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10/04/2021

Pandit For Marriage in Nerul, Navi Mumbai | Call - 9773557718
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30/03/2021

Kemdrum dosh

20/11/2019
वेशि योग /वाशि योग / उभयचरी योग :   ये शुभ योग माना जाता है तथा किसी कुंडली में इन तीनों योगों में से किसी एक योग का बनन...
21/06/2019

वेशि योग /वाशि योग / उभयचरी योग :
ये शुभ योग माना जाता है तथा किसी कुंडली में इन तीनों योगों में से किसी एक योग का बनना मुख्य रूप से कुंडली में सूर्य की स्थिति के आधार पर ही निश्चित किया जाता है।
वेशि योग :
कुंडली में सूर्य से अगले घर में कोई ग्रह स्थित हो तो कुंडली में वेशि योग बनता है जो जातक को अच्छा चरित्र, यश तथा प्रसिद्धि प्रदान कर सकता है। कुछ ज्योतिषी यह मानते हैं कि इस योग की गणना के लिए चन्द्रमा, राहु तथा केतु का विचार नहीं किया जाता जिसका अर्थ यह है कि किसी कुंडली में केवल चन्द्रमा, राहु अथवा के ही सूर्य से अगले घर में स्थित होने पर कुंडली में वेशि योग नहीं बनता तथा ऐसी स्थिति में इन ग्रहों के साथ कोई और ग्रह भी उपस्थित होना चाहिए।
उदाहरण के लिए यदि किसी कुंडली के चौथे घर में सूर्य स्थित हैं तथा कुंडली के पांचवे घर में चन्द्रमा, राहु तथा केतु के अतिरिक्त कोई अन्य ग्रह स्थित है तो कुंडली में वेशि योग बनता है। अपनी प्रचलित परिभाषा के अनुसार वेशि योग बहुत सी कुंडलियों में बन जाता है किन्तु इनमें से बहुत से जातकों को इस योग के शुभ फल प्राप्त नहीं होते जिसके चलते इस योग के किसी कुंडली में बनने के लिए कुछ अन्य तथ्यों पर भी विचार करना आवश्यक है।

किसी कुंडली में वेशि योग बनाने के लिए सूर्य को उस कुंडली में शुभ होना चाहिए तथा सूर्य से अगले घर में स्थित ग्रह अथवा ग्रहों को भी कुंडली में शुभ होना चाहिए तथा इनमें से किसी भी ग्रह के कुंडली में अशुभ होने की स्थिति में कुंडली में वेशि योग नही बनेगा अथवा ऐसा वेशि योग क्षीण होगा। इसके अतिरिक्त किसी कुंडली में वेशि योग बनाने के लिए सूर्य का किसी भी अशुभ ग्रह के प्रभाव से रहित होना भी आवश्यक है जिसका अर्थ यह है कि कुंडली में सूर्य के साथ कोई अशुभ ग्रह स्थित न हो तथा कुंडली में कोई अशुभ ग्रह अपनी दृष्टि से भी सूर्य पर अशुभ प्रभाव न डाल रहा हो क्योंकि किसी कुंडली में शुभ सूर्य पर एक अथवा एक से अधिक अशुभ ग्रहों का प्रभाव कुंडली में बनने वाले वेशि योग के शुभ फलों को कम अथवा बहुत कम कर सकता है।
वेशि योग के शुभ फल निश्चित करने से पहले कुंडली में सूर्य का बल तथा स्थिति आदि भी देख लेनें चाहिएं। उदाहरण के लिए किसी कुंडली में सूर्य के मेष राशि में दसवें घर में स्थित होने से बनने वाला वेशि योग कुंडली में सूर्य के तुला राशि में बारहवें घर में स्थित होने से बनने वाले वेशि योग की तुलना में कहीं अधिक प्रबल तथा शुभ फलदायी होगा।

वाशि योग :
कुंडली में सूर्य से पिछले घर में कोई ग्रह स्थित हो तो कुंडली में वाशि योग बनता है जो जातक को स्वास्थ्य, प्रसिद्धि, आर्थिक समृद्धि तथा किसी सरकारी संस्था में लाभ एवम प्रभुत्व का पद प्रदान कर सकता है। कुछ ज्योतिषी यह मानते हैं कि इस योग की गणना के लिए चन्द्रमा, राहु तथा केतु का विचार नहीं किया जाता जिसका अर्थ यह है कि किसी कुंडली में केवल चन्द्रमा, राहु अथवा केतु के ही सूर्य से पिछले घर में स्थित होने पर कुंडली में वाशि योग नहीं बनता तथा ऐसी स्थिति में इन ग्रहों के साथ कोई और ग्रह भी उपस्थित होना चाहिए।
उदाहरण के लिए यदि किसी कुंडली के चौथे घर में सूर्य स्थित हैं तथा कुंडली के तीसरे घर में चन्द्रमा, राहु तथा केतु के अतिरिक्त कोई अन्य ग्रह स्थित है तो कुंडली में वाशि योग बनता है। अपनी प्रचलित परिभाषा के अनुसार वाशि योग बहुत सी कुंडलियों में बन जाता है किन्तु इनमें से बहुत से जातकों को इस योग के शुभ फल प्राप्त नहीं होते जिसके चलते इस योग के किसी कुंडली में बनने के लिए कुछ अन्य तथ्यों पर भी विचार करना आवश्यक है।

वेशि योग की भांति ही वाशि योग के किसी कुंडली में निर्माण के लिए भी कुंडली में सूर्य तथा सूर्य से पिछले घर में स्थित ग्रहों का शुभ होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त कुंडली में सूर्य पर किसी भी अशुभ ग्रह का स्थिति अथवा दृष्टि के माध्यम से अशुभ प्रभाव नहीं होना चाहिए क्योंकि सूर्य पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव कुंडली में बनने वाले वाशि योग के शुभ फलों को कम अथवा बहुत कम कर सकता है।
कुंडली में बनने वाले वाशि योग के बारे में फलादेश करने से पहले कुंडली में सूर्य की स्थिति तथा बल भी देख लेना चाहिए क्योंकि वेशि योग की भांति ही वाशि योग के शुभ फलों में भी सूर्य के बल तथा स्थिति के आधार पर बहुत अंतर आ सकता है।

उभयचरी योग :
कुंडली में सूर्य से पिछले घर में तथा सूर्य से अगले घर में कोई ग्रह स्थित हो तो कुंडली में उभयचरी योग बनता है जो जातक को नाम, यश, प्रसिद्धि, समृद्धि, प्रभुत्व का पद आदि प्रदान कर सकता है। कुछ ज्योतिषी यह मानते हैं कि इस योग की गणना के लिए चन्द्रमा, राहु तथा केतु का विचार नहीं किया जाता जिसका अर्थ यह है कि किसी कुंडली में केवल चन्द्रमा, राहु अथवा केतु के ही सूर्य से पिछले अथवा अगले घर में स्थित होने पर कुंडली में उभयचरी योग नहीं बनता तथा ऐसी स्थिति में इन ग्रहों के साथ कोई और ग्रह भी उपस्थित होना चाहिए।
उदाहरण के लिए यदि किसी कुंडली के चौथे घर में सूर्य स्थित हैं तथा कुंडली के तीसरे घर में चन्द्रमा, राहु तथा केतु के अतिरिक्त कोई अन्य ग्रह स्थित है तथा कुंडली के पांचवे ग्रह में भी चन्द्रमा, राहु तथा केतु के अतिरिक्त कोई अन्य ग्रह स्थित है तो कुंडली में उभयचरी योग बनता है। अपनी प्रचलित परिभाषा के अनुसार उभयचरी योग बहुत सी कुंडलियों में बन जाता है किन्तु इनमें से बहुत से जातकों को इस योग के शुभ फल प्राप्त नहीं होते जिसके चलते इस योग के किसी कुंडली में बनने के लिए कुछ अन्य तथ्यों पर भी विचार करना आवश्यक है।

वेशि योग की भांति ही उभयचरी योग के किसी कुंडली में निर्माण के लिए भी कुंडली में सूर्य तथा सूर्य से अगले तथा पिछले घर में स्थित ग्रहों का शुभ होना आवश्यक है क्योंकि सूर्य के कुंडली में अशुभ होने से उभयचरी योग बनेगा ही नहीं जबकि इस योग के निर्माण में शामिल अन्य ग्रहों के अशुभ होने से इस योग के फल कम अथवा बहुत कम हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त कुंडली में सूर्य पर किसी भी अशुभ ग्रह का स्थिति अथवा दृष्टि के माध्यम से अशुभ प्रभाव नहीं होना चाहिए क्योंकि सूर्य पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव कुंडली में बनने वाले उभयचरी योग के शुभ फलों को कम अथवा बहुत कम कर सकता है।
कुंडली में बनने वाले उभयचरी योग के बारे में फलादेश करने से पहले कुंडली में सूर्य की स्थिति तथा बल भी देख लेना चाहिए क्योंकि वेशि योग की भांति ही उभयचरी योग के शुभ फलों में भी सूर्य के बल तथा स्थिति के आधार पर बहुत अंतर आ सकता है।

Kemadruma yoga, is one of the most important Yogas formed by Moon. According to Varahmihir, this Yoga is formed when one...
04/06/2019

Kemadruma yoga, is one of the most important Yogas formed by Moon. According to Varahmihir, this Yoga is formed when one house in front and back from the Moon are vacant. In other words, the second and the twelfth house from the Moon should be vacant so that this Yoga can be formed. This Yoga is not at all inauspicious as believed by the astrologers in the modern times. A person should not be afraid of this Yoga at all. In fact it provides strong power to a person to face all sorts of struggles in life so that he may excel and achieve success. People with this Yoga are generally seen to be excellent Generals, Ministers, Councillors, Advisors, Teachers, Professors, Coaches and highly paid & in-demand consultants. The general idea is that they may not be in 'one opinion within' for their own life but are the best people to seek advice from. For example: A person with this Yoga may not be a great soccer player being an average implementer however due to the deep knowledge of technique might guide someone to become one of the best soccer players in the Century. Most phenomenal Astrologers who have contributed to groundbreaking discoveries were born with this Yoga. It is believed that people with such type of a planetary setting, when once channelize their energy and calm the chattering mind either with meditation, yoga, mantra recitation, etc. - they can learn and store 'the entire knowledge available to humanity ever' which is what had made them great advisors & gurus throughout the history. A key distinguishing factor in such individuals is that they are theoretical gurus of all trades but average or below average implementers of that knowledge. These individuals when clubbed with an equally good implementer (who readily accepts 'a person with this Yoga' as his teacher), results in a highly successful union which is an unstoppable team in every aspect.

How is Kemdaruma Yoga formed

Kemadruma Yoga is formed if the second and twelfth house from the Moon are vacant. It is also formed when the Moon is not aspected by an auspicious planet or is not in association with an auspicious planet. Rahu and Ketu are not analyzed when we talk about Kemadruma Yoga.

There is a misconception about Kemadruma yoga that it provides a person with a troubled life. Hence, many astrologers believe this yoga to be inauspicious. This notion is not totally true. People born in Kemadruma yoga do well in their profession. They also receive respect and appreciation in their field of work. Usually, astrologers in modern times only talk about the inauspicious effects of this yoga. But, if they start talking about the auspicious results too, people would know that due to the presence of some yogas, Kemadruma yoga is converted into Raj yoga. Therefore, while analyzing a person’s natal chart, it is important to observe the yogas which neutralise Kemadruma yoga

🌹जय माता दी 🌹   🌹शुक्र_का_गोचर🌹16_अप्रैल_मीन_राशि_में_इस_समय_क्या_होगा_आपका_हाल.....?*🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞*शुक्र ग्रह को भौतिक और वैव...
16/04/2019

🌹जय माता दी 🌹
🌹शुक्र_का_गोचर🌹
16_अप्रैल_मीन_राशि_में_इस_समय_क्या_होगा_आपका_हाल.....?*
🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞
*शुक्र ग्रह को भौतिक और वैवाहिक सुख का कारक कहा जाता है। शुक्र के शुभ होने पर समस्त सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है*
और इसके अशुभ होने से जातक में संस्कारहीनता, अपयश, परिवार में अलगाव और दुःख मिलता है।
शुक्र ग्रह की शांति के लिए इसकी उपासना शुक्रवार के दिन से करनी चाहिए।
अविवाहित जातकों को शुक्र देव की पूजा-अर्चना अवश्य करनी चाहिए।

*शुक्र का मीन राशि में गोचर कब से कब तक ?*
16 अप्रैल 2019, दिन मंगलवार को प्रातः 2:16 बजे से मीन राशि में गोचर करेगा और 10 मई 2019, शुक्रवार रात 8:11 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेगा।

*शुक्र का मीन राशि में होना उच्च का माना जाता है जिस कारण मीन राशि के जातकों पर शुक्र के इस गोचर का अधिक प्रभाव होगा।*

*आपको बताते हैं सभी 12 राशियों पर शुक्र के गोचर का क्या असर होगा?*

*मेष* :-

शुक्र ग्रह आपके बारहवें भाव में गोचर करेगा। जिसके करण आत्मबल में वृद्धि होगी और आप विरोधियों पर हावी रहेंगे। पारिवारिक जीवन भी बहुत अच्छा रहेगा। हर्ष और उल्लास के लिए जीवन साथी, परिजन या मित्रों के साथ बाहर जाने की योजना बना सकते हैं।
इस समय आप जीवन साथी के साथ अच्छा समय व्यतीत करेंगे। शुक्र के बारहवें भाव में होने से कुछ खर्च बढ़ेंगे, विशेषकर भौतिक सुख-सुविधाओं से जुड़ी चीज़ों पर ज्यादा खर्चा होगा।
इस बात का विशेष ध्यान रखें कि किसी की इच्छा के विरूद्ध जाकर अंतरंग या कामुक संबंध बनाने का प्रयास ना करें अन्यथा आपके स्वास्थ्य और छवि दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है। जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें क्योंकि शुक्र के गोचर के कारण उनके स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है।

*उपाय* :-
गाय को नियमित रूप से रोटी खिलाएं।

*वृषभ* :-

शुक्र के आपकी राशि से ग्यारहवें में गोचर के कारण सुखद योग बन रहे हैं। आय और मान प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। इस समय आप कई सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से सम्मिलित होंगे। इसके कारण आपका लोगों से मेल-जोल बढ़ेगा। विशेष रूप से शुक्र के गोचर काल में आपकी वह मंशा पूरी होने वाली है जिसका आप लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे। मित्रों के साथ कहीं भ्रमण पर जा सकते हैं। इस समय भौतिक और विलासिता पूर्ण जीवन की ओर झुकाव बड सकता है।
प्रेम संबंधों में प्रेम का संचार बना रहेगा वैसे इस समय प्रेमी के साथ विवाद भी हो सकता है। जिस कारण आपके प्रेम संबंध प्रभावित हो सकते हैं। प्रेम विवाह करने की इच्छा बढ़ सकती है। जीवन साथी या व्यापारिक सांझेदार की सहायता से आपको लाभ मिल सकता हैं। स्वास्थ्य का ध्यान रखें, नियमित रूप से आराम करें और संतुलित भोजन करें। मदिरादी का सेवन करने से बचें।

*उपाय* :-
छोटी बच्चियों को चावल की खीर बांटे। स्वयं भी खायें।

*मिथुन* :-

शुक्र आपके लिए मिश्रित परिणाम लेकर आएगा। आपकी राशि में शुक्र दसवें भाव में स्थित होने के कारण कामकाजी और व्यक्तिगत जीवन में अच्छे और कड़वे दोनों प्रकार के फल देखने को मिल सकते हैं।
कार्य स्थल पर महिलाओं के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने का प्रयास करें।
लोग जो पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी खोज रहे हैं उन्हें अच्छे अवसर मिल सकतें हैं।
अच्छी छवि और विश्वसनीयता बनाये रखने के लिए आपको अपने अच्छे बौद्धिक कौशल उपयोग करना पडेगा। गोचर के अंत समय में विदेशी संस्था से व्यवसायिक साझेदारी हो सकती है।
आप परिवार को भरपूर समय दे सकतें हैं जिस कारण आपके पारिवारिक सम्बन्ध और भी गहरे होंगे।
घर के सौंदर्यीकरण और भौतिक सुख-सुविधाओं पर कुछ पैसा खर्च हो सकता हैं। फालतू की बातों से दूर रहें अन्यथा आप किसी षडयंत्र के शिकार हो सकते हैं।

*उपाय* :-
गाय को चारा खिलाएं।

*कर्क* :-

शुक्र आपकी राशि के नौंवे भाव में गोचर कर रहा है। जिस कारण आय वृद्धि होने के योग हैं साथ ही कार्य स्थल पर कोई शुभ समाचार मिल सकता है। इस समय में भाग्य आपका साथ देगा। लंबी दूरी की यात्रा की योजना बना सकते हैं। प्रियजनों के साथ सैर-सपाटा करने जा सकते हैं।
आपके बड़े भाई-बहनों को लाभ पहुंच सकता है। कार्य स्थल पर वरिष्ठ कर्मियों के साथ संबंध मधुर होंगे। सहकर्मी आपके सहायक बनेगें। पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा।

*उपाय* :-
भगवान शिव की आराधना करें और साबुत चावल चढ़ाएं।

*सिंह* :-

शुक्र आपकी राशि के आठवें भाव में रहेगा। कार्य स्थल पर कुछ मतभेदों के कारण निराशा मिल सकती है। कामकाजी और व्यक्तिगत जीवन में आकस्मिक किसी समस्या के कारण मानसिक शांति भंग हो सकती है। छोटे भाई-बहनों के साथ मतभेद हो सकता है। आपके स्वास्थ्य में भी गिरावट आ सकती है। अकारण तनाव लेने से बचें और संयम के साथ काम करें। आय में वृद्धि हो सकती है साथ ही खर्च भी बढ़ेंगे।

*उपाय* :-
सूर्य देव को जल चढ़ाएं।

*कन्या* :-

शुक्र आपकी राशि से सातवें भाव में रहेगा जिस कारण जीवन साथी या प्रेमी के साथ एक ओर तो प्यार बढ़ेगा वहीं दूसरी ओर छोटी-मोटी बातों को लेकर विवाद हो सकते हैं। इस समय आपका जीवनसाथी आप पर हावी रह सकता है किन्तु आवश्यकता पड़ने पर आपकी मदद भी करेगा। पारिवारिक जीवन में विवादों से बचने का प्रयास करें अन्यथा अकारण तनाव हो सकता है। इस समय आपका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।

*उपाय* :-
गणेशजी की आराधना करें और उन्हें ध्रुवा चढ़ाएं।

*तुला* :-

शुक्र का मीन राशि में होने वाला गोचर तुला राशि के जातकों के लिए अधिकतर लाभकारी होगा।
शुक्र आपकी राशि से छठवें भाव में गोचर करेगा। जिस कारण पारिवारिक जीवन से जुड़े से सभी मामलों में आपकी जीत होगी। जीवन साथी के साथ कड़वाह हो सकती है इसलिए उनकी चिंताओं को समझें और उस पर ध्यान दें।
शुक्र के प्रभाव से स्थिरता, सहनशीलता और साहस में बल मिलेगा। इस समय विशेषकर पेट की निचले हिस्से में कोई पीड़ा हो सकती है। परिजन और मित्रों के साथ लंबी दूरी की यात्रा की योजना बना सकते हैं।
किसी प्रकार की कानूनी विवाद में फंसने की आशंका रह सकती है लेकिन बाद में सब सामान्य भी हो जाएगा। इस समय आपके खर्च अचानक बढ़ सकते हैं।
रहस्यमयी और गुप्त चीज़ों के प्रति आकर्षण बढ़ सकता है। इसके अलावा व्यक्तिगत और कामकाजी जीवन से जुड़ा कोई भी बड़ा निर्णय ना लें तो अच्छा रहेगा। क्योंकि इन मामलों के लिए यह समय सही नहीं है।

*उपाय* :-
माता महालक्ष्मी की आराधना करें और उन्हें लाल फूल चढ़ाएं।

*वृश्चिक* :-

शुक्र का मीन राशि में गोचर वृश्चिक राशि के जातकों के प्रेम संबंधों के लिए अनुकूल रहने वाला है।
आपकी राशि में शुक्र के पांचवें भाव में गोचर करने के कारण आपका झुकाव अपने प्रियतम और जीवन साथी की ओर बढ़ेगा। इस दौरान आपके संबंधों में कुछ गर्माहट आएगी साथही प्यार व आपसी लगाव भी बढ़ेगा।

जीवन साथी या प्रेमी के साथ अंतरंग संबंध अच्छे रहेंगे। प्रेम प्रसंग से जुड़े मामलों में समय सामान्य रहेगा। आय में वृद्धि होने की संभावना है। वे लोग जो उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें सफलता मिल सकती हैं। अंत में विशेष बात अविवाहित जातकों के लिए प्रेम विवाह की संभावना बन रही है।

*उपाय* :-
भगवान विष्णु की उपासना करें।

*धनु* :-

शुक्र ग्रह आपकी राशि से चौथे भाव में स्थित होगा। यह शुक्र की यह स्थिति पारिवारिक जीवन के लिए सही नहीं है। घर में मतभेद होने से टकराव बढ़ेगा और विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। मानसिक शांति और संतुष्टि नहीं मिलने से आप तनाव में रहेंगे इसलिए अच्छा होगा कि, हर परिस्थिति में शांति और धैर्य के साथ काम लें। जल्दबाजी में कोई भी निर्णय लेने से बचें।
कार्य स्थल पर आप अपने काम से लोगों को हैरत में डाल सकतें हैं। कार्य के प्रति आपके समर्पण और प्रतिबद्धता को सराहा जाएगा। इस समय आपके अपने घर का सपना पूरा हो सकता है। क्योंकि इस प्रकार का निवेश आपके लिए शुभ रहेगा।

*उपाय* :-
माथे पर केशर का तिलक लगाएं।

*मकर* :-

शुक्र आपकी राशि से तीसरे भाव में स्थित होगा। यह समय कामकाजी जीवन के लिए अनुकूल रहने वाला है। कार्य स्थल पर कड़ी मेहनत का परिणाम मिलेगा और तरक्की भी हो सकती है।
इस अवधि में नई नोकरी के बारे में भी सोच सकते हैं। किसी भी चुनौतियों का सामान करने के लिए तैयार रहेंगे। व्यापार में कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं। इस समय लिया गया निर्णय निकट भविष्य में आपके लिए लाभकारी रहेगा। आपकी संतान को पढ़ाई में अभूतपूर्व उन्नति देखने को मिलेगी।
आपके छोटे भाई-बहन स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से पीड़ित रह सकते हैं। कार्यालय में किसी भी काम के लिए अपने सहकर्मियों पर निर्भर नहीं रहे। वरिष्ठ अधिकारी आपके कामकाज़ पर पैनी नज़र रख सकते हैं, इसलिए लगातार अच्छा काम करने का प्रयास करें।

*उपाय* :-
हनुमान चालीसा का पाठ करें।

*कुम्भ* :-

शुक्र आपकी राशि से दूसरे भाव में स्थित होगा। इस समय आपके घर में शादी-विवाह या अन्य कोई मांगलिक कार्य संपन्न हो सकते हैं। शुक्र के प्रभाव से आप हर समय ऊर्जा और उत्साह से भरपूर रहेंगे।
इस अवधि में आपकी धन हानि भी हो सकती है और खर्चे भी बढ़ सकते हैं इसलिए आर्थिक विषयों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
वैसे दूसरी ओर आमदनी बढ़ने के भी योग हैं। वे लोग जो जमीन-जायदाद के व्यापर से जुड़े हैं या फिर अपनी संपत्ति बेचने के बारे में सोच रहे हैं उन्हें इस समय लाभ मिल सकता है। परिवार के किसी सदस्य के साथ विवाद होने की आशंका रह सकती है। साथ ही पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कार्यस्थल पर आपका प्रभाव बढ़ेगा। वाहन चलाते समय सावधानी रखें दुर्घटना में चोट लगने के योग बन रहे हैं।

*उपाय* :-
हनुमान जी के मंदिर में गुड़ अर्पण करें।

*मीन* :-

शुक्र का गोचर आपकी राशि में हो रहा है यह आपके चन्द्र राशि में स्थित रहेगा। इस समय आप मानसिक रूप से अच्छा व स्वयं को ऊर्जावान होने का अनुभव करेंगे। इस समय में आप अंतरंग और प्रेम संबंधों में लिप्त रहेंगे। वे लोग जिनका पहले से प्रेम प्रसंग चल रहा है वे एक-दूसरे के और करीब आ सकते हैं।

इस समय आप अपने प्रेमी को अपना जीवनसाथी बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे यानि आप प्रेमविवाह कर सकते हैं। धन और बौद्धिक कौशल का अकारण दिखावा करने से बचें अन्यथा आप कष्ट में आ सकते हैं। वैसे तो वैवाहिक जीवन में शांति बनी रहेगी लेकिन कुछ बातों को लेकर भ्रम बन सकता है। कामकाज और भविष्य को लेकर आपकी इच्छाशक्ति में बढ़ोतरी होगी। कार्यालय के अंदर आपकी कार्य क्षमता में लगातार सुधार देखने को मिलेगा।

*उपाय* :-
विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
🙏गजेंद्र जोशी🙏

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