27/08/2019
*_-----बहरापन, कान से कम सुनाई देना ------_*
👦🏻👧🏻(1)👉🏿परिचय --------👇�👇�👇�👇�👇�👇�👇�
🌹(1)----- सुनाई देना कम हो जाना या बिल्कुल भी सुनाई न देना ही बहरापन कहलाता है। यह रोग किसी प्रकार की गम्भीर बीमारी के हो जाने के बाद, चोट लगने के कारण या किसी औषधि के दुष्प्रभाव के कारण अधिकतर होता है ।
🌹(2)----- मालूम हो कि कान शरीर का बेहद संवेदनशील अंग है। इसलिए इसके साथ छेड़छाड़ व्यक्ति के लिए और गंभीर परेशानियां खड़ी कर देती हैं। कान का परदा बहुत नाजुक होता है, और इसके साथ ज्यादा लापरवाही बहरेपन का कारण बन सकती है। इसलिए इस ठंड में जररूरत है आपको कान के प्रति ज्यादा सजग रहने की। कुछ साधारण बातों को ध्यान में रखकर आप सही वक्त पर सही इलाज करवा सकते हैं।
👦🏻👧🏻(2)👉🏿कारण-----👇�👇�👇�👇�👇�👇�👇�👇
🌹(1)------ यह शरीर की कमजोरी या नसों की खराबी के कारण होता है। कान में बहुत तेज आवाज पहुंचना, सर्दी लगना, सिर में या दिमाग में चोट लगना, नसों की कमजोरी, नहाते समय कान के बिल्कुल अन्दर तक पानी का चले जाना, कान के अन्दर बहुत ज्यादा मैल का जमा हो जाना, कान का बहना, दिमाग या गले की बीमारी, लकवा, टाइफाइड, मलेरिया, जुकाम का बार-बार होना आदि कारणों से यह रोग हो सकता है।
👦🏻👧🏻(3)👉🏿लक्षण-------👇�👇�👇�👇�👇�👇�👇�👇�
🌹(1)----- इस रोग से पीड़ित रोगी को कम सुनाई देता है या कभी-कभी उसका कान भी बन्द हो जाता है। बहरेपन के कारण कान में अजीब-अजीब सी आवाजें सुनाई देती हैं। कभी-कभी आवाज रुक-रुककर सुनाई देती है और कई बार रोगी के कानों के पास जाकर कोई चीखता-चिल्लाता रहे तो भी उसे कुछ सुनाई नहीं देता ।
🌹(2)---- अगर कान के परदे का छिद्र बड़ा हो, कभी-कभी कान से खून बहता हो ।
🌹(3)----- कान में खुजली होती हो, दर्द होता हो ।
🌹(4)----- कान की समस्या के चलते चक्कर आते हों, या कान में कुछ आवाजें आती हों, तो ।
🌹(5)----- तुरंत चिकित्सक के पास जाएं और चिकित्सक द्वारा बताई गई उपचार पद्धति अपनाएं। खून और मूत्र की जांच समेत कान का ऑडियोग्राम कराना चाहिए। ऑडियोग्राम कान की सुनने की शक्ति की पहचान करनेवाली एक वैज्ञानिक पद्धति है। इससे कान की स्थिति की समस्त जानकारी हो जाती है।
🌹(6)------ बहरे हो जाएंगे और पता भी नहीं चलेगा ।
🌹(7)------ यूं तो कान से जुड़ी बीमारी का उम्र से कोई विशेष संबंध नहीं है, क्योंकि यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। फिर भी 50 वर्ष की उम्र से अधिक व्यक्तियों में कान से जुड़ी समस्याएं बड़े पैमाने पर देखने को मिलती हैं। इसलिए ठंड में बुजुर्गों को कान के प्रति ज्यादा सजग रहना चाहिए।
👨🏻👩🏻(4)👉🏿भोजन और परहेज-------👇�👇�👇�👇�👇�👇�👇�👇
🌹(1)-----कान में तिल्ली या कुछ और चीज डालकर कान को खुजलाना नहीं चाहिए।
🌹(2)----सुबह उठने के बाद पानी में नींबू निचोड़कर पीना चाहिए इससे लाभ मिलता है।
🌹(3)----- धूप में ज्यादा देर तक काम नहीं करना चाहिए।
🌹(4)----- सिर में तिल्ली का तेल या ब्राही आंवला का तेल लगाना चाहिए।
🌹(5)----- भोजन में गर्म मसालों का प्रयोग न करें।
🌹(6)------सुबह जल्दी उठकर ताजी हवा में सैर करने के लिए जाना चाहिए।
👦🏻👧🏻(5)👉🏿सावधानी-------👇�👇�👇�👇�👇�👇�👇�👇�👇�
🌹(1)----- स्नान करते समय ध्यान रखना चाहिए कि साबुन या पानी कान में न जा पाए क्योंकि इससे भी बहरापन हो सकता है।
🌹(2)----- कान में तेल भी नहीं जाना चाहिए क्योंकि कान में जो सुनने के पर्दे होते हैं वे बहुत ही नाजुक होते हैं और कान में कुछ जाने की वजह से उनके खराब होने की आशंका ज्यादा रहती है।
🌹(3)---- जिस नदी या तालाब में जानवर नहाते हों उसके अन्दर छोटे बच्चों को या बड़ों को नहाना नहीं चाहिए।
🌹(4)---- टी.वी या गानों को तेज आवाज में नहीं सुनना चाहिए क्योंकि इससे कानों की नसों पर असर पड़ता है।
🌹(5)---- कानों की नसें खराब होने पर यह रोग ठीक होना मुश्किल हो जाता है।
🌹(6)---- कानों में किसी भी तरह के रोग होने पर इलाज में देरी ना करें, क्योंकि वक्त पर इलाज होने से यह रोग बिल्कुल खत्म हो सकता है ।
🌹(7)----- माचिस की तीली, पिन या अन्य कोई वस्तु कान में न डालें।
🌹(8)----- कान में पानी या धूल-मिट्टी के कण न जाएं, इसका पूरा ध्यान रखें।
🌹(9)----- ठंड में बाहर निकलते समय कान ढक कर निकलें।
🌹(10)----- कान से जुड़ी समस्याओं को अनदेखा करने पर कान में दर्द, बहरापन और कान बहने जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
🌹(11)----- कानों को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से बचना चाहिए।
👦🏻👧🏻(6)👉🏿विभिन्न औषधियों से उपचार-----👇�👇�👇�👇�👇�👇�👇�
🌹(1)----- 10 ग्राम पानी में 2 ग्राम गुड़ और 2 ग्राम शुंठी के चूर्ण को अच्छी तरह मिलाकर कान में बूंद-बूंद करके डालने से बहरापन कम हो जाता है।
🌹(2)-----5 ग्राम सौंफ को 250 मिलीलीटर पानी में उबाल लें। जब उबलने पर पानी करीब चौथाई हिस्सा बाकी रह जाये तो इसे 10 ग्राम घी और 200 मिलीलीटर गाय के दूध में मिलाकर पीने से बहरेपन का रोग कुछ समय में समाप्त होने लगता है।
🌹(3)----- बेल के पत्तों का तेल, काली मिर्च, सोंठ, पीपल, पीपलामूल, कूट, बेल की जड़ का रस और गाय के पेशाब को बराबर मात्रा में लेकर हल्की आग पर पकाने के लिये रख दें। फिर इसे छानकर किसी शीशी में भर लें। इस तेल को `बधिरता हर तेल कहते हैं। इस तेल को कान में डालने से कान के सभी रोग दूर हो जाते हैं।
🌹(4)-----बेल के पके हुये बीजों का तेल निकालकर बूंद-बूंद करके कान में डालने से बहरापन समाप्त हो जाता है।
🌹(5)-----बेल के कोमल पत्ते स्वस्थ्य गाय के पेशाब में पीसकर 4 गुना तिल के तेल और 16 गुना बकरी का दूध मिलाकर धीमी आग में पकाएं। इसके बाद इसे ठंड़ा करके लें। इस तेल को रोजाना कानों में डालने से बहरापन, सनसनाहट (कर्णनाद), कानों की खुश्की और खुजली दूर हो जाती है।
🌹(6)------500 मिलीलीटर काकजंघा का रस लेकर 250 मिलीलीटर तेल में डालकर पकाने के लिये रख दें। जब पकते हुये तेल बाकी रह जाये तो उसे छानकर सुबह और शाम बूंद-बूंद करके कान में डालने से बहरापन दूर होता है।
🌹(7)------ काकजंघा के पत्तों के रस को गर्म करके बूंद-बूंद कान में डालने से बहरेपन के रोग में लाभ मिलता है।
🌹(8)------ धतूरे के पीले पत्तों को हल्का-सा गर्म करके उसका रस निकालकर 2-2 बूंदे करके कान में डालने से बहरापन ठीक हो जाता है।
🌹(9)----- धतूरे का पीला पत्ता (बिना छेद वाला) को गर्म करके उसका रस निकाल लें। इस रस को 15 दिन तक सुबह-शाम कान में डालने से बहरापन ठीक हो जाता है।
🌹(10)----- सफेद मूसली और बाकुची को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस 3 ग्राम चूर्ण को दूध के साथ सुबह और शाम खाने से बहरापन ठीक हो जाता है।
🌹(11)----- दालचीनी के तेल को बूंद-बूंद करके सुबह और शाम कान में डालने से बहरापन खत्म हो जाता है।
🌹(12)------ जबाद कस्तूरी : जबाद कस्तूरी को बादाम के तेल के साथ पीसकर कान में डालने से धीरे-धीरे बहरापन दूर हो जाता है और सुनने की शक्ति बढ़ती है।
🌹(13)----- कड़वे बादाम के तेल को गुनगुना करके रोजाना सुबह और शाम कान में बूंद-बूंद करके डालने से बहरापन ठीक हो जाता है।
🌹(14)----- 100 मिलीलीटर बादाम के तेल में लहसुन की 10 कलियों को डालकर पका लें। जब पकने पर लहसुन की कलियां जल जायें तो इस तेल को छानकर कान में बूंद-बूंद करके डालने से बहरापन दूर होने लगता है