Dr. Kirti Sharma

Dr. Kirti Sharma Dr Kirti Sharma is consultant Gynecologist, Obstetrician and Infertility specialist practising at Om Hospital, Pali, Rajasthan

05/03/2026

“डिलीवरी के बाद माँ को सबसे ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है… लेकिन अक्सर सबसे कम उसी की होती है।”
बच्चे के जन्म के बाद पूरा ध्यान नवजात पर चला जाता है —
और धीरे-धीरे माँ खुद को पीछे छोड़ देती है।
भारतीय परिवारों में यह बहुत आम है कि
माँ से कहा जाता है —
“अब तो सब ठीक है… बस बच्चे का ध्यान रखो।”
लेकिन सच यह है कि डिलीवरी के बाद माँ का शरीर और मन दोनों गहरी रिकवरी से गुजर रहे होते हैं।
डिलीवरी चाहे नॉर्मल हो या ऑपरेशन —
माँ के शरीर ने 9 महीने तक एक जीवन को संभाला है।
खून की कमी, कमजोरी, हार्मोनल बदलाव, टांकों का दर्द, नींद की कमी —
ये सब उसी समय हो रहा होता है जब माँ से उम्मीद की जाती है कि वह तुरंत मजबूत बन जाए।
यही कारण है कि पोस्टपार्टम पीरियड (डिलीवरी के बाद के 6 हफ्ते) को चिकित्सा विज्ञान में रिकवरी का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है।
इस समय माँ को चाहिए —
🥗 पौष्टिक भोजन
आयरन, प्रोटीन, कैल्शियम और पर्याप्त पानी शरीर को ताकत लौटाने में मदद करते हैं।
😴 पर्याप्त आराम
जब बच्चा सोए, माँ को भी आराम करना चाहिए। नींद की कमी मानसिक और शारीरिक थकान को बढ़ा देती है।
👨‍👩‍👧 परिवार का सहयोग
बच्चे की देखभाल सिर्फ माँ की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार का भावनात्मक और शारीरिक सहयोग बहुत जरूरी है।
🩺 माँ की सेहत पर ध्यान
लगातार कमजोरी, ज्यादा bleeding, बुखार या अत्यधिक उदासी को कभी नजरअंदाज न करें।
याद रखिए —
स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चे की सबसे मजबूत नींव है।
माँ बनना एक खूबसूरत अनुभव है,
लेकिन माँ को भी देखभाल, आराम और सम्मान उतना ही मिलना चाहिए जितना बच्चे को मिलता है।
हर नई माँ को यह सुनने की जरूरत है —
“तुम भी महत्वपूर्ण हो।” ❤️
👇 अगर आप नई माँ हैं या किसी नई माँ को जानते हैं,
तो यह संदेश उनके साथ जरूर साझा करें।
👍 Like करें
📤 Share करें
💬 Comment करें

— डॉ. किर्ति शर्मा
महिला रोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ
[ Postpartum delivery childbirth depression japa ]

26/02/2026
25/02/2026

नॉर्मल डिलीवरी vs ऑपरेशन — माँ बनने का सच
👉 कौन बेहतर है — सच जानिए ❤️
🟢
हर माँ की एक ही इच्छा होती है…
बच्चा सुरक्षित हो और उसे स्वस्थ गोद में मिले 🤱
डिलीवरी का तरीका अलग हो सकता है —
माँ का प्यार नहीं ❤️
🟢 नॉर्मल (वेजाइनल) डिलीवरी — फायदे
✔ Recovery जल्दी
✔ चलना-फिरना आसान
✔ सर्जरी का जोखिम नहीं
✔ भविष्य की pregnancy पर कम असर
✔ Baby के लिए breathing adaptation बेहतर
🔴 नॉर्मल डिलीवरी — चुनौतियाँ
⚠️ Labour pain बहुत तीव्र हो सकता है
⚠️ Labour लंबा और unpredictable हो सकता है
⚠️ Perineal tear / टांके लग सकते हैं
⚠️ Emergency C-section की जरूरत पड़ सकती है
🔵 सिजेरियन (ऑपरेशन) — फायदे
✔ Emergency में माँ-बच्चे की जान बचाता है
✔ Planned surgery में timing निश्चित
✔ कुछ high-risk pregnancies में safer
✔ Labour pain से बचाव
🔴 सिजेरियन — नुकसान
⚠️ Major surgery है
⚠️ Recovery धीमी (4–6 हफ्ते)
⚠️ Infection / bleeding का जोखिम
⚠️ भविष्य की pregnancy में complications का जोखिम
⚠️ Hospital stay और खर्च अधिक
❤️ सबसे महत्वपूर्ण सच
👉 डिलीवरी का तरीका सफलता नहीं तय करता
✨ Healthy Mother
✨ Healthy Baby
यही सबसे बड़ी जीत है ❤️
🌸
माँ बनने का सफर आसान नहीं…
कई बार नॉर्मल, कई बार ऑपरेशन —
लेकिन हर माँ उतनी ही बहादुर होती है 💖
📣 🤰 आप किसके लिए prepare कर रही हैं?
Normal या C-section? Comment करें
📌 Pregnancy की सही जानकारी के लिए FOLLOW करें
📤 इस पोस्ट को हर pregnant woman तक पहुँचाएँ ❤️
माँ बनने का कोई एक “सही” तरीका नहीं होता ❤️
नॉर्मल हो या ऑपरेशन —
सबसे ज़रूरी है माँ और बच्चे की सुरक्षा 🤱
गिल्ट नहीं… सिर्फ प्यार 💖
👇 Comment में बताइए —
आप किस तरह की डिलीवरी चाहती हैं?
[ pregnancy normal cesarean delivery healthy pregnancy mother baby best gynecologist]

23/02/2026

🌸 पिछले 100 वर्षों में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में जीवन-रक्षक क्रांति 🌸
आज माँ और शिशु का सुरक्षित रहना “चमत्कार” नहीं, बल्कि विज्ञान और चिकित्सा की जीत है। 💙
🏥 1. घर से अस्पताल में प्रसव की ओर बदलाव
अब प्रशिक्षित डॉक्टर, नर्स और इमरजेंसी सुविधाओं के कारण जटिल प्रसव भी सुरक्षित हो गए हैं।
👶 2. NICU (Neonatal ICU) सुविधा
समय से पहले जन्मे या बीमार नवजात भी अब आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ देखभाल से बचाए जा रहे हैं।
💉 3. टीकाकरण (Immunisation)
टिटनेस, काली खाँसी, पोलियो जैसी घातक बीमारियों से माँ और शिशु दोनों की सुरक्षा संभव हुई।
🖥️ 4. अल्ट्रासाउंड तकनीक
गर्भ में शिशु की वृद्धि, प्लेसेंटा, जन्म दोष और जोखिम का समय रहते पता — सुरक्षित योजना संभव।
💊 5. आधुनिक दवाएँ
• Antenatal steroids → प्रीमैच्योर बेबी के फेफड़ों को मजबूत करते हैं
• Antihypertensives → प्रीक्लेम्पसिया/हाई BP से माँ-बच्चे की रक्षा
• एंटीबायोटिक्स व अन्य दवाएँ → संक्रमण और जटिलताओं पर नियंत्रण
✨ निष्कर्ष:
आज की सुरक्षित मातृत्व यात्रा — विज्ञान, अस्पताल सुविधाओं और जागरूकता का परिणाम है।
एक सदी पहले जो जोखिम था, आज वह संभाला जा सकता है।
💖 सुरक्षित माँ = स्वस्थ पीढ़ी 💖
— Dr Kirti Sharma

22/02/2026

🌙 गर्भावस्था में रोज़ा (Ramadan Fasting): रखें आस्था भी, सेहत भी सुरक्षित 🤰💛
गर्भावस्था में शरीर की पोषण ज़रूरतें दोगुनी हो जाती हैं। लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने से माँ और शिशु — दोनों पर असर पड़ सकता है। इसलिए रोज़ा रखने से पहले अपनी स्थिति समझना बेहद ज़रूरी है।
👩‍⚕️ एक स्त्री-रोग विशेषज्ञ के रूप में मेरी सलाह: हर गर्भवती महिला के लिए रोज़ा सुरक्षित नहीं होता — पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
⚠️ किन परिस्थितियों में रोज़ा रखना जोखिम भरा हो सकता है?
🔸 हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी
🔸 एनीमिया (खून की कमी)
🔸 हाई BP / प्रीक्लेम्पसिया
🔸 गर्भकालीन डायबिटीज
🔸 जुड़वा या मल्टीपल प्रेग्नेंसी
🔸 बच्चे की ग्रोथ कम होना
🔸 बार-बार चक्कर या कमजोरी
✨ यदि डॉक्टर अनुमति दें, तो सहरी में क्या खाएँ?
✔️ प्रोटीन — अंडा, दाल, पनीर, दही
✔️ कॉम्प्लेक्स कार्ब्स — दलिया, ओट्स, मल्टीग्रेन रोटी
✔️ हेल्दी फैट — बादाम, अखरोट, बीज
✔️ फल — केला, सेब
✔️ दूध या लस्सी
✔️ 3–4 गिलास पानी
❌ बहुत नमकीन, तला-भुना और कैफीन से बचें
✨ इफ्तार कैसे करें?
🌴 1–2 खजूर + पानी
🥣 हल्का और संतुलित भोजन:
✔️ सूप, सलाद
✔️ दाल, सब्जी, रोटी/चावल
✔️ प्रोटीन (चिकन/पनीर/दाल)
➡️ एक साथ बहुत ज्यादा खाना न खाएँ — इससे एसिडिटी और शुगर स्पाइक हो सकता है
💧 हाइड्रेशन = बच्चे की सुरक्षा
इफ्तार से सहरी तक 8–12 गिलास पानी धीरे-धीरे पिएँ
🚨 इन लक्षणों पर तुरंत रोज़ा खोलें और डॉक्टर से मिलें:
❗ चक्कर, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी
❗ पेट में दर्द या कसे हुए दर्द
❗ बच्चे की हलचल कम महसूस होना
❗ बहुत कम पेशाब या गहरा रंग
❗ तेज धड़कन या सांस फूलना
💖 सबसे महत्वपूर्ण बात:
स्वस्थ माँ ही स्वस्थ शिशु को जन्म देती है
📌 इस पोस्ट को सेव करें और किसी भी गर्भवती महिला तक ज़रूर पहुँचाएँ जो रोज़ा रखने की सोच रही हैं
GynecologistAdvice MomToBe SafePregnancy 🤍

18/02/2026

⚠️ प्रेग्नेंसी में अचानक सूजन + तेज सिरदर्द? इसे हल्के में मत लीजिए!
🤰 प्रीक्लेम्प्सिया (Preeclampsia) क्या है?
प्रीक्लेम्प्सिया गर्भावस्था की एक गंभीर स्थिति है, जिसमें
➡️ ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है
➡️ यूरिन में प्रोटीन आने लगता है
➡️ शरीर के अंगों (किडनी, लिवर, ब्रेन) पर असर पड़ सकता है
यह आमतौर पर 20 हफ्ते के बाद विकसित होती है।
🚨 इसके चेतावनी संकेत (Warning Signs)
❗ लगातार या तेज सिरदर्द
❗ आँखों के सामने धुंधलापन या चमक दिखना
❗ अचानक चेहरे, हाथ-पैर में ज्यादा सूजन
❗ ऊपरी पेट में दर्द
❗ अचानक वजन बढ़ना
❗ BP 140/90 mmHg या उससे अधिक
इनमें से कोई भी लक्षण हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
👶 माँ और बच्चे के लिए खतरे
🔴 समय से पहले डिलीवरी (Preterm birth)
🔴 बच्चे का कम वजन
🔴 प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो कम होना
🔴 माँ में दौरे (Eclampsia) का खतरा
🩺 कौन ज्यादा जोखिम में?
✔️ पहली प्रेग्नेंसी
✔️ पहले से हाई BP या डायबिटीज
✔️ जुड़वा गर्भ
✔️ 35 वर्ष से अधिक उम्र
✔️ मोटापा
💡 क्या करें?
✅ नियमित ANC चेकअप कराएं
✅ हर विज़िट पर BP मॉनिटर कराएं
✅ नमक सीमित मात्रा में लें
✅ डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयाँ नियमित लें
✅ अचानक लक्षण दिखें तो इंतजार न करें
❤️ याद रखें:
“सूजन हर बार सामान्य नहीं होती — कभी-कभी यह शरीर की SOS कॉल होती है।”
📢
अगर आप प्रेग्नेंट हैं या किसी को जानते हैं जो प्रेग्नेंट है —
👉 इस पोस्ट को सेव करें
👉 अपनी सहेली / बहन के साथ शेयर करें
स्वस्थ माँ = स्वस्थ शिशु 🤍

11/02/2026

🚨 क्या आप जानती हैं? हर 8 में से 1 गर्भवती महिला को थायरॉइड की समस्या होती है! 🚨
और सबसे बड़ी बात?
ज़्यादातर महिलाओं को पता ही नहीं चलता! 😰
गर्भावस्था में छोटी सी थायरॉइड ग्रंथि आपके और आपके बच्चे के स्वास्थ्य में HUGE भूमिका निभाती है! 💙
⚠️ क्यों जरूरी है थायरॉइड टेस्ट?
✅ बच्चे के मस्तिष्क विकास के लिए
✅ गर्भपात के जोखिम को कम करने के लिए
✅ समय से पहले प्रसव से बचाव के लिए
✅ प्री-एक्लेम्पसिया से सुरक्षा के लिए
✅ बच्चे के सही शारीरिक विकास के लिए
🔬 कब करवाना चाहिए टेस्ट?
📌 गर्भधारण की योजना बनाते समय
📌 गर्भावस्था के पहले तिमाही में (8-12 सप्ताह)
📌 थायरॉइड या डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री हो तो जरूर!
💊 अच्छी खबर:
सही समय पर पता लगने और उचित इलाज से 100% स्वस्थ गर्भावस्था संभव है! ✨
एक साधारण ब्लड टेस्ट आपके बच्चे का भविष्य सुरक्षित कर सकता है। 💝
👉 थायरॉइड टेस्ट के बारे में ज्यादा जानकारी या अपॉइंटमेंट के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क करे
💬 क्या आपने गर्भावस्था में थायरॉइड टेस्ट करवाया है? कमेंट में बताएं!
❤️ इस पोस्ट को शेयर करें और किसी गर्भवती महिला की मदद करें!
TSHTest गर्भावस्था थायरॉइड स्वस्थगर्भावस्था प्रेगनेंसीकेयर IndianMoms PregnancyTips DoctorAdvice thyroid

Address

OM Hospital, Near BSNL Godown, Naya Gaon
Pali
306401

Telephone

+912932221200

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Dr. Kirti Sharma posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Dr. Kirti Sharma:

Share

Share on Facebook Share on Twitter Share on LinkedIn
Share on Pinterest Share on Reddit Share via Email
Share on WhatsApp Share on Instagram Share on Telegram

Category