25/04/2020
कब्ज :
दुनिया में तरह तरह के लोग देखने को मिलते हैं जो ऊपर से तो बहुत फ्रेश और चमकते हुए नजर हैं पर उनके शरीर के अन्दर का हाल बस उन्हें ही पता होता है। एक पुरानी कहावत है की जिस व्यक्ति का पेट साफ़ हो और जिस पर कोई कर्ज ना हो तो उससे बड़ा सुखी कोई नही। पाउडर, क्रीम, लिपिस्टिक आदि से चेहरे को निखारा जा सकता है पर अन्दर की ताजगी नहीं बनाई जा सकती। शरीर के अन्दर की ताजगी को महसूस कर पाना एक बहुत ही आनंद भरा अनुभव होता है। शरीर के अंदर होने वाली तमाम समस्याओं में एक समस्या है जो सबसे ज्यादा सुमार है जिसे हम कब्ज के नाम से जानते हैं। तो चलिये हम बात करते हैं कब्ज की जो हमें हमारे शरीर के अंदर की ताजगी का अनुभव करने से रोकती है।
कब्ज यानि कॉन्स्टिपेशन पाचन तंत्र से जुड़ी एक गम्भीर समस्या है जो की किसी भी आयु वर्ग के लोगो को प्रभावित कर सकती है। पर कब्ज रोग की खासियत यह है की इसके मरीज दिनचर्या में सुधार करके और कुछ घरलू उपायों को अपनाकर इसे कंट्रोल कर सकते हैं।
क्या है कॉन्स्टिपेशन
कॉन्स्टिपेशन होने की वजह से पीड़ित व्यक्ति का पेट ठीक से साफ नहीं हो पाता, कॉन्स्टिपेशन के कारण अवरोही आंतों में तरल पदार्थो के अवशोशण में अधिक समय लगने के कारण उनमे शुष्क व कठोर मल अधिक एकत्रित होने लगता है, जिसकी वजह से उस व्यक्ति को मल त्याग करने में काफी परेशानी होती है। रोगी को शौच साफ़ नहीं होता है, मल सूखा और कम मात्रा में निकलता है। शौच कुंथन करने या घण्टों तक बैठे रहने पर निकलता है। जहाँ आम तौर पर लोग दिन में कम से कम एक बार शौच करते हैं वहीँ कांस्टीपेशन का मरीज कई दिनों तक मल त्याग नहीं कर पाता। आसान शब्दों में कॉन्स्टिपेशन होने का अर्थ है, पेट ठीक तरह से साफ नहीं हुआ है या शरीर में तरल पदार्थ की कम है।
कब्ज होने की वजह
वक्त-बेवक्त भोजन करने की आदत,
तले हुए मैदे के व्यंजन, तेज मिर्च-मसालेदार चटपटे भोजन करना
लगातार पेनकिलर्स या नॉरकोटिस या दर्द निवारक दवाएं खाना
कई बार हॉरमोंस की गडबडी, थाइरॉयड या शुगर की बीमारी होना
पहले का भोजन हजम हुए बिना फिर से भोजन खाना
पानी कम पीना तथा खाने को ठीक से चबा-चबा कर ना खाना
मानसिक तनाव, चिंता, क्रोध या शोक की अवस्था में भोजन करना,
भोजन में रेशेदार आहार की कमी होना
ज्यादा चाय, कॉफी, तंबाकू, सिगरेट शराब आदि का सेवन करना
व्यायाम बिल्कुल न करना आराम पसंद लाइफ स्टाइल रखना
खाना खाने के तुरंत बाद में फ्रिज का ठंडा पानी पीना
रात में देर से खाना, खाना खाते ही बिस्तर पकड़ना
करणों के बाद आइए अब जानते हैं कॉन्स्टिपेशन के लक्षण और इलाज के आसान नुस्खे।
मल का हार्ड और सुखा होना
हफ्ते में 3 बार से कम मल त्याग करना
मल त्याग करते समय दर्द होता है
मल त्याग में बहुत ज़ोर लगाने की जरूरत पड़ना
मल त्याग के बाद भी ऐसा लगना की अभी कुछ बाकी है
पेट में मरोड़ उठना
पेट में दर्द रहना
सरदर्द रहना
पेट में गैस रहना
बदहजमी
पाइल्स की समस्या होना जो की मल त्याग के समय ज्यादा ज़ोर लगाने से अक्सर हो जाती है
जी मिचलाना और भूख कम लगना
पैरों में दर्द रहना
उल्टी जैसा होना
चक्कर आना
मूँह से बदबू आने लगना
कमर दर्द होना
बहुत कमजोरी का अहसास होना
पेट में भारीपन लगना
ब्लड प्रेशर का बढ़ना
त्वचा पर फोड़े फुंसी होना
एसिडिटी होना
मूँह में छाले होना
डिप्रेशन रहना
अब हम जानते हैं कब्ज से छुटकारा पाने के नुस्खे।
1. खूब पिएं पानी
कम पानी पीने से कब्ज़ की समस्या हो सकती है। इस समस्या में मल आंतों में सूख जाता है, और मल त्याग करने के लिए ज़ोर लगाना पड़ता है। कब्ज़ के रोगियों को चाहिए कि वो अधिक से अधिक पानी पिएं। 4 लीटर पानी एक दिन में पीने की आदत डालें। खाना खाते समय पानी न पिएं और इसकी बजाय आप खाना खाने से आधा घंटा पहले पानी पी सकते हैं।
2. पपीता अमरूद खाएं
कॉन्स्टिपेशन की शिक़ायत हो तो आपको पपीते और अमरुद का सेवन ज़रूर करना चाहिए । दोनों के गुण हमारे पेट को लाभ पहुंचाते हैं।
3. तांबा
तांबे की बर्तन में पानी भरकर उसमें 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण डालकर रातभर रखें। सुबह बिना कुछ खाए पिए इस पानी को छानकर पीना चाहिए। इस प्रयोग को नियमित करने से पुरानी से पुरानी कब्ज में राहत मिलती है।
4. बादाम
बादाम का तेल भी कब्ज़ की समस्या में लाभ पहुंचाता है। इससे आंतों की कार्य क्षमता बढ़ती है। रात को सोने से पहले गुनगुने दूध में 1 चम्मच बादाम का तेल डालकर पीना चाहिए। 15 दिन लगातार इस उपाय को करने से पुरानी कब्ज़ भी ठीक हो जाती है।
5. नींबू पानी
एक कप हल्के गरम पानी में 1 नींबू निचोड़कर पीने से आंतों में जमा हुआ मल बाहर निकालने में मदद करता है।
6. गरम दूध
रात को गरम दूध पीकर सोना चाहिए। अगर मल आंतों में चिपक गया है तो दूध में अरंडी का तेल मिलाकर पिएं।
7. रेशेदार आहार
रेशेदार भोजन करना चाहिए। हरे पत्तेदार सब्ज़ियों, फलों और सलाद में फाइबर अधिक होता है। कब्ज़ से छुटकारा पाने के लिए पालक का जूस भी लाभदायक है।
8. मुनक्का
बीज निकले हुए 12 मुन्नके दूध में उबालकर खाएं और दूध पी जाएं। सुबह होने तक आपकी कब्ज़ खुल जाएगी।
9. ऑरेंज
8-10 दिन तक सुबह ख़ाली पेट संतरे का जूस पीने से पुरानी कॉन्स्टिपेशन ख़त्म हो जाएगी। लेकिन हां संतरे के जूस में कुछ भी न मिलाएं।
10. ईसबगोल की भूसी
10 ग्राम ईसबगोल की भूसी 125 ग्राम दही में घोलकर सुबह शाम में खाने से कब्ज़ ख़त्म हो जाता है।
11. व्यायाम
पेट से संबंधित नियमित व्यायाम करें इससे आपके कब्ज की समस्या के साथ ही पेट और शरीर की अन्य समस्याओं में भी राहत मिलेगी।
डा आशिष चौधरी
9549063030
शिविर 11 तारिख को सावंरीया होटल मे रहता है.