19/11/2017
दीवाली के झालर से ले कर खंबे का ट्यूबलाइट मैं बदलू, और ज़माने भर की लाइम लाइट केवल वुमेन्स डे लूट जाए।
मैं अपने अधिकार भूल जाऊ ये हो नही सकता, और तुम मेरे अधिकार की धनिया कर दो ये मैं होने नही दूँगा। सुनील शेट्टी की आवाज़ में कुछ ऐसे ही शब्दों की ज़रूरत है आज के दिनों में जब पुरुष अधिकार का कुछ अता पता ही नही है, जब कोई महिला चाहे किसी भी पुरुष को अपने अधिकारों के नीचे दबा बैठती है। कोई मुह बनाने की ज़रूरत नही है, ऐसा होता है इसीलिए बोल रहे है, नही होता तो हमे बोलना ही नही पड़ता। कुछ पुराने आंकड़े उठाये तो दिल्ली महिला आयोग की ओर से 50 फीसदी ऐसे रेप केस सामने आए थे, जिसमे महिलाओं की ओर से झूठे आरोप लगाए गए थे, वही दहेज प्रताड़ना में भी ऐसा ही कुछ हाल है। बात करे छत्तीसगढ़ की तो पत्नी प्रताड़ना के मामले में प्रदेश दूसरे नम्बर पर है।
अगर झूठे केस का आंकड़ा ऐसे ही बढ़ता रहा तो आप महिलाओं के लिए भी ये कोई अच्छी खबर नही, क्योंकि जब आपको न्याय की ज़रूरत होगी तब लोग आपको संदेह की नज़र से देखेंगे की आपने भी झूठा केस तो नही किया, “ वो कहानी तो आपको याद ही होगी,जब चरवाहा रोज़ गांव में हल्ला करता था शेर आया शेर आया, और इस झूठ से गांव वाले परेशान हो चुके थे, पर एक दिन जब सच मे शेर आया, चरवाहे ने फिर हल्ला किया पर उस दिन उसे बचाने कोई नही आया।
आज फेमिनिस्म के नाम पर कुछ लोग बड़ी चढ़ाई करने निकल जाते है, अरे पहले उसका अर्थ तो समझ लीजिए, फेमिनिस्म एक ऐसे संघर्ष की लड़ाई जहा लिंग भेद भाव की कोई जगह नही, और जहाँ किसी का अधिकार छोटा या बड़ा नही है। आज मेन्स डे है आज ना कोई व्हाट्सएप मेसज घूम रहा है ना फेसबुक या ट्विटर पर इस दिन को ले कर वुमेन्स डे की तरह कोई पोस्ट की बाढ़ आई है। बड़ी बड़ी कंपनियां वुमेन्स डे पर शॉपिंग डिस्काउंट देती है, रेस्टोरेंट पर खाना सस्ता कर दिया जाता है। वुमेन्स डे की सुबह से लोग आपको विश करते है, जहाँ 50-50 फिट के पोस्टर लगाए जाते है महिलाओ के सम्मान में, न्यूज़ पेपर का फ्रंट पेज उनके लिए आरक्षित होता है वही आज के दिन न्यूज़ पेपर में भव्य प्लॉट मेले का विज्ञापन चिपकाया गया है।
आज मेंस डे तो है ही, और साथ मे संडे भी है आफिस की छुट्टी, आज हम फिर घर का पंखा साफ करते हुए पाये जायंगे, शाम को ट्रैफिक सिंग्नल पर हमको ही पकड़ा जाएगा, डिस्को में फिर हमें अकेले एंट्री नही दी जाएगी, इंटरनेट पर ऐसे वीडियो और ऐसे स्लोगन वायरल चलते है जिनमे दिखाया जाता है, की अपनी बेटी को बाहर जाने से मत रोकिए उसे कपड़ो की समझ मत समझाइए, बल्कि अपने लड़के को सही व्यवहार करना सिखाये, लड़कियों की इज़्ज़त करना सीखाएं अरे भाई क्यों बस लड़कियों की इज़्ज़त करना सीखाए, सीखना है तो सही इंसान की इज़्ज़त करना सीखो। सिर्फ एक विशेष लिंग की भीड़ को ही अलग से तव्वजो देना कहाँ से सही बात है।
हम मानते है कि देश मे आज भी बहुत सी महिलाओं को उनका अधिकार प्राप्त नही हुआ है, हमारा पूरा सहयोग होगा की हम उनका अधिकार उन तक पहुँचा सके, पर जिन्हें अपने अधिकारों का ज्ञान है वो कम से कम उनका गलत उपयोग तो ना करे, बहुत मेहरबानी होगी। कदम से कदम मिलाने का यह मतलब तो नही होता कि हम रेस लगाए, की पुरुष आगे या महिला। महिलाओं के हक़ के लिये ज़रूर लड़ो पर पुरूषो के हक़ को मत छीनो।
अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस की शुभकामनाएं।