Anupama Cancer Sansthan

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Metabolic treatment of cancer with highest success rate in the world.

https://youtu.be/sJwm_Ln1PMo
11/01/2023

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Liver and Gastro-intestinal Problems treatment by Dr. Vijay Raghavan.Queries SolvedLiver diseasesCirrhosis of liverGastric ulcer ...

09/07/2022

डॉ. विजय राघवन (एक परिचय)

Dr Vijay Raghavan (डॉ. विजय राघवन) ने सैनिक स्कूल नगरोटा, जम्मू से इंटरमीडिएट करने के बाद M.B.B.S. की पढ़ाई पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज, धनबाद से की औरM.D. (Preventive Medicine) की डिग्री दरभंगा मेडिकल कॉलेज से प्राप्त की. डॉ. विजय राघवन ने कई मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण का काम किया है । वर्तमान में डॉ. विजय राघवन एसोसिएट प्रोफेसर में नियुक्त हैं, लार्ड बुद्धा मेडिकल कॉलेज, सहरसा। Associate professor, Lord Buddha Medical College, Saharsa.

शुरू से ही इन्हें अनुसंधानों में रूचि थी. इसलिए इन्होंने भारत भर के विभिन्न अनुसंधान केन्द्रों का भ्रमण किया. कुछ समय तक इन्होंने डॉ. बी. एन. चक्रवर्ती कोलकत्ता के संस्थान Institute of Reproductive Medicine में IVF (invitro-fertilisation) की ट्रेनिंग ली. इसके बाद इन्होंने कई संस्थानों में जाकर अनुसंधान की रुचि से काम किया.

इन्होंने स्थानीय लोगों को अनुसंधान की ट्रेनिंग देकर चिकित्सीय अनुसंधान केंद्र की स्थापना की. पुर्णिया में Molecular biology laboratory, Stem cell Laboratory and IVF केंद्र की स्थापना की. इस संस्थान में डायबिटीज, कैंसर, किडनी फेलियर, आर्थराइटिस इत्यादि पर अनुसंधान कार्य की शुरुआत हुई.

डॉ राघवन ने गहन शोध शुरू किया और एग्रीकल्चर विषेशज्ञों, IVF अथवा इनविट्रो-फर्टिलाइजेशन, Test-Tube Baby प्रक्रिया, Stem cell research और जानवरों में बिमारियों का अध्ययन कर कई तरह के अनुसंधानों को अंजाम दिया।

उनके अनुसंधान प्राकृतिक चिकित्सा से मिलते जुलते थे. इसलिए उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा का गहन अध्ययन किया और प्राकृतिक चिकित्सा को पूरे भारत में फैलाने के लिए AYUSH Academy की स्थापना की।

विश्वभर के वैज्ञानिक अनुसंधानों को मिलाकर मेटाबोलिक उपचार विकसित हुआ.

इन्होंने मानवता की तड़प और लाइलाज मरीजों और उसके परिवार के दुखों को महसूस किया और चिकित्सीय कार्य छोड़कर अनुसंधान में लग गये. वर्षों के अथक प्रयास से इन्होंने मेटाबोलिक चिकित्सा विकसित की, जो विश्वभर के वैज्ञानिक अनुसंधानों को मिला कर बना है. वैज्ञानिक जैसेJoel D. Wallach, Thomus Siefried, Marcola, Leonard Coldwell, Gerson इत्यादि के अनुसंधानों को मिलाकर विभिन्न बीमारयों का उपचार विकसित किया गया.

उन्होंने स्टेम सेल लेबोरेटरी विकसित की और कोशिकीय स्तर पर बीमारियों के उपचार का विस्तृत अध्ययन किया फिर उन उपचारों का जानवरों पर परीक्षण किया. इन्होंने Joel D. Wallach के जानवरों पर प्रयोग को आधार मानते हुए डायबिटीज, कैंसर, किडनी फेलियर, आर्थराइटिस इत्यादि के मेटाबोलिक उपचार के लिए दवाईयां विकसित की.

इन दवाओं की ख़ास बात यह है कि इनका कोई भी दुष्परिणाम नहीं है और यह बीमारियों के उपचार में पूर्णतः सक्षम है.

अनुसंधान में उपलब्धियां
कैंसर, किडनी फेलियर, आर्थराइटिस, डायबिटीज इत्यादि के वर्तमान उपचारों का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद, इन्होंने अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, जर्मनी इत्यादि के वैज्ञानिकों के आविष्कारों को मिलाकर मेटाबोलिक चिकित्सा विकसित की. इसी दौरान इन्हें Thomus Siefried के चिकत्सीय अनुसंधान- कैंसर का मेटाबोलिक उपचार का विस्तृत अध्ययन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.

पूरे विश्व के वैज्ञानिक लाइलाज बीमारियों पर शोध कार्य कर रहे हैं उनके अनुसंधानों को लागू करने के लिए इन्होंने AYUSH Academy की स्थापना की जिसके द्वारा प्राकृतिक चिकित्सा के साथ -साथ मेटाबोलिक चिकित्सा की ट्रेनिंग दी जा सके और बेहतर चिकित्सा का प्रसार पूरे भारत में हो सके।

डॉ.राघवन के प्रयास, देश की चिकित्सा की तस्वीर बदल सकती है। अगर इस चिकित्सा का सम्पूर्ण विस्तार हो जाय तो हमारा देश विकसित देशों की श्रेणी में गिना जाएगा।

Read in English

भारत में मेटाबोलिक चिकित्सा लागू करने की योजना
डॉ. विजय राघवन के पास पूरे भारत से बिमारियों के भय को ख़त्म करने की मजबूत योजना है, जिसे वह सरकार को समर्पित करना चाहते हैं. आम लोगों से अपील है कि इसमें सभी वर्ग और समुदाय के लोग साथ दें. क्योंकि कोई भी व्यक्ति बीमारियों से ग्रसित और लाइलाज हो सकता है. डायबिटीज, किडनी फेलियर, कैंसर जैसे रोग किसी को भी हो सकते हैं.

अगर आप बीमार पड़ने से पहले सही चीजों का साथ देंगे तो शायद आप बीमार ही ना पड़ें. गरीब लोगों को बीमारियों का बोझ इतना हो जाता है कि इससे ना तो देश प्रगति कर रहा और ना ही देश से गरीबी ही खत्म हो रही है. पूरे जीवन की कमाई एक बार बीमार पड़ने पर खर्च हो जाता है और मरीज भी ठीक नहीं होता. ऐसे में हरेक व्यक्ति का दायित्व बनता है कि मेटाबोलिक उपचार को पूरे देश में लागू करायें और लोगों को इसका प्रशिक्षण लेने के लिए प्रोत्साहित करें.

08/07/2022

कैंसर का वर्तमान उपचार(Modern Cancer Treatment), सती प्रथा के सामान ही क्रूर है।
कैंसर दुनिया भर के लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा है। यह दुनिया भर में मौत का प्रमुख कारण है और इसने समाज को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। यदि प्रारंभिक चरणों में पता लगाया और निदान किया जाता है, तो रोग उपचार योग्य और इलाज योग्य है। यदि बाद के चरणों में खोजा गया, तो बचने की संभावना कम है। मनुष्यों को प्रभावित करने वाले सौ से अधिक प्रकार के कैंसर हैं और चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, कैंसर के उपचार में कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी(विकिरण चिकित्सा), सर्जरी आदि शामिल हैं।

अस्वास्थ्यकर खाने की आदतें, धूम्रपान, तंबाकू का सेवन, शराब का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी, कैंसर के प्रमुख कारण हैं। कुछ कैंसर सौम्य हैं और कुछ घातक हैं। परिवार में कैंसर होना, मरीज और परिवार के लिए एक बड़ा झटका है। यह कई लोगों के लिए जीवन बदलने वाली और चौंकाने वाली खबर है। कैंसर का मुकाबला करने के लिए साहस और धैर्य के साथ बीमारी से निपटना महत्वपूर्ण है।

जब हम कैंसर के उपचार के बारे में बात करते हैं, तो अन्य उपचारात्मक और वैकल्पिक उपचार उपलब्ध हैं जो बीमारी को खत्म करने में मदद कर सकते हैं या रोग को शरीर के अन्य अंगों में फैलने से रोक सकते हैं। इन उपचारों का लक्ष्य मरीजों को पीड़ा से राहत दिलाना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। इसके अलावा, वे बिना किसी दुष्प्रभाव के हानिरहित हैं।

हालांकि, कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो कैंसर का पता लगाने के बाद कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी नहीं लेने का फैसला करते हैं क्योंकि उनके साइड-इफेक्ट के कारण मौत हो जाती है। और अगर वे ऐसा करते हैं, तो लोग उनका मजाक बनाना शुरू कर देते हैं। वे समाज में मजाक का पात्र बन जाते हैं। उन्हें कंजूस कहा जाता है। यह सती प्रथा के समान है जो प्राचीन भारत में मौजूद थी। अपने पति की मृत्यु के बाद महिलाओं का जीवन दयनीय हो जाता था। परिवार में होने वाली किसी भी दुर्घटना के लिए उसे प्रताड़ित किया जाता था। सामाजिक दबाव इतना तीव्र होता था कि उसे सती को स्वीकार करना पड़ता था और खुद को मारना पड़ता था।

कैंसर के इलाज के मामले में, सबसे बड़ी बाधा जागरूकता है। लोगों को पता नहीं है कि इस तरह के उपचार मौजूद हैं जो बीमारी से निपटने में काफी प्रभावी हैं। उनके लाभ अपार हैं। समाज को अज्ञानता में रहने के बजाय, पारंपरिक तरीकों से परे देखना चाहिए और उन लोगों को समझाने की जरूरत है जो वैकल्पिक उपचारों का विरोध कर रहे हैं।

07/07/2022

Modern Cancer Treatment(The Truth)

Cancer is affecting millions of people around the globe. It is the leading cause of death worldwide and has impacted the society in a big way. If detected and diagnosed in the initial stages, the disease is treatable and curable. If discovered at later stages, the chances of survival are less. There are over a hundred types of cancer affecting humans and as per medical science, the treatment for cancer includes chemotherapy, radiation therapy, surgery, targeted therapy, etc.

Unhealthy eating habits, smoking, to***co consumption, excessive drinking of alcohol, lack of physical activity are the leading causes of cancer. Some cancers are benign and some are malignant. Being diagnosed with cancer is a major jolt for the patient as well as the family. It is life-changing and shocking news for many. Dealing with the disease with courage and patience is vital for combating cancer. new cancer treatment is a fallacy.

When we talk about cancer treatment, there are other curative and alternative treatments available that can help to eliminate the disease or prevent the disease from further spreading to other organs of the body. The goal of these treatments is to provide relief to patients from suffering and improve their quality of life. Moreover, they are harmless with no side-effects. The treatment of cancer in naturopathy gives better result than so called modern treatment.

However, there is some section of people, who after diagnosed with cancer decide not to take chemotherapy and radiation therapy because of their side-effects leading to death. And if they do that, people start making fun of them. They become the object of mockery in the society. They are called a miser. It is quite similar to the Sati custom that existed in ancient India. Women’s life was made miserable after her husband’s death. She was tortured, held responsible for any mishap that happens in the family. The societal pressure was so intense that she had to accept sati and kill herself.

In the case of cancer treatment, here the bigger point is awareness. People are not aware that such treatments exist and are quite effective in handling the disease. Their benefits are immense. The society should look beyond the conventional methods rather than living in ignorance and criticizing those who are opting for alternative treatments.

06/07/2022

Advantages of our treatment over chemotherapy.
Toxicity of Treatment: Cytotoxic drugs used in Chemotherapy to kill cancer cells which act on DNA of cells. While our treatment uses energy metabolism of cancer cell as a target. These cytotoxic drugs are very harmful to patients with side effects like secondary cancer and sudden death etc.
Selectivity in killing cancer cells: Since there is no difference in DNA between cancer cells and normal cells, chemotherapy cannot kill cancer cells without killing normal cells. While our treatment utilizes energy metabolism of cancer cells. Since energy metabolism of cancer cells is anaerobic in nature while normal cells use mostly aerobic respiration. That is how cancer cells are selectively killed by our treatment.
Harmful effects of treatment: Our treatment is harmless while chemotherapy is harmful due to use of poisonous cytotoxic drugs.
Success rate: Success rate or 5-year survival rate of chemotherapy is only 2% while our treatment can give more than 60 % five-year survival rate. Please click link to know the proofs from developed countries.
Quality of Life: Our Treatment improves quality of life while chemotherapy deteriorates the quality of life of cancer patients.
Life expectancy and Survival: Survival and longevity reduce in chemotherapy while life expectancy and quality of life increases in our treatment.

कैंसर के मरीज अपने चिकित्सक से क्या सवाल करें? यह सवाल आपकी जीवन रक्षा कर सकते हैं?जो उपचार वह देते हैं जैसे कीमोथेरेपी ...
05/07/2022

कैंसर के मरीज अपने चिकित्सक से क्या सवाल करें? यह सवाल आपकी जीवन रक्षा कर सकते हैं?
जो उपचार वह देते हैं जैसे कीमोथेरेपी / रेडिएशन का उद्देश्य क्या है?
क्या कीमोथेरेपी / रेडिएशन से कैंसर ठीक होता है, तो फिर वैसे लोगों का घर जाकर सत्यता की जांच कर लें?
क्या कीमोथेरेपी / रेडिएशन से जीवन बेहतर बनता है, तो फिर वैसे किसी एक व्यक्ति जिसका जीवन बेहतर हुआ हो, उसका उदहारण प्रस्तुत करें.
कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी एक जानलेवा प्रक्रिया है ऐसे में अगर इन प्रक्रियाओं का कोई प्रमाणित लाभ नहीं है फिर ऐसी प्रक्रिया कराने से पहले हजारों बार सत्यता की जांच करें.
क्या कोई तरीका अथवा लेबोरेटरी टेस्ट है जिससे यह पता लगाया जा सके कि आपका कैंसर किस कीमोथेरेपी की दवाई से ठीक हो सकता है जैसे एंटीबायोटिक की सेंसिटिविटी की जांच की जाती है. इस तरह की जांच से सही कीमोथेरेपी की दवाई चुनने में मदद मिल सकती है.
कीमोथेरेपी से सामान्य कोशिकाओं को बचाने के लिए क्या कोई उपाय है अथवा साइड इफेक्ट्स के बचने के लिए क्या किया जाएगा.
अगर सरकार आपको मुफ्त में दवाई देती है अथवा कीमोथेरेपी के लिए पैसे देती है तो फिर सरकार से पूँछें उसके पास क्या प्रमाण हैं कि जो पैसे वह दे रहे हैं उससे आजतक किसी भी कैंसर के मरीज की जान बची है?
अगर भारत सरकार ने कभी इसकी जांच नहीं कराई है फिर वह ऑस्ट्रेलिया अथवा अमेरिका के सरकारी जांच रिपोर्ट का अध्ययन क्यों नहीं करती. इस लिंक में अमेरिका के उस रिपोर्ट को पढ़ें https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/15630849 जिसमें बताया गया है कि कीमोथेरेपी लेने के बाद 5 वर्ष जिन्दा बचने की संभावना सिर्फ 2% है जबकि जो लोग कीमोथेरेपी नहीं लेते उनके 5 वर्ष जिन्दा बचने की संभावना 60% से ज्यादा है.
कीमोथेरेपी और रेडिएशन से बेहतर उपचार कौन-कौन से हैं.
Why the best oncologists never prescribe chemotherapy. Why leukemia is best treated by safer modalities.

As the 5-year relative survival rate for cancer in Australia is now over 60%, it is clear that cytotoxic chemotherapy only makes a minor contribution to cancer survival. To justify the continued funding and availability of drugs used in cytotoxic chemotherapy, a rigorous evaluation of the cost-effec...

04/07/2022

मेटाबोलिक उपचार क्या है
बिमारी दो तरह के होते हैं . एक्यूट(तत्काल ) और क्रोनिक (पुरानी ) , एलोपैथिक विज्ञान के तहत बीमारियों का लक्षण आधारित उपचार सिर्फ एक्यूट अथवा नयी बिमारी जैसे बुखार , इन्फेक्शन , निमोनिया , मैनिंजाइटिस इत्यादि के लिए है

परन्तु क्रोनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज , उच्च रक्तचाप , मोटापा , कैंसर जैसे बीमारियों में लक्षण आधारित उपचार ज्यादा दिन तक के लिए नहीं हो सकता . बीमारियों के कारण का उपचार होनी चाहिए परन्तु हो इसका उल्टा है . किताबों में सही जानकारी नहीं दी गयी है

वैज्ञानिक अनुसंधान जो दवा कंपनियों के लिए लाभदायक होती है वही किताबों में लिखी जाती है और जो अनुसंधान से फायदा नहीं दीखता उसे कचरे में डाल दिया जाता है

सरकारों ने अनुसंधानों का व्यापारीकरण करने की अनुमति दे रखी है . जो इंसानियत के लिए खतरा है .

मेटाबोलिक उपचार बीमारियों की वजह को समाप्त कर बीमारियों से छुटकारा का रास्ता है . इसका प्रयोग मैंने कैंसर के उपचार में भी कर चुका हूँ . कैंसर का भी लक्षण आधारित उपचार गलत है . चिकित्सक कैंसर की कोशिकाओं को मारना चाहते हैं ( जोकि बिना व्यक्ति को मारे बिना संभव नहीं है ) क्योंकि इसमें दवा कंपनियों को फायदा है , इसलिए वह बातें किताबों में लिखी है . वास्तविकता यह है की कैंसर मेटाबोलिक उपचार से ठीक होता है .

लोग जानकारी के अभाव में कीमोथेरेपी जैसे जानलेवा उपचार को अपना रहे हैं . जिसके पास पैसा होता है वह निश्चित तौर पर कैंसर से मर जाते हैं जबकि गरीब लोग कैंसर से नहीं मर रहे हैं

कैंसर में लोगों को कोई भी उपचार नहीं कराना चाहिए अथवा मेटाबोलिक उपचार को अपनाए . मेटाबोलिक उपचार में कैंसर ठीक होने की काफी संभावना होती है

मैं जानता हूँ की ओंकोलोजिस्ट को मालुम है की कीमोथेरेपी से कोई भी व्यक्ति छः माह तक ही जिन्दा बचता है इसलिए सभी मरीज को वह छः महिना बचने की उम्मीद बताते हैं ———- कीमोथेरेपी एक तरह का मर्डर है , लोगों को इसबात से अवगत कराएं

कभी कभी अन्य बिमारिओं को कैंसर बता कर लो डोज कीमोथेरेपी दी जाती है और लोग समझते हैं की उनका कैंसर का उपचार हुआ है . कैंसर का उद्योग मानवता के नाम पर एक कलंक है

02/07/2022

कैंसर एक मेटाबोलिक बीमारी है
इसका अभी तक जेनेटिक बीमारी समझकर लक्षण आधारित उपचार होता आया है. कैंसर का वर्तमान उपचार (रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी) कैंसर की बीमारी से ज्यादा खतरनाक है. सबूत देखने के लिए क्लिक करें.

यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि कैंसर के उपचार में मात्र दो प्रतिशत लोग ही पांच साल तक जिन्दा रह पाते हैं, जबकि कैंसर के साथ बिना उपचार के लोग वर्षो जिन्दा रहते हैं. सबूत देखने के लिए क्लिक करें.

प्रसिद्ध वैज्ञानिक Thomas Seyfried (बोस्टन यूनिवर्सिटी अमेरिका के प्रोफेसर) का कहना है कि कैंसर का उपचार पूर्णतः गलत हो रहा है. चिकित्सा विज्ञान में किसी बीमारी को ठीक करने के लिए किसी को जहर नहीं दिया जाता लेकिन उपचार के नाम पर लाखों लोगों को जहर दिया जा रहा है.

कैंसर एक मेटाबोलिक बीमारी है जोकि कोशिकाओं में Mitochondria के खराब होने की वजह से होता है. जिसका उपचार मेटाबोलिक तरीके से बहुत आसानी से किया जा सकता है.

कैंसर क्यों होता है (डॉ थॉमस सेफ्रीड और डॉ लिओनार्ड कॉडवेल का सिद्धांत)

मानसिक अथवा शारीरिक तनाव अथवा (Toxins) टॉक्सिन्स से शरीर की ऊर्जा कम जाती है और इसमें एसिडिक माहौल तैयार हो जाता है। आपने देखा होगा अगर आप कोई मानसिक तनाव में होते हैं तो आपकी ऊर्जा कम हो जाती है। इस तरह का वातावरण लम्बे समय तक रहने से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है। एसिडिक माहौल और ऑक्सीजन की कमी की वजह से कोशिकाओं की मृत्यु शुरू हो जाती है, अपने बचाव के लिए कोशिकाएं अपना कार्य छोडकर बिना ऑक्सीजन के जिन्दा रहने का इंतजाम करती है और सिर्फ फर्मेंटेशन (Fermentation फर्मेंटेशन के द्वारा कोशिकाएं बिना ऑक्सीजन के ऊर्जा बना पाती है।) के द्वारा एनर्जी प्राप्त करती है, इन कोशिकाओं का माइटोकांड्रिया ख़राब हो चुकी होती है और उसके पास बार बार डिवीज़न के कोई और काम नहीं रहता। शरीर में एसिड की मात्रा बढ़ने और ऑक्सीजन अथवा एनर्जी की कमी और कुपोषण और शारीरिक/मानसिक तनाव से होता है कैंसर। जब आप कैंसर संस्थानों के ताम झाम में परते हैं, और आपको भय दिखाया जाता है तो आप और ज्यादा तनाव में आ जाते हैं और आपका कैंसर तेजी से बढ़ने लगता है। आप जो ट्यूमर अथवा गाँठ देखते हैं वह वास्तव में कैंसर का लक्षण है जो कि एक शारीरिक बचाव प्रक्रिया है। यही ट्यूमर एसिड को समेटकर आपको बचाती है। ट्यूमर को काटने (सर्जरी) अथवा रेडिएशन से जलाने अथवा कीमोथेरेपी से छति पहुंचाने से सुरक्षातमक कवच टूट जाता है और एसिड के फैलने और शरीर में ऊर्जा और ऑक्सीजन की कमी से पूरे शरीर में कैंसर हो जाता है।ओंकोलोजिस्ट जब मरीज को बहुत कम दिन जीने की उम्मीद बताते हैं तो व्यक्ति असीम भय के माहौल में पड़ जाता है, जिससे मानसिक तनाव की वजह से शरीर का माहौल एसिडिक हो जाता है और इससे कैंसर तेजी से बढ़ने लग जाता है। कीमोथेरेपी और रेडिएशन से शरीर को काफी छति पहुँचती है, व्यक्ति काफी तनाव में रहता है और पूरा शरीर टूट चुका होता है इससे स्टेरॉयड की मात्रा बढ़ जाती है, खून में शुगर बढ़ जाता है और माहौल एसिडिक बन जाता है जो कैंसर के और बढ़ने में सहायक होता है। कैंसर के असल कारण का निवारण किये बिना कैंसर को ठीक नहीं किया जा सकता है। क्योंकि मेटाबोलिक उपचार कैंसर की वजह पर काम करती है इसलिए यह उपचार पद्धति ही कैंसर का अंत कर सकती है।

डॉ विजय राघवन ने अमेरिका के महान वैज्ञानिक डॉ थॉमस सेफ्रीड और डॉ लिओनार्ड कॉडवेल के चिकित्सीय अनुभवों को मिलाकर, भारत में शुरू किया कैंसर का मेटाबोलिक उपचार। यह उपचार अबतक का सबसे सफल उपचार प्रणाली है।

किसी भी बिमारी के ज्यादा दिन बने रहने से वह कैंसर में तब्दील हो जाता है. जैसे: हेपेटाइटिस – B, हेपेटाइटिस – C, मोटापा, डायबिटीज, लम्बे समय का घाव, लंबे समय का मानसिक तनाव, कुपोषण अथवा कोई भी बिमारी अगर लम्बे समय तक चल सकती है, तो वह कैंसर में तब्दील हो सकती है. इसे आप इस तरह समझें, अगर आप किसी लम्बी मानसिक अथवा शारीरिक समस्या से जूझते हैं और आप हार चुके होते हैं, तो इस हारे हुए शरीर का अंत करने के लिए कैंसर उत्पन्न होता है. कैंसर के होने पर आप जिस उपचार को अपनाते हैं, जैसे – कीमोथेरेपी, रेडिएशन अथवा सर्जरी. ये सभी आपके शरीर को और बर्बाद कर देता है. फिर कैंसर विशेषज्ञ का डर दिखाना, यह सब आपको और ज्यादा शारीरिक और मानसिक तौर पर ख़त्म कर चूका होता है और आप अपनी जिन्दगी की जंग हार चुके होते हैं, और आपका कैंसर आपको ख़त्म कर देता है. डॉ विजय राघवन के अनुसंधान के अनुसार, कैंसर एक साधारण उपचार से ठीक होने वाली बिमारी है. शरीर को क्षति पहुंचाकर नहीं, परन्तु मेटाबोलिक उपचार द्वारा आप अपने शरीर को सशक्त बनाकर कैंसर से जंग जीत सकते हैं. हाल के अनुसंधानों से पता चला है कि कैंसर का उपचार जिन सिद्धांतों पर आधारित है वो पूर्णतः गलत है. अब तक कैंसर को जेनेटिक बीमारी माना जाता रहा है इसका मतलब है कि यह बीमारी कोशिकाओं के nucleus से शुरू होता है. जबकि 1969 में ही यह साबित हो चूका था कि कैंसर जेनेटिक बीमारी नहीं है.

Chemotherapy or Metabolic Treatment
Chemotherapy से कैंसर के मरीजों की जान जा रही है. वास्तव में चिकित्सा विज्ञान भ्रमित है.

चिकित्सक बड़े से ट्यूमर को देखकर सोचते हैं कि उसको हटा देंगे तो बीमारी ठीक हो जाएगा. उसको निकालने के लिए या तो रेडिएशन देते हैं या फिर सर्जरी करके निकाल देते हैं या नहीं तो फिर कोई ज़हरीला सामान (जिसको कीमोथेरेपी बोलते हैं) ब्लड में दे दिया जाता है जो वहां जाकर उन कोशिकाओं को मार देगा.

लगभग सौ वर्षों से यह सब हो रहा है. Chemotherapy (कीमोथेरेपी), रेडियोथेरेपी और सर्जरी कैंसर के उपचार में वर्षों से हो रहा है. लेकिन कैंसर से पहले जितने लोगों की मौत होती थी. आज उससे ज्यादा लोग मर रहे हैं. लोगों को यह कहकर गुमराह किया जाता है कि कीमोथेरेपी देकर उनकी आयु बढ़ाई जा सकती है लेकिन सच बिलकुल उल्टा है. कीमोथेरेपी लेने के बाद तुरंत ही मरीज़ की मौत हो जाती है, क्योंकि कीमोथेरेपी का सिद्धांत ही गलत है. इस विषय में वैज्ञानिक 100% गलत हैं कि कीमोथेरेपी से कैंसर की कोशिकाओं को मारा जा सकता है.

कीमोथेरेपी (Chemotherapy) से शरीर के हर एक कोशिका को मारा जा सकता है, लेकिन कैंसर की कोशिकाओं को नहीं. लोगों को इस बात से भी गुमराह किया जाता है कि जितनी जल्दी कैंसर के मरीजों को पहचान लिया जाएगा. उतनी ही ज्यादा सम्भावना रहेगी उनके बचने की. लोगों के बीच इस खबर को फैलाया गया है कि एडवांस स्टेज में कैंसर के मरीजों को नहीं बचाया जा सकता. जबकि शुरूआती स्टेज के मरीजों को बचाया जा सकता है.

चिकित्सा व्यापार के लोग Chemotherapy के लिए कैसे भ्रमित करते हैं?
The truth about early diagnosis of cancer.

शुरूआती जांच में जितने लोगों को कैंसर से पीड़ित बताया जाता है. उसमे 99% लोगों को कैंसर रहता ही नहीं है. उन 99% लोगों की स्थिति, कैंसर के मरीजों की तरह (Cancer like condition) होती है. उस Cancer like condition में कम डोज वाला कीमोथेरेपी देकर ब्रांडिंग किया जाता है. कि यह मरीज़ कीमोथेरेपी से ही ठीक हुआ है. जबकि वास्तव में उस मरीज़ को कैंसर था ही नहीं.

They are not treating cancer. They are treating cancer like condition in the early stage of cancer.

लेकिन लोगों को बताया जाता हैं कि वह मरीज़ (Chemotherapy) कीमोथेरेपी से ठीक हुआ है. हमें पूरी तरह विश्वास दिला दिया जाता है कि कैंसर के मरीज़ कीमोथेरेपी से ठीक हो रहे हैं. लेकिन अगर किसी को वास्तव में कैंसर हो जाय और उसे फुल डोज वाली कीमोथेरेपी दी जाय (कम डोज नहीं, फुल डोज जिससे कैंसर की कोशिका मर सके), तो थोड़े ही समय बाद मरीज़ की ही मृत्यु हो जाती है.

यही वजह है कि जितने भी मरीज़ बड़े अस्पताल जाते हैं. टाटा इंस्टिट्यूट हो या AIIMS. उन सब की मौत हो जाती है. जिंदा वही लौट पाते हैं. जिनको कैंसर नहीं है और कम डोज वाला कीमोथेरेपी दिया जाता है. और लोगों को यह भ्रम हो जाता है कि उसका कैंसर कीमोथेरेपी से ठीक हुआ.

Blood Cancer अलग-अलग तरह का होता है. लेकिन इसके बारे में भी लोगों को यही पता है. कि यह (Chemotherapy) कीमोथेरेपी से ठीक होता है.

चिकित्सक Morphologically different चीज़ों को भी कैंसर बोल देते हैं. LEUKOCYTOSIS को भी कैंसर के रूप में देखा जाता है. यदि किसी का WBC बहुत ज्यादा हो गया है. तो उसे भी कैंसर बता दिया जाता है. WBC के बढ़ जाने के कई वजह हैं. यह कैंसर नहीं है. लेकिन उसको कैंसर बताकर कम डोज वाला कीमोथेरेपी दे दिया जाता है.

हर ओंकोलोजिस्ट को पता है कि कीमोथेरेपी से मरीज़ जिंदा नहीं बचता है. कीमोथेरेपी वास्तव में मानवता के खिलाफ एक षड़यंत्र है.

कैंसर के उपचार में स्टेम सेल की क्या भूमिका है?

आइये जानते हैं कैंसर कैसे होता होता है. वास्तव में जो हम खाते हैं, या जिस माहौल में रहते हैं, उसमे बहुत सारा टोक्सिन है. ये टोक्सिन कोशिका के अंदर जाकर उसे बर्बाद कर देता. बर्बादी कई चीजों की होती है. लेकिन अगर माइटोकांड्रिया (Powerhouse of the cell) बर्बाद हो गया, तो कोशिका के लिए यह बहुत बड़ी बर्बादी होती है. क्योंकि कोशिका अब एनर्जी का प्रयोग नहीं कर सकती. सिर्फ fermentation के द्वारा ही कोशिका जिंदा रहती है.

अब चूंकि कोशिका सिर्फ fermentation के द्वारा ही जिंदा रहती है इसलिए कोशिका के चारों तरफ एक एसिडिक माहौल बन जाता है. कोशिका खुद को जिंदा रखने के लिए DNA में एक सिग्नल भेजती है ताकि लैक्टिक एसिड बनाने वाले एंजाइम बने. यह एंजाइम जब ज्यादा बनता है. तो वैज्ञानिक वर्षों से बोल रहे हैं. कि जेनेटिक बदलाव आ जाता है.

THIS IS THE GENETIC CHANGE.

यह लैक्टिक एसिड एंजाइम बनाने का सिगनल जो गया. उसके बाद जो परिवर्तन आ जाता है DNA में. उसी को वर्षों से जेनेटिक समझ रहे हैं. लोगों को ऐसा लग रहा है कि DNA में म्युटेशन होने की वजह से कैंसर होता है. लेकिन ऐसा नहीं है.

Cancer originates due to the toxins in the environment.

इन टोक्सिंस की वजह से कुछ कोशिकाओं में माइटोकांड्रिया ख़राब हो जाता है. और इसके वजह से या तो कोशिकाएं मर जाती है. या सिर्फ fermentation के सहारे जीवित रहती है. Fermentation के लिए जिस तरह के एंजाइम की जरुरत होती है. उसे बनाने का निर्देश नुक्लयूस को जाता है. Fermentation के लिए जो एंजाइम बनते हैं. उसी से कोशिकाएं जिंदा रहती है. Fermentation की वजह से वहां का माहौल एसिडिक हो जाता है. इसकी प्रतिक्रिया में कई धमनियां बनती है. ऐसी धमनियां जरुरत के मुताबिक सब जगह बनती रहती है.

क्योकि कोशिकाओं में इतना बदलाव आ जाता है. कि ये अपने जीवन रक्षा के लिए ऐसा एंजाइम बनाता है. जिससे की वो एनर्जी का प्रयोग कर सके. क्योंकि कैंसर की कोशिका में माइटोकांड्रिया ख़राब है. इस वजह से वह चर्बी को एनर्जी के रूप में नहीं ग्रहण कर सकती. और सिर्फ ग्लूकोज पर ही जिंदा रहती है. जबकि शरीर की अन्य कोशिकाओं को ग्लूकोज की कोई जरुरत नहीं होती है.

Cancer cell cannot utilize fat.

CHEMOTHERAPY IS NOT BETTER THAN METABOLIC TREATMENT OF CANCER
कैंसर के उपचार में शरीर के अन्दर परिवर्तन लाया जाता हैं. ताकि कोशिकाओं को ग्लूकोज की जरुरत न हो. अर्थात कैंसर की कोशिकाओं को ग्लूकोज मिले ही नहीं. और जब कैंसर की कोशिकाओं को ग्लूकोज नहीं मिलता है. तो उसकी मौत हो जाती है. कुछ ऐसी कोशिकाएं जो पूरी तरह कैंसर की कोशिकाओं में परिवर्तित नहीं हुई है. वह वापस नार्मल में बदल जायेगी. जब उन्हें ग्लूकोज नहीं मिलेगा. तो उनका fermentation प्रोसेस बंद हो जाएगा. तब उन कोशिकाओं की माइटोकांड्रिया खुद ठीक होने लगेगी.

Mitochondria may repair back to normal.

जब माइटोकांड्रिया रिपेयर हो जाएगा. तो वो कैंसर सेल रहेगा ही नहीं. वह कोशिका स्वस्थ हो जायेगी. इस तरह कैंसर की कोशिका को डायरेक्टली न मारकर, शरीर को ही तैयार किया जाता है. उस काम के लिए. कि शरीर खुद ही कैंसर सेल को ख़त्म कर दे. और कैंसर सेल का जो भी सामान है. उसे एनर्जी के रूप में इस्तेमाल कर ले. इस प्रक्रिया के साथ-साथ स्टेम सेल की भी प्रक्रिया चल रही होती है. जो कैंसर सेल के द्वारा हुए नुकसान की भरपाई कर देती है.

किडनी कैंसर या स्टोमैक कैंसर में किसी ऑर्गन को काटकर निकालने की जरुरत ही नहीं. वो अपनेआप रिपेयर करेगा. और वो ठीक होगा. हमने बहुत सारे कैंसर को ठीक किया है. कैंसर ठीक होता है.

कैंसर के मरीज़ को स्टेम सेल और मेटाबोलिक उपचार की मदद से ठीक किया जा सकता है.

जब यह बीमारी ठीक हो सकती है. तो बांकी कई अन्य बीमारियाँ भी ठीक हो सकती है. आपकी क्या राय है?

Metabolic treatment is a ray of hope to cure Cancer
कैंसर का Chemotherapy (कीमोथेरेपी) आधारित उपचार विफल होने के बाद प्रसिद्ध वैज्ञानिक Prof. Thomas N. Seyfried ने कैंसर के कारणों का गहराई से अध्ययन किया और पाया:

कैंसर Mitochondria की बीमारी है (यह जेनेटिक बीमारी नहीं है.
Mitochondria में खराबी ग्लूकोस की अधिकता की वजह से होता है.
कैंसर की कोशिका को जीवित रहने के लिए ग्लूकोस अथवा glutamine की जरुरत होती है इनकी अनुपस्थिति में कोशिका की मौत हो जाती है.
शरीर की अन्य कोशिकाओं में लचीलापन पाया जाता है जिसकी वजह से वो ग्लूकोस और glutamine के बिना भी जीवित रह सकती है.
Ketone bodies का इस्तेमाल शरीर की वो सारी कोशिकाएं कर सकती है जिनमे mitochondria पाया जाता है.
Ketone bodies शरीर में स्वतः बनता है. शरीर के अन्दर अन्य कोशिकाओं के लिए यह लाभकारी होता है परन्तु कैंसर की कोशिकाओं के लिए खतरनाक है.
Metabolic Treatment can cure all types of cancer including Brain, O***y, Uterus, Pancreas, Intestine, etc. This treatment is a harmless method to treat Cancer. In this therapy we use diet, exercise, supplements and some medicine to increase excretion of glutamine.

Metabolic Treatment से ब्रेन कैंसर, पैंक्रियास, लिवर, ब्लड इत्यादि में सफल उपचार हो रहा है. यह पूर्णतः हानिरहित उपचार है. Metabolic Treatment में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती. कैंसर का Metabolic उपचार कीमोथेरेपी से काफी बेहतर है. इस उपचार पद्धति में ज्यादा खर्च भी नहीं है. गाँव-घर के चिकित्सकों को इस चिकित्सा पद्धति की जानकारी नहीं होने की वजह से वो मरीजों को इसके प्रगोग के लिए प्रेरित नहीं करते.

01/07/2022

मेटाबोलिक उपचार ही क्यों ?
मेटाबोलिक उपचार के द्वारा शरीर की कोशिकाओं की खराबी को दूर कर बेहतर स्वास्थ्य की प्राप्ति की जा सकती है जो लगभग सभी तरह के पुराने और असाघ्य रोगों में कारगर है. किडनी फेलियर, कैंसर, डायबिटीज, आर्थराइटिस अथवा अन्य असाध्य रोगों में यह पद्धति अभूतपूर्व लाभ देता है. इस उपचार से शुगर, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल इत्यादि स्वतः नियंत्रित होता है और आप किडनी फेलियर, हृदयाघात इत्यादि से बच जाते हैं. कैंसर के मरीज की जिंदगी सिर्फ इसी पद्धति से बचायी जा सकती है. किडनी फेलियर, आर्थराइटिस इत्यादि के मरीजों की जिंदगी आसान और सुखमय बनाया जा सकता है. इसी वजह से अमेरिका जैसे विकसित देशों में मेटाबोलिक चिकित्सा काफी प्रचलित है और इसने अलोपथिक चिकित्सा का लगभग अंत कर दिया है. Metabolic Treatment can replace allopathy in India.

गरीबों के लिए मेटाबोलिक उपचार की योजनायें:
कोई भी गरीब आदमी अब किडनी फेलियर के उपचार से वंचित नहीं रहेगा. डायलिसिस अगर मुफ्त में भी मिले तो भी वह काफी खर्चीला उपचार है, इसलिए अब गरीबों को डायलिसिस से बेहतर उपचार की व्यवस्था की गयी है.
डायबिटीज में अब गरीब व्यक्ति को किडनी फेलियर जैसे दुष्परिणाम नहीं झेलने होंगे. गरीब लोगों की जिंदगी का महत्व ज्यादा होता है क्योंकि उन्हें ज्यादा लोगों की जिम्मेदारी झेलनी पड़ती है, इसलिए डायबिटीज में ऐसा उपचार विकसित किया गया है जिसको गरीब से गरीब व्यक्ति भी अपनाकर डायबिटीज के दुष्परिणामों से बच जाता है.
कैंसर से पीड़ित गरीब व्यक्ति भी अमेरिका जैसा उपचार पा सकते हैं. हमने अमेरिका में सबसे सफल कैंसर के उपचार को भारत में लागू किया और उस उपचार को गरीब से गरीब व्यक्ति भी अपना सकता है.
गरीबों को अब अमेरिका जैसा उपचार उपलब्ध होगा. अब उन्हें उपचार की तलाश में लाचारी का जीवन नहीं जीना पड़ेगा.
संस्था का उद्देश्य:
अनुसंधानों के द्वारा कैंसर सहित सभी लाइलाज बीमारियों का उपचार खोजना, जिससे बीमारियों से सम्बंधित भय का अंत हो सके.

अनुसंधान में उपलब्धियां
कैंसर, किडनी फेलियर, आर्थराइटिस, डायबिटीज इत्यादि के वर्तमान उपचारों का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद, इन्होंने अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, जर्मनी इत्यादि के वैज्ञानिकों के आविष्कारों को मिलाकर मेटाबोलिक चिकित्सा विकसित की. इसी दौरान इन्हें Thomus Siefried के चिकत्सीय अनुसंधान- कैंसर का मेटाबोलिक उपचार का विस्तृत अध्ययन करना का सौभाग्य प्राप्त हुआ.

पूरे विश्व के वैज्ञानिक लाइलाज बीमारियों पर शोध कार्य कर रहे हैं उनके अनुसंधानों को लागू करने के लिए इन्होंने आम लोगों को मेटाबोलिक चिकित्सा की ट्रेनिंग दी, जिसे मेटाबोलिक चिकित्सक के नाम से जाना जाता है.

मेटाबोलिक उपचार की विशेषताएं
डायबिटीज में अब जिंदगीभर सुई अथवा गोली खाने की जरूरत नहीं है और नाही किडनी फेलियर जैसे दुष्परिणामों का है खतरा. मेटाबोलिक उपचार कोशिकाओं के विकार को दूर कर डायबिटीज के दुष्परिणामों को भी ठीक करने में सक्षम है.
किडनी फेलियर में डायलिसिस अथवा ट्रांसप्लांट से बेहतर परिणाम देता है मेटाबोलिक उपचार. उच्च रक्तचाप अथवा डायबिटीज जैसे रोगों में किडनी को सुरक्षा प्रदान करता है मेटाबोलिक उपचार
कैंसर में अब अमेरिका जैसे देशों में लोग मेटाबोलिक उपचार लेते हैं और बेहतर जिंदगी जीते हैं. क्योंकि यह एक हानिरहित पद्धति है जो कीमोथेरेपी से बेहतर परिणाम देता है.
Coronary Artery Blockage (हार्ट ब्लाक) को आसानी से खोला जा सकता है वह भी बिना ऑपरेशन. मेटाबोलिक उपचार एंजियोप्लास्टी अथवा बाईपास ऑपरेशन से बेहतर परिणाम दे रहा है.
आर्थराइटिस अथवा गठिया रोग (Rheumatoid/ osteoarthritis) में अब जिंदगीभर दर्द सहने की जरूरत नहीं है और नाहीं खतरनाक दर्द की दवाओं के सेवन करने की जरूरत है.
दम्मा, मानसिक रोग जैसे डिप्रेशन, मानसिक और शारीरिक विकलांगता में भी मेटाबोलिक उपचार अच्छा परिणाम देता है.
The metabolic treatment designed by Dr. Vijay Raghavan M.D. increases life expectancy in most chronic degenerative diseases.
Every Disease can be best managed by Metabolic Treatment
Diabetes can now be best managed without injections or oral drugs. By adopting metabolic treatment, there is no chance of complications like kidney failure or heart attacks.
In Kidney Failure, metabolic treatment is better than dialysis and transplant. This treatment saves kidney in case of diabetes or high blood pressure. So, Kidney failure patients has a ray of hope.
In Cancer, metabolic treatment is far better than chemotherapy, radiation or surgery.
Coronary Artery Blockage can be easily opened by metabolic treatment. So, there is no need of angioplasty or stenting in case of blockage.
In Arthritis, both rheumatoid disease and osteoarthritis, Metabolic treatment is better than taking lifelong medications. So there is no need to take dangerous medicines just to control pain. The results are far superior than taking allopathic treatment.
गरीबों के लिए हमारी योजनाओं की जानकारी के लिए कॉल करें: +91-9102851937, 09801157478, 8969898579
गरीबों को अगर कोई गंभीर बिमारी हो जाती है तो वह उपचार के लिए संस्थाओं के चक्कर काटता रहता है और उसका कोई उपचार ही नहीं होता. इसलिए हमनें अमेरिका के सबसे सफल उपचार को गरीबों के लिए उपलब्ध कराया है. अब गरीब से गरीब व्यक्ति भी कैंसर, किडनी फेलियर इत्यादि का सफल उपचार ले सकेंगे. जानकारी के लिए कॉल करें: +91-9102851937, 09801157478, 8969898579

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