधर (उच्चतम ग्रासिंग पावर) बन जाता है, स्वस्थ और बचपन की बीमारियों को कम करने के लिए प्रतिरक्षा बन जाता है। 2 साल के बाद भी। उम्र के बच्चों के सभी तीन पहलू (grasping, भंडारण और recollection), शारीरिक शक्ति, चमक, बच्चों में और अन्य आयु समूहों में प्रतिरक्षा शक्ति में सुधार करता है। उम्र से संबंधित degenerative सीएनएस विकारों को रोकें जैसे। अल्जाइमर रोग, पार्किन्सोनिज्म इत्यादि। जब गर्भवती महिला द्वारा विशेष रूप से तीसरे से 9वें महीने तक मस्तिष्क और शरीर के दूसरे हिस्से के विकास में मदद मिलती है, भ्रूण में जन्मजात विकृति को रोकती है और मां के स्वास्थ्य को भी बनाए रखती है। उसके पास एक मध्यस्थ, तेजस्वी और स्वस्थ बच्चा होगा।

उपयोग के लिए दिशा: - 15 दिनों के लिए जीवन का पहला दिन - 1/8 टैब। दिन में एक बार।

15 दिन से 3 महीने - ¼ टैब। दिन में एक बार।

3 महीने से 6 महीने - ½ टैब। दिन में एक बार।

6 महीने से 2 साल। - 1 टैब। दिन में एक बार।

2 साल 5 साल तक - 1 टैब। दिन में दो बार।

≥ 5 साल - 2 टैब। दिन में दो बार।

गाय के दूध / घी खाली पेट पर या चिकित्सक द्वारा निर्देशित के साथ।



लाभः सुवर्ण भस्म से पुष्य नक्षत्र में बनाई यह पुण्यदायी गोली आयु, शक्ति, मेधा, बुद्धि, कांति व जठराग्निवर्धक तथा ग्रहबाधा निवारक, उत्तम गर्भपोषक है । गर्भवती स्त्री इसका सेवन करके निरोगी, तेजस्वी, मेधावी संतती को जन्म दे सकती है ।

🌸Available @ 🛒 हमारा पता 🛒 - ➖ गुरु सेवा
आर्युवैदिक - हर्बल और सत साहित्य सेंटर
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29/08/2018

भ्रूमध्य को अनामिका से हलका रगड़ते हुए ॐ गं गणपतये नमः। ॐ श्री गुरुभ्यो नमः।' करके तिलक करें।

फिर 2-3 मिनट प्रणाम की मुद्रा में (शशकासन करते हुए दोनों हाथ आगे जोड़कर) सिर जमीन पर लगा के रखें। इससे निर्णयशक्ति, बौद्धिकशक्ति में जादुई लाभ होता है। क्रोध, आवेश, वैर पर नियंत्रण पाने वाले रसों का भीतर विकास होता है।

सूर्योदय के समय ताँबे के पात्र में जल ले के उसमें लाल फूल, कुमकुम डालकर सूर्यनारायण को अर्घ्य दें। जहाँ अर्घ्य का जल गिरे वहाँ की गीली मिट्टी का तिलक करें तो विद्यार्थी की बुद्धि बढ़ने में मदद मिलती है।"

ACHYUTAYA AMRIT DRAV Price: 20PRODUCT SUMMARY ACHYUTAYA AMRIT DRAVअमृत द्रव (Achyutaya Amrut Drav) लाभ:- सर्दी-जुकाम, खा...
29/08/2018

ACHYUTAYA AMRIT DRAV
Price: 20
PRODUCT SUMMARY ACHYUTAYA AMRIT DRAV
अमृत द्रव (Achyutaya Amrut Drav)



लाभ:- सर्दी-जुकाम, खाँसी, सिरदर्द व गले के रोगों में लाभदायक ।

सेवन विधि : यदि आपको अत्याधिक सर्दी-जुकाम एवं खाँसी है तो दिन में 2 बार खाली पेट 1 कप गुनगुने पानी (Luke Warm Water) में 8 बूंद (नोर्मल वालों के लिये 4 बूंद) अमृत द्रव डालकर पी लें । 2-3 बूंद अमृत द्रव हथेली में लेकर गले, नाक एवं छाती में भी मालिश करें । तथा 5-10 मिनिट कम्बल ओढकर लेट जाएँ ।

सावधानी : एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि अमृत द्रव को आप आपकी आँखों पर, आँखों में या आँखों के आस-पास भूलकर भी बिलकुल ना लगाएं ।

#यदि आपको सिरदर्द हो रहा है तो 2 बूंद पानी हथेली में लेकर उसमें 2 बूंद अमृत द्रव मिलाकर माथे (Forehead) पर लगाने से तुरंत लाभ होता है ।

#यदि आपको गले में दर्द, खराश, टोंसिल आदि की तकलीफ हो रही है तो आप दिन में 2 बार खाली पेट 1 कप गुनगुने पानी ( Luke Warm Water) में 8 बूंद अमृत द्रव डालकर पी लें । 2-3 बूंद अमृत द्रव हथेली में लेकर गले पर अच्छी तरह से मालिश करें ।

#यदि आपको हलकी-फुल्की चोंट लग गयी है तो आप अमृत द्रव को उस जगह पर लगाएंगे तो दर्द में तुरंत आराम होगा ।

#यदि आपको किसी कीड़े ने काट लिया है तब भी आप अमृत द्रव को उस काटे हुए स्थान पर लगाएंगे तो दर्द में तुरंत आराम होगा ।

परहेज (Restrictions) : सर्दी-जुकाम, खाँसी, नजला, कफ एवं गले के रोग में जबतक रोग पूरी तरह से नियन्त्रण में नहीं आता तबतक रोगियों को खटाई, दही, चावल, कोल्डड्रिंक, छाछ, आइसक्रीम, मिठाई, नीबू, दूध, फ्रिज का ठंडा पानी, घी एवं तेल में तली हुई चीजों का सेवन बिलकुल बंद कर देना चाहिए ।

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Liver Tonic /Tablets(100 ml) Features:As the name suggests, Yakrit Sudha, which is a proportionate mixture of herbs and ...
29/08/2018

Liver Tonic /Tablets
(100 ml) Features:As the name suggests, Yakrit Sudha, which is a proportionate mixture of herbs and natural medicines,
benefits the liver in an impressive way
Protects liver from contagious diseases, Defends against swelling of the liver, Improves appetite, Enhances the organ’s (liver) work-efficiency, Prevents liver damage typically caused by alcohol, smoking and pollution, Eliminates potential threats from jaundice, Safeguards liver from ill-effects of modern medicine
Dosage: Tonic --- Adults: Two to three spoons, thrice daily; Children: One to two spoons, thrice daily.
Note: Shake Tonic Well Before Use Tablets—1 to 2 tablets Morning and evening

लिवर टोनिक / गोलियाँ
(100 मिलीलीटर) विशेषताएं: जैसा कि नाम से पता चलता है, यक्रित सुधा, जो जड़ी बूटी और प्राकृतिक दवाओं का आनुपातिक मिश्रण है,
जिगर को एक प्रभावशाली तरीके से लाभान्वित करता है
यकृत की सूजन के खिलाफ यकृत की रक्षा करता है, यकृत की सूजन के खिलाफ बचाव करता है, भूख में सुधार करता है, अंग (यकृत) कार्य-दक्षता में वृद्धि करता है, आम तौर पर शराब, धूम्रपान और प्रदूषण के कारण जिगर की क्षति को रोकता है, जांघ से संभावित खतरों को समाप्त करता है, असुरक्षित यकृत से बचाता है आधुनिक चिकित्सा का
खुराक: टॉनिक --- वयस्क: दो से तीन चम्मच, तीन बार रोजाना; बच्चे: एक से दो चम्मच, तीन बार रोजाना।
नोट: गोलियों का उपयोग करने से पहले Tonic Well Shake-1 से 2 गोलियाँ सुबह और शाम

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