Reiki Healing

Reiki Healing Reiki is a gentle relaxing therapy that soothes your Body, Mind and Spirit, transporting you to a st

PART–1 | मूलाधार चक्र (Root Chakra) — सुरक्षा, भरोसा और जीवन की नींव 🌱मूलाधार चक्र शरीर के फिज़िकल चक्रों में पहला चक्र ...
02/02/2026

PART–1 | मूलाधार चक्र (Root Chakra) — सुरक्षा, भरोसा और जीवन की नींव 🌱

मूलाधार चक्र शरीर के फिज़िकल चक्रों में पहला चक्र है। इसका सीधा संबंध इस बात से है कि आप खुद को कितना सुरक्षित (safe) और स्थिर (secure) महसूस करते हैं। यह चक्र हमारी सबसे बुनियादी ज़रूरतों से जुड़ा होता है — जैसे भोजन, घर, कपड़े, प्रेम, और जीवन का आधार। अगर यहीं गड़बड़ है, तो ऊपर का कोई भी ध्यान, मंत्र या साधना टिक नहीं पाती।

जब मूलाधार चक्र असंतुलन (out of harmony) में होता है, तो इंसान के अंदर प्रकृति पर भरोसा नहीं रहता। व्यक्ति खुद को ज़मीन से कटा-कटा महसूस करता है, जैसे उसका जीवन किसी मजबूत आधार पर टिका ही नहीं है। ऐसे समय में परिवार से जुड़ी पुरानी चोटें, कबीले या समाज में अपनी पहचान को लेकर उलझन, और यह डर कि “मेरी ज़रूरतें पूरी होंगी या नहीं” — बहुत गहरा हो जाता है। इस अवस्था में इंसान अक्सर डर के आधार पर फैसले लेता है, असुरक्षित महसूस करता है और भीतर-ही-भीतर बेचैन रहता है।

लेकिन जब मूलाधार चक्र संतुलन (in harmony) में होता है, तो व्यक्ति का रिश्ता प्रकृति से गहरा हो जाता है। अंदर एक स्थिरता आ जाती है, जैसे जीवन की लय पर भरोसा बैठ गया हो। ऐसे व्यक्ति को यह समझ आने लगती है कि जीवन उसे हमेशा ज़रूरी चीज़ें देगा। परिवार और समाज से उसका जुड़ाव स्वस्थ होता है, डर की जगह भरोसा लेने लगता है और वह खुद को सुरक्षित महसूस करता है। जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन वह उनके साथ बहना सीख लेता है, उनसे लड़ता नहीं।

कहते हैं इंसान के दिमाग में हर वक्त दो घोड़े दौड़ते रहते हैं।एक घोड़ा होता है Negative सोच का – डर, शक, असफलता, दूसरों क...
02/02/2026

कहते हैं इंसान के दिमाग में हर वक्त दो घोड़े दौड़ते रहते हैं।
एक घोड़ा होता है Negative सोच का – डर, शक, असफलता, दूसरों की बातें।
दूसरा घोड़ा होता है Positive सोच का – हिम्मत, उम्मीद, मेहनत और खुद पर भरोसा।
अब सवाल ये नहीं है कि दोनों में से कौन सा घोड़ा ताकतवर है,
सवाल ये है कि हम किसे ज़्यादा खुराक दे रहे हैं।
हर बार जब हम खुद को कम आँकते हैं,
हर बार जब हम कहते हैं “मुझसे नहीं होगा”,
हर बार जब हम दूसरों की नेगेटिव बातों को दिल पर लेते हैं –
हम अनजाने में नेगेटिव घोड़े को और मज़बूत कर देते हैं।
लेकिन जिस दिन हमने खुद पर भरोसा करना शुरू किया,
जिस दिन हमने छोटी जीतों को सेलिब्रेट किया,
जिस दिन हमने गिरकर फिर उठना सीख लिया –
उसी दिन पॉजिटिव घोड़ा आगे निकलने लगता है।
याद रखो,
ज़िंदगी की रेस में वही घोड़ा जीतता है
जिसे आप रोज़ खुराक देते हो।
तो सोच समझकर चुनो…
क्योंकि जीत भी तुम्हारी सोच से ही शुरू होती है 💭✨
Enjoy your day with Positive vibes 🙏

01/02/2026

26/01/2026
Naman to soldiers Jo Tirange ki Aan, Baan or Shaan ke liye Shaheed hue🙏🙏🙏
26/01/2026

Naman to soldiers Jo Tirange ki Aan, Baan or Shaan ke liye Shaheed hue🙏🙏🙏

जरा गौर करना जब तुम ध्यान लगाने बैठते हो तो जिसपे या जहां तुम ध्यान लगाने का प्रयत्न करते हो उधर ध्यान नही लग पाता और ध्...
23/01/2026

जरा गौर करना जब तुम ध्यान लगाने बैठते हो तो जिसपे या जहां तुम ध्यान लगाने का प्रयत्न करते हो उधर ध्यान नही लग पाता और ध्यान लगाने के दौरान जिससे तुम ध्यान हटाना चाहते हो तुम्हारा ध्यान बार बार उधर ही चला जाता हैं, हैं ना?

​कोई बात नही परेशान मत हो तुम कही ध्यान लगाने के प्रयत्न को छोड़ दो। भूल जाओ और मन को आजाद छोड़ कर सिर्फ इस बात की निरक्षण करो की मन कहां कहां जा रहा हैं, कहां कहां वो कितने समय हेतु रुक रहा हैं। बस निरंतर इसी की निरक्षण करते चले जाओ फिर एक दिन देखोगे की तुम बिना किसी विधि अथवा क्रिया की एक दिन ध्यान में प्रवेश कर जाओगे वो भी बिना कोई प्रयत्न किए। धीरे धीरे मन स्वत अपनी समस्त दौड़ को बंद करने लगेगा और एक दिन वो अपने केंद्र पे ही जाकर ठहरेगा।

21/01/2026

Releasing Blockages 🙏
Spiritual reel

Anxiety :  mind past की चोटों में फँस जाए और future का डर साथ चलने लगे, तब जीवन सच में नीरस लगने लगता है। नीरसता का मतलब...
19/01/2026

Anxiety : mind past की चोटों में फँस जाए और future का डर साथ चलने लगे, तब जीवन सच में नीरस लगने लगता है। नीरसता का मतलब ये नहीं कि आपके भीतर कुछ गलत है… नीरसता का मतलब है कि आपकी ऊर्जा “जीने” की जगह “सोचने” में फँस गई है। और anxiety का सबसे बड़ा खेल यही है—ये आपको वर्तमान से काट देती है।

सबसे पहले ये समझिए कि depression और anxiety में आपको बड़े-बड़े नियम नहीं चाहिए… आपको छोटे-छोटे ऐसे काम चाहिए जो रोज़ आपको धीरे-धीरे वापस जीवन से जोड़ दें। मन को जितना प्रकृति, शरीर और सरलता से जोड़ेंगे, उतना वह अंदर से heal होने लगेगा। 🌿

नीरसता से बाहर निकलने का पहला तरीका है—जीवन में “सेवा भाव” जगाना। इसलिए आप कम से कम एक पेड़ लगाइए और उसे बड़ा करने का संकल्प लीजिए। रोज़ 10 मिनट उस पेड़/पौधे के पास बैठिए, उसे पानी दीजिए, उसकी पत्तियाँ देखिए। ये छोटी बात नहीं है… पौधा आपको स्थिरता सिखाता है। वो बिना भागे, बिना शिकायत किए, धीरे-धीरे बढ़ता है। उसी तरह आपकी भीतर की ऊर्जा भी वापस steady होने लगती है। 🌱

दूसरा बहुत असरदार उपाय है—Daily गाय को अपने हाथ से खिलाना। 🐄🙏
गाय को रोटी या हरा चारा देना सिर्फ धार्मिक क्रिया नहीं है, ये मन को करुणा और अपनापन देता है। जब आप किसी जीव को अपने हाथ से खिलाते हैं, तब आपके भीतर “मैं अकेली हूँ” वाला भाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। अंदर एक warmth पैदा होती है, और वही warmth जीवन की नीरसता को तोड़ती है।

अब आपके शरीर और mind के लिए सबसे जरूरी चीज़—गहरी साँस और प्राणायाम। 😮‍💨
जब anxiety बढ़ती है, तो सांस अपने आप छोटी हो जाती है और शरीर alarm mode में चला जाता है। इसलिए आपको सांस को फिर से लंबा करना है। रोज़ सिर्फ 10 मिनट ये करिए:
पहले 2 मिनट धीरे-धीरे लंबी सांस बाहर छोड़िए।
फिर 5 मिनट अनुलोम-विलोम करिए।
और अंत में 3 मिनट बस सांस को आते-जाते देखिए।
इससे mind का overthinking धीरे-धीरे कम होता है और शरीर में स्थिरता आती है।

एक और छोटी सी बात जो बहुत मदद करेगी—जब भी मन past या future में भागे, उस समय खुद को एक soft reminder दीजिए: “अभी जो है, वही जीवन है।” बस इतना कहते ही आप थोड़ी देर के लिए वर्तमान में लौट आएँगे। यही लौटना धीरे-धीरे आपकी healing बनेगा।

आपको ये भी याद रखना है कि आप कमजोर नहीं हैं। आप बस लंबे समय से अंदर ही अंदर लड़ रही हैं। अब लड़ने की जगह धीरे-धीरे खुद को संभालना है। पेड़, पौधे, गाय की सेवा, और सांस—ये चार चीज़ें आपको जमीन से जोड़ देंगी और नीरसता कम होने लगेगी। 🌿🙏

आपके. लिए प्रार्थना रोज रात सुबह की

प्रार्थना-- 🙏✨
हे प्रभु, मेरे भीतर शांति का प्रकाश धीरे-धीरे बढ़ता रहे।
मेरे मन को स्थिरता मिले और मेरी साँसों में सुकून उतरता रहे।
मेरे भीतर भरोसा जागे, मेरा हृदय हल्का हो, और मेरा मन शांत रहे।
मेरी सोच साफ हो, मेरी ऊर्जा पवित्र हो, और मेरा जीवन फिर से रस से भर जाए।
मेरे अंदर साहस बना रहे, धैर्य बना रहे, और हर दिन एक नई उम्मीद के साथ शुरू हो।
मेरे शरीर को स्वास्थ्य मिले, मेरे मन को संतुलन मिले, और मेरे जीवन में शुभता बढ़ती रहे।
मैं प्रेम में रहूँ, कृतज्ञता में रहूँ, और भीतर से सुरक्षित महसूस करूँ। 🙏🌿

आपके हिसाब से आपकी नीरसता की सबसे बड़ी वजह क्या है—past की यादें, future का डर, या शरीर की कमजोरी? अपनी राय कमेंट में लिखिए 🙂

ऋषि अष्टावक्र का शरीर कई जगह से टेढ़ा-मेढ़ा था, इसलिए वह सुन्दर नहीं दिखते थे। एक दिन जब ऋषि अष्टावक्र राजा जनक की सभा म...
18/01/2026

ऋषि अष्टावक्र का शरीर कई जगह से टेढ़ा-मेढ़ा था, इसलिए वह सुन्दर नहीं दिखते थे। एक दिन जब ऋषि अष्टावक्र राजा जनक की सभा में पहुँचे तो उन्हें देखते ही सभा के सभी सदस्य गड़ हँस पड़े। ऋषि अष्टावक्र सभा के सदस्यों को हँसता देखकर वापिस लौटने लगे। यह देखकर राजा जनक ने सम्मान जनक ऋषि अष्टावक्र से पूछा- ‘‘भगवन ! आप वापिस क्यों जा रहे हैं ?’’ ऋषि अष्टावक्र ने उत्तर दिया- ‘‘राजन ! मैं मूर्खों की सभा में नहीं बैठता।’’ ऋषि अष्टावक्र की बात सुनकर सभा के सदस्य नाराज हो गए और उनमें से एक सदस्य ने क्रोध में बोल ही दिया- ‘‘हम मूर्ख क्यों हुए ? आपका शरीर ही ऐसा है तो हम क्या करें ?’’
ऋषि अष्टावक्र ने उत्तर दिया- ‘‘तुम लोगों को यह नहीं मालूम कि तुम क्या कर रहे हो ! अरे, तुम मुझ पर नहीं, सर्वशक्तिमान ईश्वर पर हँस रहे हो। मनुष्य का शरीर तो हांडी की तरह है, जिसे ईश्वर रुपी कुम्हार ने बनाया है। हांडी की हँसी उड़ाना क्या कुम्हार की हँसी उड़ाना नहीं हुआ ?’’ अष्टावक्र का यह तर्क सुनकर सभी सभा सदस्य लज्जित हो गए और उन्होंने ऋषि अष्टावक्र से क्षमा मांगी।
हम में से ज्यादातर लोग आमतौर पर किसी ना किसी व्यक्ति को देखकर हँसते हैं, उनका मजाक उड़ाते हैं कि वह कैसे भद्दा दिखता है या कैसे भद्दे कपड़े पहने हुए है लेकिन जब हम ऐसा करते हैं तो हम परमात्मा का ही मजाक उड़ाते हैं ना कि उस व्यक्ति का।
इन्सान के व्यक्तित्व का निर्माण उसका रंग, शरीर या कपड़ों से नहीं हुआ करता, बल्कि व्यक्तित्व का निर्माण मनुष्य के विचारों एवं उसके आचरण से हुआ करता है।

जय श्री राधे कृष्णा 🙏🙏
राधे राधे 🙏🙏

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