17/10/2025
"मेरे मालिक ने, मिरे हक़ में, यह अहसान किया
ख़ाक़-ए-नाचीज़ था मैं, सो मुझे इंसान किया” ~ मीर नक़ी मीर
*एक अनुभव एक सच्ची घटना*
शायर की यह बात नवोदय के लिए बहुत सही है। जिस नवोदय संस्कृति ने हम सबको बनाया।
कल 16oct को कवर्धा जिले CG में 2 सेमिनार हुवे।
एक राज्य के बहूप्रतिष्ठित (पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह जी की माता जी की पुण्य स्मृति में स्थापित) अभ्युदय विद्यालय में
और पूरे भारत के सबसे शानदार अधोसंरचना वाले,और छत्तीसगढ़ राज्य के इकलौते Govt's PN College of Fisheries में।
बड़ी बात यह नही।
बड़ी बात यह है कि
दोनो संस्थानों के के प्रमुख आयोजन कर्ता हमारे नवोदय के 4थी बैच के जूनियर थे करीब 30 सालों से मुलाकात नहीं हुई थी पर 30 साल बाद भी नवोदयन का नवोदयन पर भरोसा कायम था ..
अभ्युदय विद्यालय के प्राचार्य श्री तोरण साहू है, उन्होंने किशोर किशरियो के लिए " एडोलिसेंस एजुकेशन "जैसे विषय पर,सामयिक~ सामाजिक आवश्यकता को पहचान कर एक बहुत साहसी कदम उठाया,सम्भवतः अपनी तरह से राज्य में पहला।
फिशरी कॉलेज में कोई प्रोग्राम पहले से प्लान नहीं था पर जब हमारे जूनियर डॉ दुष्यंत दामले को यह पता चला तो उन्होंने तुरंत एक्शन ले कर अपने कॉलेज के छात्रों और स्टाफ के लिए सेमिनार आयोजित कर डाला। (अपने सीनियर को इमोशनली हाईजैक किया :-)
अप्रत्याशित दिक्कतें भी बहुत आयी, पर मुश्किलों में भी, कबाड़ में जुगाड़ निकाल लेना नवोदेरियन की स्पेशलिटी है।
बात बड़ी विश्वास की है जो एक नवोडेरियन दूसरे पर करता है।
और बड़ी बात यह थी कि दोनो जूनियर ने,( जो बहुत सी जिम्मेदारीयो के साथ है) पब्लिकली अपने सीनियर को जो सम्मान दिया सभी छात्रों के सामने, वह उनके छात्रों के लिए मिसाल बना। आचरण ही प्रमाण है,शिक्षा है।
2025, अब जब नवोदय के छात्रों के बैचों के बीच भी एक लंबा जेनरेशन गैप आ रहा है तब नवोदय की अच्छी बातें ,आपसी संवाद अच्छीसंस्कृति सदैव कायम रहे यही मनोकामना है।
जय नवोदय🙏🏻🙏🏻
सुयश ठाकुर
1989-96JNVD