21/09/2020
21 सिंतबर 2020 को पूरी दुनिया विश्व अल्जाइमर दिवस (World Alzheimer Day) मनाती है. ये दिन खास अल्जाइमर से पीड़ित लोगों के लिए और साथ ही जागरुकता फैलाने के मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस बिमारी के बारे में और कई सारी बातें पता चल सकें. अल्जाइमर आमतौर पर भूलने की बीमारी होती है जिसमें आफ हर छोटी से छोटी बात भूल जाते हैं, उदाहरण के तौर पर आपने 10 मिनट पर पहले अगर कोई काम किया है तो आपको याद नहीं रहेगा कि ये आपने किया था या नहीं.
इस बीमारी का शिकार कोई भी हो सकता है लेकिन बुजुर्ग लोग इसके शिकार ज्यादा होते हैं. अल्जाइमर में किसी भी वस्तु, व्यक्ति या घटना को याद रखने में परेशानी महसूस होती है. अल्जाइमर का इलाज करने से यह पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता, लेकिन मरीज के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है. लाखों लोग हर साल इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं, ऐसे में चलिए जानते हैं आखिर क्या हैं इसके लक्षण.
क्या है अल्जाइमर
जैसा की हमने आपको उपर बताया ये आम भाषा में कहें कि भूलने की बीमारी है. मस्तिष्क में प्रोटीन की संरचना में गड़बड़ी होने के कारण इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है इसमें आपको कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसमें आप वो चीजें कर जाते हैं जो शायद आप करना भी नहीं चाहते हैं. दुख की बात ये है की इस बीमारी का इलाज अभी तक लोगों के पास नहीं है जिस वजह से जो इसकी चपेट हैं वो परेशान रहते हैं.
अल्जाइमर के कारण
अभी तक यही देखा गया है की ये बीमारी अक्सर 60 के उपर वाले लोगों को होती है, माना जाता है की ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मस्तिष्क की कोशकाएं सिकुड़ जाती हैं जिस वजह से न्यूरॉन्स के अंदर कुछ केमिक्लस कम होने लगते हैं वहीं कुछ ज्यादा हो जाता है. इस अलावा हेड इंजरी, वायरल इंफेक्शन और स्ट्रोक में भी अल्जाइमर की स्थिति पैदा हो सकती है.
ये हैं अल्जाइमर के लक्षण
1. आपकी याददाश्त इतनी कमजोर हो जाती है कि आप छोटी चीजें भूलने लगते हैं जैसे खाना खाना,पानी पीना आदि.
2. इसके साथ ही लोग अपने ही परिवार औऱ रिश्तेदारों को पहचाना बंद कर देते हैं, हालांकि कई बार वो पहचान भी जाती हैं.
3. किसी भी चीज का नाम नहीं याद रखना, रास्ते भूल जाना हर वक्त चिड़चिड़ापन महसूस करना.
4. निर्णय न ले पाना, बोलने में दिक्कत आना आदि शामिल हैं.
अल्जाइमर का इलाज
दिमाग की कोशिकाओं में केमिकल्स की मात्रा को संतुलित करने के लिए दवाओं का प्रयोग किया जाता है. दवाओं के सेवन से रोगियों की याददाश्त और उनकी सूझबूझ में सुधार हो सकता है. दवाएं जितनी जल्दी शुरू की जाएं उतना ही फायदेमंद होता है. दवाओं के साथ-साथ रोगियों और उनके परिजनों को काउंसलिंग की भी जरूरत होती है.
फिजियोथेरपी भी काफी मददगार साबित होता है।।
#डॉ_अमित