ध्यान योगा- नेचरल हिलिंग सेंटर

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ध्यान योगा- नेचरल हिलिंग सेंटर Natural healing service

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12/09/2024

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30/08/2024

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16/08/2024

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आरोग्य विषयक सामान्य माहिती ...1.तेलाचा कमीत कमी वापर करून जेवण बनवण्यासाठी अनेकजण नॉन स्टीकचा वापर करतात. सतत वापरामुळे...
25/01/2021

आरोग्य विषयक सामान्य माहिती ...

1.तेलाचा कमीत कमी वापर करून जेवण बनवण्यासाठी अनेकजण नॉन स्टीकचा वापर करतात. सतत वापरामुळे त्यावरील कोटींग खराब होते. परिणामी केमिकलचा अन्नामध्ये समावेश होतो. नॉनस्टीक भांड्यावरील कोटींग कॅन्सरला कारणीभूत ठरू शकते.

2.जास्त वेळ पाय सोडून बसणे टाळावे.जास्त वेळ उभे राहावे. जास्त वेळ मांडी घालून बसावे.ज्यामुळे आपले मणके व सांधे चांगले राहतात ..

3.ऍलर्जीक सर्दी सर्वांत जास्त आढळून येणारा हा विकार आहे. सध्याचे वाढते प्रदूषण हे या विकाराच्या प्रमाणामध्ये भर टाकत आहे.

4.हिवाळा हा स्वभावतःच शीत हवामानाचा असतो. त्यामुळे शरीरातील संतुलन राखण्यासाठी उष्ण गुणात्मक आहाराचा समावेश हिवाळ्यामध्ये करणे गरजेचे असते.

5.विविध प्रकारच्या व्याधी दूर ठेवण्यासाठी प्रमाणबद्ध शरीर ठेवणे गरजेचे असते. वजन आटोक्यात ठेवले तर व्याधी आपसूक दूर राहतात.

6.आधुनिक जीवनपद्धती आणि चैनीच्या विविध वस्तू उपभोगताना आपल्याला तरुण वयातच मानदुखीला व कंबरदुखीला सुरुवात होते.

7.स्त्रीप्रजननसंस्थेत कुठेही सूज असली, जंतुसंसर्ग असला तरी त्यामुळे पाठदुखी, कंबरदुखी उद्भवू शकते. अर्थात अशा वेळी फक्‍त पाठीवर नाही तर आतील दोषावर नेमके उपचार करणे आवश्‍यक असते.

8.पनीर हा दुधाला फाटुन म्हणजे दुधात लिंबुरस आदी अम्ल पदार्थ (acids) टाकुन विशिष्ट पध्दतीने बनविला जाणारा पदार्थ आहे. फाटलेल्या दुधापासुन बनविला जात असल्याने हा विरूध्द पदार्थ (पचावयास कठीण) आहे.

9.गुळात नैसर्गिकता जास्त असल्यामुळे तो शरीराला हळूहळू आणि दीर्घ काळापर्यंत ऊर्जा देतो. गुळाने थकवा जाणवत नाही व स्नायू बळकट बनतात.

10.दुकानातून पदार्थ विकत घेताना त्यावरील लेबल्स नीट वाचल्यास तुम्हाला नक्की कळेल, की आपण विविध पदार्थांतून किती विविध स्वरूपात रसायनं शरीरात टाकत असतो.

11.जे लोक स्वत:बद्दल अती जागरूक असतात त्यांच्यामध्ये विशिष्ट आजारांविषयीचे समज-गैरसमज अधिक प्रमाणात बळावतात.

12.स्ट्रेस हा देखील कॉम्पुटर व्हायरसासारखा आहे. एखादी व्यक्ती जास्त काळासाठी सतत स्ट्रेस मध्ये असली की त्याचा मेंदू नको त्या विचारात गुंतल्यामुळे त्याचे कार्य व्यवस्थित होत नाही.

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29/01/2020




आलू का रस पीने के फायदे ..1.गठिया के रोग में आलू का जूस बेहद कारगर तरह से काम करता है। आलू के जूस को पीने से यूरिक एसिड ...
24/01/2020

आलू का रस पीने के फायदे ..
1.गठिया के रोग में आलू का जूस बेहद कारगर तरह से काम करता है। आलू के जूस को पीने से यूरिक एसिड शरीर से बाहर निकलता है। और गठिया की सूजन को कम करता है।
2.आलू का जूस मूत्राशय में कैल्शियम का पत्थर बनने नहीं देता।
3.किडनी की बिमारियों का इलाज करने के लिए आलू का जूस पीने की आदत डालें। यह ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रण में रखने में भी मदद करता है।
4.आलू का जूस जोड़ों के दर्द व सूजन को खत्म करता है। अर्थराइटिस से परेशान लोगों को दिन में दो बार आलू का जूस पीना चाहिए।
5.अगर आपको एसिडिटी की समस्या है तो आलू का रस काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके लिए इसके रस को रोजना आधा कप पिएं।
6.अगर आपके चेहरे में दाग, धब्बे और पिपंल है तो आलू का रस काफी फायदेमंद हो सकता है।
7.आलू का जूस आपके बढ़ते हुए वजन को घटा देता है। इसके लिए सुबह अपने नाश्ते से दो घंटे पहले आलू का जूस का सेवन करें।
8.आलू के जूस को पीने से आप आसानी से अपने कोलेस्ट्रोल के स्तर को नियंत्रण में रख सकते हैं।
9.ह्रदय की बिमारी और स्ट्रोक से बचने और इसे कम करने के लिए आलू सबसे अच्छा उपाय है।
10.लिवर और गॉल ब्लैडर की गंदगी को निकालने के लिए आलू का जूस काफी मददगार साबित होता है।
Guruji Naturopath
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योग क्या हैं ? ..योग कोई इलाज नही कि इसे बीमार व्यक्ति ही अपनाये। योग तो खुशमयी जीवन जीने की कला है।और ईश्वर कृपा से यदि...
05/01/2020

योग क्या हैं ? ..
योग कोई इलाज नही कि इसे बीमार व्यक्ति ही अपनाये। योग तो खुशमयी जीवन जीने की कला है।और ईश्वर कृपा से यदि आज हम स्वस्थ है तो भविष्य में भी स्वस्थ्य बने रहने हेतु योग अपनाना आवश्यक है, क्योंकि उम्र के साथ बीमारियाँ अक्सर आती ही है।
हमारे रूटीन वर्क का प्रभाव हमारे शरीर के सभी बाह्य और आंतरिक अंगों पर आ ही नही सकता। योग में चार अवस्थाओं में किये जाने वाले विभिन्न आसनो का शरीर के सारे बाह्य और आंतरिक अंगों पर बहुत ही सकारात्मक प्रभाव पड़ता है उनकी मसाज होती है, रक्त संचार प्रॉपर होता है जो मनुष्य के अच्छे स्वास्थ्य के लिए अतिआवश्यक है।
थकान होने पर या ज्यादा हार्डवर्क करने पर आई हुई थकान तो योगासन, प्राणायाम और ध्यान से पूरी तरह दूर हो जाती है। सारे अंगों, जोड़ों, मसल्स, लिगामेंट्स नस नाड़ियों पर आसनो से आयी हुई स्ट्रेचिंग, तनाव, दबाव से रिलैक्स होकर व्यक्ति तरोताज़ा हो जाता है। अतः थकान के दौरान अवश्य योग साधना करना चाहिए।
हिन्दू धर्म कभी नही कहता की योग का अनुसरण सिर्फ हिंदू ही करेंगे। योग तो सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन है। क्या सूर्य अपनी किरणे किसी धर्म विशेष के लोगों को ही प्रदान करता है? नही..इसी तरह योग प्रैक्टिस करने वाले को इसके पूर्ण स्वास्थ्य लाभ मिलेंगे।
वर्तमान युग में भौतिकतावाद के पीछे भागने वालों में बड़ी संख्या युवाओं की ही है। दुष्परिणामस्वरूप युवा तनावग्रस्त होकर कम उम्र में ही अनेकोनेक शारीरिक और मानसिक बिमारियों से ग्रस्त हो रहे है जिसका सबसे उत्तम *निदान योग* में ही है।
योग सिर्फ आसन ही नही वरन सम्पूर्ण लाइफ स्टाइल है। आसन तो योग का एक अंग है। योग सिर्फ एक घण्टे करने की विषय वस्तु न होकर हर पल योगी बने रह सकने की कला है। अपने मन, चित्त, विचारों, श्वसन आदि को नियंत्रण में रख सदा वर्तमान में जीना सिखाता है, योग।

कढ़ी पत्ता ..मीठा नीम..इसे मीठी नीम इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनके पत्ते नीम की तुलना में थोड़े कम कड़वे, कषैले होते हैं। क...
05/01/2020

कढ़ी पत्ता ..मीठा नीम..
इसे मीठी नीम इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनके पत्ते नीम की तुलना में थोड़े कम कड़वे, कषैले होते हैं। करी पत्ता के पेड़ पूरे भारत वर्ष में पाए जाते हैं। अत्यन्त प्राचीन काल से भारत में मीठे नीम का उपयोग किया जा रहा है |
करी पत्ता में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन B-1, विटामिन B-2, विटामिन C - (सी) जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. करी पत्ते में
#एंटी-डायबिटिक #एंटी-ओक्सिडेंट #एंटी-माइक्रोबियल गुण पाए जाते है।
अतः जब आप करी पत्ता डले हुए फ़ूड आइटम को खाएं तो पत्तियाँ अलग करके फेंकने की बजाय खाया करें।
करी पत्ता के #घरेलू उपयोग
1.चेहरे के स्किन की समस्या जैसे मुहांसे, रूखापन, दाग-धब्बे, फाइन लाइन दूर करने के लिए करी पत्ता का फेसपैक लगायें।
2.करी पत्ता का फेसपैक सूखी करी पत्ती पीसकर, गुलाबजल, मुल्तानी मिट्टी, नारियल तेल मिलाकर बनाया जाता है।
3.शरीर में हानिकारक कोलेस्ट्रोल लेवल को करी पत्ता संतुलित रखता है। जिससे ह्रदय सम्बन्धी बीमरियों से बचाव होता है।
4.करी पत्ता इन्सुलिन लेवल कण्ट्रोल करके ब्लड शुगर स्तर काबू करता है।
5.करी पत्ता (करी लीफ) नेत्र ज्योति बढ़ाता है, मोतियाबिंद होने की सम्भावना कम करता है।
6.करी पत्ते का रस कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम करता है।
7.करी पत्ता किडनी और लीवर पर बहुत अच्छा असर डालता है।
8.रक्ताल्पता के रोगी को करी पत्ता का भरपूर सेवन करना चाहिए।
9.एनीमिया रोग के इलाज के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण तत्व आयरन व फोलिक एसिड करी पत्ता में पाए जाते हैं।
10.करी पत्ता इन्सुलिन लेवल कण्ट्रोल करके ब्लड शुगर स्तर काबू करता है.

ओम का उच्चारण ..मन पर नियन्त्रण करके शब्दों का उच्चारण करने की क्रिया को मन्त्र कहते है। मन्त्र विज्ञान का सबसे ज्यादा प...
04/01/2020

ओम का उच्चारण ..
मन पर नियन्त्रण करके शब्दों का उच्चारण करने की क्रिया को मन्त्र कहते है। मन्त्र विज्ञान का सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे मन व तन पर पड़ता है। मन्त्र का जाप एक मानसिक क्रिया है। कहा जाता है कि जैसा रहेगा मन वैसा रहेगा तन। यानि यदि हम मानसिक रूप से स्वस्थ्य है तो हमारा शरीर भी स्वस्थ्य रहेगा।
ओम शब्द के नियमित उच्चारण मात्र से शरीर में मौजूद आत्मा जागृत हो जाती है और रोग एवं तनाव से मुक्ति मिलती है।

1. अनेक बार ओ३म् का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनावरहित हो जाता है।

2. अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ओ३म् के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं!

3. यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।

4. यह हृदय और खून के प्रवाह को संतुलित रखता है।

5. इससे पाचन शक्ति तेज होती है।

6. इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।

7. थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

8. नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है. रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चित नींद आएगी।

9.कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मजबूती आती है.

पित्ती उछलने के सरल उपचार...1.पित्ती की बीमारी को जड़ से नष्ट करने के लिए रोगी गेहूँ के आटा दो चम्मच , एक चम्मच हल्दी और ...
03/01/2020

पित्ती उछलने के सरल उपचार...
1.पित्ती की बीमारी को जड़ से नष्ट करने के लिए रोगी गेहूँ के आटा दो चम्मच , एक चम्मच हल्दी और थोड़ा सा घी मिलाकर इसका हलुआ तैयार कर ले । इस तैयार हलुए को ठंडा करने के बाद खाए और इसके बाद गर्म दूध पी ले ।
2.एक चम्मच त्रिफला चूर्ण शहद में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करें|
3.10 ग्राम गुड़ में एक चम्मच अजवायन तथा 10 दाने पीपरमेंट मिलाकर सेवन करें|
4.अजवाइन का चूर्ण और गुड़ समान मात्रा में लेकर 6-6 ग्राम की गोलियां बना लें प्रातः सायं एक- एक गोली पानी के साथ लेने से लाभ होता है।
5.बेसन के लड्डू में काली मिर्च मिलाकर खाने से पित्ती शांत होती है।
6.पित्ती रोगियों को हल्दी , मिश्री और शहद इन तीनों को मिलाकर रात को खाने से पित्ती की शिकायत दूर हो जाती है ।
7.आंवले के चूर्ण में गुड़ मिलाकर खाने से गरमी के कारण उछली पित्ती ठीक हो जाती है|
8.नारियल के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करें|
9.भोजन के बाद 6 माशा हरिद्राखण्ड को दूध के साथ सेवन करें|
चिकित्सक सलाह अवश्य लें ..

आधुनिक जीवनशैली के बीच मिट्टी के बर्तन धीरे-धीरे चलन से बाहर हो गए. लेकिन पिछले कुछ सालों से मिट्टी का तवा मेट्रो सिटीज ...
02/01/2020

आधुनिक जीवनशैली के बीच मिट्टी के बर्तन धीरे-धीरे चलन से बाहर हो गए. लेकिन पिछले कुछ सालों से मिट्टी का तवा मेट्रो सिटीज के साथ ही छोटे शहरी घरों में भी देखने को मिल रहा है. पुराने लोग आज भी कहते हैं कि मिट्टी के बर्तन में बना खाना खाने से कई तरह के फायदे मिलते हैं

आयुर्वेद में कहा गया है कि खाने को आग के ऊपर धीरे-धीरे पकना चाहिए. लेकिन स्टील और एल्युमिनियम के बर्तन में यह संभव नहीं हो पाता. इनमें खाना तेजी से पकता है. जबकि मिट्टी के बर्तन में खाना हल्की आंच पर बनाया जाता है. इससे खाना स्वादिष्ट और पौष्टिक बनता है।

प्राणायाम से आयु में वृद्धि...गहरी सांस लेने से अधिक मात्रा में आक्सीजन हमारे खून में बहती है हृदय इस खून को रक्त वाहिनि...
28/12/2019

प्राणायाम से आयु में वृद्धि...
गहरी सांस लेने से अधिक मात्रा में आक्सीजन हमारे खून में बहती है हृदय इस खून को रक्त वाहिनियों (Blood Vessels) के द्वारा पूरे शरीर की प्रत्येक कोशिका (Cell) को पहुंचाता है | इससे पूरे शरीर में खून के साथ आक्सीजन (प्राण वायु) अधिक बहती है जिसके सेल्स का क्षय (Decay) बहुत कम हो जाता है जो कि आयु बढ़ाने का मुख्य कारण है |
उदाहरण के तौर पर कछुवा 1 मिनट में 4-5 बार सांस लेता है और 200 साल या उससे अधिक जीता है | जबकि मनुष्य 1 मिनट में 15-16 बार सांस लेता है लगभग 100 साल तक जीता है |
प्राणायाम से शरीर के सभी अंग अधिक आक्सीजन पाते है इसलिए शरीर से सभी विषैले पदार्थ (toxins) बाहर निकल जाते हैं | इस वजह से जो रोग आपको होने वाले होते हैं वह कभी नहीं होते | प्राणायाम से पूरे शरीर प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) बढ़ती है जो कि शरीर को रोगों से बचाता है |

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