10/12/2025
Don't Live in Pain...!! सर्दियों में शरीर के अंदर 3 बड़ी घटनाएं होती हैं जो दर्द का कारण बनती हैं:
1. नसों का सिकुड़ना (Vasoconstriction) - "सप्लाई कट जाना"
वैज्ञानिक कारण: ठंड से बचने के लिए शरीर अपनी गर्मी (Heat) को बचाना चाहता है। इसके लिए वो स्किन और मांसपेशियों की नसों को सिकोड़ देता है।
आम भाषा में:
मान लीजिये आपकी कमर की मांसपेशियां एक "फैक्ट्री" हैं और खून की नसें "सड़क" हैं।
गर्मियों में सड़क चौड़ी होती है, तो फैक्ट्री (मसल्स) को ऑक्सीजन और खाना (Nutrients) भरपूर मिलता है।
सर्दियों में ठंड की वजह से यह सड़क (नसें) पतली हो जाती हैं।
नतीजा: फैक्ट्री (मसल्स) तक ऑक्सीजन कम पहुँचती है। जब सेल को ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो वो 'लैक्टिक एसिड' (कचरा) बनाना शुरू कर देती है। यही एसिड अंदर जलन और दर्द पैदा करता है।
2. जोड़ों का ग्रीस जमना (Viscosity increase) - "नारियल तेल जैसा हाल"
वैज्ञानिक कारण: हमारे जोड़ों और डिस्क के बीच में एक फ्लूइड होता है (Synovial Fluid) जो लुब्रिकेंट का काम करता है। ठंड में इसका गाढ़ापन (Viscosity) बढ़ जाता है।
आम भाषा में:
जैसे सर्दियों में नारियल का तेल या घी डिब्बे में जम जाता है, ठीक वैसे ही आपकी रीढ़ की हड्डी के जोड़ों के बीच का फ्लूइड (पानी/ग्रीस) गाढ़ा और चिपचिपा हो जाता है।
नतीजा: जोड़ों में चिकनाई कम हो जाती है और घर्षण (Friction) बढ़ जाता है। इसलिए जब आप सुबह उठते हैं, तो कमर "जकड़ी हुई" (Stiff) महसूस होती है।
3. वायुमंडलीय दबाव (Barometric Pressure) - "गुब्बारे का फूलना"
वैज्ञानिक कारण: सर्दियों में हवा का दबाव (Pressure) कम हो जाता है। फिजिक्स का नियम है कि जब बाहर का दबाव कम होता है, तो अंदर की चीजें फैलती हैं।
आम भाषा में:
हमारी मांसपेशियों और जोड़ों के टिशू (Tissues) एक गुब्बारे की तरह होते हैं।
जब बाहर ठंड और दबाव कम होता है, तो शरीर के अंदर की सूजन वाले टिशू (Inflamed tissues) हल्के से फैल (Expand) जाते हैं।
नतीजा: ये फैले हुए टिशू पास की नसों को दबाने लगते हैं। जिनके घुटने या कमर में पहले से चोट है, उन्हें यह दबाव ज्यादा महसूस होता है और पुराना दर्द फिर से जाग जाता है।
एक लाइन में निष्कर्ष (Conclusion for Patients):
"सर्दियों में दर्द इसलिए होता है क्योंकि नसें सिकुड़ जाती हैं (कम खून), ग्रीस जम जाता है (जकड़न) और पुरानी सूजन फैल जाती है। इसका इलाज सिर्फ रजाई में घुसना नहीं, बल्कि मूवमेंट (हलचल) और सिकाई है ताकि खून का दौरा फिर से शुरू हो सके।"