102 Gvk Emri mahatari exprss c.g.

102 Gvk Emri mahatari exprss c.g. providing ambulence for neonetal.....pregnant woman & sick children under 1 year bebys

17/12/2023

रायपुर। गुरुवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा लिए स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को चुस्त दुरुस्त करने के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। इसमें उन्होंने आपतकालीन एम्बुलेंस सेवा 108 संजीवनी एक्सप्रेस का जिक्र कर 30 मिनट के रिस्पांस टाइम में घटना स्थल पर पहुँचने की बात की। इस संदर्भ में जब टीआरपी ने पड़ताल की तो यह बात निकलकर आ रही है कि बढ़ते हादसों और आबादी के हिसाब से एम्बुलेंस की संख्या नाकाफ़ी है। वर्तमान में 108 संजीवनी एक्सप्रेस की कुल संख्या 300 है। जबकि गाड़ियों की संख्या बढ़ाये जाने की अत्यंत आवश्यकता है।
108 एम्बुलेंस के रिस्पॉस टाइम में असर
एक ओर जहां गर्भवती महिलाओं के लिए महतारी एक्सप्रेय के रूप में 380 एम्बुलेंस है। वहीं पूरे छत्तीसगढ़ में आपातकालीन के लिए महज 300 एम्बुलेंस मात्र बस है। यहां पर गौर करने वाली बात यह है कि 108 संजीवनी एक्सप्रेस आपतकालीन सेवा की 100 प्रतिशत केस को हैंडल करने के साथ ही अधिकांश मामलों में गर्भवती महिलाओं को भी सेवा दे रही है। खास यह है कि 380 नई एम्बुलेंस होने के बावजूद अब 102 के नोडल अधिकारी डॉ कमलेश जैन द्वारा गर्भवती महिलाओं को हॉस्पिटल से हायर सेंटर रिफर करने के लिए नया आदेश जारी कर दिया गया है। जबकि पूर्व में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को यह सेवा 108 द्वारा दिया जा रहा था। जिसके चलते 108 एम्बुलेंस के रिस्पॉस टाइम में असर पड़ रहा है।
अधिकांश एम्बुलेंस का इस्तेमाल
108 संजीवनी एक्सप्रेस का उपयोग घायलों और मरीजों को सेवा देने के साथ ही बड़ी संख्या में हॉस्पिटल आने वाले घायलों और मरीजों को हायर सेंटर रिफर करने में भी किया जा रहा है। एम्बुलेंस रिफर केस में बिजी होने के कारण दूसरी दूसरी लोकेशन से एम्बुलेंस मंगानी पड़ती है, जिसके चलते अधिक समय लगता है।
एम्बुलेंस बढ़ाने का अनुरोध कर चुके हैं संचालक
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 108 संजीवनी एक्सप्रेस का संचालन करने वाली संस्था बढ़ते केसेस को देखते हुए डेटा के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के समक्ष 10 से अधिक बार एम्बुलेंस बढ़ाने के लिए अनुरोध कर चुकी है। लेकिन गाड़ियां बढ़ाने के बजाए फ़ाइल केवल अधिकारियों के टेबल में ही घूमती रही।

17/12/2023

बस्तर संभाग के उन क्षेत्रों के लिए जहा संसाधनों व सुविधाओं की कमी है। ऐसे ग्रामीण अंचलों में 102 महतारी एक्सप्रेस वाहन गर्भवती महिलाओं के लिए संजीवनी साबित हो रही है। शहर से लेकर गांव तक महतारी और संजीवनी वाहन गर्भवती को घर पहुंच सेवा दे रही है। बीते 5 सालों में महतारी एक्सप्रेस वाहन से अब तक 5 लाख 90 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं का शिशुओं को सुविधा व सेवा प्रदान की गई है।

अब तक 5 लाख 90 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं को इस सेवा का लाभ मिल चुका

102 महतारी एक्सप्रेस के इंचार्ज संतोष ने जानकारी देते हुए बताया कि सन् 2013 में महतारी एक्सप्रेस योजना की शुरुआत की गई थी। जिसके बाद से बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और पहुंच विभिन्न मार्गों में भी महतारी एक्सप्रेस के द्वारा गर्भवती महिलाओं को सफलतापूर्वक अस्पताल पहुंचाया गया और कई बार गंभीर कोशिश में टीम द्वारा वहीं पर ऑपरेशन किया गया। इंचार्ज ने बताया कि बस्तर संभाग में कुल 74 महतारी एक्सप्रेस वाहन अपनी सेवा दे रही हैं। खासकर बीजापुर दंतेवाड़ा सुकमा और नारायणपुर जैसे अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र में भी महतारी एक्सप्रेस गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान साबित हुआ है। संतोष ने जानकारी देते हुए बताया कि सन् 2013 से लेकर अब तक 5 लाख 90 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं को इस सेवा का लाभ मिल चुका है। हालांकि कमजोर मोबाइल नेटवर्क की वजह से घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में महतारी एक्सप्रेस समय पर नहीं पहुंच पाती है, लेकिन उन हालातों में भी टीम की कोशिश यही रहती है कि ज्यादा से ज्यादा गर्भवती महिलाओं को इसका लाभ मिल पाए।

नाजुक हालातों पर पहली प्राथमिकता मां और बच्चे को बचाने का होता है

इसके अलावा महतारी एक्सप्रेस के कर्मचारियों ने बताया कि कई बार ऐसे हालात भी देखने को मिलते हैं जब गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने की हालात नहीं होती तो ऐसे समय पर ग्रामीणों की मदद से उस स्थल पर सफलतापूर्वक प्रसव कराने की कोशिश की जाती है। कई बार महिलाओं को सामान्य प्रसव भी कराया गया है।

कर्मचारियों ने कहा कि कई बार नाजुक हालातों पर उनकी पहली प्राथमिकता मां और फिर उसके बच्चे दोनों को बचाने का होता है। ठंड और बारिश के मौसम में भी टीम का प्रयास यही रहता है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक समय पर पहुंचा जा सके और इस योजना का लाभ बस्तर के ग्रामीण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले महिलाओं को मिल सके।

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29/05/2023

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27/06/2022

डोंगरगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संचालित G.V.K. EMRI कंपनी की आपातकालीन सेवा देने वाली 102 महतारी एक्सप्रेस कर्मचारियों द्वारा गर्भवती महिलाओं को लाने व लेजाने के नाम पर फर्जी ट्रीप डालकर सरकार को चुना लगा रहे है। डोंगरगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले आसपास के सभी गांव से ए.एन.सी. चेकअप के लिए जिन महिलाओं को महतारी एक्स्प्रेस 102 मे लाया जाता है। वह एक ट्रीप में 6 से 7 महिलाओं को एक साथ एक ही समय पर 102 (महतारी एक्स्प्रेस) गाड़ी से लाया जाता है साथ ही ए.एन.सी. जांच के बाद एक साथ उन्हे उनके गाँव मे छोड़ दिया जाता है। जिसका शासकीय नियमानुसार दो ट्रीप माना जाता है। जबकि इसके ठीक विपरीत अपनी निजी स्वार्थ के लिए डोंगरगढ़ के कर्मचारियों द्वारा इसे अलग-अलग ट्रीप बनाकर अलग-अलग लाना व लेजाना दर्शाया जाता है। राज्य सरकार द्वारा जी.वी.के. आई.एम.आर.आई. प्राइवेट कंपनी को प्रत्येक ट्रीप के हिसाब से राशि प्राप्त होता हैं। जी.वी.के. ई.एम.आर.आई. कंपनी के हेड जो कि रायपुर में बैठकर कंपनी को चलाते हैं। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार उनके ही निर्देश पर इन्हें ट्रीप को बढ़ाने के लिए दबाव बनाया जाता है। जिसके कारण डोंगरगढ़ महतारी एक्सप्रेस के कर्मचारियों द्वारा फर्जी तरीके से ट्रिप को बढ़ाकर सरकार के राजस्व को खाली करने का प्रयास किया जा रहा है जोकि गैर कानूनी एवं कानूनी अपराध है |
महतारी एक्सप्रेस 102 के कर्मचारियों द्वारा डोंगरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से बोरतलाव क्षेत्र व आस पास के ग्रामीण इलाके मे जाकर गर्भवती महिलाओं को लाया जाता है जिनके साथ मे स्थानीय मितानीन भी रहती है | एक ट्रिप में 6 से 7 महिलाएं एक साथ लाया ले जाया जाता है। जिसे एक ही ट्रीप मे एक साथ लाये इन 6 से 7 महिलाओं को तीन बार में लाने व लेजाने के नाम पर एक ट्रिप को 4 ट्रीप में दर्शाया जाता है | जोकि गैर कानूनी है जब इन कर्मचारियों से पूछा गया कि आपके द्वारा बोरतलाव जाकर गर्भवती महिलाओं को लाने में कितना समय लगता है तब इन्होंने 20 से 25 मिनट बताया है जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगढ़ से मार्केट होकर निकलने पर ही 10 से 15 मिनट का लग जाता हैं | उसके बाद 16 किलोमीटर की दूरी को यह केवल 20 मिनट में पूरी करते हैं यह रिपोर्ट इनके द्वारा बताई गई जबकि सबसे खराब रोड के नाम से पूरा डोंगरगढ़ मे थाना चौक डोंगरगढ़ से

13/11/2021

RAIPUR,

GVK Emergency Management Research Institute (EMRI) 102 Mahatari Express Ambulance completed 8 years of service in Chhattisgarh State on August 23. A felicitation program was organised in the office of GVK at Raipur. Staffs were felicitated for their commendable services and certificates were awarded. As per information Mahatari Express 102 has served mankind in remote tribal areas of state where medical services were not easily available. Staffs of 102 Mahatari Express are making praiseworthy efforts against all odds to provide best possible service to needy persons on time. State Government has started Mahatari Express Ambulance service to help the pregnant women of state, so that in case of emergency they can be taken to health centres on time to get medical attention at the earliest. On August 23, 2013 the service was started in Bilaspur district with 21 ambulances.

Later the service was expanded and at present 324 ambulances are being operated round the clock 365 days. For any cases related to pregnancy, medical examination of pregnant women, family planning operations, in case of ailment of babies less than one year of age free 102 Mahatari Express services can be availed by calling 102 toll free numbers. As per record during eight years of service over 55.73 lakh beneficiaries were taken to hospitals on time. Not only this during COVID-19 pandemic COVID suspected and infected pregnant women and young children were taken to hospital for immediate medical attention through 102 Mahatari Express Ambulance service.

At the same time in the entire state between May 2020 to July 2021 total of 11,601 Covid-19 suspected and infected pregnant women were taken to hospital through 102 Mahatari Express. During the pandemic situation the dedicated staff of Mahatari Express extended helping hand to the needy persons with great courage and determination thus earning reputation in the heart of the beneficiaries through their noble service to mankind.

08/05/2021

महतारी एक्सप्रेस 102 की सेवा बदहाल है। जहां एक ओर स्वास्थ्य विभाग कोरोना के राष्ट्रीय आपदा घोषित होने के बाद अलर्ट है तो वहीं विभाग में ही महिलाओं और बच्चों को एंबुलेंस सेवा देने के लिए तैनात 102 की व्यवस्था बिगड़ती नजर आ रही है। मार्च में 102 सेवा के लिए नया टेंडर जारी होना था। लेकिन कोरोना के कारण शासन ने टेंडर स्थगित कर दिया। अभी भी 102 की सेवा पुरानी जीवीके कंपनी के हाथ में है। नया टेंडर किसे और कब तक मिलेगा इसलिए गाड़ियों का मेंटेनेंस भी नहीं करवाया जा रहा है। 2 माह से कर्मचारियों को वेतन भी नहीं मिल पाया है। जिससे कर्मचारियों में नाराजगी है।

पहले शासन ने 108 और 102 दोनों का टेंडर जीवीके कंपनी को दिया था। अब 108 जय अंबे कंपनी के हाथ में है। 102 के लिए नए सिरे से टेंडर होना है। 102 सेवा के जिला समन्वयक पंकज शर्मा का कहना है कि नया टेंडर होने वाला था लेकिन कोरोना वायरस के कारण स्थगित कर दिया गया है। अप्रैल में टेंडर प्रस्तावित है। कर्मचारियों का वेतन जल्द मिले इसके लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। समय-समय पर पुरानी गाड़ियों का मेंटेनेंस भी करवाते हैं। टेंडर किसे मिलेगा यह तय नहीं है इसलिए कंपनी अभी नई गाड़ी भी नहीं भेज सकती। जो है उसी से काम चला रहे हैं।

मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ आॅइल बदल देते हैं

नियमों के मुताबिक चाहे 102 हो या 108 हर 2 से 3 माह के अंतराल में मेंटेनेंस करवाया जाना चाहिए, ताकि इस तरह की आपात सेवा में किसी तरह की बाधा ना आए। लेकिन जिले में टेंडर प्रक्रिया ना हो पाने के कारण पुरानी गाड़ियों के सिर्फ ऑइल बदल कर काम चलाया जा रहा है। जिसमें बमुश्किल 1500 रुपए का खर्च आता है। मेंटेनेंस में 5000 से 10000 का खर्चा आ जाएगा। इससे बचने के लिए और नया टेंडर होने के इंतजार में वर्तमान कंपनी मेंटेनेंस में भी औपचारिकता निभाते दिख रही है। जिसका नतीजा है कि कभी भी जिला अस्पताल सहित ग्रामीण क्षेत्र के 102 की गाड़ियां आधे रास्ते में बंद हो जाती है या फिर धक्का देकर चालू करना पड़ता है। परेशानी जच्चा बच्चा व उनके परिजन को होती है।

08/05/2021
26/04/2021

कोरबा ।

सुदूर पहाड़ी कोरवा गांव में रहने वाली कोरवा आदिवासी समुदाय की एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। मितानिन ने मदद के लिए महतारी एक्सप्रेस 102 पर काल किया। एंबुलेंस कर्मी वहां पहुंचे तो वाहन बस्ती तक ले जाने योग्य रास्ता नहीं था। कर्मी पैदल ही गांव पहुंचे। गर्भवती को कांवर पर बैठाया और कंधे पर उठाकर एक किलोमीटर दूर खड़ी एंबुलेंस तक पैदल आए। इसके बाद उसे समय पर सुरक्षित अस्पताल पहुंचाकर अपना दायित्व निभाया।

यह घटना जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम सिमकेदा की है। मुख्य गांव से पार हो कर दूर पहाड़ में बसने वाले पहाड़ी कोरवा के बस्ती की मितानीन ने 102 डायल किया था। उसने बताया कि गीता नाम की महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई है और तत्काल वाहन की जरूरत है। 102 काल सेंटर से करतला के महतारी एक्सप्रेस एंबुलेंस को संपर्क करके पहाड़ी कोरवा को लेने के लिए तत्काल भेजा गया। एंबुलेंस कर्मचारी को केस मिलते ही खरबदन कश्यप व नरसिंह पटेल के साथ रवाना हुए। पर गांव के बाहर आकर उन्हें वहीं ठहर जाना पड़ा। रास्ता खराब होने के कारण वाहन पहाड़ी कोरवा के बस्ती तक नहीं जा पाने की स्थिति थी। गर्भवती की तत्काल उपचार की जरूरत को देखते हुए दोनों कर्मचारी जंगल में एंबुलेंस खड़ा कर पैदल ही चल पड़े। कोरबा बस्ती में पहुंचकर पता चला कि महिला का दर्द बढ़ चुका है और उनको पैदल चलाना मुश्किल हो रहा। ऐसी स्थिति मे कर्मचारियों ने सूझ-बूझ से काम लिया और महिला को कांवर में बैठा कर लगभग एक किलोमीटर तक पैदल चल एंबुलेंस तक लाया। एंबुलेंस में बैठाकर सुरक्षित रूप से रास्ते में देखभाल करते हुए गर्भवती महिला को करतला अस्पताल में लाकर भर्ती किया गया है। महिला का स्थिति पहले से ठीक बताई जा रही है।

ऐसे अनेक क्षेत्र हैं, जहां खराब रास्तों के कारण संजीवनी और महतारी एक्सप्रेस की योजना आज भी नहीं पहुंच पाती। यही स्थिति उस वक्त निर्मित हुई, जब सिमकेंदा से काल किया गया। जहां एक ओर कोरोना काल के संकट से हर कोई जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ निष्ठा पूर्ण 102 के कर्मचारी अपनी सेवाएं समाज को दे रहे हैं। इस समस्या को तब तक दूर नहीं किया जा सकता, जब तक पहुंचविहीन गांवों को केवल कागज से हटाने की बजाय मैदानी हाल को न सुधार लिया जाए। ऐसे में हर बार ऐसे गांव के बीमार, बुजुर्ग और कराहती गर्भवती महिलाओं को प्रसव दर्द से जूझते रहना होगा।

18/11/2020

सरगुजा जिले के दरिमा थाना क्षेत्र के ग्राम सुमेला बहरा, धाबी झरना में प्रसव पीड़िता को लेने के लिए पहुंची महतारी 102 एक्सप्रेस गांव तक नहीं पहुंच पाई। प्रसूता के गांव तक पहुंच मार्ग खराब होने के कारण तीन किलोमीटर पहले ही एंबुलेंस को रोकना पड़ा। मितानिन ने जब एंबुलेंस के पायलट व ईएमटी से संपर्क किया तो उन्होंने खराब रास्ते के कारण एंबुलेंस के गांव से तीन किलोमीटर पहले रुकने की जानकारी दी। मितानिन ने प्रसव पीड़िता की बढ़ती तकलीफ से एंबुलेंस के ईएमटी को अवगत कराया। इसके बाद प्रसूता के घर तक पैदल पहुंचे ईएमटी ने घर में ही सुरक्षित प्रसव कराया। प्रसूता को गांव से एंबुलेंस तक लाने के लिए कोई साधन नहीं मिलने और घुप्प अंधेरा होने के कारण वह अस्पताल में मिलने वाली दवा सहित अन्य सुविधा से वंचित रह गई।

जानकारी के मुताबिक ग्राम सुमेला बहरा, धाबी झरना की मितानिन नानमुनि ने 14 नवंबर की रात आठ बजे प्रसव पीड़िता अलका (28) को अस्पताल पहुंचाने के लिए 102 नंबर पर एंबुलेंस की सुविधा के लिए डॉयल किया था। सूचना मिलने पर एंबुलेंस लेकर ईएमटी व पायलट गांव के लिए रवाना हुए लेकिन रास्ता काफी खराब होने के कारण मुझे गांव से तीन किलोमीटर पहले ही एंबुलेंस रोकना पड़ गया। प्रसूता की देखरेख में लगी मितानिन ने एंबुलेंस के पहुंचने में हो रही देरी को देखते हुए जब गांव के लिए निकली एंबुलेंस के पायलट शनि से संपर्क किया तो पता चला कि खराब रास्ता होने के कारण गांव तक एंबुलेंस का पहुंच पाना मुश्किल है। मितानिन ने एंबुलेंस के साथ पहुंचे इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन धर्म को प्रसव पीड़िता की बिगड़ती स्थिति से अवगत कराया।

इसके बाद प्रसूता के घर की दहलीज से तीन किलोमीटर दूर एंबुलेंस को छोड़कर ईएमटी धर्म को तीन किलोमीटर का फासला पैदल तय करना पड़ा। प्रसूता के घर तक पहुंच मितानिन के सहयोग से ईएमटी ने सुरक्षित प्रसव कराया। घर में ही बच्चे की किलकारी सुनकर प्रसव पीड़िता के स्वजन हर्षित हो उठे। जच्चा-बच्चा को आवश्यक दवा, टीका का लाभ मिले इसके लिए इन्हें एंबुलेंस तक लाने देर रात सुविधा नहीं मिल पाई, जिससे प्रसूता को गांव में ही छोड़ना पड़ा। ग्रामीणों का कहना था कि रास्ता खराब होने के कारण कई बार उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है। बरसात में तो गांव का पहुंच मार्ग और भी खराब हो जाता है, जिससे वे गांव तक ही सिमटकर रह जाते हैं।

18/11/2020

करोनाकाल में संजीवनी-महतारी एक्सप्रेस की सेवाओं से मिली राहत

अंबिकापुर ।

कोरोना संक्रमणकाल में यातायात व्यवस्था बंद होने के बाद मरीजों का एकमात्र सहारा शासन के द्वारा उपलब्ध एंबुलेंस रहा है। निजी वाहनों के चक्के थमने के बाद संजीवनी 108 और महतारी 102 एक्सप्रेस की सेवाएं निरंतर जारी रही, जिससे मरीजों को राहत मिली। आवागमन की व्यवस्था बंद रहने के कारण मरीजों का दबाव बढ़ा, इसके बाद भी एंबुलेंस के पायलट व ईएमटी सभी को अस्पताल तक पहुंचाने में पीछे नहीं रहे। कोरोना के खतरे के बीच बनी सामाजिक दूरियों की भी इन्होंने परवाह नहीं की।

महतारी 102 एक्सप्रेस के पायलट व ईएमटी ने प्रसव पीड़िताओं को घर से अस्पताल तक पहुंचाने के साथ ही सुरक्षित प्रसव के बाद घर तक इन्हें पहुंचाने की जिम्मेदारी का पूरी मुस्तैदी के साथ निर्वहन किए। इससे प्रसूताओं और उनके परिजनों को भटकने की नौबत नहीं बनी। सीमित संख्या में एंबुलेंस के होने के कारण इंतजार की स्थिति जरूर बन रही थी। जरूरत पड़ने पर महतारी 102 के पायलट व ईएमटी ने रास्ते में मिलने वाले घायलों, ग्रामीण क्षेत्र से बीमार लोगों को लाकर अस्पताल में भी भर्ती कराया, जो साधन के अभाव में सड़क या घर में कराह रहे थे। आज की स्थिति पर गौर करें तो आवागमन की सुविधा पटरी पर लौट रही है, इसके बाद भी सर्वाधिक मरीजों का एंबुलेंस ही सहारा है। खासकर प्रसूताओं की बात करें तो उन्हें दरवाजे तक महतारी 102 के पहुंचने का इंतजार रहता है। महतारी एक्सप्रेस के पायलट व ईएमटी भी पूरी इमानदारी से इन्हें न सिर्फ अस्पताल तक पहुंचा रहे हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर बीच रास्ते में कई महिलाओं का इन्होंने सुरक्षित प्रसव भी कराया है। इसके बाद जच्चा-बच्चा की बेहतरी के लिए इन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, मेडिकल कालेज अस्पताल लाकर भर्ती कराया है। पहुंचविहीन गांव तक इनकी पहुंच से गरीब ग्रामीणों को राहत मिली है। कई बार इन्हें नदी-नाले या पगडंडी मार्ग होने की स्थिति में सड़क मार्ग पर एंबुलेंस लगा प्रसूताओं को झेलगी, चारपाई से लेकर आते परिजनों का सहयोग करते देखा गया है। 108-102 एंबुलेंस कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष जोसेफ केरकेट्टा ने बताया कि सरगुजा में संचालित महतारी एंबुलेंस की सेवा वर्ष 2013 से मिल रही है। कोरोनाकाल में बस व अन्य सुविधा नहीं मिलने पर सरगुजा जिले के ग्रामीण, शहरी क्षेत्र के लोग प्रसूताओं को अस्पताल तक लाने डायल 102 का लाभ लेते आ रहे हैं। मितानिनों, पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से लगातार सूचनाओं का आदान-प्रदान होने से एंबुलेंस की त्वरित सेवा का लाभ 24 घंटे निःशुल्क मिल रहा है। हर महीने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एएनसी जांच होती है, इसमें महिलाओं को लाने-ले जाने की जिम्मेदारी का निर्वहन भी महतारी के पायलट कर रहे हैं। इसमें मितानिनों का योगदान भी महत्वपूर्ण है।

गौरेला पेण्ड्रा मरवाही. देश की आजादी को 73 साल हो गए। कई ऊंचाइयां हमने पा ली, तब से अब तक बहुत कुछ बदल गया। मगर अफसोस हम...
30/09/2020

गौरेला पेण्ड्रा मरवाही.

देश की आजादी को 73 साल हो गए। कई ऊंचाइयां हमने पा ली, तब से अब तक बहुत कुछ बदल गया। मगर अफसोस हम नहीं बदल पाए तो वह है बिहड़ जंगलों के बीच रहने वाले आदिवासियों का जीवन। इनकी जिंदगी बमुश्किल से दो रोटी के ही जुगाड़ में ही बीत रही है। हमने आजाद के इतने वर्षों में बस इतना ही कर पाए कि शहर और इससे लगे कुछ गांवों को ही मूलभूत सुविधाएं ही दे पाए हैं। बाकी सब वैसा ही है जैसे आजादी के पहले था।

हम बात कर रहें मरवाही तहसील के छोटे से गांव भुकभुका की जो छत्तीसगढ़ में नए जिले गौरेला पेंड्रा मरवाही के मगुरदा ग्राम पंचायत का हिस्सा है। इस गांव में बीस से पच्चीस छत्तीसगढ़ के विशेष आदिवासी समुदाय 'धनवार, बैगा व गोंड़Ó जाति लोग रहते हैं। मूलभूत सुविधाओं से दूर घने जंगलों के बीच इन परिवारों का जीवन इस जंगल पर ही आश्रित है। न ही इनके अच्छी सड़क है और न ही रहने के लिए अच्छा घर, ये बीमार पड़ जाएं तो इनके उपचार की नजदीकी स्वास्थ्य व्यवस्था भी नहीं। जरूरत में मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए इन्हें खुद के बनाए पगडंडियों से लगभग दस किमी बाहर आना होता हैं। ऐसे में अचानक ही किसी को स्वास्थ्य व्यवस्था की जरूरत हो तो स्थिति कितनी गंभीर व दयनीय होती होगी इस वाक्ये से जानते हैं।

बीती 28 सितंबर को गांव के भानमती पति बुद्धू सिंह उम्र तकरीबन 20 वर्ष को अचानक प्रसव पीड़ा होती है, मामले की गंभीरता को देखते हुए वहां की स्वास्थ्य मितानिन 102 में कॉल कर स्वास्थ्य विभाग के महतारी एक्सप्रेस को सूचना देती है। कुछ ही समय में महतारी एक्सप्रेस को लेकर स्टाफ रामकुमार व उनके सहकर्मी जंगलों के बीच एक रास्ते से वहां तक पहुंचने की कोशिश करते हैं, लेकिन रास्ता न होने के कारण मरीज से कुछ किमी पहले ही उन्हें रुकना पड़ता है। इससे आगे की तस्वीर इनकी मजबूरी और पिछड़ेपन को बयां करती है। खटिये का झूला बनाकर उस पर महिला को लिटाकर परिवार 2 किमी पगडंडियों से होते हुए एम्बुलेंस तक पहुंचा।महिला सही समय से अस्पताल पहुंचती है और प्रसव में जच्चा बच्चा स्वस्थ रहते हैं। मरवाही इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन गणेश्वर प्रसाद बताते हैं की क्षेत्र में ऐसे बहुत से गांव हैं, जहां की स्थिति ऐसी ही है।

मूलभूत सुविधाओं में इतने पिछड़े क्यों हम

टिपकापानी, चाकाडांड़, गंवरखोज, धौराठी कुछ ऐसे जगहों में से है जहां तक हमें पहुंचने के लिए काफी मुसीबतें आती है। कभी-कभी जान पर बन आती है। कभी घर पर ही प्रसव कराना पड़ता है, तो कभी स्ट्रेचर पर कई किमी तक मरीज को लाना पड़ जाता है। लोकतंत्र में समान हिस्सेदारी लेकिन मूलभूत सुविधाओं में इतने पिछड़े क्यों? गांव जरूरी सामान, राशन लेने इसी रास्ते से साइकिल या पैदल जाता है। पूरा गांव चुनाव में वोट भी डालता है पर सुविधाओं के नाम पर हमेशा खुद को ठगा महसूस करता है।

कोरबा। अस्पताल ले जाते हुए 102 महतारी एक्सप्रेस में गर्भवती ने बच्चे की जन्म दिया है। अच्छी बात यह रही कि जच्चा-बच्चा दो...
30/09/2020

कोरबा। अस्पताल ले जाते हुए 102 महतारी एक्सप्रेस में गर्भवती ने बच्चे की जन्म दिया है। अच्छी बात यह रही कि जच्चा-बच्चा दोनों ही पूरी तरह से स्वस्थ हैं। 102 के कर्मचारियों ने हिम्मत जुटाकर समय रहते बुद्धिमत्ता दिखाई जसके कारण दो माँ और बच्चे दोनो को आज नया जीवन मिला है।

कोरबा जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)हरदी बाजार के अंतर्गत आने वाला गांव डबरीपारा निवासी पवारा बाई गोंड पति परमेश्वर गोंड को सुबह डिलीवरी के लिए स्वास्थ्य केंद्र हरदी बाजार लाया गया, जहां पर पवारा बाई गोंड़ की स्थिति नार्मल डिलीवरी होने की स्थिति में नहीं थी, महिला की स्थिति को देखते हुए, उसे सुबह लगभग 8 बजे महतारी एक्सप्रेस 102 की मदद से कोरबा के लिए रवाना किया गया।

गाड़ी में पवारा बाई गोंड व उसकी माँ महेतरीन बाई के साथ गये थे, गेवरा बस्ती के समीप रास्ते में ही पवारा बाई की स्थिति बिगड़ने लगी। वह दर्द से व्याकुल हो गई। जहां माता महेतरीन बाई व 102 की स्वास्थ्य कर्मचारी कुलदीप श्रीवास व चालक अभिषेक भारती की मदद से 102 महतारी एक्सप्रेस में ही सुरक्षित प्रसव कराया गया। प्रसव के बाद माता पवारा बाई एवं बच्चा दोनों स्वस्थ है। डिलीवरी होने के बाद 102 के कर्मचारी के द्वारा वापस हरदी बाजार स्वास्थ्य केंद्र लाया गया जहां माता और बच्चे स्वस्थ है,जिससे सभी खुश नजर आए।

पूर्व में भी इस तरह से प्रसव 102 में हुई है जिसे जच्चा-बच्चा को सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाया गया है यह जानकारी कुलदीप श्रीवास स्वास्थ्य कर्मी के द्वारा बताया गया।परिवार के सदस्यों ने महतारी एक्सप्रेस को धन्यवाद देते हुए उनकी प्रशंसा की, साथ ही उनकी टीम के द्वारा किए गए कार्य की सराहना की।

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