Dr.Aakash kumar Srivastava

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32×27 mm का सिस्ट disolve हो गया सिर्फ 25 दिन मे
06/12/2025

32×27 mm का सिस्ट disolve हो गया सिर्फ 25 दिन मे

06/12/2025
05/12/2025

ओलिगोस्पर्मिया (Oligospermia) का अर्थ है शुक्राणुओं की संख्या में कमी। यह एक मेडिकल स्थिति है जिसमें प्रति मिलीलीटर वीर्य में \(15\) मिलियन से कम शुक्राणु होते हैं। इसे अल्पशुक्राणुता भी कहा जाता है। ओलिगोस्पर्मिया के बारे में संक्षिप्त विवरण: यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या सामान्य से कम होती है, जिससे गर्भधारण करने की संभावना कम हो जाती है। सामान्य शुक्राणु संख्या: सामान्यतः, वीर्य के प्रति मिलीलीटर में \(15\) मिलियन से \(200\) मिलियन से अधिक शुक्राणु होते हैं। गंभीर ओलिगोस्पर्मिया: इस स्थिति में प्रति मिलीलीटर वीर्य में \(5\) मिलियन से भी कम शुक्राणु हो सकते हैं। कारण: ओलिगोस्पर्मिया के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि नशीली दवाओं का सेवन, कुछ दवाओं का साइड इफ़ेक्ट, शराब और सिगरेट का सेवन, तनाव और मोटापा। लक्षण: ओलिगोस्पर्मिया के लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन बांझपन इसका मुख्य संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में, शुक्राणुओं की गति और गुणवत्ता में भी कमी हो सकती है।

ओलिगोस्पर्मिया (Oligospermia) का मतलब है कम शुक्राणुओं की संख्या या अल्पशुक्राणुता। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुषों क...
05/11/2025

ओलिगोस्पर्मिया (Oligospermia) का मतलब है कम शुक्राणुओं की संख्या या अल्पशुक्राणुता। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या सामान्य से कम होती है, आमतौर पर प्रति मिलीलीटर वीर्य में \(15\) मिलियन से कम शुक्राणु। इससे गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है। ओलिगोस्पर्मिया क्या है? यह एक चिकित्सीय शब्द है जो पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या में कमी को दर्शाता है। एक सामान्य वीर्य में प्रति मिलीलीटर \(15\) मिलियन से \(200\) मिलियन शुक्राणु होते हैं, जबकि ओलिगोस्पर्मिया में यह संख्या \(15\) मिलियन से कम होती है। गंभीर ओलिगोस्पर्मिया का मतलब है कि प्रति मिलीलीटर वीर्य में \(5\) मिलियन से भी कम शुक्राणु हैं। इसके कारण क्या हैं? संक्रमण: कुछ संक्रमण शुक्राणु उत्पादन और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। हार्मोनल असंतुलन: हार्मोनल समस्याएं प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। पर्यावरणीय कारण: औद्योगिक रसायनों, कीटनाशकों, भारी धातुओं और विकिरण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से भी शुक्राणु की संख्या कम हो सकती है। जीवनशैली: मोटापा, अत्यधिक शराब का सेवन, और कुछ दवाओं का उपयोग भी एक कारण हो सकता है। आनुवंशिक समस्याएं: कुछ आनुवंशिक स्थितियां भी इसका कारण बन सकती हैं। यह गर्भधारण को कैसे प्रभावित करता है? कम शुक्राणुओं की संख्या का मतलब यह नहीं है कि गर्भधारण संभव नहीं है, लेकिन यह प्रक्रिया अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कम शुक्राणु होने से शुक्राणुओं को अंडे तक पहुंचने और उसे निषेचित करने में कठिनाई हो सकती है।

20/10/2025

Happy dipawali all off u

17/09/2025

हिंदी में, PID का मतलब पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज (Pelvic Inflammatory Disease) है. यह महिलाओं के प्रजनन तंत्र का एक संक्रमण है, जो गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय को प्रभावित करता है. यह आमतौर पर योनि से फैले बैक्टीरिया के कारण होता है, खासकर यौन संचारित संक्रमणों (STIs) जैसे गोनोरिया या क्लैमाइडिया से, और अगर इसका इलाज न किया जाए तो यह बांझपन का कारण बन सकता है.
PID क्या है?
यह महिलाओं के प्रजनन अंगों का एक संक्रमण है.
इसमें गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय शामिल होते हैं.
यह योनि से बैक्टीरिया के फैलने के कारण होता है.
मुख्य कारण
गोनोरिया और क्लैमाइडिया जैसे यौन संचारित संक्रमण (STIs).
योनि में सामान्य रूप से पाए जाने वाले बैक्टीरिया का फैलना.
संभावित लक्षण पेट के निचले हिस्से (श्रोणि) में दर्द, असामान्य योनि स्राव (रिसाव), अनियमित मासिक धर्म चक्र.
जटिलताएँ
प्रजनन पथ में स्थायी क्षति.
बांझपन (गर्भवती होने में कठिनाई).
अस्थानिक गर्भावस्था (जब निषेचित अंडा गर्भाशय के बाहर विकसित होता है).
बचाव
सुरक्षित यौन संबंध बनाए रखना.
कंडोम का सही और लगातार उपयोग करना.
STIs के लिए नियमित जांच और उपचार करवाना.

13/06/2025

पीसीओडी (PCOD), जिसका पूरा नाम है पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज (Polycystic O***y Disease), एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिलाओं के अंडाशय (ओवरीज) में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं. यह मुख्य रूप से हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है, जिससे मासिक धर्म चक्र अनियमित हो जाता है और अन्य लक्षण भी दिखाई देते हैं.
पीसीओडी के मुख्य लक्षण:
अनियमित मासिक धर्म:
मासिक धर्म का चक्र अनियमित हो जाता है, कभी-कभी पीरियड्स बहुत देर से आते हैं या बहुत ही कम समय के लिए आते हैं.
वजन बढ़ना:
पीसीओडी से महिलाओं का वजन बढ़ सकता है, खासकर पेट के आसपास.
मुंहासे:
पीसीओडी से चेहरे और शरीर पर मुंहासे हो सकते हैं.
अतिरिक्त बाल:
चेहरे और शरीर पर अतिरिक्त बाल उग सकते हैं, खासकर उन जगहों पर जहां बाल आमतौर पर नहीं उगते हैं.
बांझपन:
पीसीओडी महिलाओं में बांझपन का एक आम कारण हो सकता है, क्योंकि अंडाशय में अंडे रिलीज नहीं हो पाते हैं.
पीसीओडी के कारण:
पीसीओडी के सटीक कारण अभी तक पूरी तरह से ज्ञात नहीं हैं, लेकिन यह माना जाता है कि यह हार्मोनल असंतुलन, आनुवंशिकता और जीवनशैली से संबंधित कारकों के कारण होता है.
पीसीओडी का इलाज:
पीसीओडी का इलाज लक्षणों और उनकी गंभीरता के आधार पर किया जाता है. कुछ सामान्य उपचारों में शामिल हैं:
आहार और जीवनशैली में बदलाव:
स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और वजन घटाने से पीसीओडी के लक्षणों को कम किया जा सकता है.
हार्मोनल थेरेपी:
कुछ मामलों में, हार्मोनल थेरेपी पीसीओडी के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है.
गर्भनिरोधक गोलियां:
गर्भनिरोधक गोलियां मासिक धर्म चक्र को नियमित करने में मदद कर सकती हैं.
इंसुलिन से संबंधित दवाएं:
कुछ मामलों में, इंसुलिन से संबंधित दवाएं पीसीओडी के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं.
पीसीओडी और प्रेगनेंसी:
पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं में गर्भधारण करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन यह संभव है. गर्भधारण करने के लिए, प्रजनन चिकित्सा की आवश्यकता हो सकती है.
पीसीओडी के प्रबंधन के लिए कुछ सुझाव:
डॉक्टर से नियमित रूप से जांच करवाएं।
स्वस्थ आहार लें और नियमित रूप से व्यायाम करें।
वजन कम करने के लिए प्रयास करें।
तनाव को कम करने के लिए योग, ध्यान या अन्य गतिविधियों का अभ्यास करें।
अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में अपनी डॉक्टर से बात करें और उनके निर्देशों का पालन करें.

Now PID cure
27/05/2025

Now PID cure

Patient suffering from PID since 6 years
27/05/2025

Patient suffering from PID since 6 years

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