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18/11/2025

टाइफाइड

आप सब लोगों ने एक बीमारी का नाम सुना होगा । टाइफाइड
आइए जानते हैं इसके बारे में ।

टाइफाइड एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से दूषित पानी या भोजन के सेवन से फैलती है। यह बीमारी Salmonella Typhi नामक बैक्टीरिया के कारण होती है जो आंतों को संक्रमित करता है और धीरे-धीरे खून तक पहुँचकर पूरे शरीर में प्रभाव डाल सकता है।

भारत जैसे देशों में, जहाँ पानी की स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और व्यक्तिगत हाइजीन संबंधी समस्याएँ अधिक हैं, वहाँ टाइफाइड एक आम और गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में देखा जाता है।

टाइफाइड कैसे होता है:
दूषित पानी पीने से
ऐसे भोजन का सेवन करने से जिसे संक्रमित व्यक्ति ने बिना हाथ धोए तैयार किया हो।

❌ खुले में बिकने वाला पानी, ठेले-ठेले पर मिलने वाले कटे फल, सलाद और गंदे हाथों से बनाकर दिया गया भोजन टाइफाइड फैलने के सामान्य कारण हैं।

खराब सीवेज प्रणाली और पीने के पानी में गंदगी या मल-मूत्र के अंश मिल जाना भी संक्रमण को बढ़ाता है।

बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है और आंतों में संक्रमण करके धीरे-धीरे खून में पहुँचता है।
यही कारण है कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन समय रहते इलाज न मिलने पर यह गंभीर रूप ले सकती है।

टाइफाइड की जाँच:

टाइफाइड का पता लगाने के लिए जाँच आवश्यक है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अन्य बुखारों जैसे वायरल फीवर, मलेरिया या डेंगू से मिलते-जुलते होते हैं।

आम तौर पर लंबे समय तक रहने वाला बुखार, कमजोरी, पेट दर्द, भूख में कमी, सिरदर्द और कभी-कभी दस्त या कब्ज इसके प्रमुख लक्षण हैं।

डॉक्टर इसके लिए कुछ ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं।
सबसे आम जांच विडाल टेस्ट है, जिसमें शरीर में बने एंटीबॉडी की जाँच की जाती है। हालांकि यह जांच हमेशा पूरी तरह से सटीक नहीं मानी जाती।

✅ आजकल टाइफाइड के लिए ब्लड कल्चर को सबसे विश्वसनीय माना जाता है, जिसमें खून के सैंपल से सीधे बैक्टीरिया की पहचान की जाती है।

इसके अलावा CBC और लिवर फंक्शन टेस्ट में हल्की गड़बड़ी जैसी चीजें भी देखी जाती हैं।
कुछ मरीजों में यूरिन टेस्ट या अल्ट्रासाउंड भी कराया जाता है, खासकर तब जब पेट में अधिक दर्द हो या जटिलता की आशंका हो।

इलाज:-
टाइफाइड का इलाज मुख्य रूप से एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है। डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षणों और बीमारी की गंभीरता देखकर उपयुक्त एंटीबायोटिक देते हैं।
सामान्य मामलों में oral tablet दी जाती हैं और गंभीर मामलों में इंजेक्शन के रूप में एंटीबायोटिक की आवश्यकता होती है।

बुखार और डिहाइड्रेशन कम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी, ORS, नारियल पानी और तरल पदार्थ दिए जाते हैं।

खाना हल्का और आसानी से पचने वाला होना चाहिए।
मरीज के लिए पूर्ण आराम बेहद जरूरी है। इलाज में लापरवाही करने पर आंतों में छेद, खून आना, मानसिक भ्रम, और कई अन्य जटिलताएँ हो सकती हैं, इसलिए डॉक्टर की दवाई समय पर और पूरा कोर्स पूरा करना सबसे महत्वपूर्ण है।

टाइफाइड से बचाव
✅ साफ पानी पीना, पानी को हमेशा उबालकर या फिल्टर करके इस्तेमाल करना, बाहर का कटा हुआ फल, सलाद, गोलगप्पा, गंदा पानी या सड़क किनारे बनने वाला खाना न खाना, हाथों को साबुन से धोना और भोजन बनाने से पहले स्वच्छता रखना जरूरी है।

बच्चों के लिए और उन क्षेत्रों में जहां बीमारी अधिक मिलती है, टाइफाइड का टीका लगवाना बहुत फायदेमंद है।

यह टीका संक्रमण की संभावना को काफी कम कर देता है।
खुले में शौच से बचाव, घर के आसपास की सफाई और स्वच्छ पानी की उपलब्धता टाइफाइड को रोकने के सबसे प्रभावी तरीके हैं।

सही जानकारी, समय पर जांच, उचित इलाज और सावधानियां मिलकर टाइफाइड को पूरी तरह नियंत्रित कर सकती हैं।

15/11/2025
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28/09/2025

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05/01/2025

सावधान रहें सुरक्षित रहें

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05/01/2025

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इन 5 संकेतों से पहचानिए बढ़ चुका है थायराइड, देरी करना पड़ सकता है भारीलाइफस्टाइल डेस्कOveractive Thyroid Symptoms: आज थ...
05/01/2025

इन 5 संकेतों से पहचानिए बढ़ चुका है थायराइड, देरी करना पड़ सकता है भारी

लाइफस्टाइल डेस्क
Overactive Thyroid Symptoms: आज थायराइड बहुत कॉमन समस्या होती जा रही है और सबसे हैरानी की बात तो यह है कि ये समस्या अब सिर्फ महिलाओं तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पुरुषों में भी तेजी से बढ़ रही है। थायराइड के कई लक्षणों (Symptoms Of An Overactive Thyroid) में से एक है शरीर में दर्द। अगर आपको भी अक्सर शरीर के किसी हिस्से में दर्द रहता है, तो ये आर्टिकल आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। आइए जानते हैं कि थायराइड बढ़ने पर शरीर के किन-किन हिस्सों में दर्द हो सकता है।

मांसपेशियों में ऐंठन
थायराइड बढ़ने पर मांसपेशियों में दर्द एक आम लक्षण है। यह दर्द मांसपेशियों की कमजोरी और जोड़ों में दर्द के साथ भी हो सकता है। अगर आपको थायराइड की समस्या है और ये लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज से आप इसे गंभीर होने से रोक सकते हैं।

जोड़ों में दर्द
जब थायराइड ग्लैंड बढ़ जाता है, तो कई बार एक बीमारी होती है जिसे सबस्यूट थायरॉयडिटिस कहते हैं। इस बीमारी का एक बड़ा लक्षण है जोड़ों में तेज दर्द। ऐसे में, आपके घुटनों पर सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ता है और कई बार उठने-बैठने में भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

पैरों में दर्द
थायराइड की समस्या से पीड़ित मरीजों को अक्सर पैरों में तेज दर्द का एहसास होता है। यह दर्द इतना गंभीर हो सकता है कि रोजमर्रा के काम जैसे खड़े होना या चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, कई मरीजों को तलवों में जलन की शिकायत भी रहती है। यह दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है और पेशेंट्स की लाइफ काफी प्रभावित हो सकती है।

गर्दन में दर्द
थायराइड बढ़ने पर मरीज को अक्सर गर्दन के आसपास तेज दर्द होता है। आमतौर पर यह थायराइड के शुरुआती लक्षणों में देखा जाता है, लेकिन समय के साथ यह दर्द काफी तेज हो जाता है। चूंकि थायराइड ग्लैंड गर्दन में मौजूद होता है, इसलिए यह हिस्सा भी सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। इसके अलावा, कई मरीजों को गर्दन में सूजन भी नजर आती है।

कान में दर्द
थायराइड की समस्या बढ़ने पर कई बार मरीजों को कान में बेहद तेज दर्द का एहसास होता है। यह दर्द अक्सर जबड़ों तक फैल जाता है, जिससे मरीज को असहनीय पीड़ा होती है। अगर आपको कान और जबड़े में एक साथ दर्द हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जल्दी जांच करवाना बेहद जरूरी है ताकि स्थिति पर काबू पाया जा सके।

Disclaimer: लेख में उल्लेखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं!
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हेल्थ और लाइफस्टाइल कोच
आशुतोष कुमार
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03/01/2025

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22/05/2024

गुस्सा (Anger Issues) एक मानवीय भावना है, जो उकसावे, हताशा या धमकी के प्रति होने वाली एक प्रतिक्रिया होती है। शायद ही कोई ऐसा हो, जिसे कभी गुस्सा न आया हो। लोग अलग-अलग हालातों में अपनी गुस्सा जाहिर करते हैं, लेकिन गुस्सा जाहिर करने का उनका तरीका काफी अलग हो सकता है। कुछ लोग जहां बहुत जल्दी छोटी-छोटी बातों पर नाराज हो जाते हैं, तो वहीं कुछ लंबे समय तक अपने गुस्से पर कंट्रोल कर सकते हैं।

गुस्सा हमारी सेहत पर कई तरह से असर डालता है। शारीरिक रूप से, यह एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ाता है, ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को बढ़ाता है, जो हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा बढ़ाता है। अकसर ऐसा माना जाता है कि हालातों के मुताबिक लोगों को गुस्सा आता है, लेकिन असल में शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी इसका कारण होती है। अगर आप भी जल्दी गुस्सा करने वालों में से हैं, तो आपके अंदर भी इन न्यूट्रिएंट्स की कमी हो सकती है।

मैग्नीशियम की कमी
मैग्नीशियम नर्व फंक्शन और मूड रेगुलेशन के लिए जरूरी है। ऐसे में इसकी कमी से चिड़चिड़ापन, चिंता और स्ट्रेस मैनेजमेंट में कठिनाई हो सकती है, जो क्रोध के रूप में दिखाई दे सकती है।

विटामिन डी की कमी
शरीर में विटामिन डी की कमी को डिप्रेशन और एंग्जायटी समेत मूड डिसऑर्डर से जोड़ा गया है। ये स्थितियां क्रोध की संवेदनशीलता को बढ़ा सकती हैं। विटामिन डी हमारे शरीर के विभिन्न कार्यों के लिए जरूरी है, जिसमें फास्फोरस का सही अब्जॉर्प्शन भी शामिल है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी
फिश ऑयल और अलसी में पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। ओमेगा-3 की कमी से मूड में गड़बड़ी हो सकती है, जिसकी वजह से आक्रामकता और क्रोध भी शामिल है। ओमेगा-3 मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बढ़ाता है और सूजन को कम करके सकारात्मक मूड को बढ़ावा देता है।

विटामिन बी कॉम्प्लेक्स की कमी
बी विटामिन, विशेष रूप से बी 6, बी 12 और फोलेट, ब्रेन फंक्शन और न्यूरोट्रांसमीटर प्रोडक्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन विटामिन्स की कमी से मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन और गुस्सा हो सकता है। ये विटामिन भोजन को ईंधन में बदलने, सेल रिपेयरिंग में मदद करने और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करते हैं।

आयरन की कमी
आयरन हीमोग्लोबिन के प्रोडक्शन के लिए जरूरी है, जो मस्तिष्क तक ऑक्सीजन पहुंचाता है। ऐसे में आयरन का निम्न स्तर थकान, डिप्रेशन और चिड़चिड़ेपन का कारण बन सकता है, जो गुस्से को उकसाने में योगदान कर सकता है।

जिंक की कमी
जिंक की कमी से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली खराब हो सकती है और मूड संबंधी डिसऑर्डर हो सकते हैं, जिनमें चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ना भी शामिल है। जिंक स्वस्थ मस्तिष्क कार्य का समर्थन करता है और न्यूरोट्रांसमीटर और हार्मोनल प्रक्रियाओं के लिए जरूरी है।

Ashutosh Kumar
Health Zone
093047 12343

22/05/2024

गर्मियों में बच्चों को लेकर ये जानकारी पढ़ें और शेयर करें :

गर्मियों में बच्चे ख़ास कर नवजात शिशु काफ़ी जल्दी dehydrate हो जाते हैं। अर्थात् गर्मी की वजह से उनके शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
ये गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है और जानलेवा भी हो सकती है।

काफ़ी ज़रूरी है कि बच्चों को पर्याप्त मात्रा में हर कुछ देर पर पानी पिलाते रहें।
अगर बच्चा दस्त या उल्टी से पीड़ित है तो अपने बच्चे को उल्टी करने के बाद एक घंटे तक प्रतीक्षा करें और फिर एक घंटे तक हर 10 मिनट में एक चम्मच तरल पदार्थ दें।

अगर नवजात शिशु है तो नियमित स्तनपान करायें।
अगर बच्चे को उल्टी आ रही है तो
उल्टी करने के बाद कुछ देर तक प्रतीक्षा करें और फिर सही तरीक़े से स्तनपान करायें।

अगर शिशुओं में ये सब लक्षण हैं तो सतर्क हो जायें:

❌सूखे, फटे हुए होंठ या जीभ
❌गहरे रंग का मूत्र
❌आठ घंटे तक बहुत कम या बिल्कुल पेशाब न आना
❌ठंडी या सूखी त्वचा
❌धँसी हुई आँखें या सिर पर धँसा हुआ मुलायम स्थान (शिशुओं के लिए)
❌अत्यधिक तंद्रा
❌निम्न ऊर्जा स्तर
❌रोते समय आँसू नहीं
❌अत्यधिक उतावलापन
❌तेज़ गति से साँस लेना

इन सब मामलों में अपने डॉ की सलाह लें।

और सबसे ज़रूरी बात ये कि कभी भी लगे कि बच्चा थोड़ा भी सुस्त हो रहा है तो इसे काफ़ी गंभीरता से लें और तुरंत डॉ से संपर्क करें।

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Line Bazaar, Shiv Mandir Road
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