05/03/2026
“डिलीवरी के बाद माँ को सबसे ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है… लेकिन अक्सर सबसे कम उसी की होती है।”
बच्चे के जन्म के बाद पूरा ध्यान नवजात पर चला जाता है —
और धीरे-धीरे माँ खुद को पीछे छोड़ देती है।
भारतीय परिवारों में यह बहुत आम है कि
माँ से कहा जाता है —
“अब तो सब ठीक है… बस बच्चे का ध्यान रखो।”
लेकिन सच यह है कि डिलीवरी के बाद माँ का शरीर और मन दोनों गहरी रिकवरी से गुजर रहे होते हैं।
डिलीवरी चाहे नॉर्मल हो या ऑपरेशन —
माँ के शरीर ने 9 महीने तक एक जीवन को संभाला है।
खून की कमी, कमजोरी, हार्मोनल बदलाव, टांकों का दर्द, नींद की कमी —
ये सब उसी समय हो रहा होता है जब माँ से उम्मीद की जाती है कि वह तुरंत मजबूत बन जाए।
यही कारण है कि पोस्टपार्टम पीरियड (डिलीवरी के बाद के 6 हफ्ते) को चिकित्सा विज्ञान में रिकवरी का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है।
इस समय माँ को चाहिए —
🥗 पौष्टिक भोजन
आयरन, प्रोटीन, कैल्शियम और पर्याप्त पानी शरीर को ताकत लौटाने में मदद करते हैं।
😴 पर्याप्त आराम
जब बच्चा सोए, माँ को भी आराम करना चाहिए। नींद की कमी मानसिक और शारीरिक थकान को बढ़ा देती है।
👨👩👧 परिवार का सहयोग
बच्चे की देखभाल सिर्फ माँ की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार का भावनात्मक और शारीरिक सहयोग बहुत जरूरी है।
🩺 माँ की सेहत पर ध्यान
लगातार कमजोरी, ज्यादा bleeding, बुखार या अत्यधिक उदासी को कभी नजरअंदाज न करें।
याद रखिए —
स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चे की सबसे मजबूत नींव है।
माँ बनना एक खूबसूरत अनुभव है,
लेकिन माँ को भी देखभाल, आराम और सम्मान उतना ही मिलना चाहिए जितना बच्चे को मिलता है।
हर नई माँ को यह सुनने की जरूरत है —
“तुम भी महत्वपूर्ण हो।” ❤️
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तो यह संदेश उनके साथ जरूर साझा करें।
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— डॉ. किर्ति शर्मा
महिला रोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ
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