08/03/2026
मै और मेरे मरीज ...
एक दिन एक सांस का मरीज दिखाने आया , बहुत ज्यादा जोर जोर से हांफ रहा था , फेफड़ा धमनी की तरह बाहर से ही चलता दिख रहा था. सारी पसलियां बारी बारी से कराह रही थी l
मैं- क्या हो गया?
मरीज - अरे डॉक्टर साहब, ज़िव जाथ है! मान लेई के सांसिन नही ओबाय , आजू लागथ है बचब ना ।
मै - घाबराओ नही , कुछ नही होगा , कब से तकलीफ है ?
मरीज - ओइसन ता दसन साल होईगा पै दुई रोज से उपर के सांस उपर नीचे के नीचे रह जाथ ही , ई दूनव जने लाद के ले आये हैं ।
उसके साथ 2 और आदमी थे , कच्चे मुरझाए हुए आम की तरह (अमकोलीया ) उनका चेहरा था , गाल चेहरे की हड्डियों से इतना अन्दर घुस गये थे जैसे चूसे हुए आम।
मरीज को देखकर ही ए कहा जा सकता था की वो नशा कारता होगा मैने फिर भी पूँछा - कुछ नशा करते हैं ?
बीड़ी सिगरेट तो नहीं पीते?
नही सर बीड़ी, सिगरेट ता बेलकुल नही पीत , चाहय ता एंसे पचेन से पूछ लेई , अब अपना से झूठ थोडव बोलब ।
पास खडा आदमी- अपना से ता सबय बताये परी नही ता इलाज कस के सही होई । बीड़ी ता बेलकुल नहीं पियां ।
मरीज के फेफड़े की जांच से ए जाहिर था की उसे धुएँ की वज़ह से फेफड़ा खराब हो गया है , मैने फिर पूँछा - किसी फैक्ट्री में काम करते हो?
मरीज - नही साहब, गरीब किसान हैन ।
मुझे यकीन नही हुआ, मैने कहा - आपके घर से कोई नही आया ?
मरीज - अरे साहाब, अब अपना ता सबय जानिथे , आज के केखर होत है , भाई पट्टिदार ता ज़रतय हां , ई दूनव भ्यपहा मान लेई सबएसे सगे हां ।
मैने कहा ठीक है !!
तभी एक महिला गोली की तरह घुसी , लगभग चीख रही थी ।
बोली - अपना के गार्ड घुस इन नही देत रहें!
मैं- आप कौन हैं ?
महिला- हम एनके घरे के आहेन ( पत्नी)।
ई तीनव दिनभर और रातभर गांजा पियत हां ।
मानलेई गिल्लियान आयन है ,ए आदमी का कहत कहत!!
मैं- 😳😡😡😡 मरीज की तरफ देखकर 😌😳😳😳
मरीज - अपना बीड़ी भर पूछेन्तय
मैने फिर उनके साथियों की तरफ देखा
वो कुटिल मुद्रा मे थे
मुझे माहाभारत के कृष्ण , द्रोणाचार्य, युधिष्ठिर और अश्वत्थामा की याद आ गयी।
मरीज तो खैर ठीक है , पर अब मै सारे नाशो का नाम बारी बारी से लेकर पूछता हुं - बीड़ी, सिगरेट, गांजा, शराब , पान तंबाखू, कोरेक्स ......