Dr Kranti Chandan Jaykar

Dr Kranti Chandan Jaykar He has an extra ordinary virtue of writing poem in Hindi and poem collection is named as "Chikitsa Mein Bhi Meri Kavita" .

Dr. Kranti Chandan Jaykar is A Holistic Health Expert, Eminent Consultant Dermatologist,Allergologist and Additional Professor & Founder HOD ( Skin, VD & Leprosy Department)at IGIMS Patna, Bihar. Dr. Kranti Chandan Jaykar is an eminent consultant dermatologist and Assistant Professor & HOD(incharge)Skin, VD & Leprosy at IGIMS (Indira Gandhi Institute of Medical Sciences)Patna,Bihar. His poetry is based on health care reflecting messages as "Skin is the Mirror of the Body".

 #बुद्ध_जयंती_कविता_एवं_विचार_डॉ_क्रांति_IGIMS    #डॉ_क्राँति_बुद्ध_जयंती_वैशाख_पूर्णिमा_कविता_एवं_विचार_जीवनी_दर्शनबुद्...
17/09/2021

#बुद्ध_जयंती_कविता_एवं_विचार_डॉ_क्रांति_IGIMS #डॉ_क्राँति_बुद्ध_जयंती_वैशाख_पूर्णिमा_कविता_एवं_विचार_जीवनी_दर्शन

बुद्ध जयन्ति कविता - Buddha Jayanti Poem - Dr Kranti, (HOD,Skin,IGIMS,Patna)
Mob No - 08969953194

#बुद्ध_जयंती_कविता_एवं_विचार_डॉ_क्रांति_IGIMS #डॉ_क्राँति_बुद्ध_जयंती_वैशाख_पूर्णिमा_कविता_एवं_विचा.....

श्रावण मास में शिवत्व जगाती मेरी कविता ...अंदर शिव हैं , बाहर शिव हैं , शिव संग , रास रचाएँगें !सावन में , काँवरिया बन क...
05/08/2017

श्रावण मास में शिवत्व जगाती मेरी कविता ...
अंदर शिव हैं , बाहर शिव हैं , शिव संग , रास रचाएँगें !
सावन में , काँवरिया बन के , शिव के , रंग रंगाएँगें !!
झूमे धरती , झूमता गगन , बूँद - बूँद हर्षाएंगें !
शिव में ही आनंद बसा , सब आनंदित हो जाएँगें !!
जीवन के हर दुःख के विष को , शिव-शम्भु पी आएँगेँ !
त्याग के ,धागे से , जीवन के , घावों को , सी जाएँगें !!
शिव जो संग, काहे को डरना , शिव में ही, खो जाएँगें !
सत्य ही शिव है , शिव है सुंदर , शिव भक्ति को पाएँगें !!
अपनाकर सबके विष को शिव नीलकंठ हो जाएँगें !
शिवत्यागी की, महिमा को हम , मुक्तकंठ हो गाएँगें !!
शिव ही रूद्र हैं , शिव हैं पशुपति , शिवनारी बन जाएँगें !
कला में शिव , नटराज भी शिव , शिव त्रिपुरारी बन जाएँगें !!
आदि भी शिव औ अंत भी शिव , शिव चहुँ दिशा में पाएँगें !
शिव विनाश औ शिव जीवन , शिव जिजीविषा में गाएँगें !!
कैलाशी शिव मानसरोवर , बर्फ़ानी हो जाएँगें !
बारह ज्योतिर्लिंगों में शिव-निशानी को पाएँगें !!
सोमनाथ , सौराष्ट्र विराजे , मल्लिकार्जुन आँध्र बसे !
महाकालेश्वर , ओंकारेश्वर , उज्जैनी , इंदौर बसे !!
बद्रीनाथ , केदारनाथ हैं , भीमाशंकर , पूना बसे !
शक्ति पीठ में शिव शक्ति , हर भाग यहां हर गुना बसे !!
विश्वनाथ काशी में , नाशिक ,त्रयम्बकेश्वर आन बसे !
देवघर में वैद्यनाथ , नागेश्वर , द्वारिका आन बसे !!
रामनाथपुर रामेश्वरम है , महाराष्ट्र में घृष्णेश्वर !
ये बारह ये परम पीठ हैं , शिव देवों के देवेश्वर !!
दर्शन कर ज्योतिर्लिंगों के , शक्ति से , भर जाएँगें !
शिव को हासिल हम जीवन में , भक्ति से कर जाएँगें !!
त्याग , तपस्या , करुणा की ,हर सीमा से ,भर जाएँगें !
शिव हैं सहज , दयालु शिव हैं , शिव को खुश कर जाएँगें !!
नहीं विलासी , भोग कोई हम , शिव पे, आज़ चढ़ायेंगें !
जल , धतूरा औ बेल-पत्र से , शिव को खुश कर जाएँगेँ !!
सुख में सुमिरन , दुःख में सुमिरन , शिव-भक्ति में गाएँगें !
जीवन के, हर पल में संबल , शिवशक्ति में पाएँगें !!
तीजा नेत्र, खुले जब शिव का , संहारी बन जाएँगें !
दानवता को जला के शिव ये , उपकारी बन जाएँगें !!
जला के जीवन के विलास को राख यहाँ कर जाएँगें !
त्याग के राखों से, दिल का हर ताख यहां भर जाएँगें !!
साधारण जीवन में , सोच को, ऊँची हम रख आएँगेँ !
भाव में कोमल , हृदय सहिष्णु , मन तेजोबल पाएँगें !!
नंदी वाहन , हिमालय- उर , जट-गंगा भर लाएँगेँ !
शीतल चंद्र ,व विषधर-माला, छव-भभूत कर जाएँगें !!
सिद्धों के गुरु , तंत्र - गुरु वो , नट-राजा कहलाएँगेँ !
डमरू-ताल पे , लिए त्रिशूल कर , तांडव से भर जाएँगें !!
हर जीवात्म से प्रेम का रूपक , शिव के छव में पाएँगें !
अंधकार सा शाश्वत है शिव , जग के भव में पाएँगें !!
अंतर - दृष्टि से, शिव को हम, अपने अंदर पाएँगें !
'क्रांति',जपकर ,नमः शिवाया , सुख से भर-भर जाएँगें !!
_____________क्रांति

CBI रेड:अपने पुराने लालू को ज़ेहन में जीवित पाती मेरी कविता...आज़ शिकंजे में है लालू , देखो मिडिया, बोल रहा !वंचित के दिल ...
10/07/2017

CBI रेड:अपने पुराने लालू को ज़ेहन में जीवित पाती मेरी कविता...
आज़ शिकंजे में है लालू , देखो मिडिया, बोल रहा !
वंचित के दिल का एक लालू ,देखो ऑंखें खोल रहा !!
सबसे भ्रस्ट ये लालू ही है ? करे मिनादी-ढोल रहा !
दूध के धुले बाकी नेता ? सी बी आई बोल रहा !!
घोटाले पे घोटाला है !! घोटाला , अनमोल रहा !!
ख़त्म करो इस लालू को , न झाल रहा न झोल रहा !!
लोभ -मोह की मृगतृष्णा में , फँसा मसीहा बोल रहा !
खोकर हीरा-दिली-प्रेम का , कंकड़-पत्थर तौल रहा !!
रोती है शोषित की आँखें , देख कबीरा डोल रहा !
सीसे के घर रहने वाला , संगे-पत्थर मोल रहा !!
आँखें नम है ,दिल भी नम है ,पर आँसू बेमोल रहा !
चला गया है , आज़ रहनुमा , ये ग़रीब बेबोल रहा !!
लोभ ने छिना , मोह ने छिना , दुर्गुण से है ,जोल रहा !
एक नवाज़ वो इस ग़रीब का , रहा बजाता ढ़ोल रहा !!
छोड़ करोड़ों दीन-दुःखी को , निज पीड़ा को झेल रहा !
सबको त्राण दिलाने वाला , ख़ुद ही माँगे बेल रहा !!
नहीं मरा है , नहीं मरेगा , ये लालूपन , बोल रहा !
हर शोषित की आवाज़ों में , एक अपनापन घोल रहा !!
आज़ जगी है , कौम-नई ये , पत्थर मोती चुन लेगें !
जलने को बेलौस ये ख़ुद से दिया का बाती बुन लेगें !!
अच्छाई को , हम भौतिकता- फँसे मसीहा चुन लेगें !
दुःख की बरसातों में , सुख के गीत ,पपीहा सुन लेगें !!
भ्रस्टाचार की गंगा में , सद्गुण का अमृत घोल रहा !
आज़ के लालू के अंदर , वो रूप पुराना बोल रहा !!
राजनीति काज़ल की कोठी , नयना काज़ल मोल रहा !
शोषित के माथे के टीके से , लालूपन बोल रहा !!
काश के वो एक त्यागी होता !! लालू प्रेम है बोल रहा !
पीढ़ी - दर - पीढ़ी सब कहते , ये हीरा अनमोल रहा !!
सदियों से वंचित औ शोषित , बेज़ुबान है , बोल रहा !
मन में हिम्मत और निडरता , आजीवन वो घोल रहा !!
मेरा लालू , मेरे मन के , अंदर रहता , बोल रहा !
'क्रांति', उसको नमन करो तुम , भले ये लालू जेल रहा !!
________क्रांति
दोस्तों,
आज़ अहले सुबह अखबार के पन्नों पे जब नज़र गयी तो पिछले 2 दिनों से सुर्खियों की ख़बर यानी लालू जी के यहां पर रहे सी बी आई एवम् ई डी के छापों के बारे में न्यूज़ को देखा तो मन सोचने लगा की ये लालू कौन है ? क्या ये केवल एक पूर्व मुख्यमंत्री , एक पूर्व रेल मंत्री या की ये एक राजनितिक दल के अध्यक्ष हैं या की कोई और भी हैं ??
आज़ का ये लालू जिनके यहां छापा पर रहा है , इनसे इतर भी एक लालू है जो सदियों से सताए गए शोषित, पीड़ित,अकलियत के दिल और ज़ेहन में रहता है !!
आज़ के इस लालू को आप जेल भेज सकते हैं !!
परंतु उस लालू को दुनिया की कोई भी ताकत गरीबों के दिल से नहीं निकाल सकती है !!
वो लालू सदियों से सोये एक पीढ़ी का फ़िर से जाग गया एक आत्मविश्वास है !!
एक बेआवाज़ क़ौम की को आवाज़ है , जिसे पीढ़ियों से दबाया गया !!
हाँ मगर एक अफ़सोस हरेक उस व्यक्ति को है ....
जो गर्व से कहता है की मेरे दिल में लालू बसता है ...
की ...
की उसके इस मसीहे ने ....
आगे के दिनों में भौतिकता और भाई भतीजावाद का ये रास्ता क्यों चुना ??
अगर वो महात्मा गांधी ,जेपी ,कर्पूरी ठाकुर , और यहां तक की नितीश कुमार का रास्ता चुनता , जिसने की अपने परिवार को एवम् अपने आप को राजनीति एवं वैयक्तिक सम्पतिनिग्रह से सदा दूर रखा , तो सच में ये लालू , गाँधी, जे पी, लोहिया , और न जाने कितने लोगों से आगे निकल जाता और अपार से दिली- धन का मालिक होता !!
उनके पास जबरदस्त जनसमर्थन का हीरा था , परंतु उन्होंने तुच्छ से भौतिक संपत्तियों का मकड़जाल बुनने के चक्कर में वो अभूतपूर्व जनप्रेम का हीरा - जवाहरात खो दिया !!
आज़ सम्भव है , की बहुत से लोग ,जो उनकी अच्छाई से प्रेरित हो कर , समाज में एक अच्छा स्थान पाया हो , वो आज़ के दिन में सोशलमीडिया में उनके समर्थक के रूप में दिख कर अपना नाम नहीं ख़राब करना चाहते हों , परंतु ये बात सत्य है की उन लोगों के ज़ेहन में भी वो प्रेरक लालू हमेशा ज़िंदा रहेगा , जिसने की सामंतवादी युग में उन्हें बोलने की/ सोचने की/सपने देखने की आज़ादी दी थी !!
एक और बात ...
लालू जी के साथ जो भी क़ानूनी प्रक्रिया होगी उस पर कोई टीका-टिप्पनी उचित नहीं है ...
-- परंतु ये एक तथ्य एवं राजनितिक शुचिता की जरूरत है की और भी भ्रस्ट नेताओं पर भी कार्यवाई होनी चाहिए , चाहे वो सत्ताधारी दल के क्यों न हों !!
नहीं तो...
दो बात
लालू के घोर विरोधी जनता को भी
नहीं पचेगा की ..
1)क्या बी जे पी में किसी नेता ने आय से ज्यादा संपत्ति नहीं बनाई ?
और अगर बनाई तो इतनी ही कड़ाई से वहां कार्रवाई क्यों नहीं हुई ??
2)क्या ये सभी विरोधियों को सी बी आई का भय दिखाकर 2019 की तैयारी तो नहीं हो रही है ??
अगर हाँ , तो ये लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं !!
लोकतंत्र में बहुमत पाने का ये तरीका उचित नहीं ठहराया जा सकता !!
कुछ यही सब ख़्याल आया , जब आज़ के लालूजी पे सी बी आई रेड की ख़बर को देखा !!
मेरी चेतना के अंदर का लालू शायद फ़िर से जाग गया और फ़िर जो निकला वो थी अपने ये पुराने लालू को नमन करती ये कविता जो आज़ के सज़ायाफ्ता लालू के साथ तो नहीं दिखना चाहती, परंतु उस लालूपन के आत्मविश्वास को खोना भी नहीं चाहती ...
तो मित्रों सोचा क्यों न इस कविता को आप से साझा करूँ
और ज़ेहन के लालूपन की डोर को माँझा करूँ ...
_____________क्रांति
इस लिंक को भी देखें.....
https://m.facebook.com/story.php…
@मेरी कविता
_डॉ क्रांति चन्दन जयकर ,सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (प्रभारी) , चर्म,कुष्ठ एवं यौन रोग विभाग , IGIMS, पटना-14
8969953194

     #विश्वयोगदिवस      विश्व योग दिवस (21 जून), पे आत्म-परमात्म योग चाहती मेरी कविता.अपने आत्म को अब परमात्म से योग करा...
20/06/2017

#विश्वयोगदिवस
विश्व योग दिवस (21 जून), पे आत्म-परमात्म योग चाहती मेरी कविता.
अपने आत्म को अब परमात्म से योग करा हम जाएँगें !
योग - दिवस पे , ध्यान , धारणा और समाधि पाएँगें !!

योग दिवस कविता # yoga day poem # by dr kranti # अष्टांगिक योग कविता # कुण्डलिनी जागरण कविता #

29/05/2017

डॉ क्रांति चन्दन जयकार – ऐसे डॉ जिन्हे चिकित्सा के अलावा लेखन का इतना सौख है कि वे गंगा किनारे बैठकर कविता लिखते हैं. जिंदगी के …

डॉ क्रांति चन्दन जयकर  - चिकित्षा में भी मेरी कविता
15/05/2017

डॉ क्रांति चन्दन जयकर - चिकित्षा में भी मेरी कविता

डॉ क्रांति चन्दन जयकार - ऐसे डॉ जिन्हे चिकित्सा के अलावा लेखन का इतना सौख है कि वे गंगा किनारे बैठकर कविता लिखते हैं. जिंदगी के हर पहलु के बारे में उन्ह... - Dr Kranti Chandan Jaykar - Google+

Dr. Kranti Chandan Jaykar is an eminent consultant dermatologist.
15/05/2017

Dr. Kranti Chandan Jaykar is an eminent consultant dermatologist.

Dr. Kranti Chandan Jaykar M.B.B.S.(P.M.C.H.), M.D. (Skin) Assistant Professor & HOD(incharge), Department of Skin, VD & Leprosy At IGIMS (Indira Gandhi... - Dr Kranti Chandan Jaykar - Google+

Generic Drug Reality Poem Composed by Dr Kranti Chandan Jaykar,HOD (Skin,VD & Leprosy) at IGIMS Patna, India.
15/05/2017

Generic Drug Reality Poem Composed by Dr Kranti Chandan Jaykar,HOD (Skin,VD & Leprosy) at IGIMS Patna, India.

Dr Kranti Chandan Jaykar -  Feeling great as 1st and founder faculty and incharge HOD of the Skin ,STD & Leprosy Departm...
14/05/2017

Dr Kranti Chandan Jaykar - Feeling great as 1st and founder faculty and incharge HOD of the Skin ,STD & Leprosy Department ,IGIMS patna ,for the start of STD clinic here.thanks to Bihar state aids control society and special thanks to our dynamic and honorable director IGIMS Prof (dr)N R Bisvas sir.

डॉ क्रांति चन्दन जयकार - ऐसे डॉ जिन्हे चिकित्सा के अलावा लेखन का इतना सौख है कि वे गंगा किनारे बैठकर कविता लिखते हैं. जि...
22/04/2017

डॉ क्रांति चन्दन जयकार - ऐसे डॉ जिन्हे चिकित्सा के अलावा लेखन का इतना सौख है कि वे गंगा किनारे बैठकर कविता लिखते हैं. जिंदगी के हर पहलु के बारे में उन्हौने कविता लिखी है. चाहे माँ से जुड़ी कविता हो, चाहे चिकित्सा से जुड़ी. उन्हौने तो आई. जी. आई. एम. एस. के लिए एंथम भी लिख दिया है. उनका नाम, डॉ क्रांति चन्दन जयकर है. वे आई. जी. आई. एम. एस., पटना में स्किन डिपार्टमेंट के एच्. ओ. डी. हैं.

          - चंपारण सत्याग्रह के सौ वर्ष...!@मेरी कविता _डॉ क्रांति चन्दन जयकर ,सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (प्रभार...
10/04/2017

- चंपारण सत्याग्रह के सौ वर्ष...!
@मेरी कविता
_डॉ क्रांति चन्दन जयकर ,सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (प्रभारी) , चर्म,कुष्ठ एवं यौन रोग विभाग , IGIMS, पटना-14
8969953194

चंपारण सत्याग्रह के सौ वर्ष : गाँधीवाद जगाती मेरी कविता...
सत्य,अहिंसा, गाँधीवाद को फ़िर से ज़िंदा पाएँ हम !
चंपारण - सत्याग्रह ,का ये शतक दिवस मनाएँ हम !!
जिन जगहों से देश था बदला , आज़ वहीं चल आएँ हम !
बापू की इस कर्मभूमि को, आज़ नमन कर जाएँ हम !!
घृणा - द्वेष के दौर में खुशबू-भाईचारा लाएँ हम !
सर्व-धर्म संभाव हृदय में , प्रेम लहु भर जाएँ हम !!
राजकुमार वो शुक्ल के कहने पे गाँधी जी आए थे !
चंपारण में सत्याग्रह की सफ़ल कहानी पाए थे !!
मोहनदास से एक महात्मा , रूप सँवार वो आए थे !
सत्य अहिंसा के प्रयोग को सफ़ल यहाँ कर आए थे !!
अप्रैल से अक्टूबर तक इस धरती रह आए थे !
इस बिहार के चंपारण का नाम जगत कर आए थे !!
अंग्रेजों ने उनको चंपारण जाने से रोका था !
ख़ुद को कह दोषी , बापू ने उल्टा पांसा फेंका था !!
कहा मुझे तुम जेल भरो , पर चंपारण हम जाएँगें !
हाँ ! यदि ये गलती है तो हम जेल में ही रह जाएँगें !!
अंग्रेजों की हिम्मत टूटी , सत्य की शक्ति जीत गई !
चंपारण के सत्याग्रह से राष्ट्र ये भक्ति प्रीत गई !!
नील किसानों के हर दुःख को , बापू ने विराम दिया !
सत्य के आग्रह से दिल बदला , हिंसा को आराम दिया !!
सभी कुरीति से लड़ आए , नारी को सम्मान दिया !
खोल के विद्यालय बुनियादी , शिक्षा को भी मान दिया !!
भीतिहरवा - आश्रम में उन लम्हों को जी आएँ हम !
आज़ के भारत में गाँधी के ध्वज को फ़िर लहराएँ हम !!
सौ सालों में क्या बदला ? क्या नहीं ? बहस कर आएँ हम !
समकालीन भारत में, गाँधी पे विमर्श, कर आएँ हम !!
गाँवों में बसता है भारत , ग्राम - उदय कर आएँ हम !
अंतिम व्यक्ति के सपनों को ,पूरा अब कर आएँ हम !!
धर्म- सहिष्णु दिल से नाता आज़ यहाँ जोड़ आएँ हम !
तोड़ के मज़हब वर्ग दीवारें , संग सभी चल आएँ हम !!
नशा मुक्ति की राह पकड़ के , इस बिहार ने दिखलाया !
होश - हुनर से जोड़ के नाता , गाँधीवाद है सिखलाया !!
सात ये निश्चय ने गाँवों की दशा- दिशा, ही बदली है !
जाग उठा है आज़ युवा ,छँट रही अशिक्षा - बदरी है !!
इस शताब्दी वर्ष में , गाँधीवाद का मरहम ,पाएँ हम !
पिछड़ेपन के घाव को पूरा आज़ यहाँ भर जाएँ हम !!
बुद्ध महावीर की धरती से , प्रेम का नग़मा गाएँ हम !
एक वर्ष तक ,गाँधीवाद की ,हर गुत्थी सुलझाएँ हम !!
धन्यवाद !! सी एम नितीश को आज़ यहाँ कर आएँ हम !
'क्रांति', सबके संग में आओ, गाँधीमय हो जाएँ हम !!
___________________क्रांति
दोस्तों,
आज़ 10 अप्रैल 2017 की पूर्वसंध्या पे मन सौ साल पहले की घटना याद करने लगा !!
मन कहीं खो गया उन यादों में ....
जब आज़ की तारीख़ में 1917 को बैरिस्टर मोहनदास
कलकत्ते से पटना...
राजकुमार शुक्ल जैसे
एक गुमनाम परंतु अपने धुन के पक्के चंपारण के नील किसानों के क्षेत्रीय नेता के
बार बार के बुलावे के बाद आए थे !!
उस समय कोई नहीं जानता था की ये मोहनदास..
इस काम के अंज़ाम के पहुँचने तक महात्मा गाँधी में बदल चूका होगा !!
और साउथ अफ्रीका में काफ़ी लोकप्रिय हो चूका इसका सत्याग्रह एवम् अहिंसा का प्रयोग भारत में एक नई क्रांति एवम् वाद का जनक बनेगा जो इस देश की दशा-दिशा बदलने वाला साबित होगा !!
परंतु ये हुआ !!
चंपारण आंदोलन ने कई मायनों में ..
भारत-भारतवाद एवम् गाँधी-गाँधीवाद की रुपरेखा को..
एक ठोस आकार प्रदान किया ,
जिसकी गुँज
आज़ादी की इतने सालों बाद ,और उस घटना के सौ साल पुरे होने पर भी सुनाई दे रही है !!
शायद ये समकालीन वक्त की एक ज़रूरत बन गयी लगती है जब पूंजीवाद, अतिवाद, उपभोक्तावाद, एवं असहिष्णुता के दानवीय विचार आज़ इस देश की आत्मा पे हावी होने की मुद्रा में है !! बिहार ने उस समय भी पुरे देश को रास्ता दिखाया था , और आज़ भी पलक-पांवड़े बिछाए खड़ा, उस महात्मा के सत्य-अहिंसा-सर्वकल्याण के संदेशों को, बाँटता दिख रहा है !!
गांधीजी के सपनों को हकीकत में जीने की कोशिश करते दिखता बिहार अपने मुखिया नितीश के नेतृत्व में नशामुक्त बन एवं ग्राम्य जीवन में सतरँगी खुशियाँ बिखेरते सात निश्चय लिए , फ़िर से गाँधीवाद विमर्श को आमंत्रण दे रहा है !!
बिहार आज़ फ़िर से प्रेम भाईचारा , सहिष्णुता ,एकता का पैगाम लिए खड़ा है ...
राष्ट्रीयता की दहलीज़ पर ....
गाँधीवाद की फ़ूल एवम् दीपों से सज़ी थाली को थामे !!
बिहार आज़ पुरे देश को निमंत्रित कर रहा है ...
चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी समारोहों का ख़ूबसूरत आगाज़ लिए हुए !!
कुछ यही सब सोचते सोचते अनायास ही ये कविता ,चंपारण सत्याग्रह के शतक वर्ष पे गाँधीवाद विमर्श का आमंत्रण देती हुई एक कागज़ के पन्ने पे उतर आयी तो सोचा क्यों न आप मित्रों से इसे साझा करें ..गाँधीवाद की डोर को माँझा करें ..
______________क्रांति
इस कविता की प्रस्तुति आप यूट्यूब पे निम्नलिखित लिंक से देख सकते हैं / anyone can see the recitation of this poem on YouTube through this undermentioned link
https://youtu.be/JHErM0HLA5k

Address

Royal Tara Apartment, Brahma Sthani Gali, Shekhpura
Patna
800014

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