03/01/2026
सीटें भी नही भरी... क्योकि ...
1. स्टेट फार्मेसी काउंसिल मप्र को घूसख़ोरी से फुर्सत नही.. छात्रों के लिए कुछ किया है तो सिर्फ घसीटकर पीटने वाला कृत्य ही महत्वपूर्ण उपलब्धि...
2 फार्मेसी कॉलेजो को फार्मेसी रोजगार से कोई मतलब नही.... अपने ही पढ़ाये छात्रों को मात्र 10 -12 हजार रुपये में टीचिंग की जॉब वो भी सिर्फ कुछ ही को मिल पाती है
3. मैथ्स वाले कम से कम 30 प्रतिशत छात्र अब फार्मेसी का कोर्स नही करना चाहते। मैथ्स वालो छात्रों के लिए न उनके कॉलेज ने कुछ किया और न ही काउंसिल ने कुछ किया
4. कोर्स करने के बाद फार्मासिस्ट का रजिस्ट्रेशन नही हो पा रहा है क्योंकि घूसखोरी के कारण ऑनलाइन प्रक्रिया को जटिल बनाया गया है कई लोग कोर्स कंप्लीट करने के बाद सिर्फ रजिस्ट्रेशन न होने की वजह से नौकरी का आवेदन नही कर पाए।
5. एसोसिएशन के प्रदेश मंत्री लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी भ्रष्ट काउंसिल द्वारा रजिस्ट्रेशन रिनुअल न किये जाने की वजह से दतिया मेडिकल कॉलेज से बाहर किये गए थे इससे सम्बंधित प्रकाशित ख़बरो ने फील्ड में काफी असर किया विशेषकर जबलपुर और ग्वालियर संभाग के 12वी कक्षा उत्तीर्ण करने वालो कम रुचि दिखाई..55 मेसे लगभग 21 जिलो के छात्रों में फार्मेसी कोर्स के प्रति नकारात्मक रुख है।
6. काउंसिल की फार्मेसी अधिनियमों का पालन कराने के लिए सरकार पर दबाव डालने में विफल नतीजन ऐसी पॉलिसी बन रही है जिससे फार्मेसी शिक्षा अनिवार्यता खत्म, 10287 उप स्वास्थ्य केंद्र में बिना फार्मासिस्ट 126 दवाएं और 20 मेडिकल सामाग्री का वितरण कर हो रहा खुलेआम उल्लंघन ।
7. मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में 65 प्रतिशत लोग फार्मेसी बैकग्राउण्ड से नही... QC, HR, और मार्केटिंग में नॉन फार्मेसी वालो ने किया कब्जा... बचे 35 प्रतिशत के भाई भतीजावाद से ही नौकरी मिल पा रही है।
कई और अन्य महत्वपूर्ण कारण भी है
तो क्यों कोई फार्मेसी कोर्स करेगा ।