Dr. Bhoomika Shrivastava

Dr. Bhoomika Shrivastava Laparoscopic surgeon & Infertility specialist

03/10/2025

#हिस्ट्रोस्कोपी ( ) एक स्त्री-रोग (gynecological) प्रक्रिया है जिसमें डॉक्टर गर्भाशय (uterus) के अंदर की जाँच या इलाज करने के लिए एक पतली नलीनुमा यंत्र (hysteroscope) का उपयोग करते हैं। यह यंत्र एक कैमरा और लाइट से जुड़ा होता है, जिससे गर्भाशय का अंदरूनी भाग स्पष्ट दिखाई देता है।

√√हिस्ट्रोस्कोपी कब की जाती है?

बार-बार गर्भपात (Repeated Miscarriage) की स्थिति में

अत्यधिक या असामान्य मासिक धर्म (Heavy/Irregular Periods)

गर्भधारण में कठिनाई (Infertility)

गर्भाशय में पॉलीप्स (Polyps) या फाइब्रॉइड (Fibroids) होने पर

गर्भाशय की आंतरिक संरचना में दोष (Septum, Adhesions) जानने के लिए

एंडोमेट्रियल लाइनिंग (uterus lining) की जाँच के लिए

गर्भनिरोधक उपकरण (IUCD) का लोकेशन देखने के लिए

√√हिस्ट्रोस्कोपी के प्रकार

1. डायग्नॉस्टिक हिस्ट्रोस्कोपी (Diagnostic Hysteroscopy):
सिर्फ़ गर्भाशय के अंदर देखने और जाँच करने के लिए।

2. ऑपरेटिव हिस्ट्रोस्कोपी (Operative Hysteroscopy):
जाँच के साथ-साथ पॉलीप, फाइब्रॉइड, चिपकाव (adhesions) या सेप्टम को हटाने का इलाज भी किया जाता है।

√√प्रक्रिया कैसे होती है?

यह सामान्यतः अस्पताल या क्लिनिक में की जाती है।

डॉक्टर एक पतली ट्यूब जैसी स्कोप को योनि (va**na) और गर्भाशय ग्रीवा (cervix) से अंदर डालते हैं।

गर्भाशय को हल्के गैस (CO₂) या तरल से फैलाया जाता है ताकि अंदरूनी सतह साफ दिखाई दे।

कैमरे से गर्भाशय का अंदरूनी भाग मॉनिटर पर दिखता है।

√√समय: सामान्यतः 15–30 मिनट।

यह बिना या हल्की एनेस्थीसिया (anesthesia) देकर की जा सकती है।

√√फायदे

किसी चीरे (cut) की आवश्यकता नहीं।

जल्दी रिकवरी।

एक ही समय पर जाँच और इलाज दोनों संभव।

प्रजनन (fertility) समस्याओं का निदान व समाधान।

√√संभावित जोखिम

हल्का दर्द या क्रैम्प

योनि से रक्तस्राव

संक्रमण (Infection)

बहुत कम मामलों में गर्भाशय में चोट (perforation)

“From pregnancy to advanced gynecological surgery – complete obstetric and gynecological care with state-of-the-art lapa...
20/09/2025

“From pregnancy to advanced gynecological surgery – complete obstetric and gynecological care with state-of-the-art laparoscopic facilities.”

09/09/2025

#🩺 कोइल्ड कॉपर-T का हटाना (हिस्टेरोस्कोपी द्वारा)

🔹 क्यों ज़रूरी होता है?

जब कॉपर-T के धागे (thread) बाहर दिखाई नहीं देते

कॉपर-T गर्भाशय में उलझ (coil) जाता है

कॉपर-T टूटकर या फँसकर रह जाता है

सामान्य तरीके से बाहर निकालना संभव नहीं होता

🔹 प्रक्रिया

1. रोगी को Lithotomy पोज़िशन में रखा जाता है।

2. गर्भाशय ग्रीवा (cervix) को हल्का फैलाया जाता है।
3. हिस्टेरोस्कोप (camera यंत्र) गर्भाशय के अंदर डाला जाता है।
4. गर्भाशय गुहा में कॉपर-T को सीधे देखा जाता है।
5. विशेष पकड़ने वाले यंत्र (hysteroscopic forceps) से कॉपर-T को धीरे-धीरे बाहर निकाला जाता है।

🔹 फायदे

सीधा देखने पर कॉपर-T सुरक्षित रूप से निकाला जा सकता है।
ब्लाइंड तरीके से निकालने पर जो चोट या perforation का खतरा रहता है, वह कम हो जाता है।
अगर कॉपर-T टूटा हुआ है तो भी पूरा निकाला जा सकता है।

🔹 बाद की देखभाल

थोड़ी देर निगरानी में रखा जाता है।

हल्का दर्द या स्पॉटिंग हो सकती है।

जरूरत पड़ने पर एंटीबायोटिक दी जा सकती है।

मरीज चाहें तो नया कॉपर-T डलवा सकती हैंl
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-T (IUD) removed hysteroscopically means that the intrauterine device, whose threads were not visible or had curled/coiled inside the uterine cavity, was removed with the help of hysteroscopy.

🔹 Steps / Explanation:

1. Indication:

Missing / retracted threads

Coiled or broken IUD inside uterus

Embedded IUD

Failed removal by forceps under ultrasound guidance

2. Procedure:

Patient placed in lithotomy position.

Cervix dilated if required.

Hysteroscope introduced into uterine cavity under saline distension.

IUD located under direct vision (seen coiled or embedded).

Hysteroscopic grasping forceps used to hold and gently pull out the IUD.

Removed intact under vision.

3. Advantages:

Direct visualization → safer than blind attempts.

Minimizes risk of perforation or incomplete removal.

Useful when IUD is distorted, fragmented, or embedded.

4. Post-procedure:

Observe for bleeding or pain.

Antibiotic prophylaxis sometimes given.

Patient can opt for reinsertion of new IUD.

Dr. Bhoomika Shrivastava
Obstetrician and gynaecologist
Endogynae surgery expert

08/09/2025
04/09/2025

पोस्ट-हिस्टरेक्टॉमी ओवेरियन सिस्ट (Post-Hysterectomy Ovarian Cyst) –

👉 परिभाषा (Definition):
हिस्टरेक्टॉमी (Hysterectomy) यानी गर्भाशय (Uterus) निकालने की सर्जरी के बाद भी अंडाशय (O***y) शरीर में बने रहते हैं। ऐसे में अंडाशय पर सिस्ट (थैलीनुमा संरचना जिसमें तरल भरा होता है) बनने को पोस्ट-हिस्टरेक्टॉमी ओवेरियन सिस्ट कहते हैं।

👉 कारण (Causes):

अंडाशय का सामान्य कार्य जारी रहने से फॉलिक्यूलर (Functional) सिस्ट बन सकते हैं।

एंडोमीट्रियोसिस से संबंधित सिस्ट (Chocolate cyst)।

डर्मॉइड सिस्ट या अन्य ट्यूमर।

ओवेरियन रेम्नेंट सिंड्रोम (सर्जरी के दौरान अंडाशय का कुछ हिस्सा रह जाना)।

👉 लक्षण (Symptoms):

पेट या श्रोणि (Pelvis) में दर्द।

पेट में सूजन या भारीपन।

बार-बार पेशाब लगना या कब्ज़।

कभी-कभी कोई लक्षण नहीं होते (Incidental finding)।

👉 जांच (Diagnosis):

अल्ट्रासाउंड (USG)

CT/MRI (विशेष परिस्थितियों में)

CA-125 (अगर कैंसर का संदेह हो)।

👉 उपचार (Treatment):

छोटे और बिना लक्षण वाले सिस्ट → केवल निगरानी (Follow-up USG)।

बड़े, दर्द देने वाले या संदिग्ध सिस्ट → लेप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा निकालना।

अगर कैंसर का संदेह हो तो उचित ऑन्कोलॉजिकल प्रबंधन।

👉 निष्कर्ष (Conclusion):
हिस्टरेक्टॉमी के बाद भी अंडाशय पर सिस्ट बन सकते हैं। अधिकांश सिस्ट हानिरहित होते हैं, लेकिन नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है ताकि गंभीर स्थिति (जैसे कैंसर) को समय रहते रोक.

🌸 डॉ. भूमिका श्रीवास्तव 🌸
स्त्री रोग एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
लेप्रोस्कोपिक सर्जन
072094 94005

01/09/2025

🩺 Laparoscopy – The Best Choice for Dermoid Cystectomy

🩺 डर्मॉइड सिस्टेक्टॉमी के लिए लेप्रोस्कोपी – सबसे बेहतर विकल्प

जी हाँ ✅

डर्मॉइड सिस्टेक्टॉमी (Dermoid Cystectomy) यानी डिम्बग्रंथि (ओवरी) में बने डर्मॉइड सिस्ट को निकालना, लेप्रोस्कोपी (दूरबीन विधि) से किया जा सकता है।

🔹 लेप्रोस्कोपी से फायदे

बहुत छोटे चीरे (3–4 छोटे छेद)

ऑपरेशन के बाद कम दर्द

जल्दी अस्पताल से छुट्टी

जल्दी काम पर लौटना

पेट पर दाग़ बहुत कम

अंदर चिपकने (एडहेशन) की संभावना कम

🔹 कैसे किया जाता है?

1. रोगी को बेहोशी (एनेस्थीसिया) दी जाती है।

2. पेट पर छोटे चीरे लगाकर कैमरा और उपकरण डाले जाते हैं।

3. ओवरी में बने सिस्ट को सावधानी से अलग कर बाहर निकाला जाता है।

4. कोशिश की जाती है कि ओवरी को सुरक्षित रखा जाए।

🔹 कब लेप्रोस्कोपी से संभव है?

सिस्ट का आकार 8–10 सेमी से छोटा हो

कैंसर की आशंका न हो

युवती या शादीशुदा महिला जिसमें प्रजनन (fertility) बचाना हो

🔹 कब ओपन सर्जरी (लैपरोटॉमी) ज़रूरी हो सकती है?

सिस्ट बहुत बड़ा हो (>10–12 सेमी)

कैंसर की आशंका हो

सिस्ट फट जाए या ओवरी मरोड़ (torsion) खा चुकी हो

👉 इस प्रकार, ज़्यादातर मामलों में डर्मॉइड सिस्टेक्टॉमी लेप्रोस्कोपी से सुरक्षित और सफलतापूर्वक की जा सकती है।
🌸 डॉ. भूमिका श्रीवास्तव 🌸
स्त्री रोग एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
लेप्रोस्कोपिक सर्जन

31/08/2025

लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी बड़े फाइब्रॉइड गर्भाशय में (पिछले सीज़ेरियन के बाद भी)

✅ संभव और सुरक्षित है

🔹 विशेष बातें

यदि गर्भाशय बहुत बड़ा हो और उसमें फाइब्रॉइड हो, तब भी लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी की जा सकती है।

पिछले सीज़ेरियन (C-section) के बाद अक्सर एडहेज़न (चिपकाव/स्कार टिश्यू) होते हैं, जिन्हें सर्जन सावधानी से हटाते हैं।

यह प्रक्रिया केवल अनुभवी लैप्रोस्कोपिक सर्जन द्वारा ही की जानी चाहिए।

🔹 लाभ
✔ छोटे चीरे (बिना बड़ा कट लगाए)
✔ कम दर्द
✔ जल्दी रिकवरी
✔ कम खून बहना
✔ रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जल्दी वापसी

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👉 इसलिए, बड़े फाइब्रॉइड गर्भाशय और पिछले सीज़ेरियन के बाद भी लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी संभव और सुरक्षित है।
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👩‍⚕️ डॉ. भूमि‍का श्रीवास्तव
प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ
(Obstetrician & Gynaecologist)
लैप्रोस्कोपिक सर्जन

🔹 महिलाओं के रोगों एवं प्रसूति संबंधी समस्याओं की विशेषज्ञ
🔹 फाइब्रॉइड, ओवरीयन सिस्ट, एंडोमेट्रियोसिस इत्यादि का आधुनिक लैप्रोस्कोपिक उपचार
🔹 सुरक्षित डिलीवरी, सीज़ेरियन, बाँझपन (Infertility) एवं अन्य स्त्री रोगों का विशेषज्ञ इलाज

Contact- 7209494005

28/08/2025

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