Rajneesh Life-Education & Sanjeevani Reiki

Rajneesh Life-Education & Sanjeevani Reiki Learn Sanjeevani Reiki & Mind-Mastery to be free from all tensions, worries and problems of life. This program is very unique and interesting.

Our purpose is social service through this program to help you to bring joy, happiness and bliss in your life.

Click : https://youtu.be/vlfsLnkgIyEहर बेटा बाप के खिलाफ बगावत करता है। और ऐसा बाप और बेटे का ही सवाल नहीं है--हर आज कल ...
08/03/2026

Click : https://youtu.be/vlfsLnkgIyE
हर बेटा बाप के खिलाफ बगावत करता है। और ऐसा बाप और बेटे का ही सवाल नहीं है--हर आज कल के खिलाफ बगावत है, बीते कल के खिलाफ बगावत है। वर्तमान अतीत से छुटकारे की चेष्टा है। अतीत पिता है, वर्तमान पुत्र है। बीते कल से तुम्हारा आज पैदा हुआ है। बीता कल जा चुका, फिर भी उसकी पकड़ गहरी है; विदा हो चुका, फिर भी तुम्हारी गर्दन पर उसकी फांस है। तुम उससे छूटना चाहते होः अतीत भूल-जाए, विस्मृत हो जाए। पर अतीत तुम्हें ग्रसता है, पकड़ता है।

वर्तमान अतीत के प्रति विद्रोह है। अतीत से ही आता है वर्तमान; लेकिन अतीत से मुक्त न हो तो दब जाएगा, मर जाएगा।

हर बेटा बाप से पार जाने की कोशिश है।
तुम प्रतिपल अपने अतीत से लड़ रहे हो--वह पिता से संघर्ष है।

ओशो 🌸🌹🌸🌹🌸🌹🌸

Click to watch : https://youtu.be/vlfsLnkgIyEसम्प्रदाय अतीत है, धर्म वर्तमान है।इसलिए जब भी कोई धार्मिक व्यक्ति पैदा होग...
04/03/2026

Click to watch : https://youtu.be/vlfsLnkgIyE
सम्प्रदाय अतीत है, धर्म वर्तमान है।
इसलिए जब भी कोई धार्मिक व्यक्ति पैदा होगा, सम्प्रदाय से संघर्ष निश्चित है। होगा ही। सम्प्रदाय यानी हिरण्यकश्यप; धर्म यानी प्रहलाद। निश्चित ही हिरण्यकश्यप शक्तिशाली ह, प्रतिष्ठित है। सब ताकत उसके हाथ में है। प्रहलाद की सामर्थ्य क्या है ?

हिरण्यकश्यप के पास सब था--फौज-फांटे थे, पहाड़-पर्वत थे। वह जो चहता, करता। जो चाहा उसने करने की कोशिश भी की, फिर भी हारता गया। शक्ति नहीं जीतती, जीवन जीतता है। प्रतिष्ठा नहीं जीतती, सत्य जीतता है।

ओशो 🌹🌳🌹🌳🌹🌳

18/02/2026

तुम्हारा प्रेम इसलिए दुख लाता है।
ओशो 🌸🌷 Click to watch :- https://youtu.be/PAelBonKI5w

ज्ञान तुम्हारे जीवन में क्रांति कर देगा।-ओशो🌹
18/02/2026

ज्ञान तुम्हारे जीवन में क्रांति कर देगा।
-ओशो🌹

ज्ञान तुम्हारे जीवन में क्रांति कर देगा- ओशो

Osho से जब पूछा गया कि “आप अपने आपको भगवान क्यों कहते हैं?” तो उनका जवाब बहुत अनोखा और सीधा था।वे कहते थे:“मैं अपने आपको...
16/02/2026

Osho से जब पूछा गया कि “आप अपने आपको भगवान क्यों कहते हैं?” तो उनका जवाब बहुत अनोखा और सीधा था।
वे कहते थे:
“मैं अपने आपको भगवान नहीं कह रहा, मैं कह रहा हूँ कि जो मैं हूँ, वही तुम भी हो। फर्क सिर्फ इतना है कि मुझे याद आ गया है, तुम्हें अभी याद नहीं।”
उनका अर्थ यह नहीं था कि वे किसी अलग, विशेष, सर्वोच्च ईश्वर हैं।
बल्कि उनका कहना था कि हर व्यक्ति के भीतर दिव्यता है — वही चेतना, वही अस्तित्व, वही ब्रह्म।
भगवान कोई व्यक्ति नहीं है –
उनके अनुसार भगवान कोई दाढ़ी वाला ऊपर बैठा देवता नहीं, बल्कि एक चेतना की अवस्था है।
‘भगवान’ एक अनुभव है –
जब मन शांत हो जाता है, अहंकार गिर जाता है, तब जो शुद्ध अस्तित्व बचता है — वही भगवान है।
वे कहते थे:
“अगर मैं भगवान हूँ, तो तुम भी भगवान हो। फर्क सिर्फ जागरूकता का है।”
उनका उद्देश्य लोगों को चौंकाना भी था —
ताकि लोग प्रश्न करें, सोचें, और भीतर झाँकें।



Osho से जब पूछा गया कि “आप अपने आपको भगवान क्यों कहते हैं?” तो उनका जवाब बहुत अनोखा और सीधा था।वे कहते थे:“मैं अपने आपको...

https://youtu.be/EoPIa6qTxAI?si=otuOsHt7EZBGP9yVओशो कहते हैं ,“जहाँ अहंकार है, वहाँ प्रेम नहीं हो सकता।”क्योंकि प्रेम मे...
13/02/2026

https://youtu.be/EoPIa6qTxAI?si=otuOsHt7EZBGP9yV
ओशो कहते हैं ,
“जहाँ अहंकार है, वहाँ प्रेम नहीं हो सकता।”
क्योंकि प्रेम में विलय है, और अहंकार में अलगाव।
अहंकार हमेशा चोट खाता है —
कोई कुछ कह दे
कोई सम्मान न दे
कोई विरोध कर दे
और भीतर पीड़ा पैदा हो जाती है।

11/02/2026

ध्यान और प्रेम ।

Click : https://youtu.be/IS08VHGvvvwयह तो एक उत्सव है जहाँ हर क्षण परमात्मा स्वयं को अभिव्यक्त कर रहा है।फूलों के खिलने ...
10/02/2026

Click : https://youtu.be/IS08VHGvvvw
यह तो एक उत्सव है जहाँ हर क्षण परमात्मा स्वयं को अभिव्यक्त कर रहा है।
फूलों के खिलने में वही हँस रहा है।
पक्षियों के गाने में वही गा रहा है।
नदियों के बहने में वही नृत्य कर रहा है।

Click : https://youtu.be/IS08VHGvvvwओशो कहते हैं, परमात्मा को अगर तुम गंभीरता में खोजोगे तो चूक जाओगे।क्योंकि गंभीरता मन...
08/02/2026

Click : https://youtu.be/IS08VHGvvvw
ओशो कहते हैं, परमात्मा को अगर तुम गंभीरता में खोजोगे तो चूक जाओगे।
क्योंकि गंभीरता मन की बीमारी है — और परमात्मा तो उत्सव है।
चूंकि परमात्मा आनंदमय है,
तो उसका रास्ता भी आनंदमय ही होगा।
जो तुम्हें सिकोड़ दे — वह धर्म नहीं।

जो तुम्हें नचा दे, हंसा दे— वही धर्म है।

ओशो की दृष्टि में - प्रेम कोई संबंध नहीं, बल्कि एक अवस्था (state of being) है।आम तौर पर हम प्रेम को किसी व्यक्ति से जोड़...
07/02/2026

ओशो की दृष्टि में - प्रेम कोई संबंध नहीं, बल्कि एक अवस्था (state of being) है।

आम तौर पर हम प्रेम को किसी व्यक्ति से जोड़ देते हैं—पति, पत्नी, प्रेमी, प्रेमिका, मित्र।

लेकिन ओशो कहते हैं कि
प्रेम किसी से नहीं होता, प्रेम अपने भीतर होता है ।

ओशो की दृष्टि में – प्रेम कोई संबंध नहीं, बल्कि एक अवस्था (state of being) है। आम तौर पर हम प्रेम को किसी व्यक्ति से जोड़ देते ह...

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