02/02/2026
*Dr N H Sahasrabuddhe 9822011050/9762401234
*जैसे जैसे गोलाकार वायुतत्व उपर की तरफ कम हो जाता है तो यह दिव्य आकार ध्वनित होने लगती है । और अंतमें इस जीवस्वरूप पृथ्वीतत्वका रूपांतरण निर्वासन होनेसे निर्वाणपद प्राप्त होता है । यही आकारप्रकार का असाधारण महत्व है*|
*प्रथम स्तर को कामधातू*
*द्वितीय स्तर को रूप धातू*
*तृतीय स्तर को अरूप धातू*
कहते हैं*
*अरूप ही निर्वाण है*
*अरूप ही ब्रह्मबिंदू है*
*अरूप ही मोक्ष है*
*काम से जीवनकी यात्रा का प्रारंभ याने शृंगारशालासे याने दक्षिण से*
*रूपसे मध्य याने रंगशाला का अनुभव याने पश्चिम से*
*अरूप याने ब्रह्मनिर्वाण याने मित्रपदसे ब्रह्मतत्वसे ईशान की तरफ प्रयाण*
*यह है मंडलाकार उर्जा का वास्तूमें रहस्य*