02/06/2021
"गन्ने को चूस कर खाने के गुण आयुर्वेदानुसार"
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गांव और छोटे कस्बों में रहने वालों को गन्ने को चूसकर खाने का सौभाग्य सहर्ष ही प्राप्त हो जाता था,लेकिन गांवों के तेजी से शहरीकरण होने से गन्ना खाने की यह कला तीव्र गति से समाप्त हो रही है।
गन्ना चूसने की कला विलुप्त होने के कारण
1. शहरीकरण होने से भारतीय/आयुर्वेदिक जीवन शैली का लोप होना
2. आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान के मानकों पर तेजी से परिवर्तित करके उसके मौलिक स्वरूप को बिगाड़ना
3. टूथपेस्ट से कमजोर हुए दांत और मसूड़े
4. अच्छे औषधि युक्त मंजनों का अभाव,उपलब्धता और प्रचार
जीवन के लगभग सभी छोटे बड़े बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए हमारे ऋषियों ने आयुर्वेद ग्रंथों में सभी को लिपिबद्ध भी किया है।
आइए गन्ना चूसकर खाने की इस शैली को आयुर्वेद की भाषा में समझें
"अविदाहि कफकरो वातपित्तनिवारण:।
वक्रप्रसादनो वृष्यो दंतनिष्पीडितो रस:।।"
सुश्रुत संहिता सूत्रस्थान इक्षुवर्ग
अर्थात गन्ने को दांतो से चूसकर निकाला हुआ रस अविदाहि(जो दाह/गर्मी पैदा ना करे) है
कफकारक अर्थात कफ रूपी शक्ति को बढ़ाने वाला है
कफकारक होने के कारण बच्चों के लिए अत्यंत गुणकारी है
कफकारक होने के कारण हाइट-वेट बढ़ाने वाला है
वात(वायु),पित्त को शांत करने वाला है
वायुनाशक होने के कारण बड़े-बूढ़ों को भी अत्यंत प्रिय है क्योंकि उनकी वायु से उपजे शारीरिक दर्दों(घुटने,कमर या अन्य कोई) को हरने वाला है
पित्त नाशक होने के कारण युवाओं का भी चहेता है,शरीर की गर्मी को कम करने वाला,पित्त जनित एसिडिटी को शांत करने वाला है
वक्रप्रसादनो ( मुख को प्रसन्न करने वाला है)
वृष्य शरीर को भरनेवाला और शक्तिशाली बनाने वाला है
इसलिए शीत ऋतु की मधुर बेला में सम्पूर्ण परिवार को पोषण देने वाले गन्ने को दंतनिष्पीढ़ित(दांतो से चूसकर) करके अवश्य खाएं
सावधान: आयुर्वेद की यह जानकारी ऋषियों ने प्राकृतिक रूप से उपजाए सिर्फ देसी गन्ने के बारे में लिखी है।
केमिकल/जहरीले पेस्टिसाइड्स ,यूरिया,डी ए पी,हाइब्रिड बीज से उपजाए गन्ने को खाने के दुष्प्रभावों के लिए खाने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा अतः यह लेख/जानकारी उनके लिए कतई नही है।
👹टूथपेस्ट से कमजोर हुए दांत टूटने और मसूड़ों से खून निकलने का जोखिम होने की प्रबल संभावना है
आप,आपके बच्चे,बुजुर्ग माता-पिता गन्ने को चूसकर खाने के लाभ उठा सकें इसलिए आज से ही दंतधावन(उंगली द्वारा मंजन से दांत और मसूड़ों की मालिश) किसी अच्छे मंजन से अवश्य ही करना शुरू करें।
धन्यवाद
आपके स्वास्थ्य का शुभचिंतक
विशाल गुप्ता