29/04/2022
Dharm Bina vigyaan nahi Geeta Bina gyaan nahi
एक दिन चेन्नई में समुद्र के किनारे धोती पहने व शाल लपेटे हुए एक सज्जन श्रीमद्भगवदगीता पढ़ रहे थे, तभी वहां एक नवयुवक आया। उसने प्रौढ़ व्यक्ति को गीता के श्लोक के उच्चारण सुने, किन्तु संस्कृत भाषा में होने के कारण उसे सहज रुप में समझ में नहीं आया।
कुछ देर बाद वह बोला- "आज साइंस का जमाना है, फिर भी लोग ऐसी किताबे पढ़ते हैं? दुनिया कहां से कहां बढ़ चुकी और हमारे देश के शिक्षित लोग पुरातनपंथी बने हुए आगे जाना ही नहीं चाहते। जमाना चांद पर पहुंच गया है और हम लोग वही गीता व रामायण के इतिहास की कहानियों पर ही अटके हुए हैं। हमारी सारी ऊर्जा और ध्यान नई खोजों और विज्ञान की प्रगति पर व्यय होने के स्थान पर ऐतिहासिक गौरव गाथा में लगा हुआ है।"
उन सज्जन ने पाठ पूर्ण किया, फिर दर्प भरे उस लड़के से पूछा -
"आप गीता के विषय में क्या जानते हैं, महाशय?"
वह लड़का उत्साह के स्वर मे बोला-
"अरे इन सब पुस्तकों में मुझे कोई रुचि नहीं है। मैं विज्ञान का छात्र हूं और विज्ञान में ही जीना अच्छा लगता है, जिससे मैं दुनिया में अपने देश का नाम आगे ले जा सकूं ..! मैं वर्तमान में विक्रम साराभाई रिसर्च संस्थान का छात्र हूँ I यह गीता पढ़ना हमारे लिये समय का अपव्यय है।"
वह सज्जन मुस्कराने लगे। तभी दो बड़ी बड़ी गाड़िया वहां आयीं.l
एक गाड़ी से कुछ वर्दीधारी सुरक्षा कर्मी निकले और दूसरी गाड़ी से उनका कमांडर, जिसने पीछे का दरवाजा खोला तो वो सज्जन पुरुष चुपचाप गाड़ी में जाकर बैठ गये।
युवक यह सब देखकर हक्का बक्का था, उसने दौड़कर उनसे पूंछा-
"सर.. सर आप कौन हैं? कृपया परिचय देकर जाइएगा।"
वह सज्जन बोले-
"मैं विक्रम साराभाई हूँ।"
सुनकर युवक किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया। थोडी ही देर में उसकी आंखें खुल गईं। उसे समझ में आ गया कि गीता विज्ञान से भी अधिक महत्वपूर्ण है। उसने निश्चय किया कि वह समस्त संस्कृत ग्रंथों की विशेषताओं का अध्ययन करेगा।
यह युवक डा.अब्दुल कलाम थे।
इसी भगवद गीता को पढ़कर डॉ. अब्दुल कलाम ने आजीवन मांस न खाने की प्रतिज्ञा कर ली थी।
गीता एक महाविज्ञान है, गर्व कीजिये। 🙏☺️
साभार: अज्ञात