Idea and Solution Factory -IAS factory

Idea and Solution Factory -IAS factory IAS factory अर्थात idea and solution factory एक ग्रुप है

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं
21/06/2021

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं

केवल 3 चीजे ही मुफ्त होनी चाहिएचिकित्सा, शिक्षा, और न्यायइसके अलावा बाकी मुफ्त चीजे व्यक्ति,समाज और राष्ट्र को अपाहिज बन...
10/06/2021

केवल 3 चीजे ही मुफ्त होनी चाहिए
चिकित्सा, शिक्षा, और न्याय
इसके अलावा बाकी मुफ्त चीजे व्यक्ति,समाज और राष्ट्र को अपाहिज बनाती है🇮🇳

04/06/2021

ज्योतिष शास्त्र भविष्य दर्शन की आध्यात्मिक विद्या है। भारतवर्ष में चिकित्साशास्त्र (आयुर्वेद) का ज्योतिष से बहुत गहरा संबंध है। जन्मकुण्डली व्यक्ति के जन्म के समय ब्रrााण्ड में स्थित ग्रह नक्षत्रों का मानचित्र होती है, जिसका अध्ययन कर जन्म के समय ही यह बताया जा सकता है कि अमुक व्यक्ति को उसके जीवन में कौन-कौन से रोग होंगे। चिकित्सा शास्त्र व्यक्ति को रोग होने के पश्चात रोग के प्रकार का आभास देता है। आयुर्वेद शास्त्र में अनिष्ट ग्रहों का विचार कर रोग का उपचार विभिन्न रत्नों का उपयोग और रत्नों की भस्म का प्रयोग कर किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रोगों की उत्पत्ति अनिष्ट ग्रहों के प्रभाव से एवं पूर्वजन्म के अवांछित संचित कर्मो के प्रभाव से बताई गई है। अनिष्ट ग्रहों के निवारण के लिए पूजा, पाठ, मंत्र जाप, यंत्र धारण, विभिन्न प्रकार के दान एवं रत्न धारण आदि साधन ज्योतिष शासत्र में उल्लेखित है।
ग्रहों के अनिष्ट प्रभाव दूर करने के लिये रत्न धारण करने की परिपाटी निरर्थक नहीं है। इसके पीछे विज्ञान का रहस्य छिपा है और पूजा विधान भी विज्ञान सम्मत है। ध्वनि तरंगों का प्रभाव और उनका वैज्ञानिक उपयोग अब हमारे लिये रहस्यमय नहीं है। इस पर पर्याप्त शोध किया जा चुका है और किया जा रहा है। आज के भौतिक और औद्योगिक युग में तरह-तरह के रोगों का विकास हुआ है। रक्तचाप, डायबिटीज, कैंसर, ह्वदय रोग, एलर्जी, अस्थमा, माईग्रेन आदि औद्योगिक युक की देन है। इसके अतिरिक्त भी कई बीमारियां हैं, जिनकी न तो चिकित्सा शाçस्त्रयों को जानकारी है और न उनका उपचार ही सम्भव हो सका है। ज्योतिष शास्त्र में बारह राशियां और नवग्रह अपनी प्रकृति एवं गुणों के आधार पर व्यक्ति के अंगों और बीमारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
जन्मकुण्डली में छठा भाव बीमारी और अष्टम भाव मृत्यु और उसके कारणों पर प्रकाश डालते हैं। बीमारी पर उपचारार्थ व्यय भी करना होता है, उसका विचार जन्मकुण्डली के द्वादश भाव से किया जाता है। इन भावों में स्थित ग्रह और इन भावों पर दृष्टि डालने वाले ग्रह व्यक्ति को अपनी महादशा, अंतर्दशा और गोचर में विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न करते हैं। अनुभव पर आधारित जन्मकुण्डली में स्थित ग्रहों से उत्पन्न होने वाले रोगों का वर्णन किया जा रहा है। इन बीमारियों का कुण्डली से अध्ययन करके पूर्वानुमान लगाकर अनुकूल रत्न धारण करने, ग्रहशांति कराने एवं मंत्र आदि का जाप करने से बचा जा सकता है।

29/05/2021

*बाबा रामदेव और एलोपैथी के किसी भी उनके हमउम्र डॉक्टर दोनों के बीच में एक कुश्ती हो जानी चाहिए जिससे पता चल सके कि ताकतवर आयुर्वेदाचार्य होता है या एलोपैथिक का डॉक्टर*
🤣🤣🚩🚩

28/05/2021

स्वागत है आप सभी का।🙏

इस पेज का मुख्य उद्देश्य आपको आपके सेवा संस्थान सनातन शिक्षा एवं पुरातन चिकित्सा पद्धति रिसर्च फाउंडेशन के उद्देश्य ,गतिविधियों और आगामी कार्ययोजना से अवगत करवाया जाना है।

आशा है कि आपका सहयोग मिलेगा

संगठन के 8 मुख्य कार्यक्षेत्र है

स्वास्थ्य ,शिक्षा ,ज्योतिष , आध्यात्मिक उन्नति ,पर्यावरण ,कृषि ,रोजगार और समाज सेवा ।

Address

Raipur

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Idea and Solution Factory -IAS factory posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Share on Facebook Share on Twitter Share on LinkedIn
Share on Pinterest Share on Reddit Share via Email
Share on WhatsApp Share on Instagram Share on Telegram