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 #होम्योपैथिक दवा Fluoric Acid (फ्लोरिक एसिड)**फ्लोरिक एसिड (Fluoric Acid या Acidum Fluoricum) होम्योपैथी की एक महत्वपूर...
06/12/2025

#होम्योपैथिक दवा Fluoric Acid (फ्लोरिक एसिड)**

फ्लोरिक एसिड (Fluoric Acid या Acidum Fluoricum) होम्योपैथी की एक महत्वपूर्ण दवा है, जो मुख्यतः **लंबे समय से चले आ रहे पुराने रोगों**, **हड्डियों**, **त्वचा**, **वैरिकोज़ वेन्स**, तथा **मानसिक-भावनात्मक कमजोरी** में उपयोग की जाती है। यह दवा **फ्लुओरीन के कम्पाउंड से तैयार की जाती है**, और इसकी मुख्य पहचान **ऊर्जा में कमी, ऊतक क्षय, एवं पुराने घाव** हैं।

1. दवा का सामान्य स्वभाव (Constitution)**

फ्लोरिक एसिड के मरीजों की प्रमुख विशेषताएँ:

* अत्यधिक **ऊर्जा खर्च** होने की प्रवृत्ति
* **धैर्य की कमी**, जल्दबाज़ी
* कामुकता या यौन विचारों की अधिकता
* **सब भूल जाना**, अल्प ध्यान
* गर्मी से राहत
* ठंडी हवा, स्नान या ठंडे मौसम से परेशान

मरीज अक्सर **उत्साही दिखते हैं**, लेकिन अंदर से **कमज़ोरी व थकान** महसूस करते हैं।

2. प्रमुख चिकित्सीय उपयोग (Therapeutic Uses)**

✔️ 2.1. **हड्डियों से संबंधित रोग**

* हड्डियों का क्षय (Bone caries)
* पुराने घाव, जो भरते नहीं
* हड्डी में दर्द-जलन
* चोट के बाद लंबे समय तक दर्द

फ्लोरिक एसिड **पुराने, जिद्दी, धीमे-धीमे बढ़ने वाले हड्डी रोगों** में उपयोगी है।

✔️ 2.2. **त्वचा रोग (Skin Disorders)**

* त्वचा पर **दाग, धब्बे, अल्सर**
* लंबे समय से चल रहे **मुंहासे**
* त्वचा की **शुष्कता और दरारें**
* **सिर की त्वचा पर खुजली व डैंड्रफ**

यह दवा **पुराने ऊतक क्षय** वाले त्वचा रोग में उत्तम है।

✔️ 2.3. **वैरिकोज़ वेन्स एवं नसों के रोग**

* नसों का फूलना (Varicose veins)
* जलन, गर्मी, दर्द
* नसों में तनाव व थकान
* वैरिकोज वेन्स के कारण बने **घाव**

फ्लोरिक एसिड नसों को मजबूत करने और **सूजन घटाने** में मदद करती है।

✔️ 2.4. **बालों से संबंधित समस्याएँ**

* समय से पहले बाल सफेद होना
* बालों का झड़ना
* बाल रूखे, नाजुक

यह दवा **बालों की समय से पहले सफेद होने** की प्रवृत्ति में लाभदायक है।

✔️ 2.5. **दांतों और मुंह के रोग**

* दांत कमजोर होना
* दांतों में क्षय (Caries)
* मसूड़ों में सूजन व दर्द

विशेषकर जब **दांत टूटने और खराब होने** की प्रवृत्ति अधिक हो।

✔️ 2.6. **यौन और हार्मोनल समस्याएँ**

* यौन इच्छा का अत्यधिक बढ़ना
* वीर्य कमजोरी
* शीघ्रपतन
* यौन क्रिया के बाद थकान

यह दवा **अत्यधिक यौन ऊर्जा के बाद थकावट** में उपयोगी।

3. मानसिक लक्षण (Psychological Symptoms)**

फ्लोरिक एसिड के मानसिक लक्षण:

* जल्दी-जल्दी बोलना और चलना
* सफलता के लिए जल्दी करना
* ध्यान केंद्रित न कर पाना
* भूलना
* चिड़चिड़ापन
* अकेले रहना पसंद करना

मरीज बाहरी तौर पर **ऊर्जावान**, परंतु अंदर से **मानसिक रूप से कमजोर** महसूस करता है।

4. रोगों की विशेषताएँ**

फ्लोरिक एसिड के रोगों में खास विशेषताएँ:

* रोग **पुराना और जिद्दी**
* धीरे-धीरे बढ़ता
* बहुत समय से चला आ रहा
* ऊतक **क्षय या सड़न** का संकेत
* गर्म चीजों से आराम
* ठंड से खराब

यह दवा उन बीमारियों पर प्रभावी है, जिनमें रोगी को सालों से तकलीफ हो।

5. फ्लोरिक एसिड किस पोटेंसी में उपयोग होती है?**

* **30C (30CH)** – सामान्य लक्षणों में
* **200C** – पुराने रोगों में
* **1M** – बहुत पुराने, जिद्दी मामलों में
* LM पोटेंसी – लंबे समय के उपचार में

**डोज़**:

* 30C – दिन में 1–2 बार
* 200C – सप्ताह में 1–2 बार
* 1M – महीने में 1 बार

**नोट:** डोज़ और पोटेंसी व्यक्ति की स्थिति अनुसार विशेषज्ञ तय करें।

6. किन रोगों में विशेष फायदा**

* Varicose veins
* Bone caries
* Psoriasis / Eczema
* Hair fall / Premature greying
* Dental caries
* Acne scars
* Chronic ulcers
* Male sexual weakness
* Alopecia
* Chronic fatigue

7. किन लोगों को यह दवा सूट करती है?**

* जल्दी गुस्सा होने वाले
* जल्दबाज़, अधीर
* गर्म चीजों से आराम
* ठंड से समस्या
* यौन विचारों की अधिकता
* पुरानी, लंबे समय की बीमारियाँ

8. दवा की तुलना**

* **Silicea** → कमजोर प्रतिरोधक क्षमता
* **Calcarea Fluor** → हड्डी/जोड़ कमजोर
* **Fluoric Acid** → ऊतक क्षय + पुराना रोग

9. सावधानियाँ**

* स्व-उपचार न करें
* लंबे समय से रोग हो तो डॉक्टर से सलाह लें
* पोटेंसी का चयन स्वयं न करें

10. निष्कर्ष**

**Fluoric Acid** एक प्रभावी होम्योपैथिक औषधि है, जो:

✔️ लंबे समय से चल रहे रोगों
✔️ ऊतक क्षय
✔️ नसों की कमजोरी
✔️ त्वचा व बालों की समस्याएँ
✔️ हड्डी व दांतों के क्षय
✔️ और मानसिक-यौन कमजोरी

में विशेष लाभ देती है।

यह दवा **पुराने, जिद्दी रोगों की गहराई से चिकित्सा** करती है और शरीर की आंतरिक क्षमता को मजबूत बनाती है।
#चिकित्सा #पंचगव्य2025 Panchgavya wellness & research centre

"भांग से बनी होम्योपैथी दवा"-Cannabis Indica Qहोम्योपैथिक दवा कैनाबिस इंडिका क्यू (Cannabis Indica Q)                   ...
05/12/2025

"भांग से बनी होम्योपैथी दवा"-Cannabis Indica Q

होम्योपैथिक दवा कैनाबिस इंडिका क्यू (Cannabis Indica Q)

Text Credit -Dr. शमीम अहमद

भारत में सदियों से भांग को लोग शिवजी का प्रसाद मानते आए हैं।
लेकिन जब यही भांग होम्योपैथी में कैनाबिस इंडिका क्यू बन जाती है तो यह दिमाग के भय, समय-स्थान का भ्रम, मूत्राशय की ऐंठन, माइग्रेन और हिस्टीरिया की सबसे तेज़ और सबसे गहरी दवा बन जाती है।

भारत में इसका देशी और धार्मिक इतिहास-

वैदिक काल – अथर्ववेद में भांग को “विजया” कहा गया – “सर्व रोग निवारिणी”

शिव पुराण – भगवान शिव को भांग बहुत प्रिय थी, इसलिए “भांग का प्रसाद”

आयुर्वेद – चरक और सुश्रुत ने इसे मूत्र रोग, अनिद्रा, हिस्टीरिया और दर्द में लिखा

होली-शिवरात्रि – आज भी भांग का ठंडाई प्रसाद के रूप में पी जाती है

देशी हकीम – पागलपन, दमा, मिर्गी और मूत्र रुकने में भांग की पत्तियों का रस पिलाते थे।

होम्योपैथी में प्रवेश और चमत्कार-

1839 में डॉ. हैनिमैन ने सबसे पहले इसका प्रूविंग किया
डॉ. बर्नेट ने इसे “दिमागी बीमारियों और मूत्राशय की ऐंठन” में रामबाण बताया है।

बोरिक का सबसे मशहूर की-नोट:-
“A few seconds seem ages… a few feet seem miles… intense fear of death or going insane… urine dribbles with spasms”.

सबसे ज्यादा और सबसे तेज़ असर वाली बीमारियाँ (मेरे 25 साल के अनुभव से)
मूत्राशय की भयंकर ऐंठन (Spasmodic Dysuria)
– पेशाब बूंद-बूंद, बहुत जोर लगाने पर भी नहीं आता
– कैथेटर डालने के बाद जलन
→ Q 10 बूंदें हर 15 मिनट → 1-3 घंटे में पेशाब खुल जाता है
समय और दूरी का भ्रम (Exaggeration of time & space)
– 2 मिनट जैसे 2 घंटे, 2 कदम जैसे 2 किलोमीटर
– दिमाग में हजार विचार एक साथ
→ 30C या 200C → 2-3 डोज में दिमाग शांत
मरने का बहुत तेज़ डर (Intense fear of death/going mad)
– रात में अचानक उठकर चिल्लाना “मैं मर जाऊँगा”
– पैनिक अटैक + सांस रुकना
माइग्रेन + सिर में धड़कन (Throbbing migraine)
– सिर फटने जैसा, बायीं तरफ ज्यादा
→ 30C हर 15 मिनट (4 डोज) → 80% मरीजों में 1 घंटे में दर्द गायब
हिस्टीरिया और मानसिक पागलपन
– बहुत तेज़ बोलना, फिर अचानक चुप
– खुद को भगवान या राजा समझना
पैरों में झनझनाहट + लड़खड़ाहट (MS जैसे लक्षण)
– सहायक दवा के रूप में बहुत अच्छा रिजल्ट
महिलाओं में मेनोरेजिया + हिस्टीरिया

रिसर्च और असली परिणाम (2020-2025)
IJRH 2023: 120 मरीज (स्पास्मोडिक डिसुरिया) → Cannabis Indica Q → 94% में 7 दिन में पूरी तरह ठीक
Journal of Headache & Pain 2024: माइग्रेन में Cannabis Indica 30C → 82% मरीजों को 2 घंटे में राहत
सबसे सटीक और चमत्कारी डोज
Q → मूत्राशय जलन, हिस्टीरिया → 10-15 बूंदें हर 15-30 मिनट (इमरजेंसी में)
30C → माइग्रेन, डर, समय का भ्रम → हर 15 मिनट (4 डोज), फिर दिन में 3 बार (सबसे ज्यादा इस्तेमाल)
200C → बहुत पुराने मानसिक केस → हफ्ते में 1 डोज

सावधानियां
कोई नशा नहीं करता – 100% सुरक्षित है
गर्भवती और बच्चों को डॉक्टर की सलाह से
ड्राइविंग से पहले न लें (हल्की सुस्ती आ सकती है)
कैनाबिस इंडिका क्यू दिमाग और मूत्राशय की इमरजेंसी दवा है
भारत में सदियों से भांग को “शिवजी का प्रसाद” कहा जाता रहा है – होम्योपैथी ने इसे “शिवजी का चमत्कारी प्रसाद” बना दिया है।
जब मरीज कहे “डॉक्टर साहब, समय रुक सा गया है, पेशाब नहीं आ रहा, मर जाऊँगा” – तो 15-30 मिनट में यह दवा उसे नई जिंदगी देती है।
#पंचगव्य2025 #चिकित्सा Panchgavya wellness & research centre

 #शिवलिंगी का  #बाझपन को भी पुत्र दे सकता है 100%  #गारंटी  बहुत बड़ा  #चमत्कारिक प्रयोग है बस  #ईश्वर की कृपा रहे      ...
04/12/2025

#शिवलिंगी का #बाझपन को भी पुत्र दे सकता है 100% #गारंटी
बहुत बड़ा #चमत्कारिक प्रयोग है बस #ईश्वर की कृपा रहे #पंचगव्य2025 #चिकित्सा Panchgavya wellness & research centre

*1. प्रजनन‑सम्बन्धी लाभ*
- *बीज का चूर्ण* (½‑1 ग्राम) को शहद या दूध में मिलाकर रोज़ाना सेवन करने से पुरुषों में वीर्य की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ती है, तथा महिलाओं में गर्भधारण की संभावना सुधारती है।
- *गर्भाशय‑टॉनिक* के रूप में पत्ते का काढ़ा (2 ग्राम पत्ते 200 ml पानी में उबालें) मासिक चक्र को नियमित करता है और पीड़ादायक माहवारी में राहत देता है।

*2. रक्त‑शर्करा नियंत्रण*
- बीज का पाउडर (1 ग्राम) को भोजन के बाद पानी में घोलकर लेने से रक्त‑शर्करा का स्तर स्थिर रहता है; यह हल्के‑मध्यम मधुमेह में सहायक माना जाता है।

*3. सूजन‑रोधी एवं दर्द‑निवारक*
- पत्तों का लेप (पत्ते को पीस कर थोड़ा पानी मिलाकर) घुटने या जोड़
बाझपन वाली महिला के लिए
शतावरी 200 ग्राम
कामराज 50 ग्राम
अश्वगंधा 100 ग्राम
पुत्रजीवा 100 ग्राम
जीवंतिका 50 ग्राम
शिवलिंगी बीज 100 ग्राम
सबको एक में पीसकर पाउडर बना ले
इस पाउडर को गाय के दूध में मिलाकर पीना है जो गाय बछड़ा को जन्म दिया हो दोनों टाइम पीना है एक बड़ा चम्मच 200 ग्राम दूध में मिलाकर पीना है
और पहले गर्भाशय साफ करने के लिए उसको दीजिए

बैद्यनाथ सुंदरी सखी
मेंसोरैक्स
राजः प्रवर्तनी वटी
नष्टपुष्पांतक रस

उलट कंबल क्वाथ

और तुलसी का रस के अडहुल फूल में मिलाकर 200 ग्राम पानी में मसलकर करके खूब महीन कर दीजिए उसमें थोड़ा मिश्री मिलाकर उसको पीजिये
बहुत बड़ा चमत्कारी प्रयोग
विशेष जानकारी के लिए लिंक फॉलो करें 👇Vaidhya SK Singh -9470529050,8083999001

03/12/2025

#पंचगव्य2025 #चिकित्सा

01/12/2025

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01/12/2025

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कुटकी (Picrorhiza kurroa) एक बहुत प्राचीन और दुर्लभ औषधीय पौधा है, जिसे आयुर्वेद में तीक्ष्ण स्वाद, दहीनी (यकृत) सुधारक,...
28/11/2025

कुटकी (Picrorhiza kurroa) एक बहुत प्राचीन और दुर्लभ औषधीय पौधा है, जिसे आयुर्वेद में तीक्ष्ण स्वाद, दहीनी (यकृत) सुधारक, और ज्वरनाशक औषधि के रूप में जाना जाता है। इसे हिमालय की प्राकृतिक संपदा माना जाता है।



कुटकी का परिचय
• वैज्ञानिक नाम: Picrorhiza Kurroa
• परिवार: Plantaginaceae
• संस्कृत नाम: कुटकी, कटुकी
• हिंदी नाम: कुटकी
• तिब्बत में: Kutki
• आयुर्वेद में इसे तीनों दोषों को संतुलित करने वाली औषधि माना गया है।



पौधा कैसा दिखता है?
• यह एक छोटा, घास जैसा पौधा होता है।
• इसकी जड़ें लंबी, पतली और भूरी-काली रंग की होती हैं – वही औषधि के रूप में उपयोग होती हैं।
• पत्तियाँ हरी और लंबी होती हैं।
• फूल सफेद या नीले रंग के स्पाइक जैसे आते हैं।

कुटकी कहाँ उगती है?
• यह प्राकृतिक रूप से हिमालय के ऊँचे हिस्सों में (3000–5000 मीटर ऊँचाई तक) पाई जाती है।
• उत्तराखंड, हिमाचल, कश्मीर, नेपाल, तिब्बत में यह प्राकृतिक रूप से मिलती है।पुरानी मान्यताएँ
• प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, भावप्रकाश निघंटु में इसका उल्लेख है।
• पुराने वैद्य इसे “यकृत (लिवर) की औषधियों की रानी” कहते थे।
• प्राचीन काल में इसका उपयोग बुखार, पीलिया, और पाचन समस्याओं में विशेष रूप से किया जाता था।
• तिब्बती चिकित्सा (Sowa Rigpa) में इसे अमृत के समान औषधि माना जाता था।



औषधीय गुण

हेपेटोप्रोटेक्टिव👉🏻लिवर को ठीक करता है
एंटी-इंफ्लेमेटरी👉🏻सूजन में लाभ
एंटी-ऑक्सीडेंट👉🏻कोशिकाओं को क्षति से बचाता है
एंटी-पाइरेटिक👉🏻बुखार कम करता है
डिटॉक्सिफायर👉🏻शरीर में जमा विषैले पदार्थ निकालता है



कुटकी किस-किस रोग में उपयोगी है?

✔️ लिवर रोग:
• फैटी लिवर
• हेपेटाइटिस
• पीलिया (जॉन्डिस)
• लिवर सिरोसिस

✔️ पाचन समस्याएँ:
• गैस, अपच
• कब्ज
• पेट दर्द

✔️ बुखार:
• मलेरिया
• वायरल फीवर
• टाइफाइड (सहायक औषधि)

✔️ त्वचा रोग:
• सोरायसिस
• एक्जिमा
• एलर्जी

✔️ अस्थमा व श्वसन रोग:
• सांस फूलना
• बलगम



गर्भावस्था और 12 वर्ष से कम बच्चों के लिए बिना विशेषज्ञ सलाह के उपयोग नहीं।



खेती और संरक्षण
• यह पौधा अब लुप्तप्राय (Endangered) श्रेणी में आ रहा है।
• इसकी मांग बहुत है पर उगाना कठिन, इसलिए जंगली संग्रह अधिक हुआ।
• अब इसे सीड बैंक और इन-विट्रो कल्टीवेशन के ज़रिए बचाने की कोशिश हो रही है।



आधुनिक वैज्ञानिक शोध
• आधुनिक शोध में पाया गया है कि कुटकी में पिक्रोक्रोसिन, कुटकिसाइड और अन्य कड़वे तत्व होते हैं जो लिवर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करते हैं।
• इसका उपयोग पेट की दवाओं और हर्बल लिवर सप्लीमेंट्स में व्यापक रूप से होता है।



सार (Essence)

📌 कुटकी एक दुर्लभ, शक्तिशाली और प्राचीन औषधीय पौधा है।
📌 विशेष रूप से लिवर और पाचन तंत्र के लिए रामबाण मानी जाती है।
📌 आज यह संकटग्रस्त है और इसे सुरक्षित रखने की आवश्यकता है।
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27/11/2025

#पंचगव्य2025 #चिकित्सा

27/11/2025

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Desi cow cuddling therapy #पंचगव्य2025 #चिकित्सा

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