Dr. Rakesh Patel

Dr. Rakesh Patel MBBS, MD MEDICINE
DIABETOLOGIST

गांवों मे भूत ...    बचपन  मे गांवों मे ज़ितनी आबादी  इंसानो और जानवरों की होती उतनी ही लगभग य़ा उससे थोड़ी अधिक ही भूतों ...
12/04/2026

गांवों मे भूत ...

बचपन मे गांवों मे ज़ितनी आबादी इंसानो और जानवरों की होती उतनी ही लगभग य़ा उससे थोड़ी अधिक ही भूतों ,प्रेतों, देवी देवताओं और दानवों की भी होती थी ।
गांव का कोई घर , कोई बागीचा, कोई तालाब य़ा कोई सुनसान जगह ऐसी नही थी जहां उनकी उपस्थिति दर्ज ना हो। किसी के बीमार होने का पहला और बुज़ुर्गों के हिसाब से एकमात्र कारण यही लोग थे ।
बचपन मे गर्मियों के दिनो मे जब आँगन मे खाट डालकर सब सोते तो कुछ बूढे और जानकार समझे जाने वाले बुजुर्ग भूतों की ऐसी ऐसी डरावनी और अपनी बहादुरी की कहानियां सुनाते की हमारे रोंगटे खडे हो जाते ।
एक बार एक बब्बा ने बताया - दादू का बताई,
हम लोग - बताई बबा!
एक बेरा घुप अधियारी रात रहय , आ अहीमक आंधी चलय , ता हम सोचेन के हमार आमा सब आन बिन लेईही ; ए से रातिन हम बगएचा पहूच गयेन ।
हम का दिखेन !!!
हम लोग - का?
एक ठे दुय पोर्सा ( लगभग 12 फीट) के आदमी, निछक्क उज्जर ( सफेद ) ओंन्ना (कपड़ा) पहिने , आये के खडा होईगे !!! हम ता जानिन गयेन के आहीं ।
हम लोग - के बबा ?
बबा - अरे दानू मामा

हम लोग - (आश्चर्य से, हम लोगो की हालत खराब हो रही )फेर का
भा ?
बबा - फेर हम तुरंतय दोहराबय लागेन -
तू मामा हम भैने !
तू मामा हम भैने !
तू मामा हम भैने !

हम लोग- ( उस दिन हम लोगों ने ए अचूक विद्या सीखी की दानवों से हमारा मूलतह रिश्ता मामा भांजे का है )

फ़ेर?

फ़ेर, फ़ेर ऊ कहिन- या समय हमार पचेन के आय, अब दूबारा एय ना ।
हम फेर घरे आय गयेन ।

ऐसे ही कितनी कहानियां आप सब ने सुनी होंगी
आज तबीयत खराब थी तो अचानक कुछ याद आ गया ..

indian  nutritional  journal  मे मेरा एक आर्टिकल  पब्लिश  हुआ  है ....      जल्दी  ही DIABETES (मधुमेह )   पर मेरी एक कि...
08/04/2026

indian nutritional journal मे मेरा एक आर्टिकल पब्लिश हुआ है ....

जल्दी ही DIABETES (मधुमेह ) पर मेरी एक किताब आ रही है ज़िसमे बघेल खण्ड के खानो के शुगर लेबल की भी चर्चा है...

युद्ध ....        दुनिया मे हर कोई युद्ध मे है , कुछ अंदर से तो कुछ बाहर से लड़  रहे हैं । ज्यादातर का   युद्ध खुद के सुध...
29/03/2026

युद्ध ....

दुनिया मे हर कोई युद्ध मे है , कुछ अंदर से तो कुछ बाहर से लड़ रहे हैं । ज्यादातर का युद्ध खुद के सुधार को कम , दूसरों के सुधार को ज्यादा आतुर है ।
बचपन के युद्ध भी कितने मासूम और अपनी तरह की विराटता से सुसज्जित थे, लगता था हमसे बड़ा कोई योद्धा हो नही सकता , दुनिया को बस हम ही पलट सकते हैं । और वो दुनिया थी मोहल्ले य़ा स्कूल के 4 दोस्त । बचपन के कुछ ही युद्ध याद हैं , ज्यादातर लड़ाइयां तो जेहन मे दर्ज ही नही हैं अब ।
मेरे बचपन का एक दोस्त था सूर्य प्रताप सिंह ( सूर्या ) । जब मैं कक्षा चौथी ( सरस्वती शिशु मंदिर बैढ़न) मे था तब वो मेरे साथ आया , उसके पापा पुलिस मे थे । वो थोड़ा तेजतार्रर था ( एक तो पढ़ने मे होशियार और दूसरा पापा पुलिस मे)।
मै अपने कक्षा का मानीटर था और अपने को सबसे होशियार समझता था। वो , मै और मनीष शर्मा ( एक और दोस्त जो साडा कालोनी से आता था, आजकल दुबई मे है ) हम तीनों दोस्त पढ़ने मे लगभग एक जैसे थे , पर अव्वल रहने के लिये मै प्रतिबद्ध था अंदर से भी बाहर से भी ।
मनीष के पापा ( जो कि सीनेटरी इन्सपेक्टर थे) उसको स्कूटर से छोडने आते, मै पैदल आता और सूर्या भी अक्सर पैदल आता य़ा उसके पापा सायकिल से छोड देते। उसका घर थाने के पास था , जो की स्कूल के काफी नजदीक था , मै बिलौंजी मे रहता था करीब 2km दूर । रीवा से जाने मे पहले साडा कालोनी, फिर बिलौंजी, फिर थाना फिर स्कूल पड़ता था ।
छठवीं (6th class ) मे मेरे 92% आने पर मेरे पापा ने मुझे Avon की साइकिल दिला दी थी , अब मै और सूर्या उस सायकल से बैढ़न के आसपास के 30km के एरिया मे मौका मिलते ही देशाटन पर निकल पड़ते । हम दोनो और हमारा परिवार इतने घुलमिल गये की वो और मै दोनो मे से किसी भी घर मे रुक जाते, खाते पीते और पढते। मै अपने घर से उसके घर जाता और वहां से उसको आगे डंडे पर बैठाता( करियर मे बस्ता रहता ) फिर हम साथ मे स्कूल जाते ।
एक बार हम दोनो मे युद्ध हो गया , बात इतनी विशाल थी की ठीक से याद नही किस बात पर , पर युध तो हुआ। युद्ध हम दोनो के बीच था , तो इसमें घर को सामिल नही किया जा सकता था; झापड पड़ने का खतरा था , उसकी तो मम्मी भी कभी कभी पीट देती थी , मेरे घर मे ए खतरा सिर्फ पिता जी से था।
तो हुआ ए की सुबह जब स्कूल जाने की बारी आई तो मै अपने सबसे करीबी दुश्मन से कैसे बात करूँ और कैसे उसको मै अपनी प्यारी सायकल प़र बैठाऊ , अभी कल ही तो युद्ध हुआ है और उसने कोई युद्धविराम की भी घोषणा नही की है, पर अगर घर वालों को पता चला तो मुझे ही सरेंडर करना पडेगा ।
खैर, मै उसके घर के सामने सायकल खड़ी किया , वो बिना कुछ बोले चुपचाप डंडे पर आकर बैठ गया , हम दोनो स्कूल आ गये, डंडे से उतरते ही फिर दुश्मन। ए शीतयुद्ध कई दिनो तक चला। अब आप मेरी हालत सोच ही सकते हैं की एक कट्टर दुश्मन को अपनी सायकल (जो मुझे आज की fortuner से कहीं ज्यादा प्यारी थी) मे बैठाकर मेरी छाती मे कितना ही दर्द हुआ होगा ।
कुछ दिनो मे ही घर बालों को शक हुआ क्युकी आजकल एक दुसरे के घर जाना कम हुआ, ताकी घर वालों के सामने कहीं बात ना करनी पड़ जाय तो इसे समझौता और हार माना जा सकता है, साथ मे क्रिकेट नही , साथ मे घुमना नही । तो सूर्या की मम्मी ने मुझसे पूँछा - का बात है दादू ?
मैं- का बात है , कुछ नहीं, कोई बात नही !! ( मै थोड़ा असहज हुआ)
मम्मी- (उनको भी मै मम्मी ही कहता था ) ता बोलत चालत काहे नाई आय ?
मैं- .........मै तो बोल रहा हुं
मम्मी- ठीक है पापा से संझा बताईथे
मै - नही नही , पापा से बताने की कोई जरूरत ही नही है , कोई बात ही नही है , चलो सूर्या ( मन मारके ) ।
मम्मी- कुछ खाबे
मैं- नही
मम्मी- ऐतवार का घरे अउब , अम्मा का बताई देहा ।
मैं- जी
हम दोनो के प्राण सूख गये , रविवार डेड लाइन थी , किसी भी कीमत पर रविवार के पहले समझौते पर हस्ताक्षर जरूरी थे वरना मोहल्ले भर के सामने इज्ज़त का साम्राज्य ढहने का खतरा था ।
सूर्या - चलो यार आज स्कूल के बाद क्रिकेट खेलेंगे और आज सायकल मै चलाऊंगा।
मम्मी- आँखे उपर की , एक बार मेरी तरफ , एक बार सूर्या की तरफ देखा ,
युद्ध विराम !!

सूर्या आजकल रायपुर मे है , हम दोनो कभी कभी मिलते हैं , परिवार के साथ , प्रेम को आविरल धारा आज भी हमारी रगों मे बहती है ...
काश की सभी युद्धों का अंत ऐसा ही हो ...

27/03/2026
ईद का त्यौहार आप सभी के जीवन में खुशहाली, स्वास्थ्य, समृद्धि और अमन-चैन लेकर आए ।🌙 ईद मुबारक!
21/03/2026

ईद का त्यौहार आप सभी के जीवन में खुशहाली, स्वास्थ्य, समृद्धि और अमन-चैन लेकर आए ।

🌙 ईद मुबारक!

पुणे  यात्रा...        2009 मे  एम  डी  मेडिसिन  के प्रवेश के समय  हम 11 लोगो मे 1 लड़की  और 10 लड़के  थे ।  हम तब  ए सोच...
17/03/2026

पुणे यात्रा...

2009 मे एम डी मेडिसिन के प्रवेश के समय हम 11 लोगो मे 1 लड़की और 10 लड़के थे । हम तब ए सोचते थे लड़की बेचारी मेडिसिन विभाग मे अकेली होगी तो हमे उसका भी काम करना पड़ सकता है , लेकिन ज्वाइनिंग के बाद पता चला की वो इतनी मेहनती और कर्मठ थी की हममे से कइयों के बराबर अकेले काम कर लेती थी । एक बार रात 3 बजे मै और वो वार्ड का काम खत्म करके आये और हमे सुबह तक सभी फाइलों मे डेथ सम्मरी (death summary ) कम्प्लीट करनी थी , हम सुबह 6am से काम कर रहे थे , मैने कहा यार मुझसे अब नही हो पाएगा , वो बोली तू सोजा मै तो कम्प्लीट करके ही सोऊंगी ।
तो स्नेहल से वर्षों बाद पुणे मे मिला , आज वो एक बहुत ही सफल और सम्मानित nephrologist ( किडनी रोग विशेषज्ञ) है पुणे में। मुझे कंधे की एक समस्या के लिये छोटा सा procedure कराना था , दिनभर अपना काम छोड़कर उसने मेरा साथ दिया । अपने घर खाना खिलाया।

मैं INTERNATIONAL DIABETES SUMMIT मे हिस्सा लेने के लिये वाया इंदौर पुणे गया था । इंदौर मे अपने PMT की तैयारी के दिनो के साथी सचिन से मिला , पुणे मे मेरे सीनियर डॉ कुंदन खामकर सर से मुलाकात हुई और मेरा एक प्यारा जूनियर विचार निगम मिल गया । उसके परिवार के साथ खाना खाया और उसने पुणे की फेमस भाखरवाड़ी भी दी ।
पुणे मे डॉ आखिलेश सिह (सतना) के साथ ऐतिहासिक शानिवारवाड़ा भी देखा।

कहीं बाहर जाकर आपको इतने प्यारे लोग मिल जायें तो यात्रा वाकई बहुत सफल मानी जाएगी।
DIABETES मे बहुत से देशी और विदेशी लोगो के शोध और व्याख्यान भी सुनने और सीखने को मिले .... so it was wonderful.

Diabetes  मे सबसे ज्यादा खतरा kidneys  को होता है सभी शुगर के मरीज साल मे 1 बार और अगार diabetes  5 साल से ज्यादा है तो ...
12/03/2026

Diabetes मे सबसे ज्यादा खतरा kidneys को होता है
सभी शुगर के मरीज साल मे 1 बार और अगार diabetes 5 साल से ज्यादा है तो हर 6 माह मे , अगर शुगर बिलकुल कंट्रोल नही है और kidneys मे कुछ प्रारंभिक दिक्कत है तो हर 3 माह मे kidney की जांच जरूर कराइये ...👏

मै और मेरे मरीज ...    एक दिन  एक सांस  का मरीज दिखाने आया , बहुत ज्यादा जोर जोर से हांफ रहा था , फेफड़ा धमनी की तरह बाह...
08/03/2026

मै और मेरे मरीज ...

एक दिन एक सांस का मरीज दिखाने आया , बहुत ज्यादा जोर जोर से हांफ रहा था , फेफड़ा धमनी की तरह बाहर से ही चलता दिख रहा था. सारी पसलियां बारी बारी से कराह रही थी l
मैं- क्या हो गया?
मरीज - अरे डॉक्टर साहब, ज़िव जाथ है! मान लेई के सांसिन नही ओबाय , आजू लागथ है बचब ना ।

मै - घाबराओ नही , कुछ नही होगा , कब से तकलीफ है ?
मरीज - ओइसन ता दसन साल होईगा पै दुई रोज से उपर के सांस उपर नीचे के नीचे रह जाथ ही , ई दूनव जने लाद के ले आये हैं ।

उसके साथ 2 और आदमी थे , कच्चे मुरझाए हुए आम की तरह (अमकोलीया ) उनका चेहरा था , गाल चेहरे की हड्डियों से इतना अन्दर घुस गये थे जैसे चूसे हुए आम।

मरीज को देखकर ही ए कहा जा सकता था की वो नशा कारता होगा मैने फिर भी पूँछा - कुछ नशा करते हैं ?
बीड़ी सिगरेट तो नहीं पीते?
नही सर बीड़ी, सिगरेट ता बेलकुल नही पीत , चाहय ता एंसे पचेन से पूछ लेई , अब अपना से झूठ थोडव बोलब ।
पास खडा आदमी- अपना से ता सबय बताये परी नही ता इलाज कस के सही होई । बीड़ी ता बेलकुल नहीं पियां ।

मरीज के फेफड़े की जांच से ए जाहिर था की उसे धुएँ की वज़ह से फेफड़ा खराब हो गया है , मैने फिर पूँछा - किसी फैक्ट्री में काम करते हो?
मरीज - नही साहब, गरीब किसान हैन ।
मुझे यकीन नही हुआ, मैने कहा - आपके घर से कोई नही आया ?
मरीज - अरे साहाब, अब अपना ता सबय जानिथे , आज के केखर होत है , भाई पट्टिदार ता ज़रतय हां , ई दूनव भ्यपहा मान लेई सबएसे सगे हां ।

मैने कहा ठीक है !!
तभी एक महिला गोली की तरह घुसी , लगभग चीख रही थी ।
बोली - अपना के गार्ड घुस इन नही देत रहें!

मैं- आप कौन हैं ?
महिला- हम एनके घरे के आहेन ( पत्नी)।

ई तीनव दिनभर और रातभर गांजा पियत हां ।
मानलेई गिल्लियान आयन है ,ए आदमी का कहत कहत!!

मैं- 😳😡😡😡 मरीज की तरफ देखकर 😌😳😳😳
मरीज - अपना बीड़ी भर पूछेन्तय

मैने फिर उनके साथियों की तरफ देखा
वो कुटिल मुद्रा मे थे
मुझे माहाभारत के कृष्ण , द्रोणाचार्य, युधिष्ठिर और अश्वत्थामा की याद आ गयी।
मरीज तो खैर ठीक है , पर अब मै सारे नाशो का नाम बारी बारी से लेकर पूछता हुं - बीड़ी, सिगरेट, गांजा, शराब , पान तंबाखू, कोरेक्स ......

04/03/2026

होली ...

बेटी और मैं....फिर ए जहां रंगीन है... Happy holi
04/03/2026

बेटी और मैं....फिर ए जहां रंगीन है...
Happy holi

होली की ढ़ेरो शुभकामनाएं दोस्तों । प्रेम के इस त्योहार मे आप हमेशा खुश रहे , मस्त रहें और प्रेम के रंग से भरे रहें ।  कभी...
04/03/2026

होली की ढ़ेरो शुभकामनाएं दोस्तों । प्रेम के इस त्योहार मे आप हमेशा खुश रहे , मस्त रहें और प्रेम के रंग से भरे रहें । कभी किसी तरह की नफरत आपके जेहन को मलीन ना करने पाये ।

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