23/12/2021
इम्युनिटी के लुटेरे: प्राणों के पॉकेटमार
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इम्युनिटी या व्याधिक्षमत्व आजकल बहस का विषय बना हुआ है। इम्यूनिटी बूस्टर्स का बाजार मल्टीबिलियंस डॉलर्स में पहुंचा दिया गया है। हजारों लाखों तरीके रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के जेरे बहस हैं। लेकिन आज संक्षेप में जानते हैं कि हमारी इम्यूनिटी घटती किन कारणों से है।
१) यह तय मानिए कि हर एक जीव दूसरे जीवों से निरन्तर संघर्षरत है। जैसे हमें अपने जीवन को बचाने के लिए, अपने जर्मप्लाज्म की कांटीन्युटी क़ो बचाने के लिए निरन्तर हिंस्र पशुओं, रोग फैलाने वाले वाहकों, बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोजोआ, फंगस से लड़ना पड़ा है।
अब अगर हम कभी लड़ना छोड़ दें, तो हमें यह युद्धकला भूलने लगती है। याद रखिए कि हमारे सारे फिजियोलॉजिकल सिस्टम्स में केवल दो ऐसे हैं जिनके पास मेमोरी का गुण है। पहला नर्वस सिस्टम और दूसरा इम्यून सिस्टम।
तो जब हम लड़ना छोड़ देंगे तो हमारी प्रतिरक्षा कमजोर हो जाएगी। मतलब अत्यधिक सुविधाभोगी लोग जो एंटीजन से एनकाउंटर ही नहीं करते उनकी इम्यूनिटी गयी।
२) जितने झाग बनाने वाले प्रोडक्ट्स हैं, जैसे साबुन, डिटर्जेंट, शैम्पू, शेविंग क्रीम, फेस वॉश आदि, उनमें सोडियम लॉरिल सल्फेट होता है अधिकतर। यह डीएनए सिंथेसिस का दुश्मन है, इसलिए हीमैटोपोएसिस को भी प्रभावित करता है और लिम्फोसाइट्स की संख्या घटती है।
इतना ही नहीं यह हमारी फर्टिलिटी, स्पर्म क्वालिटी और सेक्सुअल फिटनेस का भी दुश्मन है। तो, इन प्रोडक्ट को जरा सावधानी से, जरा संभलकर। वरना..
३) 'साइकोइम्यूनोलॉजी' आजकल तेजी से उभरता हुआ एक क्षेत्र है। कुछ उदाहरणों से समझें। जिन बच्चों के मातापिता में संबंध ठीक नहीं होते या तलाक जैसी स्थिति होती है उन बच्चों में कफज रोग बढ़ जाते हैं। वह वायरल फ्लू के जल्दी जल्दी शिकार बनते हैं। घरेलू हिंसा प्रभावित महिलाओं में एनीमिया, ल्यूकोरिया और डिस्टर्ब पीरियड्स की शिकायत अधिक पाई गयी है। फीमेल इनफर्टिलिटी के केसेज उन महिलाओं में अधिक देखने को मिलेंगे जहाँ इन लॉज़ थोड़े अनार्किस्ट होते हैं।
तो खराब साइकि आपको फिजिकली भी बीमार कर सकती है यह ध्यान रहे। तनाव, शोक, अकेलापन यह आपके दुश्मन हैं।
४) ग्रीड और ग्रीफ़ आपकी इम्यूनिटी को बहुत घटा देते हैं। जबकि 'सत्वावजय' इसकी मजबूती के लिए आवश्यक तत्व है।
५) भोजन में अतिरिक्त शुगर, अतिरिक्त नमक यह दोनों वास्तव में जैसे घड़े में छेद कर देने वाले कारक हैं। शरीर एक बार खराब पोषण को संभाल लेगा पर इस अतिरिक्त शुगर और सॉल्ट को नहीं।
६) ऐसे पैकेटबंद भोजन जिनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर्स हों, बहुत ज्यादा प्रिजर्वेटिव्स हों, आर्टिफिशियल टेस्ट इनहांशर्स हों, यह सब शत्रु समझिए।
७) जब आप ऋतुचर्या का पालन नहीं करते। मतलब कि आपका रहन सहन खानपान वही है कार्तिक में भी जो चैत बैसाख में था तो होगी गड़बड़।
८) जब आपके जीवन में न योग है, न व्यायाम, न सद्वृत्ति है न श्रेष्ठ रसायन। तो समझो रस गायब।
९) जब आप हिताशन, मिताशन और कालभोजन का पालन नहीं करते।
१०) अंतिम शत्रुता आप स्वयं निभाते हैं जब आप अपने 'स्लीप सायकिल' और 'बॉयोलॉजिकल क्लॉक' या 'एज' क्लॉक का सम्मान नहीं करते।
स्लीप सायकिल न्यूरोट्रांसमीटर्स के बैलेंस के साथ स्ट्रैस हार्मोन्स को भी नियंत्रित करती है।
जैविक घड़ी मने सूरज को फॉलो कीजिए। शाम के बाद मस्तिष्क का अनावश्यक एक्साइटेशन ठीक नहीं।
एज क्लॉक, आयु घड़ी ,मसलन, जिनका वैवाहिक जीवन पच्चीस वर्ष की आयु में शुरू हुआ वह उनकी तुलना में वृद्धावस्था में अधिक स्वस्थ होंगे जिनके विवाह पैंतीस चालीस में हो रहे हैं।
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