ShivShakti Electro Homeopathic Clinic Rath

ShivShakti Electro Homeopathic Clinic Rath Infolity, TubeBlock, Favourite, Curvical, sitica, all stomach disease etc.
(1)

09/02/2026

Electro Homeopathic Clinic Rath @शिवशक्ति इलेक्ट्रोहोम्योपैंथिक क्लिनिक राठ @अखंड विश्वकर्मा ब्राह्मण महासभा - संपूर्ण भारत Jyotish Centre

*गैंग्रीन,लीवर/फैटी लीवर,बवासीर,पेट के समस्त रोग,PCOD/PCOS, बच्चेदानी की रसोली,शरीर कि सभी प्रकार कि गांठ, बांझपन,लकवा, ...
04/02/2026

*गैंग्रीन,लीवर/फैटी लीवर,बवासीर,पेट के समस्त रोग,PCOD/PCOS, बच्चेदानी की रसोली,शरीर कि सभी प्रकार कि गांठ, बांझपन,लकवा, शरीर में कहीं भी नस ब्लॉक होना, हार्ट ब्लॉकेज की समस्या,साइटिका, स्लिप-डिस्क,सर्वाइकल का दर्द,बीपी की समस्या,साईनस,अनुवांशिक अस्थमा/श्वास, पित्त की थैली की पथरी एवं किडनी की पथरी ब माइग्रेन या किसी भी प्रकार के मानसिक रोग जैसे कि डर लगना या डिप्रेशन में जाना,रोग इत्यादि,जैसी असाध्याय बीमारियों का बिना ऑपरेशन उपचार के लिए संपर्क करें*
डॉक्टर एन•पाराशर
(स्त्रीरोग विषेशज्ञ)
डॉक्टर सुनील पाराशर शास्त्री
(जनरल फिजिशियन)
*शिवशक्ति इलेक्ट्रोहोम्योपैथिक क्लिनिक राठ*
मोबाइल नंबर-6393895325

30/01/2026

Electro Homeopathic Clinic Rath

30/01/2026

*🌷 #शुक्रवार, #द्वादशी ३० #जनवरी २०२६🌷*
_* #पं०सुनील #पाराशर( #शास्त्री जी)*_ *30-01-26, पञ्चाङ्ग व राशिफल एवं व्रत कथाओं के लिए फेसबुक पेज को लाइक कमेंट शेयर एवं फॉलो अवश्य करें क्योंकि आप सभी के इस् सहयोग से सभी भक्तों को यह पञ्चाङ्ग प्रतिदिन संध्या बंद्न पूजन आदि में सहायता अवश्य प्रदान करेगा जिससे हमारी सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार होगा ।।*
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#𝕙𝕚𝕘𝕙𝕝𝕚𝕘𝕙𝕥𝕤
*सूर्योदय: ~ 06:56*
*सूर्यास्त: ~ 17:54*
*चन्द्रोदय: ~ 15:05*
*चन्द्रास्त: ~ 29:36+*
*अयन ~ उत्तरायणे (दक्षिण गोले)*
*ऋतु: शिशिर*
*शक सम्वत: ~ १९४७ (विश्वावसु)*
*विक्रम सम्वत: ~ २०८२ (सिद्धार्थी)*
*मास ~ माघ*
*पक्ष ~ शुक्ल*
*तिथि ~ #द्वादशी (११:०९ से त्रयोदशी)*
*नक्षत्र ~ #आर्द्रा (२७:२७+ से पुनर्वसु)*
*योग ~ वैधृति (१६:५८ से विष्कुम्भ)*
*प्रथम करण ~ बालव (११:०९ तक)*
*द्वितीय करण ~ कौलव (२१:४६ तक)*
🌿🌷🌿🌷🌿🕉️🌿🌷🌿🌷🌿
*🪷🪷॥गोचर ग्रहा:॥🪷🪷*
*सूर्य ~ मकर*
*चंद्र ~ मिथुन*
*मंगल ~ मकर (अस्त, पश्चिम , मार्गी)*
*बुध ~ मकर (अस्त , पूर्व, मार्गी )*
*गुरु ~ मिथुन (उदित, पूर्व, वक्री)*
*शुक्र ~ मकर (अस्त, पश्चिम, मार्गी)*
*शनि ~ मीन (उदय, पूर्व, मार्गी)*
*राहु ~ कुम्भ*
*केतु ~ सिंह*

*शुभाशुभ मुहूर्त विचार*
==================
*अभिजित मुहूर्त ~ १२:१३ से १२:५६*
*अमृत काल ~ १८:१८ से १९:४६*
*सर्वार्थ सिद्धि योग ~ २७:२७+ से ३१:१०+*
*रवि योग ~ २७:२७+ से ३१:१०+*
*विजय मुहूर्त ~ १४:२३ से १५:०६*
*गोधूलि मुहूर्त ~ १७:५६ से १८:२३*
*सायाह्न सन्ध्या ~ १७:५९ से १९:१८*
*निशिता मुहूर्त ~ २४:०८+ से २५:०१+*
*राहुकाल ~ ११:१४ से १२:३५*
*राहुवास ~ दक्षिण-पूर्व*
*यमगण्ड ~ १५:१७ से १६:३८*
*दुर्मुहूर्त ~ ०९:२० से १०:०३*
*होमाहुति ~ शनि (२७:२७+ से चन्द्र)*
*दिशा शूल ~ पश्चिम*
*अग्निवास ~ पृथ्वी*
*चन्द्र वास ~ पश्चिम*
*शिववास ~ कैलाश पर (११:०९ से नन्दी पर)*

*चौघड़िया विचार*
=================
*॥दिन का चौघड़िया॥*
*१ - चर २ - लाभ*
*३ - अमृत ४ - काल*
*५ - शुभ ६ - रोग*
*७ - उद्वेग ८ - चर*
*॥रात्रि का चौघड़िया॥*
*१ - रोग २ - काल*
*३ - लाभ ४ - उद्वेग*
*५ - शुभ ६ - अमृत*
*७ - चर ८ - रोग*
*नोट~ दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।*

*शुभ यात्रा दिशा*
==================
*पश्चिम-दक्षिण (दहीलस्सी अथवा राई का सेवन कर यात्रा करें)*

*विशेष तिथि*
================
*प्रदोष व्रत, वराहद्वादशी आदि।*

*आज जन्मे शिशुओं का नामकरण*
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*आज २७:२७+ तक जन्मे शिशुओ का नाम आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (कु, घ, ड, छ) नामाक्षर से तथा इसके बाद जन्मे शिशुओ का नाम पूनर्वसु नक्षत्र के प्रथम चरण अनुसार (के) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।*

*उदय-लग्न मुहूर्त*
===================
*मकर - ०६:१७ से ०७:५९*
*कुम्भ - ०७:५९ से ०९:२६*
*मीन - ०९:२६ से १०:५१*
*मेष - १०:५१ से १२:२७*
*वृषभ - १२:२७ से १४:२२*
*मिथुन - १४:२२ से १६:३७*
*कर्क - १६:३७ से १८:५७*
*सिंह - १८:५७ से २१:१४*
*कन्या - २१:१४ से २३:३१*
*तुला - २३:३१ से २५:५०+*
*वृश्चिक - २५:५०+ से २८:०९+*
*धनु - २८:०९+ से ३०:१३+*

*पञ्चक रहित मुहूर्त*
==================
*शुभ मुहूर्त - ०७:१० से ०७:५९*
*रोग पञ्चक - ०७:५९ से ०९:२६*
*शुभ मुहूर्त - ०९:२६ से १०:५१*
*शुभ मुहूर्त - १०:५१ से ११:०९*
*रोग पञ्चक - ११:०९ से १२:२७*
*शुभ मुहूर्त - १२:२७ से १४:२२*
*मृत्यु पञ्चक - १४:२२ से १६:३७*
*अग्नि पञ्चक - १६:३७ से १८:५७*
*शुभ मुहूर्त - १८:५७ से २१:१४*
*रज पञ्चक - २१:१४ से २३:३१*
*शुभ मुहूर्त - २३:३१ से २५:५०+*
*चोर पञ्चक - २५:५०+ से २७:२७+*
*शुभ मुहूर्त - २७:२७+ से २८:०९+*
*रोग पञ्चक - २८:०९+ से ३०:१३+*
*शुभ मुहूर्त - ३०:१३+ से ३१:१०+*

*आज का राशिफल*
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*मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)*
*आज के दिन से आपको मिला जुला फल प्राप्त होगा मध्यान तक का समय कल्पनाओं में खराब करेंगे आज बुद्धि विवेक रहने पर भी किसी काम से बचने के चक्कर मे मूर्खो जैसी हरकते कर स्वयं ही हास्य के पात्र बनेंगे। मध्यान बाद आर्थिक विषयो को लेकर चिंता बढ़ेगी पूर्व में बरती लापरवाही की ग्लानि होगी। कार्य क्षेत्र पर गति रहेगी परन्तु प्रतिस्पर्धा भी होने के कारण लेदेकर सौदे करने पड़ेंगे फिर भी धन की आमद राहत जनक हो जाएगी। आज आप बाहर के लोगो से अत्यंत मधुर व्यवहार करेंगे लेकिन घर मे इसके विपरीत खर्च से बचने अथवा स्वभावतः परिजनों को दबाकर रखने के प्रयास में रहेंगे। संध्या का समय सेहत में नरमी आने पर पूर्वनियोजित कार्य रद्द करने पैड सकते है।*

*वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)*
*आज का दिन आपके लिए सामान्य फलदायी रहेगा। आज आप जिसभी कार्य को करने का मन बनाएंगे उसमे सेहत की नरमी आलस्य प्रमाद फैलाएंगी जिससे कोई भी कार्य नियत समय पर सम्पन्न नही कर सकेंगे घर अथवा कार्य क्षेत्र पर इस कारण किसी की आलोचना सहनी पडेगी। व्यवसाय से आज ज्यादा लाभ की संभावना ना होने पर भी कम समय मे अधिक लाभ पाने की लालसा में कोई अनैतिक कार्य भी कर सकते है लेकिन आत्म निर्भर रहने के कारण व्यर्थ के झमेलों से बचे रहेंगे फिर भी जोखिम वाले कार्यो से आज बचकर रहे शारीरिक अथवा धन हानि हो सकती है। संध्या का समय मायूस करेगा धैर्य से काम लें कल से स्थिति सुधरेगी।*

*मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)*
*आज के दिन आपके अंदर पराक्रम शक्ति प्रबल रहेगी एवं भाग्य का भी साथ ठीक मिलने से किसी भी कार्यो में ज्यादा माथापच्ची नही करनी पड़ेगी। लेकिन छोटे भाई बहनों को दबाना आपके व्यक्तित्त्व पर विपरीत प्रभाव डालेगा। आज सभी को साथ लेकर चलने में ही भलाई है वरना घरेलू कलह सार्वजनिक होने पर बदनामी का भय है। व्यवसाय से आय के अवसर कई बार मिलेंगे धन लाभ ठीक ठाक होगा परन्तु खर्च भी साथ लगे रहने से कुछ हाथ नही लगेगा। कार्य क्षेत्र पर सहकर्मी अथवा भागीदारों से विवाद होने की संभावना है शांति से काम ले इसका समय व्यर्थ के अलावा और कुछ निष्कर्ष नही निकलेगा।*
*संध्या बाद अनैतिक कार्यो की ओर प्रवृत्त होंगे यात्रा की योजना बनेगी।*

*कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)*
*आज का दिन भी उदासीनता में बीतेगा। व्यावसायिक मति एवं बाजार की जानकारी होने के बाद भी जिस कार्य को करने का प्रयास करेंगे उसमे धन अथवा अन्य किसी अभाव के कारण गति नही दे पाएंगे फिर भी जोड़ तोड़ कर धन लाभ कही न कही से अवश्य होगा लेकिन अनैतिक कार्यो में खर्च होने से बचत नही हो सकेगी उलटे संचित धन में कमी आएगी। अतिमहत्त्वपूर्ण कार्य आज टालना ही बेहतर रहेगा अथवा दोपहर के बाद करने पर हानि की संभावना कम रहेगी। घरेलू वातावरण आशानुकूल मिलने से राहत रहेगी परिजन हर कार्य मे सहयोग के लिये तैयार रहेंगे। दुर्घटना के योग भी है सावधान रहें। स्वास्थ्य में दिन भर गिरावट रहेगी लेकिन संध्या बाद सुधार आएगा।*

*सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)*
*आज का दिन आपको आशा के विपरीत फल देने वाला है। जिस कार्य अथवा समय लाभ की उम्मीद नही होगी उसी कार्य से अथवा समय अकस्मात लाभ होने से आश्चर्य में पड़ेंगे तथा जहां से सफलता की उम्मीद रहेगी वहां से निराश होने की संभावना है। आज किसी अन्य के ऊपर निर्भर रहने की जगह स्वयं के बल पर कार्य करे तो सफलता की संभावना अधिक रहेगी। काम-धंधे में जो भी कार्य को छोटा या बड़ा उसे निष्ठा से करे कुछ लाभ ही देकर जायेगा आनाकानी करने पर आगे के लिये मार्ग बंद हो सकता है। गृहस्थी में आनंद का वातावरण रहेगा परिजन कामनापूर्ति होने पर स्नेह बरसायेंगे लेकिन आनाकानी करने पर परिणाम विपरीत ही मिलेंगे। स्वयं अथवा परिजन कि सेहत को लेकर आशंकित रहेंगे इसमे लापरवाही से बचें।*

*कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)*
*आज का दिन कुछेक विषयो को छोड़ आपके पक्ष में ही रहेगा। सेहत में नरमी रहने के बाद भी दैनिक अथवा अन्य कार्यो को थोड़े बहुत विलंब के बाद पूर्ण कर लेंगे। सामाजिक व्यवहार का भी आज विशेष लाभ मिलेगा जब भी दुविधा में फंसे नजर आएंगे किसी न किसी का सहयोग मिल जायेगा नौकरी पेशाओ को आज अधिकारी वर्ग को प्रसन्न रखने में परेशानी आएगी अतिरिक्त भागदौड़ करने के बाद भी काम मे नुक्स निकालेंगे। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन सामान्य से अधिक उत्तम रहेगा आय के साथ अतिरिक्त खर्च भी लगे रहेंगे फिर भी संतुलन बना रहेगा। आज किसी सामाजिक व्यवहार का मान रखने के लिये यात्रा करनी पड़ेगी इसमें धन खर्च तो होगा लेकिन प्रतिष्ठा मिलने से अखरेगा नही। घर मे थोड़ी बहुत खींचतान के बाद भी आनंद आएगा।*

*तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)*
*आज का दिन पहले की तुलना में बेहतर रहेगा सेहत पुरानी बीमारी को छोड़ ठीक ही रहेगी लेकिन फिर भी स्वभाव किसी न किसी कारण से चिड़चिड़ा रहेगा घर के बड़े लोगो का व्यवहार आज कम ही पसंद आएगा। माता के सुख में भी आज कमी अनुभव होगी। कार्य क्षेत्र पर स्थिति बेहतर रहेगी लेकिन आज व्यवसाय अथवा अन्य कार्यो से पैतृक धन अथवा पिता के सहयोग की अन्य किसी रूप में आवश्यकता पड़ेगी इसलिये व्यवहार में विनम्रता रखे अन्यथा उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। सरकारी कार्यो को भी प्राथमिकता दें आज लापरवाही करने पर लंबे समय के लिये लटक सकते है। व्यवहारिकता कम रहने के कारण दिन से उचित लाभ नही उठा पाएंगे फिर भी धन की आमद संतोष जनक हो जाएगी।*

*वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)*
*आज आपकी दिनचर्या चाहकर भी व्यवस्थित नही हो सकेगी मन मे काफी कुछ सोच कर रखेंगे लेकिन अंत समय मे ही विचार किये कार्य निरस्त कर अन्य कार्यो में लगना पड़ेगा। आज आपकी मानसिकता भी व्यवसायी रहेगी प्रत्येक कार्य मे हानि लाभ देखकर ही चलेंगे कार्य अथवा अन्य किसी क्षेत्र से आशा ना होने के बाद भी अकस्मात लाभ होने पर उत्साह बढ़ेगा फिर भी आर्थिक स्थिति से संतोष नही होगा ज्यादा से ज्यादा धन कमाने के चक्कर मे सेहत की अनदेखी करेंगे जो बाद महंगी पड़ेगी। दिन भर छुट पुट खर्च लगे रहेगें लेकिन संध्या बाद बड़ा खर्च करने की योजना बनेगी। घर मे भी छोटी मोटी बातो को छोड़ शांति रहेगी। यात्रा में वाहनादि से सावधानी रखें।*

*धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)*
*आज आप के दिमाग मे केवल पैसा ही रहेगा दिन के आरंभ से ही आर्थिक लाभ पाने के लिये प्रयासरत रहेंगे आज भी कल की ही भांति परिश्रम करना पड़ेगा लेकिन आर्थिक दृष्टिकोण से आज दिन कल की तुलना में बेहतर रहेगा। किसी भी कार्य के आरंभ में सफलता को लेकर संदेह होगा लेकिन ध्यान रहे जिस भी काम को हाथ मे ले उसे पूरा ही करके छोड़े आशाजनक ना सही कुछ ना कुछ लाभ अवश्य मिलेगा। भूमि भवन संबंधित कार्य से भी आज लाभ की संभावना है लेकिन किसी न किसी की लापरवाही के चलते टल भी सकता है। परिवार अथवा रिश्तेदारी में ना चाहकर भी खर्च करने पर घर का बजट प्रभावित होगा। मन मे यात्रा पर्यटन के विचार बनेंगे इसके पूर्ण होने की सम्भवना आज कम ही है। सेहत लगभग ठीक ही रहेगी।*

*मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)*
*आज का दिन कुछ उतार चढ़ाव भरा रहेगा। दिन के आरंभ से ही मन वर्जित कार्यो में रुचि लेगा आज लोग जिस कार्य को करने के लिये मना करेंगे आपको वही काम करना पसंद आएगा जिससे परिजन अथवा किसी अन्य से डांट फटकार भी सुनने को मिलेगी। कार्य क्षेत्र पर आज मन मारकर ही काम करेंगे फिर भी कम समय मे अन्य की तुलना में अधिक लाभ कमा लेंगे। आज आपके शत्रु पक्ष में वृद्धि के योग भी है इसके जिम्मेदार भी आप स्वयं ही होंगे लेकिन फिर भी आपका पलड़ा भारी रहेगा विरोधी चाहकर भी अहित नही कर पाएंगे। लोहे संबंधित व्यवसाय से लाभ तो होगा लेकिन दुर्घटना के योग भी है सावधान रहें। घर मे आपके पल पल बदलते स्वभाव से थोड़ी बहुत नोकझोंक होगी। स्वास्थ्य आज ठीक रहेगा।*

*कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)*
*आज के दिन आपके दिमाग मे उथल पुथल लगी रहेगी किसी पुराने कार्य सफलता को लेकर अंदर से बेचैन रहेंगे लेकिन गुप्त होने के कारण प्रदर्शन भी नही कर पाएंगे। कार्य व्यवसाय से आशाजनक धन सजह मिल जाएगा फिर भी किसी बड़ी योजना को लेकर छोटे मोटे लाभ से संतुष्ट नही होंगे। कार्य क्षेत्र पर चतुराई का परिचय देंगे जिससे कुछ समय के लिये प्रेमीजन आपके खिलाफ भी होगे स्वतः ही सामान्य भी हो जाएंगे। नौकरी पेशाओ के लिये आज का दिन कोई नई दुविधा लाएगा पर साथ ही लाभ भी मिलने से ज्यादा अखरेगा नही। घर मे सुखशांति रहेगी किसी पर्यटक अथवा धार्मिक स्थल की यात्रा के लिये योजना बनाएंगे। सर्दी से बचना आवश्यक है जुखाम आदि से परेशानी हो सकती है।*

*मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)*
*आज के दिन आप बैठे बिठाये व्यर्थ के झगड़े मोल लेंगे कार्य क्षेत्र पर आवश्यकता अनुसार आय आसानी से हो जाएगी फिर भी असंतोषी स्वभाव उटपटांग के कार्यो में भटकाएगा आज अपने काम से काम रखें पराये काम मे टांग फसाना भारी पड़ सकता है मान हानि के प्रबल योग है। सहकारी कार्यो से आज बच कर ही रहे समय धन व्यर्थ करने के बाद भी काम बनना सन्देहास्पद रहेगा। कार्य क्षेत्र पर भागीदारों अथवा किसी अन्य से धन को लेकर कहासुनी हो सकती है। घरेलू वातावरण भी आपके रूखे व्यवहार के कारण अशांत रहेगा वादा कर मुकरने पर भी किसी से कलह होगी। आज आपके समर्थन की अपेक्षा विरोध करने वाले अधिक मिलेंगे धैर्य से दिन बिताएं यात्रा से बचे सेहत थोड़ी बहुत नरम रहेगी।

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12/01/2026

*⚜️⚜️ #सम्पूर्ण 16 #संस्कार⚜️*

1 गर्भाधान संस्क
2. पुंसवन संस्कार
3.सीमन्तोन्नयन संस्कार
4.जातकर्म संस्कार
5.नामकरण संस्कार
6.निष्क्रमण संस्कार
7.अन्नप्राशन संस्कार
8.मुंडन/चूडाकर्म संस्कार
9.विद्यारंभ संस्कार
10.कर्णवेध संस्कार
11. यज्ञोपवीत संस्कार
12. वेदारम्भ संस्कार
13. केशान्त संस्कार
14. समावर्तन संस्कार
15. विवाह संस्कार
16.अन्त्येष्टि संस्कार/श्राद्ध संस्कार

1.गर्भाधान संस्कार

हमारे शास्त्रों में मान्य सोलह संस्कारों में गर्भाधान पहला है। गृहस्थ जीवन में प्रवेश के उपरान्त प्रथम क‌र्त्तव्य के रूप में इस संस्कार को मान्यता दी गई है। गार्हस्थ्य जीवन का प्रमुख उद्देश्य श्रेष्ठ सन्तानोत्पत्ति है। उत्तम संतति की इच्छा रखनेवाले माता-पिता को गर्भाधान से पूर्व अपने तन और मन की पवित्रता के लिये यह संस्कार करना चाहिए। दैवी जगत् से शिशु की प्रगाढ़ता बढ़े तथा ब्रह्माजी की सृष्टि से वह अच्छी तरह परिचित होकर दीर्घकाल तक धर्म और मर्यादा की रक्षा करते हुए इस लोक का भोग करे यही इस संस्कार का मुख्य उद्देश्य है।विवाह उपरांत की जाने वाली विभिन्न पूजा और क्रियायें इसी का हिस्सा हैं.


गर्भाधान मुहूर्त

जिस स्त्री को जिस दिन मासिक धर्म हो,उससे चार रात्रि पश्चात सम रात्रि में जबकि शुभ ग्रह केन्द्र (१,४,७,१०) तथा त्रिकोण (१,५,९) में हों,तथा पाप ग्रह (३,६,११) में हों ऐसी लग्न में पुरुष को पुत्र प्राप्ति के लिये अपनी स्त्री के साथ संगम करना चाहिये। मृगशिरा अनुराधा श्रवण रोहिणी हस्त तीनों उत्तरा स्वाति धनिष्ठा और शतभिषा इन नक्षत्रों में षष्ठी को छोड कर अन्य तिथियों में तथा दिनों में गर्भाधान करना चाहिये,भूल कर भी शनिवार मंगलवार गुरुवार को पुत्र प्राप्ति के लिये संगम नही करना चाहिये।

2.पुंसवन संस्कार
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गर्भ ठहर जाने पर भावी माता के आहार, आचार, व्यवहार, चिंतन, भाव सभी को उत्तम और संतुलित बनाने का प्रयास किया जाय ।हिन्दू धर्म में, संस्कार परम्परा के अंतर्गत भावी माता-पिता को यह तथ्य समझाए जाते हैं कि शारीरिक, मानसिक दृष्टि से परिपक्व हो जाने के बाद, समाज को श्रेष्ठ, तेजस्वी नई पीढ़ी देने के संकल्प के साथ ही संतान पैदा करने की पहल करें । उसके लिए अनुकूल वातवरण भी निर्मित किया जाता है। गर्भ के तीसरे माह में विधिवत पुंसवन संस्कार सम्पन्न कराया जाता है, क्योंकि इस समय तक गर्भस्थ शिशु के विचार तंत्र का विकास प्रारंभ हो जाता है । वेद मंत्रों, यज्ञीय वातावरण एवं संस्कार सूत्रों की प्रेरणाओं से शिशु के मानस पर तो श्रेष्ठ प्रभाव पड़ता ही है, अभिभावकों और परिजनों को भी यह प्रेरणा मिलती है कि भावी माँ के लिए श्रेष्ठ मनःस्थिति और परिस्थितियाँ कैसे विकसित की जाए ।

क्रिया और भावना

गर्भ पूजन के लिए गर्भिणी के घर परिवार के सभी वयस्क परिजनों के हाथ में अक्षत, पुष्प आदि दिये जाएँ । मन्त्र बोला जाए । मंत्र समाप्ति पर एक तश्तरी में एकत्रित करके गर्भिणी को दिया जाए । वह उसे पेट से स्पर्श करके रख दे । भावना की जाए, गर्भस्थ शिशु को सद्भाव और देव अनुग्रह का लाभ देने के लिए पूजन किया जा रहा है । गर्भिणी उसे स्वीकार करके गर्भ को वह लाभ पहुँचाने में सहयोग कर रही है ।

ॐ सुपर्णोऽसि गरुत्माँस्त्रिवृत्ते शिरो, गायत्रं चक्षुबरृहद्रथन्तरे पक्षौ । स्तोमऽआत्मा छन्दा स्यङ्गानि यजूषि नाम । साम ते तनूर्वामदेव्यं, यज्ञायज्ञियं पुच्छं धिष्ण्याः शफाः । सुपर्णोऽसि गरुत्मान् दिवं गच्छ स्वःपत॥

3.सीमन्तोन्नयन
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सीमन्तोन्नयन को सीमन्तकरण अथवा सीमन्त संस्कार भी कहते हैं। सीमन्तोन्नयन का अभिप्राय है सौभाग्य संपन्न होना। गर्भपात रोकने के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु एवं उसकी माता की रक्षा करना भी इस संस्कार का मुख्य उद्देश्य है। इस संस्कार के माध्यम से गर्भिणी स्त्री का मन प्रसन्न रखने के लिये सौभाग्यवती स्त्रियां गर्भवती की मांग भरती हैं। यह संस्कार गर्भ धारण के छठे अथवा आठवें महीने में होता है।

4.जातकर्म

नवजात शिशु के नालच्छेदन से पूर्व इस संस्कार को करने का विधान है। इस दैवी जगत् से प्रत्यक्ष सम्पर्क में आनेवाले बालक को मेधा, बल एवं दीर्घायु के लिये स्वर्ण खण्ड से मधु एवं घृत गुरु मंत्र के उच्चारण के साथ चटाया जाता है। दो बूंद घी तथा छह बूंद शहद का सम्मिश्रण अभिमंत्रित कर चटाने के बाद पिता बालक के बुद्धिमान, बलवान, स्वस्थ एवं दीर्घजीवी होने की प्रार्थना करता है। इसके बाद माता बालक को स्तनपान कराती है।

5.नामकरण संस्कार

नामकरण शिशु जन्म के बाद पहला संस्कार कहा जा सकता है । यों तो जन्म के तुरन्त बाद ही जातकर्म संस्कार का विधान है, किन्तु वर्तमान परिस्थितियों में वह व्यवहार में नहीं दीखता । अपनी पद्धति में उसके तत्त्व को भी नामकरण के साथ समाहित कर लिया गया है । इस संस्कार के माध्यम से शिशु रूप में अवतरित जीवात्मा को कल्याणकारी यज्ञीय वातावरण का लाभ पहँचाने का सत्प्रयास किया जाता है । जीव के पूर्व संचित संस्कारों में जो हीन हों, उनसे मुक्त कराना, जो श्रेष्ठ हों, उनका आभार मानना-अभीष्ट होता है । नामकरण संस्कार के समय शिशु के अन्दर मौलिक कल्याणकारी प्रवृत्तियों, आकांक्षाओं के स्थापन, जागरण के सूत्रों पर विचार करते हुए उनके अनुरूप वातावरण बनाना चाहिए । शिशु कन्या है या पुत्र, इसके भेदभाव को स्थान नहीं देना चाहिए । भारतीय संस्कृति में कहीं भी इस प्रकार का भेद नहीं है । शीलवती कन्या को दस पुत्रों के बराबर कहा गया है । 'दश पुत्र-समा कन्या यस्य शीलवती सुता ।' इसके विपरीत पुत्र भी कुल धर्म को नष्ट करने वाला हो सकता है । 'जिमि कपूत के ऊपजे कुल सद्धर्म नसाहिं ।' इसलिए पुत्र या कन्या जो भी हो, उसके भीतर के अवांछनीय संस्कारों का निवारण करके श्रेष्ठतम की दिशा में प्रवाह पैदा करने की दृष्टि से नामकरण संस्कार कराया जाना चाहिए । यह संस्कार कराते समय शिशु के अभिभावकों और उपस्थित व्यक्तियों के मन में शिशु को जन्म देने के अतिरिक्त उन्हें श्रेष्ठ व्यक्तित्व सम्पन्न बनाने के महत्त्व का बोध होता है । भाव भरे वातावरण में प्राप्त सूत्रों को क्रियान्वित करने का उत्साह जागता है । आमतौर से यह संस्कार जन्म के दसवें दिन किया जाता है । उस दिन जन्म सूतिका का निवारण-शुद्धिकरण भी किया जाता है । यह प्रसूति कार्य घर में ही हुआ हो, तो उस कक्ष को लीप-पोतकर, धोकर स्वच्छ करना चाहिए । शिशु तथा माता को भी स्नान कराके नये स्वच्छ वस्त्र पहनाये जाते हैं । उसी के साथ यज्ञ एवं संस्कार का क्रम वातावरण में दिव्यता घोलकर अभिष्ट उद्देश्य की पूर्ति करता है । यदि दसवें दिन किसी कारण नामकरण संस्कार न किया जा सके । तो अन्य किसी दिन, बाद में भी उसे सम्पन्न करा लेना चाहिए । घर पर, प्रज्ञा संस्थानों अथवा यज्ञ स्थलों पर भी यह संस्कार कराया जाना उचित है ।


6.निष्क्रमण्

निष्क्रमण का अभिप्राय है बाहर निकलना। इस संस्कार में शिशु को सूर्य तथा चन्द्रमा की ज्योति दिखाने का विधान है। भगवान् भास्कर के तेज तथा चन्द्रमा की शीतलता से शिशु को अवगत कराना ही इसका उद्देश्य है। इसके पीछे मनीषियों की शिशु को तेजस्वी तथा विनम्र बनाने की परिकल्पना होगी। उस दिन देवी-देवताओं के दर्शन तथा उनसे शिशु के दीर्घ एवं यशस्वी जीवन के लिये आशीर्वाद ग्रहण किया जाता है। जन्म के चौथे महीने इस संस्कार को करने का विधान है। तीन माह तक शिशु का शरीर बाहरी वातावरण यथा तेज धूप, तेज हवा आदि के अनुकूल नहीं होता है इसलिये प्राय: तीन मास तक उसे बहुत सावधानी से घर में रखना चाहिए। इसके बाद धीरे-धीरे उसे बाहरी वातावरण के संपर्क में आने देना चाहिए। इस संस्कार का तात्पर्य यही है कि शिशु समाज के सम्पर्क में आकर सामाजिक परिस्थितियों से अवगत हो।

7.अन्नप्राशन संस्कार

बालक को जब पेय पदार्थ, दूध आदि के अतिरिक्त अन्न देना प्रारम्भ किया जाता है, तो वह शुभारम्भ यज्ञीय वातावरण युक्त धर्मानुष्ठान के रूप में होता है । इसी प्रक्रिया को अन्नप्राशन संस्कार कहा जाता है । बालक को दाँत निकल आने पर उसे पेय के अतिरिक्त खाद्य दिये जाने की पात्रता का संकेत है । तदनुसार अन्नप्राशन ६ माह की आयु के आस-पास कराया जाता है । अन्न का शरीर से गहरा सम्बन्ध है । मनुष्यों और प्राणियों का अधिकांश समय साधन-आहार व्यवस्था में जाता है । उसका उचित महत्त्व समझकर उसे सुसंस्कार युक्त बनाकर लेने का प्रयास करना उचित है । अन्नप्राशन संस्कार में भी यही होता है । अच्छे प्रारम्भ का अर्थ है- आधी सफलता । अस्तु, बालक के अन्नाहार के क्रम को श्रेष्ठतम संस्कारयुक्त वातावरण में करना अभीष्ट है । हमारी परम्परा यही है कि भोजन थाली में आते ही चींटी, कुत्ता आदि का भाग उसमें से निकालकर पंचबलि करते हैं । भोजन ईश्वर को समर्पण कर या अग्नि में आहुति देकर तब खाते हैं । होली का पर्व तो इसी प्रयोजन के लिए है । नई फसल में से एक दाना भी मुख डालने से पूर्व, पहले उसकी आहुतियाँ होलिका यज्ञ में देते हैं । तब उसे खाने का अधिकार मिलता है । किसान फसल मींज-माँड़कर जब अन्नराशि तैयार कर लेता है, तो पहले उसमें से एक टोकरी भर कर धर्म कार्य के लिए अन्न निकालता है, तब घर ले जाता है । त्याग के संस्कार के साथ अन्न को प्रयोग करने की दृष्टि से ही धर्मघट-अन्नघट रखने की परिपाटी प्रचलित है । भोजन के पूर्व बलिवैश्व देव प्रक्रिया भी अन्न को यज्ञीय संस्कार देने के लिए की जाती है...

8 मुंडन/चूड़ाकर्म संस्कार

इस संस्कार में शिशु के सिर के बाल पहली बार उतारे जाते हैं । लौकिक रीति यह प्रचलित है कि मुण्डन, बालक की आयु एक वर्ष की होने तक करा लें अथवा दो वर्ष पूरा होने पर तीसरे वर्ष में कराएँ । यह समारोह इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि मस्तिष्कीय विकास एवं सुरक्षा पर इस सयम विशेष विचार किया जाता है और वह कार्यक्रम शिशु पोषण में सम्मिलित किया जाता है, जिससे उसका मानसिक विकास व्यवस्थित रूप से आरम्भ हो जाए, चौरासी लाख योनियों में भ्रमण करते रहने के कारण मनुष्य कितने ही ऐसे पाशविक संस्कार, विचार, मनोभाव अपने भीतर धारण किये रहता है, जो मानव जीवन में अनुपयुक्त एवं अवांछनीय होते हैं । इन्हें हटाने और उस स्थान पर मानवतावादी आदर्शो को प्रतिष्ठापित किये जाने का कार्य इतना महान् एवं आवश्यक है कि वह हो सका, तो यही कहना होगा कि आकृति मात्र मनुष्य की हुई-प्रवृत्ति तो पशु की बनी रही ।हमारी परम्परा हमें सिखाती है कि बालों में स्मृतियाँ सुरक्षित रहती हैं अतः जन्म के साथ आये बालों को पूर्व जन्म की स्मृतियों को हटाने के लिए ही यह संस्कार किया जाता है...

9.विद्यारंभ संस्कार

जब बालक/ बालिका की आयु शिक्षा ग्रहण करने योग्य हो जाय, तब उसका विद्यारंभ संस्कार कराया जाता है । इसमें समारोह के माध्यम से जहाँ एक ओर बालक में अध्ययन का उत्साह पैदा किया जाता है, वही अभिभावकों, शिक्षकों को भी उनके इस पवित्र और महान दायित्व के प्रति जागरूक कराया जाता है कि बालक को अक्षर ज्ञान, विषयों के ज्ञान के साथ श्रेष्ठ जीवन के सूत्रों का भी बोध और अभ्यास कराते रहें ।

10.कर्णवेध संस्कार

हमारे मनीषियों ने सभी संस्कारों को वैज्ञानिक कसौटी पर कसने के बाद ही प्रारम्भ किया है। कर्णवेध संस्कार का आधार बिल्कुल वैज्ञानिक है। बालक की शारीरिक व्याधि से रक्षा ही इस संस्कार का मूल उद्देश्य है। प्रकृति प्रदत्त इस शरीर के सारे अंग महत्वपूर्ण हैं। कान हमारे श्रवण द्वार हैं। कर्ण वेधन से व्याधियां दूर होती हैं तथा श्रवण शक्ति भी बढ़ती है। इसके साथ ही कानों में आभूषण हमारे सौन्दर्य बोध का परिचायक भी है।

यज्ञोपवीत के पूर्व इस संस्कार को करने का विधान है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्ल पक्ष के शुभ मुहूर्त में इस संस्कार का सम्पादन श्रेयस्कर है।

11.यज्ञोपवीत/उपनयन संस्कार

यज्ञोपवीत (संस्कृत संधि विच्छेद= यज्ञ+उपवीत) शब्द के दो अर्थ हैं-उपनयन संस्कार जिसमें जनेऊ पहना जाता है । मुंडन और पवित्र जल में स्नान भी इस संस्कार के अंग होते हैं।


सूत से बना वह पवित्र धागा जिसे यज्ञोपवीतधारी व्यक्ति बाएँ कंधे के ऊपर तथा दाईं भुजा के नीचे पहनता है। यज्ञ द्वारा संस्कार किया गया उपवीत, यज्ञसूत्र

यज्ञोपवीत एक विशिष्ट सूत्र को विशेष विधि से ग्रन्थित करके बनाया जाता है। इसमें सात ग्रन्थियां लगायी जाती हैं । ब्राम्हणों के यज्ञोपवीत में ब्रह्मग्रंथि होती है। तीन सूत्रों वाले इस यज्ञोपवीत को गुरु दीक्षा के बाद हमेशा धारण किया जाता है। तीन सूत्र हिंदू त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक होते हैं। अपवित्र होने पर यज्ञोपवीत बदल लिया जाता है। बिना यज्ञोपवीत धारण कये अन्न जल गृहण नहीं किया जाता। यज्ञोपवीत धारण करने का मन्त्र है

यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात् ।आयुष्यमग्रं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।।

12.वेदारम्भ संस्कार

ज्ञानार्जन से सम्बन्धित है यह संस्कार। वेद का अर्थ होता है ज्ञान और वेदारम्भ के माध्यम से बालक अब ज्ञान को अपने अन्दर समाविष्ट करना शुरू करे यही अभिप्राय है इस संस्कार का। शास्त्रों में ज्ञान से बढ़कर दूसरा कोई प्रकाश नहीं समझा गया है। स्पष्ट है कि प्राचीन काल में यह संस्कार मनुष्य के जीवन में विशेष महत्व रखता था। यज्ञोपवीत के बाद बालकों को वेदों का अध्ययन एवं विशिष्ट ज्ञान से परिचित होने के लिये योग्य आचार्यो के पास गुरुकुलों में भेजा जाता था। वेदारम्भ से पहले आचार्य अपने शिष्यों को ब्रह्मचर्य व्रत कापालन करने एवं संयमित जीवन जीने की प्रतिज्ञा कराते थे तथा उसकी परीक्षा लेने के बाद ही वेदाध्ययन कराते थे। असंयमित जीवन जीने वाले वेदाध्ययन के अधिकारी नहीं माने जाते थे। हमारे चारों वेद ज्ञान के अक्षुण्ण भंडार हैं।

13.केशान्त संस्कार

गुरुकुल में वेदाध्ययन पूर्ण कर लेने पर आचार्य के समक्ष यह संस्कार सम्पन्न किया जाता था। वस्तुत: यह संस्कार गुरुकुल से विदाई लेने तथा गृहस्थाश्रम में प्रवेश करने का उपक्रम है। वेद-पुराणों एवं विभिन्न विषयों में पारंगत होने के बाद ब्रह्मचारी के समावर्तन संस्कार के पूर्व बालों की सफाई की जाती थी तथा उसे स्नान कराकर स्नातक की उपाधि दी जाती थी। केशान्त संस्कार शुभ मुहूर्त में किया जाता था।

14.समावर्तन संस्कार

गुरुकुल से विदाई लेने से पूर्व शिष्य का समावर्तन संस्कार होता था। इस संस्कार से पूर्व ब्रह्मचारी का केशान्त संस्कार होता था और फिर उसे स्नान कराया जाता था। यह स्नान समावर्तन संस्कार के तहत होता था। इसमें सुगन्धित पदार्थो एवं औषधादि युक्त जल से भरे हुए वेदी के उत्तर भाग में आठ घड़ों के जल से स्नान करने का विधान है। यह स्नान विशेष मन्त्रोच्चारण के साथ होता था। इसके बाद ब्रह्मचारी मेखला व दण्ड को छोड़ देता था जिसे यज्ञोपवीत के समय धारण कराया जाता था। इस संस्कार के बाद उसे विद्या स्नातक की उपाधि आचार्य देते थे। इस उपाधि से वह सगर्व गृहस्थाश्रम में प्रवेश करने का अधिकारी समझा जाता था। सुन्दर वस्त्र व आभूषण धारण करता था तथा आचार्यो एवं गुरुजनों से आशीर्वाद ग्रहण कर अपने घर के लिये विदा होता था।

15.विवाह संस्कार

हिन्दू धर्म में; सद्गृहस्थ की, परिवार निर्माण की जिम्मेदारी उठाने के योग्य शारीरिक, मानसिक परिपक्वता आ जाने पर युवक-युवतियों का विवाह संस्कार कराया जाता है । भारतीय संस्कृति के अनुसार विवाह कोई शारीरिक या सामाजिक अनुबन्ध मात्र नहीं हैं, यहाँ दाम्पत्य को एक श्रेष्ठ आध्यात्मिक साधना का भी रूप दिया गया है । इसलिए कहा गया है ... 'धन्यो गृहस्थाश्रमः' ...

16 . अंत्येष्टि संस्कार :

यह व्यक्ति के जीवन का आखिरी संस्कार है जिसे मृत्यु के बाद की जाती है। इस संस्कार में घर से अग्नि ले जाकर श्मशान घाट पर शव को चिता पर लेटा कर चिता प्रज्वलित की जाती है।

*पं•सुनील पाराशर शास्त्री*
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04/01/2026

*नव वर्ष की हार्दिक शुभ मंगल कामनाएं*
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03/01/2026

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*चन्द्रास्त: नही*
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*शक सम्वत: ~ १९४७ (विश्वावसु)*
*विक्रम सम्वत: ~ २०८२ (सिद्धार्थी)*
*युगाब्द (कलि संवत) ~ ५१२७*
*मास ~ पौष*
*पक्ष ~ शुक्ल*
*तिथि ~ #पूर्णिमा (१५:३२ से प्रतिपदा)*
*नक्षत्र ~ #आर्द्रा (१७:२७ से पुनर्वसु)*
*योग ~ ब्रह्म (०९:०५ से इन्द्र, २९:१६+ वैधृति)*
*प्रथम करण ~ बव (१५:३२ तक)*
*द्वितीय करण ~ बालव (२५:५८+ तक)*
🌿🌷🌿🌷🌿🕉️🌿🌷🌿🌷🌿
*🍀🍀॥गोचर ग्रहा:॥🍀🍀*
*सूर्य ~ धनु*
*चंद्र ~ मिथुन*
*मंगल ~ धनु (अस्त, पूर्व, मार्गी)*
*बुध ~ धनु (अस्त, पूर्व, मार्गी)*
*गुरु ~ मिथुन (उदित, पश्चिम, वक्री)*
*शुक्र ~ धनु (अस्त, पूर्व, मार्गी)*
*शनि ~ मीन (उदित, पूर्व, मार्गी)*
*राहु ~ कुम्भ*
*केतु ~ सिंह*

*शुभाशुभ मुहूर्त विचार*
=================
*अभिजित मुहूर्त ~ १२:१० से १२:५३*
*अमृत काल ~ ०८:३३ से ०९:५८*
*विजय मुहूर्त ~ १४:१९ से १५:०२*
*गोधूलि मुहूर्त ~ १७:५१ से १८:१८*
*सायाह्न सन्ध्या ~ १७:५४ से १९:१४*
*निशिता मुहूर्त ~ २४:०५+ से २४:५८+*
*ब्रह्म मुहूर्त ~ २९:२३+ से ३०:१६+*
*राहुकाल ~ ०९:५० से ११:११*
*गुलिक काल ~ ०७:०९ से ०८:२९*
*यमगण्ड ~ १३:५२ से १५:१३*
*दुर्मुहूर्त ~ ०७:०९ से ०७:५२*
*वर्ज्य ~ २८:१९+ से २९:४६+*
*आडल योग ~ १७:२७ से ३१:०९+*
*होमाहुति ~ चन्द्र*
*दिशा शूल ~ पूर्व*
*राहुकाल वास ~ पूर्व*
*अग्निवास ~ पृथ्वी*
*चन्द्रवास ~ पश्चिम*
*शिववास ~ श्मशान में (१८:३२ से गौरी के साथ)*

*चौघड़िया विचार*
================
*॥दिन का चौघड़िया॥*
*१ - काल २ - शुभ*
*३ - रोग ४ - उद्वेग*
*५ - चर ६ - लाभ*
*७ - अमृत ८ - काल*
*॥रात्रि का चौघड़िया॥*
*१ -लाभ २ - उद्वेग*
*३ - शुभ ४ - अमृत*
*५ - चर ६ - रोग*
*७ -काल ८ - लाभ*
*नोट~ दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।*

*शुभ यात्रा दिशा*
==============
*(पश्चिम) अदरक या उडद की दाल का सेवन करके यात्रा करें*

*विशेष तिथि*
===============
*पौष पूर्णिमा व्रत, शाकम्भरी पूर्णिमा, अरूद्र दर्शन, अन्वाधान, सावित्री बाई फुले जयंती आदि*

*आज जन्मे शिशुओं का नामकरण*
==================
*आज १७:२७ तक जन्मे शिशुओं के नाम आर्द्रा नक्षत्र के अनुसार क्रमशः (कु, घ, ङ) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है॥*

*उदय लग्न मुहूर्त*
================
*धनु - ०५:५३ से ०७:५८*
*मकर - ०७:५८ से ०९:४४*
*कुम्भ - ०९:४४ से ११:१७*
*मीन - ११:१७ से १२:४८*
*मेष - १२:४८ से १४:२८*
*वृषभ - १४:२८ से १६:२६*
*मिथुन - १६:२६ से १८:३९*
*कर्क - १८:३९ से २०:५६*
*सिंह - २०:५६ से २३:०८*
*कन्या - २३:०८ से २५:१८+*
*तुला - २५:१८+ से २७:३३+*
*वृश्चिक - २७:३३+ से २९:४९+*

*पञ्चक रहित मुहूर्त*
==================
*मृत्यु पञ्चक - ०७:०९ से ०७:५८*
*अग्नि पञ्चक - ०७:५८ से ०९:४४*
*शुभ मुहूर्त - ०९:४४ से ११:१७*
*रज पञ्चक - ११:१७ से १२:४८*
*अग्नि पञ्चक - १२:४८ से १४:२८*
*शुभ मुहूर्त - १४:२८ से १५:३२*
*रज पञ्चक - १५:३२ से १६:२६*
*शुभ मुहूर्त - १६:२६ से १७:२७*
*चोर पञ्चक - १७:२७ से १८:३९*
*शुभ मुहूर्त - १८:३९ से २०:५६*
*रोग पञ्चक - २०:५६ से २३:०८*
*शुभ मुहूर्त - २३:०८ से २५:१८+*
*मृत्यु पञ्चक - २५:१८+ से २७:३३+*
*अग्नि पञ्चक - २७:३३+ से २९:४९+*
*शुभ मुहूर्त - २९:४९+ से ३१:०९+*

*आज का राशिफल*
==============
*मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)*
*आज का दिन रोजगार के मामले में बढ़िया रहने वाला है। मामा पक्ष से आपको धन लाभ मिलता दिख रहा है। आपके परिवार में किसी सदस्य के विवाह में आ रही बाधा को लेकर भी अपने किसी सहयोगी से बातचीत कर सकते हैं। विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा के मार्ग प्रशस्त होंगे और आपकी मेहनत का आपको पूरा फल मिलेगा, जिससे काम करने में भी आपको आसानी होगी। आप अपने पेंडिंग कामों को भी समय से निपटाने की कोशिश करेंगे।*

*वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)*
*आज का दिन आपके लिए अनुकूल रहने वाला है। आपको अपने कामों को लेकर किसी दूसरे पर डिपेंड नहीं रहना है। आपको एक से अधिक सोर्सो से इनकम प्राप्त होगी और आपकी कोई मन की इच्छा पूरी होने से खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। भगवान के भक्ति में आपका खूब मन लगेगा, लेकिन संतान के मनमाने व्यवहार को लेकर आपको टेंशन हो सकती हैं, जिस पर आप पूरा फोकस बनाए रखें। यदि आपने अपने किसी सहयोगी को कोई जिम्मेदारी दी, तो उसमें ढील दे सकते हैं।*

*मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)*
*आज बिजनेस को लेकर आप कोई निर्णय ले सकते हैं, जो आपका लंबे समय से पेंडिंग पड़ा था और किसी डील को भी फाइनल करने का मौका मिलेगा। संतान की पढ़ाई लिखाई को लेकर कोई समस्या आ रही थी, तो आप उसे भी दूर करने की कोशिश करेंगे। आपको अपनी मेहनत का पूरा फल मिलेगा। किसी दूसरे व्यक्ति से आपको लेनदेन सोच समझकर करने की आवश्यकता है और भाई का आपको पूरा साथ मिलेगा।*

*कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)*
*आज का दिन आपके लिए मिश्रित रूप से फलदायक रहने वाला है। आपको अपने खर्चों का लेखा-जोखा रखना होगा। आप रहने सहन के स्तर में सुधार लाएंगे। नए साल में आपके खर्च बढ़ सकते हैं। आपकी अपने किसी मित्र से कहासुनी होने की संभावना है। आपको अपने आसपास रह रहे लोगों को पहचान कर चलना होगा। आप किसी अजनबी पर आंख बंद करके भरोसा ना करें, नहीं तो वह आपको धोखा दे सकता है।*

*सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)*
*आज का दिन आपके लिए इनकम को बढ़ाने वाला रहेगा। आपको किसी यात्रा पर जाना अच्छा रहेगा और धन धान्य में वृद्धि होगी। कोई सरकारी काम रुका हुआ था, तो उसकी भी पूरे होने की संभावना है। आपको अपने काम को लेकर पूरी मेहनत करनी होगी। संतान पक्ष की ओर से कोई खुशखबरी सुनने को मिलेगी। पैतृक संपत्ति संबंधित मामले में आपको जीत मिलेगी। भगवान की भक्ति में आपका खूब मन लगेगा। आपको आपका रुका हुआ धन भी मिलेगा।*

*कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)*
*आज का दिन आपके लिए कोर्ट कचहरी से संबंधित मामला में अच्छा रहने वाला है। इनकम में वृद्धि होगी और आपकी धार्मिक कामों के प्रति काफी रुचि बढेगी और प्रेम व सहयोग की भावना आपके मन में बनी रहेगी। आपको किसी विपरीत परिस्थिति में धैर्य बनाए रखना होगा। जो जातक सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे हैं, उन्हें कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। आप अपने किसी मित्र से बेवजह के विवाद में ना पड़े, नहीं तो इससे आपके आपसी रिश्ते खराब होंगे।*

*तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)*
*आज का दिन आपके लिए व्यापार के मामले में अच्छा रहने वाला है। आप जिस काम में हाथ डालेंगे, उसमें आपको अच्छी सफलता मिलेगी। परिवार में चल रही समस्याएं भी दूर होंगी। किसी को यदि आप कोई जिम्मेदारी देंगे, तो वह उसे पर खरे उतरेगी और माता-पिता आपको किसी काम को लेकर कोई सलाह दे सकते हैं। आपको अपने किसी विरोधी की बातों में आने से बचना होगा, नहीं तो इससे आपका कोई भारी नुकसान हो सकता है।*

*वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)*
*आज वाहन की खराबी के कारण खर्चा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य को लेकर भी आपको थोड़ा सा सतर्क रहने की आवश्यकता है। जीवन साथी और आपके बीच प्रेम भरपूर रहेगा। आपको किसी दूसरे के मामले में बेवजह बोलने से बचना होगा और आप खानपान पर पूरा ध्यान दें। संतान को लेकर आपको कोई फैसला लेना पड़ सकता है। जिससे नौकरी में आसानी होगी और वह कहीं बाहर भी जा सकते हैं। आपको किसी पुराने मित्र से लंबे समय बाद मिलने का मौका मिलेगा।*

*धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)*
*आज का दिन आपके लिए तरक्की की राह पर आगे बढ़ाने के लिए रहेगा। व्यापार में आपको अच्छी सफलता मिलेगी और आपके कुछ नए मित्र बनेंगे। नए साल में आपको कोई सरप्राइज गिफ्ट मिल सकता है। जीवनसाथी की सेहत में यदि कोई समस्या आएगी, तो वह भी दूर होगी और आप किसी नई नौकरी के लिए अप्लाई कर सकते हैं। किसी नई संपत्ति की खरीदारी करना आपके लिए अच्छा रहेगा। आपको अपनी इनकम को ध्यान में रखकर व्यय करना होगा।

*मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)*
*आज का दिन नौकरी में कार्यरत लोगों को थोड़ा सावधान रहना होगा, क्योंकि आपके ऊपर काम का दबाव अधिक रहेगा और कोई पुराना लेनदेन आपके लिए समस्या बन सकता है और माता-पिता के आशीर्वाद से आपका कोई रुका हुआ काम पूरा होगा। वरिष्ठ सदस्यों से आपको कोई बात सोच समझ कर बोलनी होगी। आपकी कुछ नया करने की कोशिश रंग लाएगी और आपको अपने किसी पुराने मित्र से लंबे समय बाद मिलकर खुशी होगी।*

*कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)*
*आज का दिन आपके लिए बिजनेस के मामले में बढ़िया रहने वाला है और आपको घूमने फिरने के दौरान कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। किसी दूसरे के मामले में आपको बोलने से बचना होगा। विद्यार्थियों की कुछ नया करने की इच्छा जागृत हो सकती हैं और आप किसी परीक्षा के तैयारी में पूरी मेहनत से जुटेंगे। आपको अपने पिताजी से कोई बात समझ कर बोलनी होगी, जो जातक सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे हैं, उन्हे कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है।*

*मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)*
*आज का दिन आपके लिए किसी नए घर की खरीदारी के लिए अच्छा रहेगा और वैवाहिक जीवन में प्रेम व सहयोग बना रहेगा। परिवार में यदि सदस्यों में लड़ाई झगड़ा चल रहा था, तो वह भी दुर होगा और माताजी से आप किसी जरूरी काम को लेकर बातचीत कर सकते हैं। आप कहीं घूमने फिरने जाएं, तो वहां आप अपने कीमती सामानों की सुरक्षा अवश्य करें और बिजनेस को लेकर आप कोई जरूरी फैसला लेंगे, जिसमें आपको अपने पार्टनर से राय अवश्य लेनी होगी।
#𝕛𝕪𝕠𝕥𝕚𝕤𝕙 #𝕗𝕓𝕣𝕖𝕖𝕝𝕤𝕗𝕪𝕡シ゚𝕧𝕚𝕣𝕒𝕝 #𝕙𝕚𝕘𝕙𝕝𝕚𝕘𝕙𝕥𝕤 @शिवशक्ति इलेक्ट्रोहोम्योपैंथिक क्लिनिक राठ Electro Homeopathic Clinic Rath @अखंड विश्वकर्मा ब्राह्मण महासभा - संपूर्ण भारत Jyotish Centre Sunil Parashar Singh

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