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09/10/2017

[10/8, 11:02 PM] SANDEEP SIR: *जन्म पत्रिका बनाने वाला ब्राह्मण,*
*जन्म पत्रिका समझाने वाला ब्राह्मण,*
*जन्म पत्रिका से दोष निकालने वाला ब्राह्मण,*
*और सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि दोष पर उपाय बताने वाला भी ब्राह्मण,*
*वाह क्या धंधा निकाला है ब्राह्मण ने.*
*ये धंधा ब्राह्मणों के ज्ञान पर नहीं,*
*लोगों के अज्ञान पर टिका है।*
*(राष्ट्रपिता क्रांतिकारी ज्योतिबा फुले)*
[10/8, 11:02 PM] SANDEEP SIR: *पहले जानो, फिर मानो*
1-किसी भी बात को इसलिए नहीं मान लेना चाहिए कि उसे आपके पूर्वज मानते आये हैं !
2-किसी भी बात को इसलिए नहीं मान लेना चाहिए कि वह बहुत सारी किताबो में लिखी है !
3-किसी भी बात को इसलिए नहीं मान लेना चाहिए कि वह परम्परा से चली आ रही है !
4-किसी भी बात को इसलिए नहीं मान लेना चाहिए कि उसे बहुत सारे लोग मानते हैं !
बल्कि उस बात को मानना चाहिए, जो तर्क की कसौटी पर खरी उतरती हो, परिक्षण में खरी हो, विज्ञानं के तर्क पर खरी हो ! अर्थात : पहले जानो, फिर मानो !
👌🏼"नास्तिक" होना आसान नही
कोई भी "नासमझ" इंसान "ईश्वर" के अस्तित्व को मानकर फ्री हो जाता है उसके लिए उसे "बुद्धि" की जरुरत नही होती परंतु नास्तिक होने के लिए "दृढ विश्वास और साहस" की जरूरत होती है ऐसी "योग्यता" उन लोगो के पास होती है जिनके पास "प्रखर तर्क बुद्धि" होती है. "अंधश्रद्धा" ऐसा "केमिकल" है जो इंसान को "मूर्ख" बनाने मे काम आता है .
-- पेरियार ई.वी. रामास्वामी

@ हिन्दू धर्म का विचित्र इतिहास @
1- मंदोदरी " मेंढकी " से पैदा हुई थी !
2- " श्रंगी ऋषि " " हिरनी " से पैदा हुये थे !
3- " सीता" " मटकी" मे से पैदा हुई थी !
4- " गणेश " अपनी " माँ के मैल " से पैदा हुये थे !
5- " हनुमान " के पिता पवन " कान " से पैदा हुये थे !
6- हनुमान का पुत्र # मकरध्वज था जो # मछ्ली के मुख से पैदा हुआ था !
7- मनु सूर्य के पुत्र थे उनको छींक आने पर एक लड़का नाक से पैदा हुआ था !
8- राजा दशरत की तीन रानियो के चार पुत्र जो फलो की खीर खाने से पैदा हुये थे
9- सूर्य कर्ण का पिता था। भला सूर्य सन्तान कैसे पैदा कर सकता है वो तो आग का गोला है !
" ब्रह्मा " ने तो 4 वर्ण यहां वहां से निकले हद है !!
" दलित " का बनाया हुआ " चमड़े का ढोल"
# मंदिर में बजाने से मंदिर # अपवित्र नहीं होता!
" दलित " मंदिर में चल जाय तो मंदिर " अपवित्र " हो जाता है।
# उन्हें इस बात सेकोई # मतलब नहीं की # ढोल किस जानवरकी चमड़ी से बना है।
उनके लिए # मरे हुए जानवर की चमड़ी पवित्र है,
पर जिन्दा दलित अपवित्र....!!
" लानत है ऐसे धर्म पर" ....!!!
" बुद्धिजीवी " प्रकाश डाले !! दिमाग की बत्ती जलाओ अंधविश्वास भगाऔ

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 यदि " पूजा-पाठ " करने से ही " बुद्धि " और " शिक्षा " आती तो...
" पंडों की औलादें " ही विश्व में # वैज्ञानिक-डॉक्टर-इंजीनियर " # होती..!!
" वहम् " से बचों अपने बच्चों को " उच्च शिक्षा " दिलवाओ.. #
क्योंकि,
" शिक्षा " से ही " वैज्ञानिक-डॉक्टर-इंजीनियर " और शासक बनते हैं ..!
# " पूजा-पाठ " से नहीं..!
# अतः " वहम् " का कोई ईलाज नहीं ..!!
और
" शिक्षा" का कोई # जवाब नहीं..!!
" शिक्षित बनो " .. " संगठित रहो " .. " संघर्ष करो "

🌻 🙏🏻
🦀ब्राह्मण धर्म और बलात्कार 🦀
🍷____ये है सनातन धर्म ____🍷
क्या आप जानते हैं ?
👉🏻इन्द्र ने - गौतम ऋषि की पत्नी "अहिल्या " के साथ रेप किया !
👉🏻चन्द्रमा ने - अर्क अर्पण करती ब्रहस्पति की पत्नी "तारा " के साथ रेप किया !
👉🏻अगस्त्य ऋषि ने - सोम की पत्नी "रोहिणी " के साथ रेप किया !
👉🏻ब्रहस्पति ऋषि ने - औतथ्य की पत्नी व मरूत की पुत्री "ममता "के साथ रेप किया !
👉🏻पराशर ऋषि ने - वरुण की पुत्री "काली "के साथ रेप किया !
👉🏻विश्वामित्र ने - अप्सरा "मोहिनी" के साथ सम्भोग किया !
👉🏻वरिष्ठ ऋषि ने - "अक्षमाला " के साथ रेप किया !
👉🏻ययाति ऋषि ने - "विश्ववाची "के साथ रेप किया !
👉🏻पांडु ने - "माधुरी "के साथ रेप किया !
👉🏻राम के पूर्वज राजा दण्ड ने - शुक्राचार्य की पुत्री "अरजा "के साथ रेप किया !
👉🏻ब्रह्मा ने - अपनी बहिन गायत्री और पुत्री सरस्वती के साथ रेप किया !
ऐसी न जानें कितनी घटनाएँ इनके धर्म ग्रन्थों में भरी पढ़ी हैं इस पोस्ट को करने का मेरा एक ही मकसद है मैं हिन्दू धर्म के ठेकेदारों से पूछना चाहता हूँ ?
👆🏻इन बलात्कारियों का 🔥दहन क्यों नहीँ ? और -
💥"रावण महान " जैसे महा विद्वान शीलवान व्यक्तित्व का जिसने सीता का अपहरण तो किया पर कोई शील भंग नहीँ किया, ऐसे नारी को सम्मान देने वाले "रावण " का दहन 🔥आखिर क्यों ?💥
🕯जागो 🙏 जागो 🕯


____💎रत्न विचार 💎
भगवान से *न्याय* मिलता,
तो *न्यायालय* नहीं होते।
सरस्वती से *ज्ञान* मिलता,
तो *विद्यालय* नहीं होते।
दुआओ से *काम* चलता,
तो *औषधालय* नहीं होते।
बिन काम किये *भाग्य* चमकता,
तो *कार्यालय* नहीं होते।

मंदिर धर्म के दलालों की *निजी दुकान* है, जो कि कुछ *विशेष जाती* के लोगो को ही फायदा पहुँचाने के लिए है।

वहाँ वही जाते हैं, जो *दिमाग से गुलाम* होते हैं।

सोच बदलो, ब्राह्मणवाद मिटाओ।
🙏🏼 इंसान को मान बैठा भगवान🙏🏼
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मैं भी मंदिर बहुत गया हूँ।
मंदिर में रखी मूर्ति के भोग भी बहुत लगाये हैं।
भगवान के चरणों में रूपये भी बहुत रखे हैं।
परंतु किसी भी भगवान को मैंने इंसान की समस्या के लिए दरबार लगाते नहीं देखा l
परंतु कभी किसी भगवान को मैंने भक्त के लिए मंदिर के बंद दरवाजें खोलते हुए नहीं देखा।
कभी मंदिर यानी अपने घर में मोमबत्ती अगरबत्ती चलाते नहीं देखा
मंदिर में हो रहे बलात्कार को कभी रुकते नहीं देखा l
कभी किसी भगवान को मेरे द्वारा चढ़ाये गये भोग को सेवन करते नहीं देखा।
कभी किसी भगवान को पानी पीते नहीं देखा।
कभी किसी भगवान को नहाते नहीं देखा।
कभी किसी भगवान को कपड़ें लेकर पहनते नहीं देखा।
कभी किसी भगवान को टॉयलेट जाते नहीं देखा।
कभी किसी भगवान को उसके हाथ से पैसे पकड़ते नहीं देखा।
कभी किसी भगवान ने आशीर्वाद देने के लिए मेरे सिर पर हाथ नहीं रखा।
कभी किसी भगवान ने मुझे गले नहीं लगाया।
कभी किसी भगवान को मैंने मुझे दु:ख-दर्द, परेशानी में मुझे संभालते नहीं देखा।

क्या देखा ?
=======
भगवान के नाम पर भोग खाते ब्राह्मण को देखा।
भगवान के नाम पर पैसे लेते ब्राह्मण को देखा।
भगवान के नाम पर कपड़ें लेते और पहनते ब्राह्मण को देखा।
भगवान के मंदिर में से पैसे उठाते ब्राह्मण को देखा।
भगवान के मंदिर में चढा़ये पैसों से मालामाल होते ब्राह्मण को देखा।

मैं बेवकूफ मंदिर गया भगवान को मानने और मान बैठा इंसान को।
आस्था का सैलाब तो देखों कि जब ब्राह्मण को भगवान को लूटते देखा तो खुश हुआ,
परंतु भगवान के चढ़ावें को खुद उठाने से डरता था कि भगवान पर चढ़ाया हुआ लेना पाप है। भगवान नाराज होकर श्राप दे देगा।
क्या मानसिकता थी कि भगवान के नाम का तो ब्राह्मण ही ले सकता हैं, मैं ले लूँ तो चोर, लुटेरा, अधर्मी कहलाउंगा।

वाह रे इंसान, तू भगवान की मूर्ति के चक्कर में एक नालायक, चोर, लुटेरे इंसान को भगवान मान बैठा।

इंसान को भगवान मानने की गलती करने के लिये मुझे क्षमा करें।
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1 oct ko jhareda vill delhi cantt me Sahu ji maharaj ji ki 101 safal jayntiyo ka smaapan or samaaj ki mahilao ko bhi bad...
03/10/2017

1 oct ko jhareda vill delhi cantt me Sahu ji maharaj ji ki 101 safal jayntiyo ka smaapan or samaaj ki mahilao ko bhi badh chad kar aage aana chahiye unme ye jagrukta laane ke sandarbh me safal programe....

28/09/2017

जिस मेहनत से स्वर्णो के बच्चे IAS, CA, SSC, MCA की तैयारी करते है....

क्षत्रियों बच्चे UPSC, RAILWAY, NDA आदि की परीक्षाओ की तैयारी करते है.....

बनियों के बच्चे MBA, Business, engineering, IIT, Medical etc. की तैयारी करते है.....

उससे भी कडी मेहनत से हमारे पिछड़ा और शोषित वर्ग के बच्चे ...

*कांवर यात्रा,
दहीहंडी,
गणेश पूजा,
नवरात्रि,
पैदल - लेटकर धार्मिक
यात्रा,
परिक्रमा , जिस देवी देवता का ट्रेंड चलता है जैसे कि पीताम्बरा माता,
सांई बाबा,
कैला देवी करौली आदि के दर्शन की तैयारी करते रहते है.......*
इन मानसिक गुलाम, सामाजिक, वैचारिक और सांस्कृतिक रूप से पिछड़ों को सद्बुद्धि प्रदान करें....

@ईश्वर केवल शोषण का नाम है
*सुकरात*

@ईश्वर का जन्म ही गहरी साजिश से हुआ है।
*कार्ल मार्क्स*

@इस देश मे जो नौजवान इश्वरवादी है मेरे नजर मे नामर्द है!
*शहीद भगत सिंह*

@इस ब्रह्माण्ड मे कोई ईश्वर नही है_
*तथागत गौतम बुद्ध*

@पुरे विश्व मे अगर कोई यह साबित कर दे कि ईश्वर है तो मै अपना सर्वस्त्र उसे दे दूँगा_ *स्टीफन हाँकिन्स*
HB
@कोइ ऐसा इश्वर नहीं है जो इस ब्रह्माण्ड को संचालित कर रहा है तुम अपने कर्म के जिम्मेदार स्वंय हो_
*रजनीश ओशो*
जिस दिन ये मंदिर जाने वाली भीड़ स्कूल की तरफ जाने लगेगी वो देश खुद ही विकसीत होना शुरू कर देगा।
* बाबा साहब अम्बेडकर*

🙏🙏🙏🙏

28/09/2017

*चलो नागपुर!!!*

एक बार माता रमाबाई, डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के पास पंढरपुर चलकर विठोबा के दर्शन की जिद करने लग गई. बाबासाहब ने मना करते हुए कहा, “जो विठोबा भक्तों को दूर ठेलता हो वह कैसा देवता है? हम ऐसा तीर्थक्षेत्र बनायेंगे जहां किसी को मनाई नहीं होगी.”
🐘
माता रमाबाई के जीते जी यह स्वप्न पूर्ण नहीं हुआ. किन्तु 14 अक्तूबर 1956, विजयादशमी के दिन अपने लाखों अनुयायियों के साथ बाबासाहब ने विषमतामय हिंदुत्व को त्याग; समता, न्याय व बंधुत्व पर आधारित बौद्ध धम्म को अपना लिया. सैकड़ो वर्ष पूर्व महान सम्राट अशोक मौर्य ने इसी दिन कलिंग युद्ध के पश्चात, धौली में बौद्ध धम्म अपनाया था.
🐘
नागपुर की ओर दौड़ती खचाखच भरी रेलगाड़ियाँ, दीक्षाभूमि की तरफ लगातार चलती बसें, भीड़ भरे रास्तें, भीम बुद्ध गीत बजाते लाउडस्पीकर, स्थान-स्थान पर बनायें हुए पानी वितरण के स्टाल, आनेवाले उपासकों के लिए निशुल्क भोजन व आवास व्यवस्था, मुफ्त चिकित्सा व औषधी कैंप, स्वागत के लिए बनाए पोस्टर, अस्थाई दुकानें.....यह सब आभास देतें है, धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस का.
इस वर्ष भी 62 वां धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस नागपुर में आगामी ३० सितम्बर को मनाया जा रहा है. हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 10 से 15 लाख लोग दीक्षाभूमि आयेंगे. मनुवादी मीडिया इसकी रिपोर्टिंग नहीं करता क्योंकि उसको नागपुर में उसी दिन आरएसएस के सालाना गुरुदक्षिणा कार्यक्रम की लाज बचानी होती है जिसमें कुछ सौ लोग भाग लेते हैं, और समता के विरुद्ध समरसता की डींगे हांकते है.
यहाँ आनेवाले व्यक्तियों मन में किसी प्रकार की पाप मुक्ति की आशा नहीं होती. न वे किसी मन्नत के लिए यहाँ पहुँचते है. न तो वे किसी चमत्कार की उम्मीद करते हैं.
इस तीर्थक्षेत्र में न तो कोई दीप जलाता है न अगरबत्ती. सभी श्रृंखलाबद्ध तरीके से विश्व के सबसे बड़े शुन्यमध्य स्तूप ‘दीक्षाभूमि’ के गर्भ गृह में रखी बाबासाहब की अस्थियों को नमन कर उनकी राहों पर चलने का संकल्प लेते हैं. वे उस महान युगपुरुष को वंदन करते हैं जिसने मानवीय अधिकारों के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी.
यहाँ आनेवाले एक व्यक्ति से मैंने पूछा कि नवरात्री के व्रत रखना छोड़ वह यहाँ क्या कर रहा है? उसने जवाब दिया की महिसासुर जो हमारा ही पूर्वज था, उसके हत्यारिन की पूजा मैं कैसे कर सकता हूँ?
दूसरे पढ़े लिखे व्यक्ति से मैंने पूछा कि वह कस्तूरचंद पार्क में रावण दहन को देखने क्यों नहीं गया? उसने भी सारगर्भित उत्तर दिया, “रावण दहन, ब्राह्मण सेनापति पुष्यमित्र शुंग द्वारा दसवें शुद्र सम्राट बृहदत्त मौर्य की छल कपट से की हत्या का पर्व है. आप अगर अपना इतिहास नहीं जानते तो दीक्षाभूमि से कुछ किताबें अवश्य खरीद लीजिये.”
यहाँ से लौटने वालों के हाथों में राख-भभूत, गंडे-ताबिज, पशुमूत्र या गोबर से बना प्रसाद, पत्थर मूर्तियों को व पुजारी के गंदे पैरों को धो कर निकले पानी का चरणामृत, भोग के नाम पर बासी खाना आदि नहीं होते.
यहाँ अधिकतर पुस्तकों की दुकाने लगती है. वापसी में हर व्यक्ति के हाथों में कोई ना कोई किताब होती है. सहज ही मन-मस्तिष्क में कार्ल रोवंस के शब्द गूंजने लगते है, “पढ़ाई ने जितने मानवों को मुक्ति दिलाई है, उतनी मुक्ति संसार के सारे युद्ध मिलकर भी नहीं दिला पायें.”
बाबासाहब ने कहा था की गुलाम को उसकी गुलामी का अहसास करा दीजिये, वह अपने आप विद्रोह कर उठेगा.
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यह पोस्ट अपने भाइयों के मध्य, विशेषतः उनके बीच जो अब भी कर्म कांडों के चक्कर में पड़े हैं, अवश्य शेयर करें व उनसे कम से कम एक बार दीक्षाभूमि आकर, मुक्ति की आवाज सुनने, स्वतंत्रता व समता का अहसास करने का आव्हान करें.
🐘
जयभीम!!!

Chatterpati sahuji maharaj ji ki jayanti
28/09/2017

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28/09/2017
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Nand kishore beniwal ji
26/09/2017

Nand kishore beniwal ji

1st october    sunday.      10.00am
26/09/2017

1st october sunday. 10.00am

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